क्या आपको पता है की टाईम और स्विंग ट्रेडिंग – Best Time Frame for Swing Trading Stocks in Hindi अगर आपको पता नहीं है तो आप इस ब्लॉग को पूरा पढ़े.

टाईम और स्विंग ट्रेडिंग – Best Time Frame for Swing Trading Stocks in Hindi

Table of Contents

स्विंग ट्रेडिंग में सफलता, आपके ट्रेन्ड रिवर्सल को परखने की क्षमता और बाज़ार में समय पर दाखील होने की रणनीति पर निर्भर होती है।

साथ ही साथ, आप कितनी शिघ्रता से दुसरों से पहले बाज़ार में दाखील हो सकते है और उसमें से बाहर निकल सकते है, उस पर ही निर्भर होता है।

बाज़ार के विभिन्न स्टेज (Market Stages):

बाज़ार विविध स्टेज में से आगे बढ़ते हुए नज़र आता है। पहले आपको बाज़ार की चाल के विविध स्टेज को पहचानना सिखना होगा। उन स्टेज की शुरूआत में और उनके आखिर में स्विंग ट्रेडिंग के लिए कई मौके उपलब्ध होते है।

स्टेज १ : यह ऐसी कालावधी होती है जब स्थापित मंदी का अंत होनेवाला होता है और तेजी की शुरूआत होनेवाली होती है।

इस कालावधी में एक समान मंदी की कालावधी के बाद बाज़ार मजबूत सपोर्ट प्राप्त करता है और कुछ समय तक वह कन्सॉलिडेट होकर एक मजबूत बेस बनाता है।

बाज़ार के विभिन्न स्टेज (Market Stages)

जब बाज़ार पहलेवाले स्टेज में होता है तब ज्यादातर ट्रेन्ड रिवर्सल होने से पहले कुछ समय तक कन्सॉलिडेट होते हुए नज़र आता है।

स्विंग ट्रेडर का इस बिच, ट्रेड की जा सके ऐसी रेन्ज खड़ी दिखाई दे तो, जब तक ऐसा रन्ज स्थापित रहती है तब तक वह उसका फायदा उठा सकते है।

स्टेज २ : यह स्टेज ऐसी कालावधी को दर्शाती है जिसमें बाज़ार कन्सॉलिडेशन में से बाहर निकलकर सकारात्मक ब्रेकआऊट देने में सफल होता है और तेजी की शुरूआत होती है।

उदाहरण निफ्टी :

बाज़ार के विभिन्न स्टेज (Market Stages 2)

बाज़ार जब स्टेज २ में दाखील होता है तब उसका पहला फेज ज्यादातर मोमेन्टम फेज होता है। निश्चित टाईमिंग की निती से स्विंग ट्रेडर इस फेज में दाखील होकर बहुत ही कम कालावधी में अच्छा मुनाफा कमा सकते है।

इस फेज में बाज़ार या शेअर्स में थोड़े ही दिनों में बहुत अच्छी बढ़ोतरी दिखाई देती है। इसलिए यहाँ पर समय सीमा के आधार पर मुनाफा नहीं ले सकते परंतु ट्रेलिंग स्टॉप लॉस लगाकर वह स्तर जब तक टुटता नहीं, तब तक उठनेवाले उबाल का फायदा ले सकते है।

अगर मोमेन्टम फेज की शुरूआत के समय में खरीदी करने से चूक गए हो तो बाद में स्विंग ट्रेडर को बहुत समय तक बाज़ार के बाहर ही रहना पड़ता है क्योंकि जब तक यह फेज स्थापित होता है तब तक स्विंग ट्रेडिंग की दृष्टी से नए संकेत नहीं मिलते है।

इस स्टेज में स्विंग ट्रेडर को करेक्शन और फिर से नई खरीदी के संकेतों की राह देखनी पड़ती है।

दुसरा फेज स्विंग फेज है। इस फेज में कन्सॉलिडेशन या तेजी में बाज़ार स्विंग करता है अर्थात झुलकर आगे बढ़ता है और ऐसे फेज में स्विंग ट्रेडर उसका फायदा उठाने के लिए उसमें कुद पड़ते है।

स्टेज ३ : इस कालावधी में शेअर्स या बाज़ार में स्थापित एक तरफा तेजी का अंत आता हुआ नज़र आता है और बाज़ार घुमकर कुछ समय तक कन्सॉलिडेट होता है अथवा गिरने लगता है।

चार्ट उदाहरण : आयडीबीआय

बाज़ार के विभिन्न स्टेज (Market Stages 3)

स्टेज ४ : इस कालावधी में दिर्घ कालावधी की मंदी वास्तव में आगे बढ़ती है। मंदी में भी बाज़ार स्विंग के साथ घटते हुए नज़र आता है।

यह स्टेज स्विंग ट्रेडर के लिए किस तरह से लाभदाई होती है?

ट्रेन्ड की दिशा में ही ट्रेडिंग करने के नियमों पर अमल करने से इस कालावधी में बेहतर यह है कि बार बार अटकने वाले मुविंग अँवरेज के रेजिस्टन्स के नजदीक बिक्री करते हुए गिरावट की दिशा की चाल के ट्रेन्ड लाईन को पकड़कर उसके नजदीक अपनी बिक्री को कवर करते रहना चाहिए।

बाज़ार के विभिन्न स्टेज (Market Stages 4)

आप नीचे सपोर्ट देनेवाली ट्रेन्ड लाईन पर खरीदी करके फिर भाव बढ़ने पर बिक्री करके भी बाहर निकल सकते है। पर ऐसा करते समय एक बात को ध्यान में रखना चाहिए कि कई बार ऐसी ट्रेन्ड लाईन के सपोर्ट को तोड़कर भाव स्थापित ट्रेन्ड की दिशा में अधिक घट सकता है।

वैसे भी मैं हमेशा जोर देता हूँ कि ट्रेडिंग हमेशा दिर्घ कालावधी के स्थापित ट्रेन्ड की दिशा में ही करना चाहिए, उसके विरूद्ध नहीं।

बाज़ार के सभी चार स्टेज नीचे दिए चित्र में दिखाए गए है।

सभी स्टेज को आप किसी भी प्रकार की मुश्किल के बिना सहजता से पहचान सके और समझ सके इसलिए उन्हें यहाँ पर एक ही चार्ट में दर्शाया गया है।

बाज़ार के सभी चार स्टेज (Market Stages)

स्विंग ट्रेडर को कौनसे स्टेज पर बाज़ार में या शेअर्स में दाखील होना चाहिए?

पहले बताया गया है उस तरह से स्विंग ट्रेडर बाज़ार में दाखील होने के निश्चित और कार्यक्षम तकनीक का उपयोग करके मोमेन्टम फेज की शुरूआत में दाखील हो सकते है और उसका महत्तम फायदा ले सकते है।

अगर इस फेज में बाज़ार में दाखील होने से चूक गए तो स्विंग ट्रेडर को कुछ समय तक रूक कर राह देखने की निती को अपनाना चाहिए, जब तक बाज़ार या शेअर्स में दाखील होने के लिए फिर से नए संकेत नहीं मिलते।

ऐसा करने से आप ज्यादातर बाज़ार जब स्टेज २ में होता है और तेजी स्थापित होती है तब फिर से दाखील हो सकते है, किसी भी इन्डेक्स या शेअर्स स्विंग के साथ आगे बढ़ने लगते है और वह कम कालावधी से लेकर मध्यम कालावधी के मूविंग ॲवरेज पर सपोर्ट लेते है।

वह आगे चलकर फिर से स्टेज ४ में भी दाखील हो सकते है, जब बाज़ार मंदी में होता है और स्विंग के साथ ऊपर की दिशा में कम कालावधी की या मध्यम कालावधी की मुविंग अँवरेज को अवरोध देकर गिरावट आगे बढ़ती है।

ऐसे समय में आप शेअर्स या इन्डेक्स को, रेजिस्टन्स के नजदीक बिक्री करके फिर नीचे सपोर्ट देनेवाली ट्रेन्ड लाईन के नजदीक बिक्री को कवर कर सकते है।

वह स्टेज ४ के मध्य भाग में भी दाखील हो सकते है, जब बाज़ार या शेअर्स स्विंग के साथ घटकर आगे बढ़ते है और उसमें दिखनेवाला उबाल ऊपर स्थापित मूविंग ॲवरेज आगे रेजिस्टन्स देकर दुध के उबाल के समान साबित होते है।

अब वहाँ पर ऐसा क्षणिक उबाल आता है तब रेजिस्टन्स के नजदीक बिक्री करते रहकर मंदी में भी अच्छा मुनाफा लिया जा सकता है।

इस प्रकार का फायदा लेने के लिए आपके पास शेअर्स की डिलीवरी होना जरूरी है या फिर फ्यूचर और ऑप्शन का आधार लेना पड़ता है। शेअर्स खाते में नहीं हो तो शॉर्ट सेलिंग नहीं की जा सकती।

स्विंग ट्रेडर को कौनसे स्टेज पर बाज़ार में या शेअर्स में दाखील होना चाहिए

स्विंग ट्रेडर ऐसे शेअर्स का भी फायदा ले सकते है जो कोई दो महत्वपूर्ण ॲवरेज में अटके होते है और एक अच्छी रेन्ज मिलती हो। इस तरह के पॅटर्न की आगे चलकर अधिक चर्चा करेंगे।

समय का संचालन :

स्विंग ट्रेडर जिस तरह से भाव का संचालन करते है, उसी तरह से उन्हें समय का भी संचालन करना सिखना चाहिए। अपनी हर नई पोजिशन के लिए उन्हें कितना समय देना है इसकी गिनती पहले ही करनी पड़ती है।

यह कैसे किया जाए? उसकी गिनती का आधार उसका अंतर आगे आनेवाले हाई-रीस्क-झोन अर्थात उच्च जोखीमवाले क्षेत्र से कितना है उस पर आधारित होता है, जब आपको उस पोजिशन में से बाहर निकलना होता है।

आपने किस प्रकार का ट्रेडिंग किया है, यह निश्चित करता है कि यह हाई-रीस्क-झोन एक महत्वपूर्ण रेजिस्टन्स है या एक महत्वपूर्ण सपोर्ट है।

नोट :

किसी भी प्रकार के ट्रेडिंग में महारत हासिल करनी हो तो पहले आपको बाज़ार घुमनेवाली विरोधाभासी जानकारी का पृथ्थक्करण करना सिखना चाहिए। बाज़ार में तभी दाखील होना चाहिए जब रिस्क-रीवॉर्ड की प्रतिशतता आपके पक्ष में होती है।

कई बार आपको किसी टाईम फ्रेम में मौका नज़र आता है परंतु संभव है कि दुसरे टाईम फ्रेम में इस मौके की पुष्टी करनेवाली स्टेज न हों।

इस कारण आपके लिए जरूरी है कि आप गहन पृथ्थक्करण करके किसी भी परिस्थिति में अस्तित्व में होनेवाले जोखीम के प्रमाण का पहले मुल्यांकन करे।

किसी भी चार्ट के निष्कर्ष तक पहुँचने से पहले वह चार्ट में ओवरऑल क्या स्थिति है यह पहचानने में गलती नहीं करनी चाहिए। कई बार ऐसा होता है कि

अॅनालिस्ट किसी चार्ट के अभ्यास के प्रयत्न में अनजाने में इतनी गहराई में जाते है कि वह अपनी आँखों के सामनेवाले चार्ट में ओवरऑल क्या स्थिति है यह देखने में चूक जाते है। चार्ट के अभ्यास की जटीलता में महारत जरूर

हासिल करनी चाहिए, पर बिना कारण अॅनालिसिस को जटील बनाना जरूरी नहीं। चार्ट के गहन अभ्यास के साथ ही ‘किप-इट-सिम्पल’ तकनीक का अमल करना चाहिए।

इसमें दुसरा कुछ नहीं पर तैयार होनेवाली पॅटर्न को पहचानना सिखना चाहिए जिससे आप अच्छा मुनाफा देनेवाला ट्रेडिंग कर सके।

एक के अलावा अनेक टाईम फ्रेम पर ध्यान रखना – ३डी चार्टिग (Multiple Time Frame Charting – 3D Charting):

चार्ट की मद्द से ट्रेडिंग करते समय कई लोग उसमें घाटा करते हुए नज़र आते है। इसका मुख्य कारण यह है कि वह एक के बदले अनेक टाईम फ्रेम पर ध्यान देने के महत्व को नहीं समझते। ज्यादातर शेअर्स विविध टाईम फ्रेम का आदर करके घुमते रहते है।

एक ही टाईम फ्रेम में मिलनेवाले संकेतों के आधार पर किसी भी शेअर्स में ट्रेडिंग करना याने बड़े संकट को बुलावा देने जैसा है।

इसलिए एन्ड ऑफ डे (ई.ओ.डी.), या ईन्ट्राडे चाटिंग सॉफ्टवेअर आपके पास होना जरूरी है, जो आपको एक के बदले अनेक टाईम फ्रेम पर नज़र रखने का विकल्प देता है।

क्या करना चाहिए – चार्ट के ३डी डयमेन्शन में देखकर सिखना।

जो भी शेअर्स आपने पकड़कर रखें है, उन्हें पकड़कर रखने की समय सीमा को ध्यान में रखकर निश्चित तीन टाईम फ्रेम का चयन करना होता है।

उसके बाद जिस टाईम फ्रेम पर आपको लक्ष्य केंद्रित करना है और उससे एक कदम आगे की और एक कदम पिछे की टाईम फ्रेम को निश्चित करना चाहिए।

उदाहरण :

ईन्ट्राडे ट्रेडर १ मिनट, ५ मिनट और ६० मिनिट के चार्ट पर आधारित काम करते हुए दिखाई देते है।

यहाँ पर ५ मिनिट का चार्ट आपके ध्यान देने का केंद्र है, ६० मिनिट के चार्ट | का उपयोग महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टन्स जानने के लिए होता है और १ मिनिट के चार्ट का उपयोग कम जोखीमवाले शेअर्स में दाखील होने के लिए किया जाता है।

स्विंग टेडर और पोजिशन ट्रेडर (Swing Trader & Position Trader):

स्विंग ट्रेडर १ घंटे के चार्ट का उपयोग करते है और उसके साथ दैनिक चार्ट और साप्ताहिक चार्ट का संयोजन करके काम करते है, जहाँ पर दैनिक चार्ट यह अवलोकन का केंद्रबिंदू होता है

जिस के आधार पर आपको किसी भी शेअर्स की चाल जान लेनी चाहिए और साप्ताहिक चार्ट के आधार पर महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टन्स जान लेना चाहिए।

जो दैनिक चार्ट पर कई बार दिखाई नहीं देता है और ईन्ट्राडे चाटिंग सॉफ्टवेअर हो तो १ घंटे के चार्ट के आधार पर शेअर्स में दाखील होना चाहिए।

ईन्ट्राडे चाटिंग सॉफ्टवेअर इन्स्टॉल करना आपके लिए फायदेमंद होता है परंतु जिनके पास ईन्ट्राडे चाटिंग सॉफ्टवेअर नहीं है वह लोग दैनिक और साप्ताहिक चार्ट के २डी संयोजन का भी उपयोग कर सकते है।

१ घंटे के चार्ट के आधार पर संभव है कि आप पहले दाखील होने के मौके को गवाँ दें, परंतु दैनिक चार्ट के आधार पर दाखील होने के मौके के आधार पर भी अच्छा मुनाफा कमाना संभव है।

महत्वपूर्ण बात : एक बात को ध्यान में रखना चाहिए कि ज्यादातर लोग शुरूआती कालावधी में ईन्ट्राडे चाटिंग सॉफ्टवेअर में निवेश नहीं कर सकते। वह विविध वेबसाईट पर दिखनेवाले मुफ्त के चार्ट के उपयोग का विकल्प पसंद करते है, इस बात को समझ सकते है।

इसलिए मैंने ज्यादातर केस स्टडी जो इस किताब में शामिल की है उनमें दैनिक और साप्ताहिक चार्ट की मद्द से किस तरह से शेअर्स में दाखील होना चाहिए और बाहर निकलना चाहिए यह दिखाया है।

साप्ताहिक चार्ट आपको नजदीकी स्थापित ट्रेन्ड के विषय में जानकारी देता है और दैनिक चार्ट के आधार पर आपको समय सूचकता पूर्वक दाखील होने में मद्द होती है।

पकड़कर रखने की मर्यादा (Holding Period):

आम तौर पर ऐसी मान्यता है कि स्विंग ट्रेडर को अपनी पोजिशन ज्यादा से ज्यादा ३ दिनों से लेकर १० दिनों तक पकड़कर रखनी होती है।

निरीक्षण स ऐसा दिखाई देता है कि ज्यादातर दिर्घ कालावधी के टेन्ड में कम कालावधा क लिए आनेवाले स्विंग में कमाल का उतार-चढ़ाव जो कुछ दिनों के लिए स्थापित होता है उसका फायदा लेने का मौका उन्हें मिलता है।

मेरी यह राय है कि आपको ऐसी तकनीक का उपयोग करना चाहिए जो आपको पहले से ही कोई निश्चित टार्गेट तय करने के बजाए किसी भी स्विंग पर सवार होकर उसका महत्तम फायदा उठाने में मदद करे।

कई बार एक मजबूत ट्रेन्ड स्थापित होते हुए नज़र आता है, जो आपकी अपेक्षा से भी अधिक समय तक टिक सकता है। अगर आप पूर्व निर्धारीत टार्गेट के आधार पर बाहर निकलें तो आप अतिरिक्त मुनाफे की संभावना को गवाँ सकते है।

जब आप न्यूनतम जोखीम और महत्तम फायदे की तकनीक का उपयोग करते है तब आपका ध्येय ऐसे निश्चित स्तरपर दाखील होने का होना चाहिए

जहाँ पर जोखीम बहुत ही कम प्रमाण में होता है और आपको उस पोजिशन को कम कालावधी में तब तक पकड़कर रखना चाहिए जब तक उसमें मुनाफा मिल रहा होता है।

ऐसी स्थिति में आपको मिलनेवाले फायदे को काटने के बदले, ट्रेलिंग स्टॉप लॉस का उपयोग करके अतिरिक्त मुनाफा निकाल लेना चाहिए।

आपको स्विंग ट्रेडिंग में किस तरह से इस ट्रेलिंग स्टॉप लॉस का उपयोग करना चाहिए इसकी विस्तार पूर्वक चर्चा अगले भाग में करते है।

टाईम हॉरीझोन – टाईम फ्रेम (Time Horizon – Time Frame):

बात जब टायमिंग करने की होती है तब ज्यादातर ट्रेडर कहाँ पर गलती करते ज्यादातर ट्रेडर, कौनसे टाईम फ्रेम पर लक्ष्य केंद्रित करना चाहिए और कितने समय तक अपनी पोजिशन को पकड़कर रखना चाहिए इस विषय में स्पष्ट नहीं होते।

यह एक बहुत ही घातक कमी है जिससे उन्हें लगातार नुकसान सहना पड़ता है। वह एक ही टाईम फ्रेम पर लक्ष्य केद्रित करते है और दुसरे टाईम फ्रेम की अवगणना करते है। इस लिए उन्हें ज्यादातर नुकसान सहन करना पड़ता है।

एक उदाहरण के जरिए मैं आपको यह स्पष्ट करता हूँ।

सेंचुरी टेक्सटाईल : दैनिक चार्ट

सेंचुरी टेक्सटाईल दैनिक चार्ट

जैसे कि आप देख सकते है सेंचुरी टेक्सटाईल के चार्ट में बढ़ोतरी शुरू थी और विविध सूचक जैसे के आर.एस.आई., ए.डी.एक्स. अपनी मजबूती को दर्शा रहे थे परंतु मैंने चार्ट पर खिंची सीधी लाईन के स्तर से भाव घटने लगता है। कैसे?

सिर्फ दैनिक चार्ट पर लक्ष्य केंद्रित करने से इसका कारण पता नहीं चलता परंतु अगर आप साप्ताहिक चार्ट पर नज़र घुमाते हो तो आपको उसका कारण पता चलेगा।

जैसे कि अब हम चार्ट में देख सकते है २०० दिनों का एक महत्वपूर्ण रेजिस्टन्स स्थापित होता है। इसलिए जो भी ट्रेडिंग करोगे उसके शुरूआत में ही अगर साप्ताहिक चार्ट पर नज़र रखी गई

तो ट्रेडर इस साप्ताहिक रेजिस्टन्स के स्तर पर भाव आने से पहले ही सचेत होते है और जब यह रेजिस्टन्स अटकता है और ट्रेलिंग स्टॉप ट्रिगर होता है तब सहजता से मुनाफा निकालकर आगे चलकर नए सिरे से बिक्री करके खड़े रह सकते है।

नोट : मध्यम कालावधी की चाल जानने के लिए साप्ताहिक चार्ट पर नज़र रखना जरूरी है। उसके साथ ही महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टन्स जानने के लिए भी साप्ताहिक चार्ट पर नज़र रखना जरूरी होता है क्योंकि यह स्तर दैनिक चार्ट पर स्थापित नहीं होता।

सेंचुरी टेक्सटाईल : साप्ताहिक चार्ट

सेंचुरी टेक्सटाईल साप्ताहिक चार्ट

दुसरी महत्वपूर्ण बात जो हर स्विंग ट्रेडर को ध्यान में रखनी चाहिए वह है कि उन्हें अपने शेअर्स पकड़कर रखने की समय सीमा के विषय में पहले से ही स्पष्टीकरण करना चाहिए।

जैसे कि मैंने पहले कहाँ है, स्विंग ट्रेडिंग में आपको पोजिशन तब तक पकड़कर रखनी चाहिए जब तक एक तरफा बढ़ोतरी चलती है।

बाहर निकलने का निर्णय विविध कॅन्डल स्टिक का रिवर्सल पॅटर्न, अथवा भाव जब ३ और ७ दिनों के मुविंग ॲवरेज को तोड़ता है, या किसी डायवर्जन्स का संकेत जो पहले मिलता है उसके अनुसार करना होता है।

किसी भी स्थिति में स्विंग ट्रेडर को अपनी पोजिशन कन्सॉलिडेशन के शेअर्स या इन्डेक्स में खड़ी नहीं करनी चाहिए।

साथ ही किसी भी हालात में स्विंग ट्रेडर को अपनी पोजिशन को कम कालावधी के नुकसान से बचाने के लिए दिर्घ कालावधी के निवेश में नहीं घुमानी चाहिए।

ध्यान में रखीए : स्विंग ट्रेडर के लिए मजबूत ट्रेन्ड ही उनका मित्र होता है।

अब हम अलग अलग तरीके से ट्रेडर पोजिशन होल्ड करने के लिए कौनसी समय सीमा का उपयोग करते है और कौनसे ३डी चार्ट के संयोजन का उपयोग करते है वह जान लेते है।

ट्रेडर का प्रकार : स्केल्पर (Scalper) होल्डिंग की समय सीमा : सेकंद से लेकर मिनिटों तक। ३डी चार्ट संयोजन का उपयोग : १ मिनिट, ५ मिनिट, १५ मिनिट।

ट्रेडर का प्रकार : ईन्ट्राडे ट्रेडर (Intraday Trader) होल्डिंग की समय सीमा : मिनिटों से लेकर घंटों तक। ३डी चार्ट संयोजन का उपयोग : १ मिनिट, ५ मिनिट, ६० मिनिट।

ट्रेडर का प्रकार : स्विंग ट्रेडर और पोजिशन ट्रेडर (Swing Trader & Position Trader) होल्डिंग की समय सीमा : घंटों से लेकर दिनों तक। ३डी चार्ट संयोजन का उपयोग : १५ मिनिट, दैनिक, साप्ताहिक।

ट्रेडर का प्रकार : निवेशक (Investor) : होल्डिंग की समय सीमा : दिनों से लेकर महिनों या कई वर्षों तक। ३डी चार्ट संयोजन का उपयोग : दैनिक, साप्ताहिक और मासिक।

अब हम हर प्रकार के ट्रेडर के विषय में संक्षिप्त में जानकारी लेते है। भले ही अपनी चर्चा का केंद्रबिंदू स्विंग ट्रेडिंग हो, फिर भी हर प्रकार के ट्रेडर क्या करते है यह जान ले तो आप स्विंग ट्रेडिंग में खास करके क्या नहीं करना चाहिए इसकी जानकारी प्राप्त कर सकते है।

स्केल्पर (Scalper) :

स्केल्पर ऐसा व्यक्ति है जो शेअर्स हो या फ्युचर, वह बाज़ार में बहुत ही कम कालावधी के लिए पोजिशन खड़ी करके ज्यादातर बीड-आस्क के स्प्रेड का फायदा उठाकर ट्रेडिंग करते हुए नज़र आते है।

बहुत से फॉरेक्स के बाजारों में स्केल्पींग की अनुमती नहीं दी जाती। जैसे कि ऊपर बताया गया है, वह बहुत ही छोटी टाईम फ्रेम का उपयोग करके अपना ध्येय पूरा करते हुए दिखाई देते है।

ईन्ट्राडे ट्रेडर (Intraday Trader) :

ईन्ट्राडे ट्रेडर अपनी पोजिशन को एक दिन के लिए ही खड़ी करते है और अपनी पोजिशन को दुसरे दिन आगे नहीं बढ़ाते।

वह अपनी इस व्यूहरचना के विषय में स्पष्ट होते है, और अपनी ट्रेडिंग पोजिशन उसी दिन में बंद करते है और किसी भी स्थिति में उसे डिलीवरी में तब्दील नहीं करते।

पोजिशन ट्रेडर (Position Trader) :

पोजिशन ट्रेडर का प्रमुख हेतू दिन प्रतिदिन दिखनेवाले कम कालावधा के उतार-चढ़ाव पर ध्यान केंद्रित करने के बजाए स्थापित प्राथमिक ट्रेन्ड पर ध्यान केंद्रित करके ट्रेडिंग करना होता है।

यहाँ पर कोई भी पोजिशन कुछ दिनों से लेकर कुछ महिनों तक पकड़कर रखनी होती है।

निवेशक (Investor) :

निवेशक शेअर्स में निवेश दिर्घ कालावधी की दृष्टी से करते है। वह कम कालावधी में दिखनेवाले उतार-चढ़ाव की अवगणना करते हुए नज़र आते है और अपनी पोजिशन तब तक होल्ड करते हुए नज़र आते है जब तक दिर्घ कालावधी का महत्वपूर्ण सपोर्ट नहीं हुँटता।

वह कम कालावधी के स्विंग में ट्रेडिंग करने का प्रयास नहीं करते परंतु अपना ध्यान दिर्घ कालावधी के स्थापित ट्रेन्ड पर ही रखते है।

एक के बदले अनेक टाईम फ्रेम के संयोजन से शेअर्स में दाखील होना (Making Entry with Multiple Time Frames) :

आपके तय किए ट्रेडिंग के टाईम फ्रेम के एक स्तर ऊपर और एक स्तर नीचे के टाईम फ्रेम पर अपना लक्ष्य केंद्रित करने से आप उसके भीतर के मौके और जोखीम को पहचान सकते हो।

उदाहरण के तौर पर, जब ट्रेडर ईन्ट्राडे चार्ट की मद्द से ट्रेडिंग करते है और ५ मिनिट के चार्ट पर जब कुछ आशावादी सेटअप खड़ा नज़र आता है

तब ट्रेडर ६० मिनिट के चार्ट पर लक्ष्य केंद्रित करके महत्वपूर्ण सपोर्ट और रेजिस्टन्स का स्तर ढुंढ़ते है और १ मिनिट के चार्ट की मद्द से उसमें दाखील होकर कम कालावधी में स्थापित होनेवाले प्रवाह का महत्तम फायदा उठाते है।

यह एक के बदले अनेक टाईम फ्रेम पर लक्ष्य केंद्रित करने की आदत सभी स्तरों पर कार्य करती है।

ट्रेडिंग की शैली और संबंधित प्राईज चार्ट (Trading Style & Related Price Chart) :

स्काल्पर : १ मिनिट का चार्ट।

दैनिक ट्रेडर : ५ मिनिट का चार्ट।

पोजिशन ट्रेडर : ६० मिनिट का चार्ट।

निवेशक : दैनिक चार्ट।

स्टॉप लॉस के लिए दोनों भाव और समय सीमा के अनुसार चलना चाहिए। अगर किसी ट्रेडिंग में समय के अनुसार किसी भी प्रकार के परिणाम नहीं दिखाई दें और संभावित भाव नहीं मिला तो निश्चित की गई समय सीमा के अनुसार बाहर निकलने की व्यूहरचना पर अमल करना चाहिए।

रूक कर राह देखने की निती को जान लीजिए।

जब आप किसी चार्ट पर अमल करते हो तब जरूरी नहीं की उस चार्ट में स्विंग हर दिन तैयार होगा।

ऐसे भी दिन आ सकते है जब बाज़ार एक सीमित रेन्ज में अटक कर घुमता हुआ नज़र आता है जिसमें आपको ट्रेडिंग करने का मौका नहीं मिलता। बाज़ार आपको मौका देता है परंतु हर मिनिट, हर घंटे या हर दिन देगा ऐसा जरूरी नहीं।

आपके पास दो विकल्प है। एक तो आप ऐसे चार्ट को ढूंढ़ लीजिए जिसमें स्विंग निर्माण होने की तैयारी हो, या फिर अपने पसंद के शेअर्स के चार्ट में रूक कर राह देखने की निती का अमल करे और उसमें स्विंगवाली चाल आने की राह देखे।

आपको कोई भी ट्रेडिंग तभी करना चाहिए जब उसमें परिणाम की प्रतिशतता का झुकाव मुनाफे की दिशा में अधिक प्रमाण में हो। जब आप टर्मिनल के सामने बैठे हो तब उतावलापन नहीं करना चाहिए।

जरूरी नहीं कि जब आप टर्मिनल के सामने बैठे हो तब आपको ट्रेडिंग करना ही चाहिए। अगर बाज़ार में कोई मौका आते हुए न दिखाई दे

तब आप स्वयं को ऐसा तैयार करो कि आपमें इतना सब तो होगा कि आप नीरस बाज़ार में जरूरत पड़ने पर स्थिर बैठे रहोगें और समय बिताने के लिए ट्रेडिंग करने की लालसा से दूर रहेंगे।

ऐसा करने से आप स्वयं को इस प्रकार से तैयार करते है कि आप घाटा दनवाले ट्रेडिंग से दूर रहोगे और अच्छा फायदा देनेवाले मौके की राह देखते बैठ सकते हो।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको स्वयं को इस तरह से तैयार करना चाहिए कि जब बाज़ार में कोई भी मौका उपलब्ध नहीं होता तब आपको अनुशासन के साथ बाज़ार से दूर रहना चाहिए और रूककर राह देखनेवाली व्यूहरचना पर अमल करना चाहिए

जो आपकी ट्रेडिंग की व्यूहरचना के साथ मेल खाती हो। बाज़ार आपको हर पल अच्छा मौका उपलब्ध करा दे यह जरूरी नहीं। हमें कभी भी उतावला ट्रेडर नहीं बनना चाहिए।

जिन्होंने अनुशासन के साथ बाज़ार में अमल करने की कला को सीखा नहीं, उन्हें बाज़ार से दूर ही रहना चाहिए।

अब हम यह जान लेते है कि आसक्ति से ट्रेडिंग करने की आदतवाले लोग कैसे होते है।

आसक्ति से ट्रेडिंग करने की आदत वाले ट्रेडर ट्रेडिंग स्क्रीन के सामने शांती से बैठने में असमर्थ होते है। ऐसे लोगो को कुछ मिनिटों के अंतराल पर ट्रेडिंग करना ही पड़ता है, चाहे उस समय बाज़ार में कोई भी मौका उपलब्ध न हो।

ऐसे ट्रेडर जब बाज़ार या जिस शेअर्स पर उन्होंने लक्ष्य केंद्रित किया है वह रेन्ज में घुम रहे हो तब भी शांत बैठे रहने में असमर्थ होते है।

भले कोई भी ट्रेडिंग का संकेत ना मिले तो भी उन्हें ऐसा लगता है कि उनको ट्रेडिंग का मौका दिख रहा है और वह किसी भी शेअर्स में ट्रेडिंग करने के लिए कूद पड़ते है। ऐसे तर्क के विरूद्ध स्वभाव के कारण उन्हें बड़ा नुकसान सहना पड़ता है।

ट्रेडिंग स्क्रिन एक ऐसा संमोहन करनेवाला मंच है कि वह नए ट्रेडर जीन में अनुशासन का अभाव है, उन्हें इस तरह से आकर्षित करता है कि वह हर मिनिट में ट्रेडिंग करने पर विवश होते है। वह ट्रेडिंग स्क्रिन के सामने कुछ किए बगैर शांत बैठने में असमर्थ होते है।

अगर उन्हें ट्रेडिंग स्क्रिन के सामने कुछ किए बिना एक घंटा बैठना पड़े तो उन्हें ऐसा लगता है कि उनका संपूर्ण जीवन ही व्यर्थ है। इस तरह की मानसिकता के कारण उन्हें लगता है कि समय व्यर्थ में बिताने के बजाए मौका हो या ना हो, वह ट्रेडिंग तो करते ही रहते है।

इस प्रकार की मानसिकता को समय रहते सुधारा नहीं गया तो वह ज्यादातर ट्रेडर और निवेशकों को उनके पतन की ओर ले जाती है। बाज़ार एक ऐसी युद्धभूमि है जहाँ पर आप स्वयं कितने बहादूर है यह दिखलाने की जरूरत नहीं होती।

यह कोई ऐसा मंच नहीं जहाँ पर आप दिखला दोगे की आपमें जोखीम सहने की कितनी ताकत है। जिन्हें इस तरह के पराक्रम करने का नशा है, उनको दुसरे साहस आज़माकर देखने चाहिए।

शेअर बाज़ार में अगर आप सही आदत और अनुशासन के अभाव के साथ दाखील हुए तो वह बहुत ही घातक साबित हो सकता है। शेअर बाज़ार कोई खेल का अखाड़ा नहीं।

अगर आप उसे एक युद्धभूमि की तरह समझते हो तो आपको उसमें तभी विजय प्राप्त हो सकती है जब आप जरूरी शस्त्र हासिल कर सको, अर्थात जरूरी ज्ञान हासिल करोगे और योग्य मानसिकता बनाओगे।

अगर ऐसा करने में असफल हुए तो आप कुछ समय में ही बाज़ार से बाहर फेंक दिए जाओगे।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप किसी भी प्रकार के ट्रेडिंग में दाखील होने से पूर्व जरूरी कुशलता हासिल करें और तर्कसंगत बुद्धी के साथ ही बाज़ार में ट्रेडिंग करना सिखले। शेअर बाज़ार में सफल होने की यह कुंजी है।

रेकॉर्ड रखना और ट्रॅकिंग शीट को अपडेट करना (Keeping Records & Updating Tracking Sheets) :

दुसरा एक महत्वपूर्ण काम जो आपको करना है वह यह कि आपको निश्चित ट्रेडिंग रेकॉर्ड रखना चाहिए। इसके लिए आपको विविध एक्सेल शीट्स का निर्माण करना होगा और आपको जरूरी हो वैसे रेकॉर्ड को आप जाँच के लिए जमा करके रख सकते हो।

आपको ध्यान में रखना चाहिए कि हमारी बुद्धी एक क्रूर खेल खेलेंगी, जब हम किसी विवरण के लिए हमारी याद शक्ति पर भरोसा करते हो। आप सभी स्तरों को ध्यान में नहीं रख सकते।

अगर आप हर रोज बहुत ही ज्यादा चार्ट के अभ्यास करते हो तो आपके लिए अलग अलग कंपनियों के हर एक चार्ट में क्या चल रहा है यह ध्यान में रखना असंभव होता है।

इस लिए स्वयं की आंकलन शक्ति पर जरूरत से ज्यादा जोर देने के बजाए, आपके हित में यह है कि सभी जानकारिओं को आप एक्सेल शीट म या नोटबुक में जैसे आपको सही लगे उसमें ठिक तरह से नोट करके रख।

जब इस प्रकार की जानकारी कागज़ पर या कॉम्प्यूटर में ठिक तरह से नोट का जाती है तब आपकी नज़र के सामने एक स्पष्ट चित्र होता है, और आप महत्वपूर्ण पॉईन्ट को देखने में कभी भी नहीं चूकते।

जो अपने ट्रेडिंग को नोट नहीं करते और जैसे कि ऊपर बताया है वैसे ट्रेडिंग शीट बनाकर काम नहीं करते है, वह कम कालावधी हो या दिर्घ कालावधी हो अपनी किस्मत से ही बाज़ार में जीत सकते है।

शेअर बाज़ार को एक गंभीर व्यवसाय की तरह समझना चाहिए। हर एक व्यवसाय में विविध रिकॉर्ड मेन्टेन करने पड़ते है।

पॉईन्ट यह है कि अगर आपको जानना है कि आप कौनसी दिशा में जा रहे है और कितनी अच्छी तरह से टेडिंग कर रहे है तो इसका आधार आप किस तरह से विविध रेकॉर्ड रखते है उस पर होता है।

इसलिए स्विंग ट्रेडिंग हो या किसी भी प्रकार का ट्रेडिंग हो या फिर कोई भी निवेश हो, उसमें अगर सफल होना हो तो आपको इस महत्वपूर्ण जरूरत की कभी भी अवगणना नहीं करनी चाहिए।

हम आशा करते है की हमारी ये टाईम और स्विंग ट्रेडिंग – Best Time Frame for Swing Trading Stocks in Hindi ब्लॉग पोस्ट आपको पसंद आयी होगी अगर आपको शेयर मार्किट से जुड़ा कोई भी सवाल है तो आप कृपया कमेंट में जरूर पूछे।

।। धन्यवाद ।।

Important Links:-

Open Demat & Trading Account in Zerodha – https://zerodha.com/?c=NH6775

87 / 100

5 टिप्पणियाँ

buy CBD · फ़रवरी 21, 2021 पर 10:41 पूर्वाह्न

I don’t know if it’s just me or if everybody else encountering problems with your site.

It appears as though some of the written text in your content are running off the screen.
Can someone else please provide feedback and let
me know if this is happening to them too? This might
be a issue with my web browser because I’ve had this
happen before. Kudos

CBD oil · फ़रवरी 21, 2021 पर 12:56 अपराह्न

Wonderful article! We will be linking to this great post on our website.
Keep up the good writing.

शेयर बाज़ार का मूल ज्ञान - Share Market Basics In Hindi · फ़रवरी 16, 2021 पर 6:00 अपराह्न

[…] टाईम और स्विंग ट्रेडिंग – Best Time Frame for Swing Tr… […]

स्विंग ट्रेडिंग स्टेप बाय स्टेप - Swing Trading Step By Step In Hindi · फ़रवरी 18, 2021 पर 4:41 अपराह्न

[…] टाईम और स्विंग ट्रेडिंग – Best Time Frame for Swing Tr… […]

स्विंग ट्रेडिंग के नियम - Top 13 Golden Rules For Swing Trading In Hindi · फ़रवरी 23, 2021 पर 8:56 अपराह्न

[…] टाईम और स्विंग ट्रेडिंग – Best Time Frame for Swing Tr… […]

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

hi_INHindi