क्या आपको पता है की फ्युचर्स और ऑप्शन मार्केट में प्रवेश कैसे करना चाहिए (How to Enter Future and Options in Hindi) अगर आपको पता नहीं है तो आप इस ब्लॉग को पूरा पढ़े.

फ्युचर्स और ऑप्शन मार्केट में प्रवेश कैसे करना चाहिए – How to Enter Future and Options in Hindi.

शेअर्स के मूल्य में समय के चलते बढोतरी होने की संभावना सबसे अधिक होती है।

आम तौर पर यह कहा जाता है कि शेअर बाजार में नए से व्यवहार चालू करने की ईच्छा रखनेवालो ने इनिशिअल पब्लिक ऑफर याने की शेअर्स के पब्लिक ईश्य में ही निवेश करके शुरूवात करनी चाहिए।

यह निवेश करके अच्छा अनुभव मिलने के बाद सेकेंडरी मार्केट में से शेअर्स खरीदने की शुरूवात करनी चाहिए।

निवेश में से तेज गती से और अधिक प्रमाण में फायदा पाने के लिए निवेशक को फ्यूचर्स के बाजार में भी निवेश करना चाहिए। पर इसमें बहुत अधिक जोखिम होता है इसलिए यह कदम उठाने से पहले निवेशक को शेअर बाजार में अच्छा अनुभव होना चाहिए।

फ्युचर्स में ट्रेडींग करने के लिए ब्रोकर के पास अकाऊन्ट खोलने का तरिका स्टॉक मार्केट में ट्रेडींग करने के लिए खोले जानेवाले अकाऊन्ट के समान ही है।

जहाँ कुछ दलालो ने मात्र इसके लिए अलग फॉर्म तैयार किए है। यह फॉर्म भरकर देने के बाद ही उन्हे फ्युचर्स में ट्रेडींग करने के लिए अकाऊन्ट चालू करके दिया जाता है।

सेबी और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में रजिस्ट्रेशन करवाए प्रतिष्ठीत ब्रोकर के साथ ही हमें फ्युचर्स ट्रेडींग का व्यवहार करना चाहिए।

अगर आप फ्युचर्स का ट्रेडींग करने की इच्छा रखते हो तो आप नॅशनल स्टॉक एक्सचेंज (एन.एस.ई) में ही फ्युचर्स और ऑप्शन्स का व्यवहार करे क्योंकि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की तुलना में एन.एस.ई का वॉल्युम बहुत अधिक है।

स्टॉक ब्रोकर का चयन करते समय ध्यान में रखने लायक बाते (Points to be considered for selection of Broker):

  1. उस ब्रोकर का ऑफिस आपके घर के आसपास होनी चाहिए।
  2. उस ब्रोकर की बाजार में अच्छी प्रतिष्ठा होनी चाहिए।
  1. उस ब्रोकर का नाम बी.एस.ई और एन.एस.ई दोनो में रजिस्टर होना चाहिए।
  2. उसकी दलाली का भाव हमें पता होना चाहिए।
  3. हम उसे किस तरह से ऑर्डर दे सकते है यह देखना चाहिए। उदा. ऑन । लाईन ट्रेडींग अथवा फोन से। अगर ये दोनो सुविधा हो तो बेहतर होगा।
  4. दलाल द्वारा प्रदान की गई सेवाए (NSE, BSE, FNO, Commodity, etc)

डेरिवेटिव्ह में व्यवहार करने से पहले ध्यान में लेने लायक बाते (Points to be considered before trading in the Derivatives):

डेरिवेटिव्ह में ट्रेडींग शुरू करने से पहले एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि आपके पास कम से कम मार्जिन मनी के लिहाज से २० प्रतिशत रकम होना आवश्यक है। साथ ही मार्क टू मार्केट के लिहाज से अन्य २५ प्रतिशत रकम होना भी जरूरी है।

सामान्यत: बाजार में अस्थिर माहौल होगा तब आपने जिस स्क्रिप्ट या इंडेक्स में डेरिवेटिव्ह का व्यवहार किया होगा उसके बाजार मुल्य के लगभग ५० प्रतिशत रकम आपके पास होना जरूरी है।

बाजार में अस्थिर माहौल के वक्त एक्सचेंज के अधिकारी मार्जिन में बढोतरी करते है अथवा अधिक मार्जिन लागू करते है। आरंभ में कम अस्थिरता वाले स्क्रिप्ट और छोटे छोटे लॉट में ही निवेश कीजिए।

यह सब समझने के लिए हम आगे के उदाहरण का अभ्यास करते है। आपने रिलायन्स इन्डस्ट्रीज के फ्युचर्स की खरीदी करने का विचार किया है।

समझ लिजिए लॉट की साईज १५० है। सामान्यतः एक लॉट की बाजार किमत २,७५० X १५० = ४,१२,५०० रू होती है।

इस स्थिति में उसका एक लॉट खरीदने के लिए आपको ब्रोकर को आरंभिक मार्जिन के लिहाज से २० प्रतिशत के हिसाब से रू ८२,५०० देने पडते है।

साथ ही बाजार भाव में आने वाले उतारचढाव के सामने, मार्क टू मार्केट मार्जिन के पैसे चुकाने के लिए आपके पास और ८०,००० से १,००,००० रूपए होना जरूरी है।

आप जिस स्क्रिप्ट के डेरिवेटिव्हस का व्यवहार करते है उस स्क्रिप्ट से संबंधित आपके गणित के या मान्यता के विपरीत बाजार में उतारचढाव आया तो ऐसे वक्त मार्जिन कहके आपको अधिक पैसे जमा करने पड़ते है।

संक्षिप्त में बताना हो तो डेरिवेटिव्ह मार्केट में टेडींग करने के लिए नए खिलाडी के पास कम से कम दो या ढाई लाख रूपए होना जरूरी है।

फ्युचर्स में व्यवहार करते समय एक बात हमेशा ध्यान में रखे की सौदा करने के तुरंत बाद आपके स्टॉप लॉस और टार्गेट प्राईज की सुचना आपने ब्रोकर को दिजिए।

हम आशा करते है की हमारी ये फ्युचर्स और ऑप्शन मार्केट में प्रवेश कैसे करना चाहिए (How to Enter Future and Options in Hindi)  ब्लॉग पोस्ट आपको पसंद आयी होगी अगर आपको शेयर मार्किट से जुड़ा कोई भी सवाल है तो आप कृपया कमेंट में जरूर पूछे।

।। धन्यवाद ।।

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