भारत में डेरिवेटिव बाजार – Derivatives Market in India in Hindi

भारत में डेरिवेटिव बाजार (Derivatives Market in India in hindi) काफी पहले से मौजूद है। यद्यपि तब अखिल भारतीय स्तर पर इसे वैधानिक मान्यता प्राप्त नहीं थी।

अलग-अलग स्थानों पर स्थानीय नाम से इस प्रकार के सौदे होते थे। परंतु उन सौदों का स्वरूप आज के डेरिवेटिव (Derivative) सौदों के अनुसार ही था।

सिक्यूरिटीज कॉण्ट्रेक्ट (Securities Contract) (रेगूलेशन) ऐक्ट (SCRA)-1956 के अनुसार, डेरिवेटिज को भी सिक्यूरिटीज (Securities) माना गया

जिनके अंतर्निहित अन्य सिक्यूरिटीज (Securities) जैसे डेब्ट इंस्ट्रमेंट (बांड/डिबेंचर), शेयर, लोन या कोई रिस्क इंस्ट्रमेंट हो, डेरिवेटिव (Derivative) का मूल्य इसके अंतर्निहित सिक्यूरिटीज (Secutities) के मूल्य के अनुसार निर्देशित होता है।

इस ऐक्ट के तहत ऐसे करार को भी डेरिवेटिव (Derivative) माना गया, जिनका मूल्य अंतर्निहित सिक्यूरिटीज (Securities) या सिक्यूरिटीज की कीमतों के सूचकांक से निर्देशित होता है।

भारत में वैधानिक तरीके से डेरिवेटिव सौदे प्रारंभ करने हेतु ‘सिक्यूरिटीज लॉ (एमेंडमेंट) ऑर्डिनेंस-1995’ के तहत कदम उठाया गया।

इस ऑर्डिनेंस के द्वारा सिक्यूरिटीज (Securities) के ऑप्शन व्यापार पर लागू प्रतिबंध हटाया गया। डेरिवेटिव ट्रेडिंग (Derivatives Trading) को नियमावली में बाँधने तथा इस पर नजर रखने के लिए मजबूत रेगूलेटरी ढाँचा बनाने के लिए एक समिति का गठन किया गया।

एक अन्य विशेषज्ञ दल का गठन डेरिवेटिव मार्केट (Derivatives Market) के खतरों को सीमित रखने के लिए किया गया। दिसंबर 1999 में ‘सिक्यूरिटीज कॉण्ट्रेक्ट (रेगूलेशन) ऐक्ट’ में परिवर्तन करके डेरिवेटिव्ज को सिक्यूरिटीज की परिभाषा में शामिल किया गया था।

डेरिवेटिव ट्रेडिंग (Derivatives Trading) पर नजर रखने के लिए ‘नियामक ढाँचे’ (रेगूलेटरी फ्रेमवर्क) का गठन किया गया। इसके साथ ही फॉरवर्ड ट्रेडिंग पर लगा प्रतिबंध भी हटा लिया गया।

इसमें महत्त्वपूर्ण बात दर्ज की गई कि भारत सरकार द्वारा संशोधन दर्जा प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज के तहत किए गए डेरिवेटिव सौदे ही मान्यता प्राप्त होंगे।

इस प्रकार सेबी द्वारा स्वीकृति मिलने पर जून 2000 में भारत में डेरिवेटिव ट्रेडिंग (Derivatives Trading) की शुरुआत हुई। प्रारंभ में बी.एस.ई. (BSE) तथा एन.एस.ई. (NSE) के सूचकांकों के ‘इंडेक्स फ्यूचर कॉण्ट्रेक्ट’ शुरू किए गए।

इसके पश्चात् इन दोनों सूचकांकों के ऑप्शन कॉण्ट्रेक्ट तथा किसी भी सिक्यूरिटीज (Securities) के आप्शन कॉण्ट्रेक्ट की शुरुआत हुई।

सिक्यूरिटी के फ्यूचर कॉण्ट्रेक्ट की शुरुआत सबसे बाद में लागू की गई। आज भारत के डेरिवेटिव बाजार में फ्यूचर कॉण्ट्रेक्ट की ट्रेडिंग बड़ी भारी तादाद में की जाती है।

भारत में डेरिवेटिव बाजार (Derivatives Market) की बढ़ती लोकप्रियता का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि शुरुआत में इंडेक्स फ्यूचर का कारोबार सन् 2000-01 में 2,365 करोड़ रुपए का एन.एस.ई. में दर्ज हुआ

वहीं यह आँकड़ा फरवरी 2007 में 2,42,237 करोड़ रुपए तक जा पहुँचा।

अन्य डेरिवेटिव सौदों में भी इसी अनुपात में वृद्धि दर्ज की गई। सबसे महत्त्वपूर्ण बात डेरिवेटिव सौदों की ट्रेडिंग तथा सेटलमेंट में नियमों का पालन व पारदर्शिता रही।

ओवर ऑल ट्रेडिंग (Over All Trading)

भारत में डेरिवेटिव इंस्ट्रमेंट (Derivative Instrument) की ट्रेडिंग निर्धारित नियमों व नियामकों के तहत की जाती है।

पूरी ट्रेडिंग स्टॉक एक्सचेंज (Treading Stock Exchange) के माध्यम से की जाती है, जहाँ खरीद, बिक्री, कॉण्ट्रेक्ट, ऑफर, ट्रेडिंग की सारी प्रक्रिया स्वचालित प्रणाली द्वारा देश के सारे टर्मिनलों तथा एक्सचेंजों से जुड़ी रहती है।

सारी प्रक्रिया स्वचालित स्क्रीन पर प्रत्येक व्यक्ति के लिए उपलब्ध रहती है। इस स्वचालित प्रणाली की ऑनलाइन निगरानी भी रखी जाती है तथा इस सिस्टम में पारदर्शिता होती है।

डेरिवेटिव बाजार (Derivative Market) में फ्यूचर कॉण्ट्रेक्ट (Future Contract) के विकल्प उपलब्ध रहते हैं

जिनकी अधिकतम वैधता तीन माह की होती है। प्रतिमाह के प्रारंभ में नया फ्यूचर कॉण्ट्रेक्ट (Future Contract) अस्तित्व में आता है तथा इसकी वैधता अधिकतम तीन माह तक होती है।

प्रत्येक माह के अंतिम गुरुवार को एक फ्यूचर कॉण्ट्रेक्ट समाप्त होता है, जो तीन माह पूर्व प्रारंभ हुआ था।

इस प्रकार किसी भी समय तीन समय अवधि (टाइम फ्रेम) वाले फ्यूचर कॉण्ट्रेक्ट (Future Contract) डेरिवेटिव बाजार (Derivatives Market) में उपलब्ध रहते हैं।

सिर्फ माह के अंतिम गुरुवार को केवल दो फ्यूचर कॉण्ट्रेक्ट उपलब्ध होते हैं, क्योंकि एक फ्यूचर कॉण्ट्रेक्ट उसी दिन समाप्त हो रहा होता है। इसके अगले ट्रेडिंग दिवस को नया फ्यूचर कॉण्ट्रेक्ट अस्तित्व में आ जाता है, जिसकी वैधता आगामी तीन माह तक होती है।

उदाहरण के लिए, अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में तीन विभिन्न समयावधि वाले फ्यूचर कॉण्ट्रेक्ट डेरिवेटिव बाजार (Derivatives Market) में उपलब्ध हैं।

पहला फ्यूचर कॉण्ट्रेक्ट, जिसकी समाप्ति अप्रैल माह के अंतिम गुरुवार को होगी, इसकी उपलब्ध अवधि एक माह है।

दूसरा फ्यूचर कॉण्ट्रेक्ट (Future Contract), जो मई माह के अंतिम गुरुवार को समाप्त होगा तथा इसकी उपलब्ध अवधि दो माह है।

तीसरा फ्यूचर कॉण्ट्रेक्ट (Future Contract), जो इसी अप्रैल माह के प्रथम ट्रेडिंग दिवस को अस्तित्व में आया था और इसकी वैधता तीन माह तक की है और यह फ्यूचर कॉण्ट्रेक्ट (Future Contract) जून माह के अंतिम गुरुवार को समाप्त होगा।

प्रत्येक माह के प्रथम ट्रेडिंग दिवस को नया फ्यूचर कॉण्ट्रेक्ट शुरू होता है तथा माह के अंतिम गुरुवार को तीन माह पुराना फ्यूचर कॉण्ट्रेक्ट (Future Contract) समाप्त होता है।

डेरिवेटिव ट्रेडिंग (Derivatives Trading) सिस्टम की विशेषता है कि कोई भी व्यक्ति ब्रोकर टर्मिनल के माध्यम से ट्रेडिंग कर सकता है। ट्रेडिंग के सौदों में पूरी पारदर्शिता रहती है।

पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन स्क्रीन पर उपलब्ध रहती है तथा कोई भी निवेशक प्रस्तुत कीमतों को देखकर किसी भी सौदे में अपनी पोजीशन लेकर शामिल हो सकता है।

डेरिवेटिव ट्रेडिंग (Derivatives Trading) की पूरी प्रणाली कैश सेगमेंट के इक्विटी ट्रेडिंग जैसी ही है। जो निवेशक डेरिवेटिव बाजार (Derivative Market) की कार्य-प्रणाली से अच्छी तरह वाकिफ हैं, उनके लिए यह निवेश का सहज तरीका है।

कोई व्यक्ति डेरिवेटिव बाजार (Derivatives Market) में स्वयं के लिए दो प्रकार की भूमिकाएँ तलाश सकता है। पहली प्रकार की भूमिका के तहत यह व्यक्ति सौदों के ऑर्डर लेने, ऑर्डरों के मिलान करने तथा ट्रेडिंग का प्रबंधन सँभालने का कार्य कर सकता है।

इस भूमिका के तहत कई कार्य किए जाते हैं तथा यह तरीका डेरिवेटिव ट्रेडिंग (Derivatives Trading) का आधार है।

दूसरी भूमिका के तहत व्यक्ति ट्रेडिंग सदस्यों की कार्यशैली की निगरानी कर सकता है, जिनके लिए विभिन्न डेरिवेटिव (Derivative) सौदे निपटाए जाते हैं।

इस भूमिका के तहत व्यक्ति सौदों में शामिल होकर विभिन्न सौदों की सीमाएँ निर्धारित कर सकता है तथा सिस्टम के तहत सौदों पर बंधन लगा सकता है, जिससे कि पूरी ट्रेडिंग सहजता से, बिना किसी बड़ी परेशानी के निपटाई जा सके।

यह भूमिका जोखिम-प्रबंधन का काम करती है, जो डेरिवेटिव व्यापार के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है।

सदस्यता (Membership)

डेरिवेटिव बाजार (Derivatives Market) की गतिविधियों में भाग लेने के लिए किसी व्यक्ति को एक्सचेंज के फ्यूचर तथा ऑप्शन साइड की सदस्यता लेनी आवश्यक है।

इसमें क्लीयरिंग मेंबर (Clearing Member) की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है

क्योंकि यह अपने अंतर्गत ट्रेडिंग मेंबरों के सौदों का निपटान करता है तथा अपने कार्यक्षेत्र के तहत रिस्क मैनेजमेंट (Risk Management) (जोखिम-प्रबंधन) तथा सौदों के सेटलमेंट (Settlement) के लिए उत्तरदायी होता है।

क्लीयरिंग (Clearing)

सहज तथा दोषरहित क्लीयरिंग (Smooth and Lossless Clearing)

यह पूरे ट्रेडिंग सिस्टम (Treading System) में होनेवाले ऑपरेशंस को मजबूत आधार प्रदान करती है। क्लीयरिंग मेंबर (Clearing Member) प्रत्येक ट्रेडिंग दिवस के समापन के पश्चात् अपने ट्रेडिंग मेंबर्स की ओपन पोजीशन तैयार करता है।

इससे विभिन्न ट्रेडिंग मेंबरों के ऑब्लिगेशन पता चलते हैं। इसमें कस्टोडियल पार्टिसिपेंट्स (जो उसके ट्रेडिंग मेंबर नहीं हैं) के लिए की गई क्लीयरिंग भी शामिल होती है।

ट्रेडिंग मेंबर दो प्रकार के सौदे करता है (Trading Member Performs Two Types of Deals)

एक, अपने स्वयं के लिए तथा दूसरे किसी अन्य व्यक्ति (क्लाइंट) जैसे हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (एच.एन.आई.) के लिए।

किसी भी सौदे के लिए ट्रेडिंग मेंबर को यह दरशाना आवश्यक है कि यह सौदा किस प्रकार का है। क्लीयरिंग मेंबर (Clearing Member) दोनों प्रकार के सौदों की फाइनल पोजीशन प्रत्येक ट्रेडिंग दिवस के अंत में तैयार करता है।

सेटलमेंट (Settlement)

ओपन पोजीशन के द्वारा जरूरतों तथा स्थिति का जायजा मिलने के पश्चात् सेटलमेंट (Settlement) की बारी आती है। सेटलमेंट (Settlement) से तात्पर्य है कि ओपन पोजीशन के अनुसार स्थितियों का सामना करके जरूरतों को पूरा किया जाए।

डेरिवेटिव मार्केट (Derivatives Market) में फ्यूचर तथा ऑप्शन सौदों को कैश (नकदी) एडजस्टमेंट द्वारा सेटल किया जाता है।

डेरिवेटिव मार्केट (Derivatives Market) के फ्यूचर तथा ऑप्शन कॉण्ट्रेक्ट के अंतर्निहित इंडेक्स (बी.एस.ई. या एन.एस.ई. के सेंसेक्स तथा निफ्टी) या सिक्यूरिटीज (Securities) का आदान-प्रदान सेटलमेंट (Settlement) के दौरान नहीं होता

अपितु इन सौदों की कीमत के अनुसार राशि का एडजस्टमेंट किया जाता है।

।। धन्यवाद ।।

Important Links :-

Open Demat Account in Zerodhahttps://zerodha.com/?c=NH6775

84 / 100
श्रेणी: Share Market

4 टिप्पणियाँ

डेरिवेटिव मार्केट का बढ़ता चलन - Increasing Trend Of Derivatives Market In Hindi. · नवम्बर 18, 2020 पर 11:14 अपराह्न

[…] भारत में डेरिवेटिव बाजार – Derivatives Market in India i… […]

शेयर बाजार से जुड़े अर्थव्यवस्था के महत्त्वपूर्ण पहलू - Important Aspects Of The Stock Market Economy In Hindi. · नवम्बर 19, 2020 पर 8:33 अपराह्न

[…] भारत में डेरिवेटिव बाजार – Derivatives Market in India i… […]

डेरिवेटिव ट्रेडिंग में प्रयुक्त होनेवाली शब्दावली - Terminology Used In Derivatives Trading In Hindi. · नवम्बर 20, 2020 पर 9:05 अपराह्न

[…] भारत में डेरिवेटिव बाजार – Derivatives Market in India i… […]

डेरिवेटिव्ह मार्केट का परिचय - Introduction To Derivatives Market In Hindi. · जुलाई 10, 2021 पर 3:15 अपराह्न

[…] करने की छूट दी। उसके बाद जून २००० में भारत में डेरिवेटिव्हस के व्यवहार का आरंभ हुआ था। सेबी ने […]

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

hi_INHindi