इस Blog में Depository क्या है ?, Forms Of Shares, ISIN NO क्या है इन सारे Question के Answer इस Blog में मिल जायेंगे ,

Depository (डिपॉजिटरी) क्या है?

भारत सरकार ने Depository (डिपॉजिटरी) कानून सितम्बर १९९६ में घोषित किया और अगस्त १९९६ में संसद के दोनों सदनों में पारित हुआ। १९९६ में SEBI (सेबी) ने Depository (डिपॉजिटरी) के नियम तय करके पास किए।

८ नवंबर १९९६ के दिन भारत की सर्व प्रथम Depository (डिपॉजिटरी) सर्विस, नेशनल सिक्योरिटी Depository (डिपॉजिटरी) लिमिटेड (NSDL) की स्थापना, SEBI (सेबी) से अनुमती लेकर की गई।

उसके बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने SEBI (सेबी) से अनुमती लेकर १९९९ में सेंट्रल Depository (डिपॉजिटरी) सर्विस इंडिया (CDSL) की स्थापना की।

इस तरिके में शेअर का प्रमाण पत्र लिखित स्वरूप में नहीं होता, मगर वो कम्प्युटर में इलेक्ट्रॉनीक रूपमें मौजूद होते है।

इसलिए लिखित शेअर के प्रमाण पत्रों के कारण जो समस्यांए निर्माण होती है वह कम हुई।रूपए लेने अथवा देने के लिए बैंक अकाउंट की जरूरत होती है।

उसी तरह शेअर का लेन देन करने के लिए Depository (डिपॉजिटरी) अकाउंट की जरूरत होती है। उसी को डिमेट (Demat) अकाउंट कहते है।

बैंक पैसा जमा करती है और हम चेक द्वारा दुसरो को पेमेंट कर सकते है। उसी तरह Demat Account (डिमेट अकाउंट) में हमारे शेअर जमा किए जाते है और शेअर का लेन देन किया जाता है।

फर्क सिर्फ इतना है कि बैंक के अकाउंट में कम से कम रक्कम जमा (Minimum Balance) रखनी जरूरी है (बैंक के नियमोनुसार) डिमेट अकाउंट में कोई रक्कम जमा रखने की जरूरत नहीं होती।

Depositories in India (भारत के डिपॉजिटरीस) :-

National Securities Depository Limited (नेशनल सिक्योरिटी डिपॉजिटरी लिमिटेड) (NSDL) सबसे पहले भारत में ८ नवंबर १९९६ में सेबी में रजिस्टर की गई थी।

Central Depository Services Limited (सेन्ट्रल डिपॉजिटरी सर्विस लिमिटेड) (CDSL) संस्था (BSE) ने मुंबई के शेअर बाज़ार में स्थापित की है। वह सेबी में १९९९ को रजिस्टर की गई थी।

Depositories Participant (डिपॉजिटरी पार्टीसीपेंट) :-

शेअर धारक अथवा निवेशक वर्ग को Depository (डिपॉजिटरी) अपने एजेंट द्वारा सेवा देते है। उन्हें Depositories Participant (डिपॉजिटरी पार्टीसीपेंट) यानि (DP) कहते है।

इस Depositories Participant (डिपोजिटरी पार्टीसीपेंट) को सेबी के पास रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है।

साधारणरूप से बैक, फायनानशियल Share Holder (शेअर होल्डर) अथवा निवेशक अपनी जरूरत के अनुसार Depositories Participant (डिपोजिटरी पार्टीसीपेंट) तय करके अपना खाता खोलते है।

उस खाते को Demat Account (डिमेट अकाउंट) कहते है। Demat Account (डिमेट अकाउंट) खोलने के लिए जरूरी दस्तावजों की पुरी तरह जानकारी अगले पाठ में दी गई है।

Forms of Shares (शेअर्स के स्वरूप) :-

  1. Physical Shares (भौतिक शेअर)
  2. Demat (डिमेट)

Physical Shares (भौतिक स्वरूप के शेअर) :-

इस शेअर में लिखित प्रमाण पत्र मिलता है और उसमें शेअर की दर्शनी कीमत लिखी होती है।

भूतकाल के शेअर खरीदने का और बेचने का तरिका अगर आपने देखा हो तो आपको पता चलेगा की वर्तमान के डिमेट का तरिका कितना आसान है।

भतकाल में शेअर खरीदनेवाले को शेअर का प्रमाण पत्र और साथ ही शेअर ट्रान्सफर फॉर्म कंपनी को भेजना पड़ता था।

इसमें अगर हस्ताक्षर ठिक तरह से नहीं हुआ तो शेअर का प्रमाण पत्र कंपनी से वापिस भेज दिया जाता था और शेअर भी हमारे नाम ट्रान्सफर नहीं होते थे।

Demat (डिमेट) :-

Dematerialisation (डिमटेरीअलायझेशन) के संक्षिप्त नाम को डिमेट कहते है। इस तरीके में शेअर, डिबेंचर सर्टिफिकेट का रूपांतर इलेक्ट्रॉनिक डेटा में होता है।

वह Depositories Participant (डिपोजिटरी पार्टीसीपेंट) के कम्प्युटर में संग्रहीत (Store) होते है।

Procedure for Dematerialisation of Securities (भौतिक शेअर को डिमेट करने का तरीका) :-

सब से पहले फीजिकल शेअर के प्रमाण पत्र को डिमेट में बदलने के लिए जिस बैंक में डिमेट की सुविधा है उसमें अकाउंट खोलना पड़ता है।

इस शेअर प्रमाण पत्र के साथ एक बिनती पत्र बैंक को देना पड़ता है। इस प्रमाण पत्र पर “Submitted for Dematerialization” यह लिखना जरूरी है।

यहाँ पर एक बात का ध्यान रखना है कि, शेअर धारक का नाम शेअर प्रमाण पत्र पर जिस तरह लिखा है ठिक उसी तरह डिमेट खाते पर होना चाहिए।

शेअर धारक के डिमेट खाते में शेअर जमा होते है तब बैक शेअर धारक को पंद्रह दिनों में पत्र के द्वारा उसकी जानकारी देता है।

शेअर डिमेट खाते में जमा करने के लिए कंपनी को कोई दिक्कत हुई तो वह पत्र द्वारा बैक को सुचीत करती है। शेअर धारक को हर महिने Depositories Participant (डिपोजिटरी पार्टीसीपेंट) से होल्डींग स्टेटमेंट मिलता है।

किसी भी शेअर धारक को Dematerialization (डिमट्रेलायझेशन) (डिमेट) में से Symmetralization (सिमटेरिलायझेशन) करना हो तो अर्थात उन्हें लिखित स्वरूप में सर्टीफीकेट चाहिए तो उनका एक फार्म भरकर उनके चार्जेस रजिस्ट्रार को भेजना पड़ता है।

Benefits of Dematerialised Shares (डिमेट शेअर के फायदे) :-

  • शेअर का ट्रान्सफर तुरंत होता है।
  • शेअर ट्रान्सफर में स्टॅम्प फीस की बचत होती है।
  • भौतिक शेअर में हमेशा डर होता है कि पोस्ट में शेअर की चोरी, हस्ताक्षर में होने वाली तफावत, चोरी के शेअर आना, गलत डिलेवरी होना इत्यादि मुश्किले डिमेट पद्धती में नहीं आती।
  • शेअर के रजिस्टर ऑफिस में पेपर वर्क बहुत कम होता है, क्योंकि सभी काम कम्प्युटर के जरिए होते है।
  • बहुत कम खर्च आता है।
  • नोमिनेशन एकदम सरल है।
  • पता बदली करना एकदम आसान है।
  • पत्र व्यवहार बहुत कम होता है।
  • आई.पी.ओ अथवा राईटशेअर शेअरधारक को अलॉट (Allot) होने के तुरंत बाद डिमेट खाते में जमा होते है।
  • इसमें छपाई का खर्च बहुत कम है।
  • शेअर दलालों का काम एकदम आसान हो जाता है क्योंकि फिजीकल प्रमाण पत्रों की गिनती, ट्रान्सफर फार्म की चेकिंग, स्टॅम्प लगाना इन की जरूरत नहीं पड़ती।
  • इनमें ऑडलॉट तरीका रद्द हुआ है। इसलिए मार्केट लॉट जैसा कुछ रहा नहीं।
  • डिमेट अकाउंट आप एक शेअर लेकर भी शुरू कर सकते है।

ISIN NO क्या है? International Securities Identification Number (इंटरनेशनल सिक्योरिटीज आयडेंटीफीकेशन नंबर) :-

हर स्क्रिप्ट का इंटरनेशनल सिक्योरिटीज आयडेंटीफीकेशन नंबर (ISIN NO) अलग होता है। जब हम डिमेट इंस्ट्रक्शन स्लिप भरते है तब स्क्रिप्ट के साथ यह नंबर भी लिखना पड़ता है।

इस नंबर में कुछ गलती हुई तो व्यवहार ऑक्शन में जाता है, क्योंकि कंपनी की पहचान उस (ISIN NO) नंबर पर आधारित होती है।

इस नंबर की जरूरत ज्यादातर पे इन और पे आऊट के लिए होती है।

डिमेट अकाउंट (खाते) में कम से कम रखने वाली रक्कम (Minimum balance of securities required with your DP):

डिमेट अकाउंट और बैंक अकाउंट एक जैसे ही होते है। बैक में हम पैसों का लेन देन करते है। बैंक में अगर हम दुसरे के नाम का चेक देते है तो उसके नाम से पेमेंट किया जाता है।

डिमेट अकाउंट और उसमें यही एक फर्क होता है कि बैंक के खाते में कम से कम रक्कम जमा रखनी पड़ती है।

डिमेट अकाउंट में कम से कम रक्कम जमा रखने की जरूरत नहीं होती। जमा रक्कम शुन्य होगी तो भी डिमेट अकाउंट चल सकता है। साथ ही वह शुन्य जमा रक्कम से खोला भी जा सकता है।

।। धन्यवाद ।।

Important Links :-

Open Demat & Trading Account in Zerodhahttps://zerodha.com/?c=NH6775

81 / 100
Categories: Share Market

0 Comments

Leave a Reply

Avatar placeholder

Your email address will not be published. Required fields are marked *