क्या आपको पता है की शेयर ब्रोकर का चुनाव कैसे करें? – How to Choose a Stock Broker in Hindi अगर आपको पता नहीं है तो आप इस ब्लॉग को पूरा पढ़े.

शेयर ब्रोकर का चुनाव कैसे करें? – How to Choose a Stock Broker in Hindi

शेयर बाजार में सौदे सिर्फ पंजीकृत शेयर दलालों के माध्यम से ही किए जाते हैं। इसलिए निवेशक के लिए सही दलाल का चयन करना आवश्यक हो जाता है।

शेयर ब्रोकर के मामले में विश्व के सबसे लोकप्रिय निवेशक वारेन बफे की बात खासी रोचक है। वे कहते हैं-“शेयर ब्रोकर आपका दोस्त नहीं है। वह एक डॉक्टर की तरह होता है, जो मरीज से दवा के बदले शुल्क लेता है।

अब यदि आप सही डॉक्टर के पास नहीं पहुँचेंगे तो खामियाजा आपको ही भुगतना होगा।” हालाँकि यह सही व सटीक बात निवेशक मानते हैं, लेकिन बावजूद इसके उनके व्यवहार में यह नहीं झलकता कि वे ब्रोकर को लेकर संजीदा हैं।

ज्यादातर निवेशक तो अपने शेयर ब्रोकर का नाम, उसकी फर्म तथा उसके फोन नंबर से ज्यादा कुछ नहीं जानते और शेयर की खरीद-बिक्री के लिए पूरी तरह से ब्रोकर पर आश्रित रहते हैं और सोचते हैं कि ब्रोकर उनके लाभ के लिए ही सब कर रहा है।

यदि आप ऐसा सोचते हैं तो बिलकुल गलत है; क्योंकि सच तो यह है कि पैसा किसी के कंधे पर सवार होकर नहीं कमाया जा सकता। यदि आप में सूझ-बूझ, विश्लेषण की क्षमता व जागरूकता नहीं है तो आपकी सहायता कोई नहीं कर सकता।

इसलिए ब्रोकर का चुनाव करते समय उसके ट्रेक रिकॉर्ड, सेवा की गुणवत्ता, ग्राहकों के लिए सलाहकारी सेवा, रिसर्च इत्यादि के अलावा ब्रोकर का व्यवहार भी खास मायने रखता है।

यदि कोई ब्रोकर सस्ती सेवाएँ उपलब्ध करवाता है, दलाली (ब्रोकरेज) कम लेता है और लुभावनी खरीद खबरें देता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि ब्रोकर का चयन आपके लिए फायदेमंद साबित होगा।

वैसे ब्रोकर और निवेशक का रिश्ता पूरी तरह से विश्वास पर टिका होता है, लेकिन फिर भी कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।

यदि आपका ब्रोकर किसी खास स्टॉक की अत्यधिक खरीद बिना किसी खास वजह के करने को कह रहा है तो हो सकता है, इसके लिए उसे ऊँचा कमीशन मिल रहा हो!

इसलिए यदि आप सचेत रहेंगे तो ब्रोकर की पैंतरेबाजी को समझ सकते हैं। यदि आपका ब्रोकर आपकी जरूरत, वित्तीय स्थिति व व्यक्तिगत इच्छाओं को जाने बिना आपके लिए ट्रेड करता है तो आपको जोखिम व हानि उठानी पड़ सकती है।

एक अच्छे ब्रोकर को यह पता होता है कि उसका ग्राहक किस तरह का निवेशक है। यदि निवेशक को ब्रोकर से शिकायत हो तो शेयर बाजार के सर्विस विभाग के अतिरिक्त सेबी से भी संपर्क किया जा सकता है।

बी.एस.ई. व एन.एस.ई. की वेबसाइट पर ब्रोकरों की सूची उपलब्ध है। इसके अलावा ब्रोकर भी अपनी जानकारियाँ अन्य माध्यमों द्वारा प्रकाशित करवाते हैं।

लेकिन ब्रोकर का चयन करते समय उसका ‘ट्रेक रिकॉर्ड’ जरूर देखें। आपके घर या ऑफिस के पास स्थित ब्रोकर आपके लिए सुविधाजनक होता है।

आजकल अनेक बैंक भी ब्रोकिंग का कारोबार कर रहे हैं। इसलिए आप जिस बैंक में अपना डी-मैट एकाउंट खुलवा रहे हैं, यदि वह बैंक ब्रोकिंग कारोबार में भी है तो वहीं अपना ब्रोकिंग एकाउंट भी खुलवाना ठीक रहता है।

ब्रोकर स्टॉक एक्सचेंज का सदस्य होता है। उसके पास यह अधिकार होता है कि वह स्वयं के लिए तथा किसी और के लिए भी (उस निवेशक के लिए), जो उस ब्रोकर के पास रजिस्टर्ड हो, शेयरों की खरीद-बिक्री कर सकता है।

वह पूरी खरीद-बिक्री होने के हिसाब से अपना कमीशन (ब्रोकरेज) लेता है। इसके अलावा यह अपने ग्राहकों की शेयर से संबंधित सुरक्षित ट्रेडिंग, ग्राहकों को निवेश संबंधी परामर्श और उनके पोर्टफोलियो को संचालित करता है।

कुछ वर्ष पहले तक बी.एस.ई. का शेयर दलाल सदस्य बनना काफी महँगा था। लेकिन करोड़ों रुपए का शुल्क खर्च घटकर अब कुछ लाख रुपए रह गया है।

हम आशा करते है की हमारी ये (शेयर ब्रोकर का चुनाव कैसे करें? – How to Choose a Stock Broker in Hindi) ब्लॉग पोस्ट आपको पसंद आयी होगी अगर आपको शेयर मार्किट से जुड़ा कोई भी सवाल है तो आप कृपया कमेंट में जरूर पूछे।

।। धन्यवाद ।।

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प्रायमरी मार्केट क्या है? - Primary Market In Hindi · मार्च 8, 2021 पर 3:21 अपराह्न

[…] शेयर ब्रोकर का चुनाव कैसे करें? – How to Cho… […]

सेकंडरी मार्केट क्या है? - Secondary Market In Hindi · मार्च 9, 2021 पर 4:23 अपराह्न

[…] शेयर ब्रोकर का चुनाव कैसे करें? – How to Cho… […]

डेब्ट इनवेस्टमेंट क्या है? - Debt Investment In Hindi · मार्च 10, 2021 पर 3:17 अपराह्न

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