डेरिवेटिव मार्केट का बढ़ता चलन – Increasing Trend of Derivatives Market in Hindi.

डेरिवेटिव बाजार में फ्यूचर और ऑप्शन सेगमेंट में ट्रेडिंग करने के लिए डेरीवेटिव मार्केट का बढ़ता चलन (Increasing Trend of Derivatives Market in Hindi) जानना भी जरुरी है.

डेरिवेटिव बाजार में फ्यूचर तथा ऑप्शन सेगमेंट में ट्रेडिंग करने के लिए कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण तथ्य जानने जरूरी हैं।

डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लिए उत्सुक व्यक्ति को फ्यूचर साइड तथा ऑप्शन साइड के सेगमेंट की अलग से सदस्यता लेनी आवश्यक है।

इस सदस्यता के लिए उत्सुक व्यक्ति को एक्सचेंज द्वारा निर्धारित मानकों पर खरा उतरना जरूरी है। इन्हें पूरा करने पर ही कोई व्यक्ति इस सेगमेंट का सदस्य बन सकता है।

डेरिवेटिव सौदों में आवश्यक रूप से जोखिम जुड़ा होता है तथा इस जोखिम का एक मूल्य होता है। इस मूल्य के द्वारा इन सौदों की स्थिति (पोजीशन) का पता चलता है।

एक्सचेंज सदस्यों से प्रारंभिक सुरक्षित धन (इनीशियल मार्जिन मनी) जमा करवाता है, जो कि सदस्य अपने क्लाइंट से वसूलते हैं। इस प्रकार जो व्यक्ति ट्रेडिंग करता है, उसे मार्जिन मनी चुकानी पड़ती है।

सौदों में निहित जोखिम का मूल्य हर स्तर (दैनिक) पर आँका जाता है तथा देखा जाता है कि इसके पोजीशन बदलने पर समस्या तो खड़ी नहीं होगी ! डेरिवेटिव ट्रेडिंग की निरीक्षण प्रणाली (मॉनिटरिंग सिस्टम) के तहत प्रत्येक सदस्य की पोजीशन पर लगातार नजर रखी जाती है।

इसके तहत सदस्य द्वारा जमा की गई आधार राशि तथा अतिरिक्त राशि के अनुसार उस सदस्य के लिए सौदों की सीमा निर्धारित की जाती है। जब सौदे इस सीमा के पास पहँचने लगते हैं तो सदस्य को तुरंत सूचित कर दिया जाता है।

यदि सदस्य पुराने सौदों के निपटाए । बगैर और अधिक सौदे करने का इच्छुक हैं तो उसके अतिरिक्त मार्जिन राशि एक्सचेंज में जमा करवानी पड़ती है।

फ्यूचर तथा ऑप्शन सेगमेंट के लिए अलग से ‘सेटलमेंट गारंटी फंड’ की स्थापना की गई है। इस फंड का उपयोग किसी सदस्य द्वारा दिवालिया (डिफॉल्ट) होने की स्थिति में उन सौदों के सेटलमेंट के लिए किया जाता है।

डेरिवेटिव ट्रेडिंग सिस्टम को सहज सुरक्षित तरीके से विश्वासपूर्वक चलाए जाने के लिए बड़ी मार्जिन राशि की जरूरत होती है, जिसमें मार्केट का मार्जिन भी जुड़ा होता है।

दिन-प्रतिदिन बढ़ती आर्थिक गतिविधियों के चलते कई क्षेत्रों में डेरिवेटिव का प्रयोग बढ़ रहा है। आजकल जिन क्षेत्रों में डेरिवेटिव का चलन है, वे इस प्रकार हैं

इक्विटी में डेरिवेटिव का प्रयोग – Use of Derivatives in Equity in Hindi.

डेरिवेटिव के प्रयोग में इक्विटी सबसे बड़ा क्षेत्र है। प्रतिदिन समाचार-पत्रों तथा न्यूज चैनलों में इक्विटी के डेरिवेटिव्ज की खबरें आती रहती हैं। इक्विटी (शेयर) के क्षेत्र में दो तरीके से डेरिवेटिव इंस्ट्रमेंट का प्रयोग होता है।

पहला है-स्टॉक एक्सचेंज में जिन स्टॉक की ट्रेडिंग होती है, उन स्टॉक को अंतर्निहित करके डेरिवेटिव्ज में फ्यूचर तथा ऑप्शन कॉण्ट्रेक्ट बनाए तथा निपटाए जाते हैं।

डेरिवेटिव के माध्यम से निवेशक को इक्विटीज के बारे में विस्तृत जानकारी मिलती है।

इक्विटी में डेरिवेटिव के प्रयोग का दूसरा तरीका है शेयर बाजार के विभिन्न इंडेक्स में डेरिवेटिव कॉण्ट्रेक्ट बनाना।

शेयर बाजार में विभिन्न शेयरों के ग्रुप बनाकर उन शेयरों की कीमतों के आधार पर कई तरह के इंडेक्स बनाए जाते हैं।

जैसे मिड कैप, स्माल कैप, लार्ज कैप, इन्फ्रास्ट्रक्चर, पावर स्टील इत्यादि कंपनियों के शेयरों के इंडेक्स। इन इंडेक्स में परिवर्तन इनके अंतर्गत आनेवाली कंपनियों के शेयरों की कीमत में परिवर्तन के अनुसार आता है।

ये इंडेक्स सूचक की तरह काम करते हैं। इन इंडेक्स के मूल्य के अनुसार डेरिवेटिव सौदे किए जाते हैं। कई निवेशक अपना निवेश बाजार की पूरी स्थिति को अपने नजरिए से देखकर करते हैं।

ऐसे निवेशकों के लिए ये इंडेक्स बहुत उपयोगी हैं तथा वे इनके डेरिवेटिव सौदों में निवेश करते हैं।एक्सचेंज में डेरिवेटिव का सेगमेंट कैश सेगमेंट से अलग रहता है।

डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लिए अलग कायदे-कानून हैं। डेरिवेटिव ट्रेडिंग में कैश सेगमेंट की ट्रेडिंग की तुलना में ज्यादा जोखिम जुड़ा है, परंतु रिटर्न भी इसी अनुपात में अधिक हो सकता है।

डेब्ट (बांड/डिबेंचर इत्यादि) में डेरिवेटिव का प्रयोग – Use of Derivatives in Debt in Hindi (Bonds / Debentures etc.)

कंपनियों को अपनी वित्तीय आवश्यकताएँ पूरी करने के लिए फंड (धन) की जरूरत होती है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए बाजार में कई तरह के डेब्ट इंस्ट्रमेंट मौजूद रहते हैं ।

डेब्ट इंस्ट्रमेंट्स में डेरिवेटिव के प्रयोग से वित्तीय संरचना जटिल हो जाती है। इसका समाधान भी डेरिवेटिव के माध्यम से नए इंस्ट्रमेंट बनाकर किया जा सकता है।

डेब्ट साइड में डेरिवेटिव का अर्थ है कि इस तरह के डेरिवेटिव इंस्ट्रमेंट बनाए जाएँ, जिससे निर्धारित समयावधि के लिए फंड की जरूरत पूरी की जा सके।

फंड की जरूरत पूरी होने तथा समयावधि पूरी होने पर पुनर्भुगतान (रिपेमेंट) तथा अन्य शर्ते इस रूप में होती हैं कि पुनर्भुगतान का स्वरूप परिवर्तित होकर किसी भी अन्य प्रकार में हो सकता है, जिसका जिक्र डेरिवेटिव कॉण्ट्रेक्ट में किया गया है।

किसी भी कंपनी को फंड की जरूरत विशेष मौके पर हो सकती है तथा डेब्ट डेरिवेटिव का प्रयोग करके इन जरूरतों को पूरा किया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त कंपनी के कारोबार में कई अतिरिक्त स्थितियों, जैसे कंपनी के वित्तीय ढाँचे को सुरक्षा प्रदान करना इत्यादि का सामना भी डेरिवेटिव के माध्यम से किया जा सकता है।

विदेशी मुद्रा व्यापार में डेरिवेटिव का प्रयोग – Use of Derivatives in Forex Trading in Hindi.

विश्व स्तर पर विदेशी मुद्रा का बाजार पूरी तरह विकसित अवस्था में है तथा विदेशी मुद्रा की ट्रेडिंग बड़ी तादाद में होती है।

प्रत्येक देश की अर्थव्यवस्था आयातनिर्यात पर निर्भर करती है। अत: किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यवसायी को आगामी समय (भविष्य) के लिए विदेशी मुद्रा की दरकार रहती है।

चूंकि विदेशी मुद्रा विनिमय की दर हर समय बदलती रहती है तथा इस विनिमय दर में छोटा सा बदलाव भी भारी झटका दे सकता है

(क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सौदों का मूल्य काफी ऊँचा होता है), अत: किसी भी व्यवसायी के लिए अपनी पोजीशन सुरक्षित रखने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में डेरिवेटिव कॉण्ट्रेक्ट का प्रयोग आवश्यक हो जाता है।

अतिविकसित विदेशी मुद्रा बाजार अवश्यंभावी रूप से डेरिवेटिव प्रकृति का होता है, क्योंकि आगामी समय में विदेशी मुद्रा की माँग हमेशा बनी रहती है तथा इसकी विनिमय दर सदैव पूर्वानुमान लगाने का विषय होती है।

उदाहरण के लिए, एक कंपनी विदेश से मशीनें आयात करती है तथा लेन-देन विदेशी मुद्रा के रूप में होता है। चूंकि विदेशी सौदों में वस्तु की मात्रा तथा आपूर्ति करने की अवधि पहले से तय होती है तथा विदेशी मुद्रा में इनका मूल्य भी पहले से तय किया जाता है।

अब मशीनों की आपूर्ति तथा वास्तविक भुगतान के समय यदि विदेशी मुद्रा के विनिमय की दर बढ़ जाए तो आयात करनेवाली कंपनी को इन मशीनों का भारतीय मुद्रा में मूल्य पहले से अधिक चुकाना पड़ेगा। इस प्रकार कंपनी को अपनी योजना से अधिक खर्च करना होगा।

विदेशी मुद्रा के भुगतान के लिए डेरिवेटिव रास्ते अपनाकर व्यवसायी अपनी पोजीशन लेकर सुरक्षित हो सकता है।

विदेशी मुद्रा का लगभग पूरा बाजार डेरिवेटिव के प्रयोग से गति करता है। विदेशी मुद्रा के डेरिवेटिव बाजार में ‘ऑप्शन’, ‘फॉरवर्ड’, ‘फ्यूचर’, ‘स्वेप’ इत्यादि तरीकों का प्रयोग किया जाता है।

कॉमोडिटी ट्रेडिंग में डेरिवेटिव का प्रयोग – Use of Derivatives in Commodity Trading in Hindi.

कॉमोडिटी की ट्रेडिंग अखिल भारतीय तथा विश्व स्तर पर होती है। बड़े स्तर पर ट्रेडिंग कॉमोडिटी एक्सचेंज के माध्यम से होती है।

कॉमोडिटी के विभिन्न प्रकार (जैसे अनाज, तेल, चीनी, कपड़े, कपास, केमिकल, धातु इत्यादि) होते हैं तथा हर क्षेत्र में अलग-अलग ट्रेडर्स होते हैं। इस प्रकार कॉमोडिटी ट्रेडिंग को चलानेवाले तथा प्रभावित करनेवाले बहुत सारे कारक होते हैं।

उदाहरण के तौर पर, किसान बहुत सारे कृषि उत्पाद पैदा करते हैं तथा वे अपनी उपज की अच्छी कीमत प्राप्त करना चाहते हैं। डेरिवेटिव मार्केट की अनुपस्थिति में बाजार में ओवरसप्लाई की स्थिति आ सकती है तथा उपज के दाम गिर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, किसी क्षेत्र में बिचौलिए (मिडिलमैन) लाभ का बड़ा हिस्सा हड़प सकते हैं। एक अन्य स्थिति की बात करें, तो बाजार में बहुत सारे डीलर माल की आपूर्ति करते हैं तथा बहुधा अंतिम उपभोक्ता तक माल पहुँचाते हैं।

ये डीलर हमेशा चाहेंगे कि बाजार में माल की आपूर्ति सदैव बनी रहे। साथ ही, ये डीलर इस व्यवस्था में विश्वसनीयता भी चाहेंगे। दोनों स्थितियों का जवाब कॉमोडिटी बाजार में डेरिवेटिव ट्रेडिंग के द्वारा मिल सकता है।

कॉमोडिटी के बाजार में माँग तथा आपूर्ति की पोजीशन का मिलान डेरिवेटिव ट्रेडिंग के जरिए करके बड़े स्तर पर (पूरे देश या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर) आवश्यकताओं की पूर्ति की जा सकती है।

कई कॉमोडिटी का उपयोग अन्य सामान बनाने में किया जाता है। अत: कच्चे माल की सतत आपूर्ति निर्धारित दरों पर डेरिवेटिव ट्रेडिंग के माध्यम से की जा सकती है।

कॉमोडिटी बाजार में डेरिवेटिव ट्रेडिंग के द्वारा किसी कॉमोडिटी-विशेष की स्थिति के बारे में भी पता चलता है, जिससे उस कॉमोडिटी के उत्पादन संबंधी निर्णय लिये जा सकते हैं।

म्यूचुअल फंड में डेरिवेटिव का प्रयोग – Use of Derivatives in Mutual Funds in Hindi.

वित्तीय बाजार में मौजूद म्यूचुअल फंड (MF) कई कारकों पर निर्भर करते हैं तथा इस क्षेत्र में डेरिवेटिव का प्रयोग बहुत संभावनाओं वाला होता है।

म्यूचुअल फंड स्वयं में एक डेरिवेटिव प्रोडक्ट है, क्योंकि इसका मूल्य इसमें अंतर्निहित एसेट के मूल्य के अनुसार विचलन करता है।

वैसे म्यूचुअल फंड इक्विटी, डेब्ट, कॉमोडिटी इत्यादि क्षेत्रों में कार्य करते हैं; परंतु इसके अतिरिक्त भी कई क्षेत्र हो सकते हैं।

उदाहरण के लिए, रियल एस्टेट के क्षेत्र में कई म्यूच्युअल फंड हैं तथा इनका मूल्य रियल एस्टेट की स्थिति तथा उनके मूल्य पर निर्भर करता है। इस वजह से यह क्षेत्र डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लिए उपयुक्त है।

चूँकि छोटा निवेशक रियल एस्टेट जैसे बड़ी पूँजी की लागतवाले क्षेत्र में सीधे निवेश नहीं कर सकता, अत: म्यूचुअल फंड तथा डेरिवेटिव के माध्यम से वह इस क्षेत्र में छोटा निवेश करके आनुपातिक लाभ ले सकता है।

इसके अतिरिक्त म्यूचुअल फंड में कई रणनीतियों तथा योजनाओं के तहत डेरिवेटिव का प्रयोग होता है। आजकल वित्तीय बाजार में डेरिवेटिव में निवेश करने के उद्देश्यवाले म्यूचुअल फंड भी मौजूद हैं।

।। धन्यवाद ।।

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3 टिप्पणियाँ

डेरिवेटिव ट्रेडिंग में प्रयुक्त होनेवाली शब्दावली - Terminology Used In Derivatives Trading In Hindi. · नवम्बर 18, 2020 पर 11:15 अपराह्न

[…] डेरिवेटिव मार्केट का बढ़ता चलन – Increasing Tr… […]

शेयर बाजार से जुड़े अर्थव्यवस्था के महत्त्वपूर्ण पहलू - Important Aspects Of The Stock Market Economy In Hindi. · नवम्बर 19, 2020 पर 8:33 अपराह्न

[…] डेरिवेटिव मार्केट का बढ़ता चलन – Increasing Tr… […]

सेबी - इनसाइडर ट्रेडिंग का निषेध (SEBI - Prohibition Of Insider Trading In Hindi) · जुलाई 10, 2021 पर 3:32 अपराह्न

[…] डेरिवेटिव मार्केट का बढ़ता चलन – Increasing Tr… […]

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