शेयर होल्डर होने से फायदे-Advantage Of being Share Holder.

अगर आपके पास किसी कंपनी के Shares हैं तो आपको शेयर होल्डर होने से फायदे मिलेंगे।आइए जानिए Advantage Of being Share Holder बनने के क्या क्या लाभ होते है।

Ownership (भागीदार) :-

किसी कंपनी के शेयर खरीदकर Share Holder (शेयर होल्डर) न सिर्फ आर्थिक लाभ उठाता है, बल्कि वह उस कंपनी का Ownership (भागीदार) भी बन जाता है।

इसका मतलब जब कोई व्यक्ति किसी कंपनी का Share Holder (शेयर होल्डर) हो जाता है तो कंपनी अपने निर्णयों में Share Holder (शेयर होल्डर) को भी शामिल करती है।

Share Holder (शेयर होल्डर) के पास किसी कंपनी के शेयरों की संख्या उस कंपनी में उसकी आंशिक भागीदारी को दरशाती है।

ज्यादातर मामलों में कंपनी की मीटिंग में Share Holder (शेयर होल्डर) को उसके शेयरों के अनुपात में वोट देने का अधिकार होता है।

कुछ कंपनियों में विशेष कानून के तहत वोटिंग एवं भागीदारी संबंधी अधिकार प्रतिबंधित हैं और उनके निवेशकों के लिए अलग नियम हैं।

Share Hold करके किसी कंपनी का भागीदार बनना उन लोगों में गर्व की भावना पैदा करता है, जिनके पास खुद की कंपनी स्थापित करने के लिए समुचित धन नहीं है।

Ownership (ओनरशिप) यानी भागीदारी का मतलब यह नहीं है कि जिस व्यक्ति के पास किसी कंपनी के 100 शेयर हैं, तो वह कंपनी के ऑफिस में जाएगा और कंपनी का बिजनेस चलाएगा।

Share Holder (शेयर होल्डर) के पास सीमित अधिकार होते हैं; लेकिन उसके पास यह अधिकार हमेशा रहता है कि वह अपने आपको कंपनी का भागीदार कह सके।

Information advantage (सूचना का लाभ) :-

यदि आप किसी कंपनी के Share Holder (शेयर होल्डर) हैं तो आपको कंपनी के पूरे कामकाज और उससे जुड़ी प्रत्येक सूचना मिलती है।

आपको लगातार यह सूचना मिलती रहती है कि कंपनी का काम-काज कैसा चल रहा है और वह कैसी स्थिति में है।

इसका लाभ यह होता है कि Share Holder (शेयर होल्डर) कंपनी द्वारा मिली सूचनाओं के आधार पर महत्त्वपूर्ण निर्णय ले सकता है।

हालाँकि Share Holder (शेयर होल्डर) कंपनी के दैनिक कार्य को नियंत्रित नहीं करता है, लेकिन उसे कंपनी द्वारा लिये गए महत्त्वपूर्ण निर्णयों की सूचना दी जाती है और जिन मामलों में Share Holder (शेयर होल्डर) की सहमति की जरूरत होती है, वहाँ उनकी सहमति से ही कंपनी कार्य को आगे बढ़ाती है।

कंपनी द्वारा Share Holder (शेयर होल्डर) को दी जानेवाली सूचनाओं में कंपनी के विकास के लिए किए गए महत्त्वपूर्ण निर्णय, तिमाही रिपोर्ट तथा ऐसी कई अन्य महत्त्वपूर्ण सूचनाएँ होती हैं, जो Share Holder (शेयर होल्डर) को सही निर्णय लेने में मदद करती हैं।

Dividend (डिविडेंड) का फायदा :-

कंपनी द्वारा घोषित किए गए Dividend (डिविडेंड) पर Investor का अधिकार होता है। यदि Share Holder (शेयर होल्डर) के पास कंपनी द्वारा निर्धारित रिकॉर्ड डेट तक उस कंपनी के शेयर हैं तो वह कंपनी द्वारा मिलनेवाले Dividend (डिविडेंड) का अधिकारी होता है।

Opportunity to attend general meeting and voting rights (जनरल मीटिंग में शामिल होने तथा वोटिंग के अधिकार का अवसर) :-

कंपनी विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए अपने Share Holder (शेयर होल्डरों) की वार्षिक जनरल मीटिंग या असामान्य जनरल मीटिंग आयोजित करती है।

इन मीटिंगों में न सिर्फ विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श होता है, अपितु इन मुद्दों पर वोटिंग भी करवाई जाती है।

मीटिंग में Share Holder (शेयर होल्डर) को यह अधिकार दिया जाता है कि वह विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात कंपनी के सामने रखे; लेकिन इसका अधिकार उस व्यक्ति के पास कंपनी के शेयरों के अनुपात पर निर्भर करता है।

पूरे वर्ष के दौरान कंपनी जिन विभिन्न मुद्दों से रूबरू होती है, उनमें बहुत से ऐसे मुद्दे Issue (इश्यू) होते हैं, जिन पर सदस्यों की सहमति की आवश्यकता होती है।

यदि किसी मुद्दे पर असहमति बनती है तो सहमति के लिए वोटिंग करवाई जाती है।

Share Holder (शेयर होल्डर) कंपनी के वास्तविक निर्णयों में भाग लेने का अधिकारी होता है। हालाँकि बहुत से मामलों में ऐसा भी होता है कि कुछ निवेशकों का किसी मुद्दे पर अलग नजरिया होने के बावजूद उन्हें बहुसंख्य निवेशकों की मरजी पर अपनी सहमति देनी पड़ती है।

ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि उनके पास शेयरों की संख्या काफी कम होने के कारण उनका प्रभाव भी काफी कम होता है।

फिर भी, प्रत्येक Share Holder (शेयर होल्डर) को अपने वोटिंग के अधिकार का सावधानी से उपयोग करना चाहिए। हालाँकि कोई एक व्यक्ति निर्णय को नहीं बदल सकता है

लेकिन यदि बहुत बड़ी संख्या में Share Holder एक साथ उपस्थित हों तो किसी भी मुद्दे पर अच्छा-खासा प्रभाव डाल सकते हैं।

Advantage Of Bonus Share (अतिरिक्त शेयरों का लाभ) :-

कंपनियाँ समय-समय पर अपने शेयरधारकों Share Holder (शेयर होल्डर्स) को अपनी अतिरिक्त Share Holding (शेयर होल्डिंग) से कुछ-न-कुछ रिवॉर्ड देती रहती हैं।

जब कंपनी Right Issue (राइट इश्यू) जारी करती है, तब उस पर सबसे पहला अधिकार कंपनी के शेयरधारकों का होता है। यदि शेयरधारक Right Issue (राइट इश्यू) लेने से मना कर देते हैं, तब उसे किसी बाहरी व्यक्ति को दिया जाता है।

Right Issue (राइट इश्यू) के रूप में Share Holder (शेयर होल्डर) को कंपनी बहुत बड़ा लाभ देती है, क्योंकि वे Right Issue Share की तात्कालिक बाजार कीमत से कम पर Share Holders (शेयर होल्डर्स) को मिलते हैं।

इसी तरह Bonus Share (बोनस शेयर) के रूप में कंपनी अपने शेयरधारकों को उनके पास मौजूद शेयरों की संख्या के अनुपात में मुफ्त प्रदान करती है।

Example :-

के लिए, यदि रिलायंस इंडस्ट्रीज एक शेयर पर एक Bonus Share (बोनस शेयर) की घोषणा करती है तो इसका मतलब हुआ जिसके पास पहले से रिलायंस इंडस्ट्री के 20 शेयर हैं, उनके पास Bonus Share (बोनस शेयर) मिलने के बाद यह संख्या 40 हो जाएगी।

Authority over the company’s surplus (कंपनी के सरप्लस पर अधिकार) :-

क्युकी शेयरधारक कंपनी का भागीदार होता है, इसलिए यदि कंपनी Liquidation (लिक्विडेशन) में जाती है तो उसे सबसे आखिर में पैसा मिलता है।

सभी देनदारियाँ चुकाने के बाद कंपनी के पास जितनी एसेट (पूँजी) बचती है, उसे शेयरधारकों में वितरित कर दिया जाता है।

Transfer of shares (शेयरों का स्थानांतरण) :-

शेयरों की खरीद-बिक्री पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं होता है। निवेशक अपनी मन-माफिक कीमत पर शेयर बेच सकता है, यदि उस कीमत पर कोई खरीदार तैयार है।

यदि Investors किसी विशेष श्रेणी के अंतर्गत आता है तो उस पर प्रतिबंध होता है।

Example :-

के लिए, Promoter को Issue किए जानेवाले शेयरों का लॉक-इन होता है। यानी उस विशेष श्रेणी के Investors को उन शेयरों को बेचने की अनुमति नहीं होती है।

Postal Ballet (पोस्टल बैलेट) :-

पिछले कुछ वर्षों में ही Postal Ballet (पोस्टल बैलेट) का Concept अस्तित्व में आया है। इससे निवेशकों को सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि जनरल मीटिंग में बिना स्वयं उपस्थित हुए Investors कंपनी से जुड़े विभिन्न मुद्दों Issue (इश्यू) पर वोट कर सकता है।

बस, Investors को करना यह होता है कि कंपनी द्वारा भेजे गए Postal Ballet (पोस्टल बैलेट) के द्वारा अपना वोट भेज देना होता है।

इसका महत्त्व भी उतना ही होता है, जितना मीटिंग में उपस्थित Investors द्वारा दी गई वोटिंग का होता है। कंपनी इस Ballet (बैलेट) में उन सभी रिजोल्यूशन (मुद्दों) का विवरण देती है और ये निर्णय क्यों लिये गए, उसका कारण भी बताती है।

शेयरधारक को इसमें अपने शेयरों की संख्या तथा इन निर्णयों के पक्ष या विपक्ष में वोट देना होता है। इसके बाद Postal Ballet (पोस्टल बैलेट) के साथ आए नाम-पतेवाले लिफाफे में इसे डालकर कंपनी को भेज देना होता है।

।। धन्यवाद ।।

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Categories: Share Market

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