शेयर सूची (स्टॉक टेबल) को पढ़ने का तरीका – How to read a stock list in hindi.

बाजार में रोजाना होने वाली शेयरों की खरीद-फरोख्त से बहुत से आँकड़ों की रचना होती है। ये आँकड़े विभिन्न समाचार-पत्रों में या वित्तीय सूचनाओं वाले स्रोतों में निवेशकों के लिए उपलब्ध होते हैं।

एक निवेशक के लिए बुद्धिमत्तापूर्वक निवेश करने के लिए यह जरूरी है कि वह इन आँकड़ों को समझे या स्टॉक सूची को सही तरीके से समझकर आवश्यक गणना कर सके।

प्रत्येक शेयर सूची में दो प्राइस कोटेशन होते हैं। इनमें पहला बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बी.एस.ई.) और दूसरा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एन.एस.ई.) के लिए होता है।

बहुत से ऐसे शेयर हैं, जो दोनों एक्सचेंज में सूचीबद्ध हैं और कुछ शेयर ऐसे हैं, जो सिर्फ किसी एक एक्सचेंज में ही सूचीबद्ध हैं।सूचीबद्धता के आकार के हिसाब से देखें तो बी.एस.ई. में सूचीबद्ध शेयरों की संख्या अधिक है।

निवेशक को सबसे पहला आइटम जो नजर आता है, वह है कंपनी का बी.एस.ई./ एन.एस.ई. कोड। निवेशक को यह पता होना चाहिए कि जिस कंपनी में वह निवेश करना चाहता है या निवेश कर चुका है, उसका बी.एस.ई. व एन.एस.ई. में कोड क्या है;

क्योंकि प्रत्येक स्क्रिप का अलग कोड होता है। यदि कंपनी का बी.एस.ई. कोड व एन.सी.ई. कोड पता है तो निवेशक कंपनी के बारे में पूरी जानकारी पा सकता है।

यह जानकारी एक्सचेंज द्वारा मुहैया करवाई जाती है।यह कोड तब बहुत महत्त्वपूर्ण हो जाता है, जब निवेशक किसी विशेष कंपनी पर लगातार नजर रख रहा हो।

छोटी कंपनियों के स्टॉक्स के ट्रांजेक्शन के लिए ब्रोकर की तरफ से आग्रह होता है कि निवेशक उन कंपनियों के बी.एस.ई./एन.एस.ई. कोड दर्ज करें, ताकि ट्रांजेक्शन को पूरा करने में कोई समस्या न हो।

स्टॉक टेबल में कंपनियों के नाम सामान्य रूप से लिखे होते हैं। कई बार जगह की कमी के कारण इनका संक्षिप्त रूप भी लिखा होता है।

इन कंपनियों के नाम के समक्ष उस दिन के शेयर की कीमतें पाँच विभिन्न रूपों में लिखी जाती हैं- ओपन, हाई, लो. क्लोज तथा गत दिन का क्लोज।

ओपन से तात्पर्य यह है कि उस दिन ट्रेडिंग की शुरुआत में उस शेयर की प्रारंभिक कीमत कितनी आँकी गई है। हाई से तात्पर्य है कि उस दिन उस कंपनी के शेयर की सर्वाधिक बाजार कीमत कितनी आँकी गई।

लो से तात्पर्य है कि उस दिन उस कंपनी के शेयर की न्यूनतम कीमत कितनी आँकी गई। कई समाचार-पत्रों की स्टॉक टेबिलों (शेयर सूची) में पिछले ट्रेडिंग दिन की क्लोज वैल्यू भी दरशाई जाती है।

ये आँकड़े शॉर्ट टर्म निवेशकों तथा डे-ट्रेडर्स के लिए निर्णय लेने के लिहाज से काफी महत्त्वपूर्ण होते हैं। दो अन्य आँकड़े ‘वॉल्यूम’ तथा ‘खरीद-फरोख्त के सौदों की संख्या’ भी स्टॉक टेबिल में महत्त्वपूर्ण होती है।

‘वॉल्यूम’ (आकार) से तात्पर्य है कि किसी कंपनी के शेयर के दैनिक कारोबार में कुल कितने धन का ट्रांजेक्शन (लेन-देन) किया गया तथा इस वॉल्यूम में कुल कितने सौदे किए गए।

यदि किसी शेयर के कारोबारी दिन में वॉल्यूम का आँकड़ा बड़ा हो तथा सौदों की संख्या कम तो यह दरशाता है कि इस शेयर की ट्रेडिंग में बड़े निवेशकों तथा संस्थागत निवेशकों ने रुचि ली है।

इसके विपरीत, यदि इसी वॉल्यूम के आँकड़े में सौदों की संख्या बहुत ज्यादा हो तो यह दरशाता है कि इस शेयर की ट्रेडिंग में छोटे निवेशकों ने ज्यादा रुचि ली है।

इसके अतिरिक्त कई अन्य महत्त्वपूर्ण आँकड़े भी स्टॉक टेबिल में दरशाए जाते हैं, जैसे प्राइस अर्निंग रेशियो (पी/ई)। इससे पता चलता है कि बाजार में कंपनी का किस प्रकार मूल्यांकन किया गया है।

स्टॉक टेबिल में कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन (बाजार पूँजीकरण) भी दर्ज होता है। यह आँकड़ा दरशाता है कि कंपनी के शेयर की तात्कालिक बाजार कीमत के हिसाब से कंपनी में बाजार की कितनी पूँजी लगी है।

कई महत्त्वपूर्ण गणनाओं में यह आँकड़ा आवश्यक होता है। स्टॉक टेबल में प्रत्येक शेयर का गत एक वर्ष (52 सप्ताह) की अधिकतम तथा न्यूनतम कीमत भी दर्ज होती है।

स्टॉक लेबल में कई प्रकार के रेशियो जैसे रिटर्न/नेट वर्थ, रिटर्न/कैपिटल, प्रॉफिट रेशियो तथा बैलेंस शीट रेशियो आदि दर्ज होते हैं।

ये आँकड़े विभिन्न प्रकार के विश्लेषणों के लिए महत्त्वपूर्ण होते हैं। स्टॉक टेबिल में शेयरों के समक्ष बीटा फैक्टर’ भी दरशाया जाता है।

बीटा फैक्टर’ से पता चलता है कि उस शेयर का प्रदर्शन बाजार के सापेक्ष में किस प्रकार का है। यदि बीटा फैक्टर एक (1) है, अर्थात् वह शेयर बाजार के हिसाब से ही गति (उतार-चढ़ाव) करता है।

बीटा फैक्टर एक से कम होने पर यह पता चलता है कि इस शेयर की गति बाजार के सापेक्ष में कम है तथा बीटा फैक्टर एक से अधिक होने पर यह पता चलता है कि इस शेयर की गति (उतार-चढ़ाव) बाजार के

सापेक्ष से अधिक है। ये सारे आँकड़े एक निश्चित अवधि के अध्ययन के पश्चात् हासिल किए जाते हैं तथा इसी परिप्रेक्ष्य में इन आँकड़ों को समझना चाहिए। दैनिक लिहाज से इन आँकड़ों के आधार पर निर्णय नहीं लिया जा सकता।

स्टॉक टेबल में विभिन्न कंपनियों के शेयरों के लिए अलग-अलग श्रेणियाँ बनाई गई हैं और यह उनके मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से होती हैं।

किसी व्यक्ति को स्टॉक टेबल में किसी शेयर के बारे में जानकारी देखनी है तो इन्हीं श्रेणियों के अंतर्गत शेयरों की सूची में तलाश करना चाहिए।

समय-समय पर ये स्टॉक एक श्रेणी से दूसरी श्रेणी में स्थानांतरित भी होते रहते हैं। स्टॉक टेबिल में सबसे पहले ‘पी’ कैटेगरी के शेयर तथा उसके पश्चात् अन्य श्रेणियों के शेयर प्रदर्शित किए जाते हैं। किसी भी श्रेणी में ये शेयर अल्फाबेटिक क्रम में दरशाए जाते हैं।

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