क्या आपको पता है की ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग में क्या फर्क है? – Difference Between Trading And Investing in Hindi अगर आपको पता नहीं है तो आप इस ब्लॉग को पूरा पढ़े.

ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग में क्या फर्क है? – Difference Between Trading And Investing in Hindi

बोहोत सारे लोगो को लगता है की ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग इन दो शब्दों का मतलब एक ही है जब की ऐसा नहीं है तो आज हम जानेंगे की ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग क्या होता है और इनमे क्या अंतर है।

ट्रेडिंग क्या है? – What is Trading in Hindi

ट्रेडिंग में शॉर्ट टर्म के लिए याने कुछ सेकंड से लेकर कुछ महीनो तक शेयर्स को रखा जाता है वैसे ट्रेडिंग के अलग-अलग प्रकार होते है।

ट्रेडिंग के प्रकार – Types Of Trading in Hindi

  1. स्केलपिंग ट्रेडिंग (SCALPING TRADING)
  2. इंट्राडे ट्रेडिंग (INTRADAY TRADING)
  3. स्विंग ट्रेडिंग (SWING TRADING)
  4. पोजीशन ट्रेडिंग (POSITION TRADING)

स्केलपिंग ट्रेडिंग क्या है? – SCALPING TRADING in Hindi

स्केलपिंग ट्रेडिंग में शेयर को कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक होल्ड किया जाता है।

इंट्राडे ट्रेडिंग क्या है? – INTRADAY TRADING in Hindi

इंट्राडे ट्रेडिंग का मतलब उसके नाम में से ही पता चलता है जिस दिन आपने शेयर ख़रीदे है अगर आप उन्हें उसी दिन बेचते हो उसे इंट्राडे ट्रेडिंग कहते है। इंट्राडे ट्रेडिंग ट्रेडिंग का सबसे लोकप्रिय तरीका है।

अगर आपको इंट्राडे ट्रेडिंग के बारे में और जानकारी चाहिए तो निचे दिए हुए लिंक पर क्लिक करे।

स्विंग ट्रेडिंग क्या है? – SWING TRADING in Hindi

स्विंग ट्रेडिंग में शेयर्स को कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ्तों तक होल्ड किया जाता है अगर आपको स्विंग ट्रेडिंग के बारे में और जानकारी चाहिए तो निचे दिए हुए लिंक पर क्लिक करे।

पोजीशन ट्रेडिंग क्या है? – POSITION TRADING in Hindi

पोजीशन ट्रेडिंग में शेयर्स को कुछ महीनो के लिए होल्ड किया जाता है इनके अलावा ट्रेडिंग का एक और लोकप्रिय तरीका है जिसका नाम है BTST यानि Buy Today and Sell Tomorrow याने आज खरीदना और कल बेचना ट्रेडर्स शेयर की प्राइस मूवमेंट से पैसा बनाने की कोशिश करते है।

ट्रेडर्स अपने अनालिसिस के लिए टेक्निकल अनालिसिस का उपयोग करते है टेक्निकल अनालिसिस में चार्ट की मदत से प्राइस और वॉल्यूम के पैटर्न का अनालिसिस किया जाता है और फिर स्टॉक की डिमांड और सप्लाई को और ट्रेडर्स की साइकोलॉजी समझने का प्रयास किया जाता है।

जो लोग ट्रेडिंग करते है उन्हें ट्रेडर्स कहते है।

इन्वेस्टिंग क्या है? – What is Investing in Hindi

इन्वेस्टिंग में लॉन्ग टर्म के लिए यानि १ साल से ज्यादा टाइम पिरेड के लिए लिए इन्वेस्ट किया जाता है जो लोग इन्वेस्टिंग करते है उन्हें इन्वेस्टर्स कहते है इन्वेस्टर्स Buy & Hold का उपयोग करते है और शेयर्स को सालो तक होल्ड करना पसंद करते है।

इन्वेस्टर्स किसी कंपनी में इन्वेस्ट करने को कंपनी में पार्टनरशिप यानि भागेदारी की तरह देखते है और उन शेयर्स में सालो तक बने रहते है।

इन्वेस्टर्स हमेशा बिज़नेस मैन की तरह सोचते है जिस तरह बिज़नेस मैन किसी बिज़नेस को समझते है और बड़ी बारीकी से उस बिज़नेस को परखते है इन्वेस्टर्स भी उसी बारीकी से कंपनी को परखते है।

इन्वेस्टिंग में कंपनी अनालिसिस के लिए फंडामेंटल अनालिसिस को फॉलो किया जाता है अगर आपको फंडामेंटल अनालिसिस क्या है ये पता नहीं है तो आप निचे दिए हुए लिंक को क्लीक कर पता कर सकते है।

इन्वेस्टिंग में दो प्रकार है – Two Types Of Investing in Hindi

  1. Value Investing
  2. Growth Investing

जैसे की हमने देखा ट्रेडर्स का ध्यान शेयर्स की प्राइस और वॉल्यूम पर होती है वही इन्वेस्टर्स का ध्यान कंपनी के फंडामेंटल पर होता है लॉन्ग टर्म में स्टॉक प्राइस कंपनी की ग्रोथ को फॉलो करती है इसीलिए इन्वेस्टर्स कंपनी के फंडामेंटल का अनालिसिस करते है।

वही शेयर में शार्ट टर्म में बोहोत सारी वोलैटिलिटी होती है इसीलिए ट्रेडर्स फंडामेंटल की बजाये टेक्निकल अनालिसिस का उपयोग करते है जिस में स्टॉक प्राइस और वॉल्यूम का अनालिसिस किया जाता है।

ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग टैक्सेशन – Trading and Investing Taxation in Hindi

ट्रेडिंग शेयर्स को कम टाइम पिरेड के लिए होल्ड किया जाता है तो अगर आप शेयर्स को १ साल से कम टाइम पिरेड के लिए होल्ड करते हो तो आपको प्रॉफिट पर शार्ट टर्म कॅपिटल गेन टैक्स (Short Term Capital Gain Tax) लगेगा।

जो की फ़िलहाल फ्लैट १५% है लेकिन ये रूल इंट्राडे ट्रेडिंग पर लागू नहीं होता है मतलब अगर आप इंट्राडे ट्रेडिंग करते हो तो आपको प्रॉफिट पर अपने टैक्स लैब के अनुसार टैक्स पे करना होगा।

उदाहरण

अगर आप २०% टैक्स लैब में आते हो तो आपको अपने प्रॉफिट पर २०% टैक्स भरना होगा है।

इन्वेस्टर्स स्टॉक को कई सालो तक होल्ड करते है अगर आप शेयर्स को १ साल से ज्यादा टाइम पिरेड के लिए होल्ड करते हो तो आपको लॉन्ग टर्म कॅपिटल गेन टैक्स (Long Term Capital Gain Tax) लगता है जो की कम है इन्वेस्टर्स होने का एक ये भी फायदा है।

हम आशा करते है की हमारी ये (ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग में क्या फर्क है? – Difference Between Trading And Investing in Hindi) ब्लॉग पोस्ट आपको पसंद आयी होगी अगर आपको शेयर मार्केट से जुड़ा कोई भी सवाल है तो आप कृपया कमेंट में जरूर पूछे।

।। धन्यवाद ।।

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