Demat Account क्या होता है? || How to open a Demat Account (in Hindi)

इस Blog में हम जानेंगे की Demat Account क्या होता है? (What is Demat Account in hindi ?) और How to open a Demat Account (in Hindi)

Demat Account क्या होता है? || (What is Demat Account in hindi)

Demat Account (डी-मैट एकाउंट) के बिना शेयर खरीद पाना नामुमकिन है। यह Share Market (शेयर बाजार) में निवेश करने की एक अनिवार्य शर्त है। Demat (डी-मैट) का अर्थ है-Dematerialize (डीमैटीरियलाइज).

इसका अर्थ है कि आपको किसी कंपनी की संपत्ति अभौतिक या अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त हो गई है। उसी का हिसाब-किताब रखने के लिए Demat Account (डी-मैट एकाउंट) की व्यवस्था की गई है।

ऐसा इसलिए भी है, ताकि भौतिक रूप से लेन-देन के दौरान संपत्ति के फर्जी होने, चोरी होने या फिर नकली होने की आशंका को समाप्त किया जा सके।

दरअसल, यह एक तरह का बैंक एकाउंट होता है, जिसमें मुद्रा का स्थान शेयर ले लेता है। Demat Account (डी-मैट एकाउंट) खलवाने के लिए आपको निकटतम Depository (डिपॉजिटरी) तक अपनी पहुँच बनानी होगी।

Depository Bank (डिपॉजिटरी बैंक) की तरह ही एक ट्रस्टी होता है। जहाँ बैंकों द्वारा रुपयों का लेन-देन किया जाता है, वहीं Depository (डिपॉजिटरी) के द्वारा सिक्यूरिटीज (प्रतिभूतियों) का लेनदेन होता है। इस प्रकार इसे ‘सिक्यूरिटीज का बैंक’ कहा जाता है।

Depository (डिपॉजिटरी) में Investors, Shares, Debenture bonds, Government Securities (सरकारी प्रतिभूतियाँ), यूनिट्स जैसी प्रतिभूतियों को इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में रखते हैं।

Depository (डिपॉजिटरी) इन प्रतिभूतियों (सिक्यूरिटीज) को रखने के अलावा प्रतिभूतियों के लेन-देन (ट्रांजेक्शन) की भी सुविधा प्रदान करता है।

Depository क्या है ? || What is depository In Hindi.

सन् 1992 के शेयर घोटाले के बाद से ही सरकार कोई ऐसा तरीका खोजना चाह रही थी, जिससे शेयरों के व्यापार पर नजर रखी जा सके और नियमित बनाया जा सके।

इस बात को ध्यान में रखकर सरकार ने शेयर प्रमाण-पत्रों का भौतिक आदान-प्रदान रहित निक्षेप निधि Depository (डिपॉजिटरी) प्रणाली अपनाने का फैसला लिया।

इस प्रणाली में शेयरों के स्वामित्व को साबित करने के लिए किसी प्रकार का प्रमाण-पत्र नहीं रखना होता है।

भारतीय प्रतिभूति एवं एक्सचेंज बोर्ड (SEBI) ने Depository (डिपॉजिटरी) अधिनियम के अंतर्गत वर्ष-1996 में दो Depository (डिपॉजिटरी) कंपनियों National Security Depository Limited (NSDL) और Central Depository Services India Limited (CDSL) को पंजीकृत किया है।

पूरे भारत में ये दोनों डिपॉजिटरी ही अपने DP (Depository Participant) के माध्यम से Demat Account (डी-मैट एकाउंट) की देख-रेख करती हैं।

Demat Account (डी-मैट एकाउंट) खुलवाने के लिए आपको निकटतम Depository (डिपॉजिटरी) तक जाना होगा।

ग्राहकों को Depository (डिपॉजिटरी) की सेवाएँ जिस एजेंट के माध्यम से मिलती हैं, उन्हें ‘डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट’ DP (Depository Participant) कहा जाता है।

Depository Participant का काम बैंक, वित्तीय संस्थान या ब्रोकर करते हैं और इनके पास अपने Demat (डी-मैट) शेयर जमा कराना या निकालना, बैंक खाते के संचालन जैसा ही होता है।

Share Market (शेयर बाजार) में निवेश करनेवाली कई बड़ी कंपनियों से लेकर छोटे ब्रोकर तक Demat Account (डी-मैट एकाउंट) खुलवाने का काम करते हैं।

इनमें बहुत सारे सरकारी व गैर-सरकारी बैंक भी हैं, जहाँ आप अपना Demat Account (डी-मैट एकाउंट) खुलवा सकते हैं।

BSE (Bombay Stock Exchange) द्वारा प्रमोट की गई Depository (डिपॉजिटरी) ‘CDSL’ है, जो कई अग्रणी बैंकों जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और दूसरे अग्रणी ब्रोकर द्वारा जुड़ी हुई है।

वहीं NSDL जो भारत की पहली Depository (डिपॉजिटरी) है, वह NSE (National Stock Exchange) द्वारा की गई Depository (डिपॉजिटरी) है तथा बहुत सी सरकारी तथा गैर-सकारी वित्तीय संस्थानों से जुड़ी हुई है।

National Security Depository Limited (NSDL) के जितने भी Share Holders (शेयर होल्डर्स) हैं, वे सभी NSDL की Depository (डिपॉजिटरी) सुविधाओं का उपयोग करते हैं।

Demat Account कैसे खोलें || How to open a Demat Account In Hindi.

सबसे बेहतर तो यही होता है कि आप उसी DP (Depository Participant) का प्रयोग करें, जिसका प्रयोग आपका ब्रोकर करता है। इससे आपके शेयर सौदे सरल तथा कम समय में हो जाएँगे।

Demat Account (डी-मैट एकाउंट) खोलने से पहले आप DP (Depository Participant) का चुनाव करते वक्त तीन ‘सी’ का ध्यान रखें। ये तीन ‘सी’ हैं-Convienions, Comfort और Cost।

आप जाँच लें कि कौन से DP की सेवाएँ आपको कम खर्च, आपकी आसान पहुँच तथा आसानी से मिल सकती हैं। अधिकांश बैंक DP (Depository Participant) हैं।

उदाहरण के लिए, यदि आपने अपना DP (Depository Participant) ‘स्टेट बैंक ऑफ इंडिया’ को चुन लिया है तो वहाँ आपको Demat Account (डी-मैट एकाउंट) खोलने के लिए एक फॉर्म भरना होगा।

यदि आपका बैंक ब्रोकर भी है तो आप अपना सेविंग बैंक अकांउट भी वहाँ खोलकर अपना शेयर कारोबार एक ही जगह पूरा कर सकते हैं।

मतलब Demat Account (डी-मैट एकाउंट), ब्रोकिंग एकाउंट और बैंक एकाउंट एक ही जगह। शेयर ब्रोकर को एक ग्राहक के रूप में आपको तमाम जानकारियाँ देनी होती हैं।

उसके बाद ब्रोकर आपको एक ‘यूनिक आइडेंटिफिकेशन’ नंबर देना है। फॉर्म के साथ आपको निम्नलिखित सबूत देने होंगे

  • पहचान का सबूत-आपके हस्ताक्षर-युक्त फोटोग्राफ, पैन कार्ड की फोटोकॉपी।
  • स्थायी पते का सबूत-इसके लिए आप पासपोर्ट की फोटोकॉपी, ड्राइविंग लाइसेंस की कॉपी, राशनकार्ड या बैंक की पासबुक की फोटोकॉपी, टेलीफोन या बिजली का बिल, जिस पर आपका स्थायी पता लिखा हो। इनमें से आपके पास जो भी दो-तीन स्थायी सबूत उपलब्ध हों, उन्हें फॉर्म के साथ संलग्न करना होता है।
  • पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ।

आप एक ही DP या उससे एक से अधिक Demat Account (डी-मैट एकाउंट) भी खुलवा सकते हैं, लेकिन जरूरी है कि अपनी इंस्ट्रक्शन स्लिप को सँभालकर रखें।

कैसे होता है शेयरों का Dematerialize (डीमैटीरियलाइजेशन) ? || How to dematerialize shares.

जिनके पास अभी तक पुराने शेयर फिजिकल फॉर्म में पड़े हैं, उनका डीमैटीरियलाइजेशन करवाना बहुत जरूरी है। वरना आप उन शेयरों की कुछ समय बाद खरीद-बिक्री नहीं कर पाएँगे।

DP (Depository Participant) के पास अपने शेयर Demat (डी-मैट) कराने की प्रक्रिया भी काफी आसान है। Demat Account (डी-मैट एकाउंट) खोलने के बाद बस अपने शेयर सर्टिफिकेट रद्द करके DP (Depository Participant) को सौंपने हैं।

साथ ही, आपको एक ‘डी-मैट रिक्वेस्ट फॉर्म’ भरकर देना है, जिसमें आपके शेयरों की फोलियो संख्या, सर्टिफिकेट नंबर व अन्य विवरण दर्ज किया जाता है।

इसके बाद इन शेयरों को Demat (डी-मैट) रूप में बदलने के लिए DP (Depository Participant) आपका यह रिक्वेस्ट फॉर्म उस कंपनी या उसके रजिस्ट्रार व हस्तांतरण एजेंट को भेज देता है।

शेयरों के Demat (डी-मैट) रूप में परिवर्तित हो जाने पर ये DP (Depository Participant) के पास खाते में जमा हो जाते हैं। आमतौर पर इस पूरी प्रणाली में लगभग एक महीना लगता है।

Demat Account (डी-मैट एकाउंट) खोलने और उसके संचालन से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए आप अपने निकट के DP (Depository Participant) से संपर्क करें। .

Dematerialize (डीमैटीरियलाइजेशन) के फायदे || Advantages of Dematerialization.

  • Securities (सिक्यूरिटीज) का तुरंत हस्तांतरण (ट्रांसफर) हो जाना।
  • Securities (सिक्यूरिटीज) के हस्तांतरण के दौरान किसी तरह की टैंप ड्यूटी नहीं चुकानी पड़ती और न ही लंबा-चौड़ा ट्रांसफर फॉर्म भरना पड़ता है। इसके अलावा इस बात का भी कोई खतरा नहीं रहता कि शेयर नकली, झूठे या चुराए हुए हैं।
  • नामांकन की सुविधा उपलब्ध होना। अगर खाते में एक से अधिक लोगों के नाम हों, तब भी आप नामांकन फॉर्म भर सकते हैं, ताकि एक खाताधारक की मृत्यु होने पर खाते के शेयर जीवित खाताधारक के अलग खाते में चले जाएँ। नामांकित व्यक्ति को शेयर तभी मिलते हैं, जब खाते के सभी धारकों की मृत्यु हो जाए।
  • Demat (डी-मैट) प्रणाली की मार्फत छोटे निवेशक ‘ऑड लॉट’ या कम संख्या के शेयर आसानी से बाजार भाव पर बेच सकते हैं और महँगे शेयर भी कम संख्या में खरीद सकते हैं; जबकि पहले महँगे शेयरों का ‘मार्केटेबल लॉट’ खरीदने के लिए बड़ी राशि की आवश्यकता होती थी।
  • यदि आपका स्थानीय पता बदल गया है तो आपको उन सभी कंपनियों को सूचित करने की जरूरत नहीं है, जिनमें आपने निवेश किया है, बल्कि आपको केवल डी.पी. को सूचित करना होगा और उसके बाद आपका डी.पी. यह जानकारी उन सभी कंपनियों तक पहुँचा देगा, जिसमें आपने निवेश किया है।
  • Demat (डी-मैट) सुविधा के चलते अब आपको कंपनियों द्वारा मिलनेवाले बोनस शेयर व राइट शेयर बिना विलंब के आपके खाते में जमा हो जाते हैं; जबकि पहले इन शेयरों के सर्टिफिकेट निवेशकों को कई सप्ताह बाद मिलते थे। इस दौरान कई बार सर्टिफिकेट खो जाते थे या गलत पते पर पहुँच जाते थे।

Demat Account के लिए पैन क्यों जरूरी है || Why PAN is important for Demat Account.

आप यदि Share Market (शेयर बाजार) में निवेश करना चाहते हैं तो एक बात स्पष्ट रूप से समझ लें कि आपके पास यदि इनकम टैक्स परमानेंट एकाउंट नंबर (पैन) नहीं है

तो आप Share Market (शेयर बाजार) में न तो प्राथमिक बाजार के द्वारा और न ही द्वितीयक बाजार के द्वारा निवेश कर पाएँगे।

Share Market (शेयर बाजार) में कारोबार करने के लिए Demat Account (डी-मैट एकाउंट) होना जरूरी है, लेकिन यदि आपके पास पैन कार्ड नहीं है तो आपका Demat Account (डी-मैट एकाउंट) भी नहीं खुल सकता।

सरकार ने इनकम टैक्स संबंधी पारदर्शिता लाने की दृष्टि से ऐसा किया है। लेकिन आपको इनकम टैक्स के ‘पैन नंबर’ सुनकर घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि शेयरों पर मिलनेवाले लाभांश को सरकार ने ‘कर’-मुक्त रखा है।

यानी कंपनी से मिलनेवाले Dividend (डिविडेंड) पर आपको किसी तरह का टैक्स नहीं देना होता। इसी तरह यदि आपने शेयरों को खरीदकर बारह महीने तक अपने पास रखा और बाद में बेचकर लाभ कमाया तो ऐसे लाभ पर कोई शार्ट-टर्म कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगता

जबकि यदि आपने खरीदे गए शेयर साल के भीतर ही बेचकर लाभ कमाया है तो उस लाभ पर आपको ‘शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स’ चुकाना होता है।

।। धन्यवाद ।।

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