क्या आपको पता है की इंट्राडे ट्रेडिंग टिप्स – Intraday Trading Tips in Hindi अगर आपको पता नहीं है तो आप इस ब्लॉग को पूरा पढ़े.

इंट्राडे ट्रेडिंग टिप्स – Intraday Trading Tips in Hindi

साधारण रूप से ऐसा देखने को मिलता है कि लोग दूसरों को इंट्राडे ट्रेडिंग में मिला हुआ फायदा, साथ ही मित्र परिजनों की दिखाई हुई उनकी और दुसरों का सफलता की छवि के कारण इंट्राडे ट्रेडिंग में प्रवेश करते है।

उन लोगोंने किस प्रकार से फायदा कमाया इसका विश्लेषण किए बगैर और बिना किसी जानकारी के वह इंट्राडे ट्रेडिंग में प्रवेश करते है। इस वजह से उन्हें बहुत बडा घाटा होता है और वे हताश होकर इंट्राडे ट्रेडिंग छोड देते है।

आप एक बात जान लिजिए की इंट्राडे ट्रेडिंग किस्मत का खेल नहीं है। इंट्राडे ट्रेडिंग ‘जब’ और ‘तब’ का खेल है, यह भी निश्चित ही नहीं है। साधारण रूप से लोग यही भाषा में बोलते हुए नजर आते है कि ‘अगर मुझे फायदा हुआ होता तो’।

आपको एक बात विशेष रूप से ध्यान में रखनी चाहिए कि इंट्राडे ट्रेडिंग बच्चों का खेल नहीं है। इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए बहुत मेहनत करनी पडती है। जिस स्क्रिप्ट में आपको ट्रेडिंग करना है उसका विश्लेषण करना जरूरी है।

आपको चाहिए वह हर नई जानकारी हासिल करने के लिए हमेशा प्रयास करते रहना पडता है। इसी के साथ ही आपके व्यवहार पर आपको संपूर्ण विश्वास होना चाहिए।

डे ट्रेडिंग में सफलता के लिए आवश्यक गुण – Qualities to Succeed as a Day Traders in Hindi

आसान शब्दों में बताना हो तो इंट्राडे ट्रेडिंग सभी के लिए नहीं है। इंट्राडे ट्रेडिंग में आपकी सफलता और असफलता केवल आपके गुणों पर ही निर्भर करती है। हमें लगता है कि इंट्राडे ट्रेडिंग में सफलता प्राप्त करने के लिए आप में आगें दिए हुए गुणों का होना जरूरी है।

१. लचिलापन (Flexibility):

इंट्राडे ट्रेडिंग करनेवाले व्यक्ति में होनेवाला सब से बडा गुण ‘लचिलापन और हालात के साथ अनुकूल रहने की क्षमता होनी चाहिए। हमें यह देखने मिला है कि जादा सख्त स्वभाव के लोग इंट्राडे ट्रेडिंग में अच्छा मुनाफा नहीं कमा सकते।

इंट्राडे ट्रेडिंग में मिलनेवाले संकेतों को समझ कर उनके अनुसार चलनेवाले या फिर इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए मिलनेवाली मार्गदर्शिका के अनुसार चलनेवाले ही बाजार में अच्छा फायदा कमा सकते है।

साथ ही दिन के दरम्यान बदलते हुए हालात के अनुसार निर्णय लेने की क्षमता भी आप में होना जरूरी है। याने की लचिलापन इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए आवश्यक सबसे बडा गुण है। मगर यह गुण उतनी आसानी से नहीं विकसित किया जा सकता है।

२. आत्मसंयम (Self-Control):

इंट्राडे ट्रेडिंग करनेवाले व्यक्ति में आत्मसंयम का गुण भी होना जरूरी है। यह गुण डे ट्रेडिंग करनेवालों में होना चाहिए या फिर उनको यह गुण स्वयं ही अपने अंदर विकसित करना चाहिए।

ट्रेडिंग के हर एक दिन के दरम्यान ट्रेडर को ट्रेडिंग करने के लिए कई मौके मिलते है। परंतु कोई भी डे ट्रेडर इन सभी मौकों का उपयोग नहीं कर सकता। आर्थिक और व्यवहारारिक दृष्टी से हर एक मौके का उपयोग करना संभव नहीं होता।

ट्रेडिंग के हर एक दिन के दरम्यान मिलनेवाले मौकों से सिर्फ मुनाफा ही होगा ऐसा निश्चित रूप से कोई भी ट्रेडर नहीं कह सकता। इसलिए हर एक मौके को कमाई करने का बड़ा मौका समझकर उसमें निवेश नहीं करना चाहिए।

डे ट्रेडर को हर दिन ट्रेडिंग करने से पूर्व एक आयोजन करना चाहिए और उस आयोजन की मर्यादा में रहकर ही डे ट्रेडिंग करना चाहिए।

इंट्राडे ट्रेडिंग के दरम्यान मिले हुए मौकों का विश्लेषण करके उनमें ट्रेडिंग पोजिशन खडी करनी चाहिए।

डे ट्रेडर को उनके आयोजन के अलावा कमाई करने का मौका मिलता हो तो उस पर भी ध्यान देना चाहिए और इस अचानक मिले हुए मौके का फायदा उठाकर कमाई करनी चाहिए।

३. दिन खत्म होने से पहले टेडिंग पोजिशन बंद करने की तैयारी (Willingness to Exit Trades at End of Day):

७५ % ट्रेडर इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए बाजार में अपनी पोजिशन तैयार करते है पर अगर उस दिन उन्हे इस ट्रेडिंग में घाटा हुआ तो उस घाटे से बचन के लिए अपनी पोजिशन दूसरे दिन या अधिक समय के लिए खडी रखते हैं।

उन्हें घाटा हुआ है इस वास्तविकता को न मानकर वह फायदे की संभावना से अपनी पोजिशन आगे चालू रखते है।

स्वयं के गलत निर्णय से नुकसान हुआ है इस वास्तविकता को वह स्विकार नहीं करते और वह सफाई देने का प्रयत्न करते है कि उनके यह ट्रेडिंग से आगे चलकर उन्हे जरूर फायदा होगा।

डे ट्रेडर को घाटा होने पर भी अपनी पोजिशन को दुसरे दिन पर नहीं ले जाना चाहिए। डे ट्रेडर द्वारा की जानेवाली यह एक सबसे बड़ी गलती है।

किसी समय आपको अपनी इस गलती के लिए बहुत बडी किमत चुकानी पड सकती है। इसलिए इंट्राडे ट्रेडिंग करनेवालों में महत्व का गुण यह भी होना चाहिए की दिन के अंत में उन्होने अपनी पोजिशन जो भी हो बंद करने की तैयारी दिखानी चाहिए।

४. जिम्मेदारी को स्विकार करना चाहिए (Accept Responsibility):

आपके द्वारा किए गए सभी ट्रेडिंग और उनके परिणमों की जिम्मेदारी आपका स्विकार करनी चाहिए। उसके लिए कोई भी बहाना न बनाना भी एक गुण ही है। इंट्राडे ट्रेडिंग में सफल होने के लिए यह गुण भी जरूरी है।

एक सफल डे ट्रेडर अपनी गलती के लिए कभी भी बाजार को, सरकार को, कंपनी को, या फिर अन्य किसी को भी जिम्मेदार नहीं मानता। आपके किए हुए व्यवहार में फायदा या घाटा कुछ भी हो, उसकी पूरी जिम्मेदारी वह स्वयं स्विकार करता है।

डे ट्रेडर को एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि बाजार कमाई करने के कई मौके आपको देता है। उन्हें नहीं पहचान पाए तो वह गलती आपकी ही है।

अपने अहंकार के कारण कुछ ट्रेडर ऐसा मानते है कि उन्हें कभी भी घाटा नहीं होगा। अगर उन्हे घाटा हुआ तो वह ट्रेडिंग सिस्टीम को दोष देते है। ऑर्डर प्लेस करते समय दलाल ने गलती की ऐसा भी वह कहते है।

इसी प्रकार बाजार में उठी अफवाओं के कारण और अन्य बातें सुनकर, उन्ही के कारण अपका नुकसान हुआ ऐसा बहाना भी बताते है।

डे ट्रेडर द्वारा बताए गए बहानों में से कोई एक बहाना सच भी हो सकता है इस बात को नकारा नहीं जा सकता मगर आपने लिए हुए निर्णय का कुछ भी परिणाम आए या फिर आपको जो कुछ भी घाटा हुआ

उसका जिम्मा स्वयं ही लेना चाहिए और कुछ भी बहाना न बनाकर स्वयं ही अपना निर्णय मानकर खुद का व्यक्तित्व दर्शाना चाहिए। ऐसा करने से भविष्य में आपके परफॉरमन्स में हमेशा सुधार होता रहेगा।

५. अनुशासन (Discipline):

इंट्राडे ट्रेडिंग में सफल होने के लिए अनुशासन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सफल डे ट्रेडर हमेशा अनुशासित मार्ग का उपयोग करते है। वे कभी भी अनुशासन भंग नहीं करते है। दुसरे शब्दों में बताना हो तो वह ट्रेडिंग के नियमों का कभी भी उल्लंघन नहीं करते।

सफल डे ट्रेडर हमेशा अनुशासन का पालन करते है। पोजिशन में थोडा नुकसान होता हो तो भी पोजिश्न को दिन के अंत में निकाल देते है।

उसी प्रकार फायदा देनेवाली पोजिशन को भी वह दिन के अंत में निकाल देते है। आगे आने वाले समय में आज से भी अधिक फायदा कमा सकते है ऐसा न सोचकर वह अपनी पोजिशन उसी दिन बंद कर देते है।

किसी भी परिस्थिति में आपको दुसरो के रुपयों पर ट्रेडिंग न करके स्वयं के रुपयों पर ट्रेडिंग करना चाहिए। साथ ही ओव्हर ट्रेडिंग भी नहीं करना चाहिए। यह भी एक अनुशासन का ही अंग है।

इंट्राडे ट्रेडिंग में खडी की हुई पोजिशन को उचित दिशा में ले जाने के लिए आवश्यक समय देना भी एक अनुशासन का ही प्रकार है।

६. घाटा सहने की क्षमता होनी चाहिए (Able to Digest Loss):

इंट्राडे ट्रेडिंग में सफल होने के लिए टेडिंग करनेवाले को सबसे पहले घाट का सहन करना सिखना चाहिए। हर ट्रेडिंग के दिन के अंत में आपने क्या हासिल किया और क्या खोया यह स्विकार करने की वृत्ती आपमें होना जरूरी है। इस बात को लेकर निराश होने की कोई जरूरत नहीं है।

उसी प्रकार शेखचिल्ला जैसे बहुत ही बड़ी सफलता के सपने में भी नहीं खोना चाहिए। हमने भूतकाल में क्या किया इस बात का हम हमेशा विचार करते है।

उसका हमें पश्चाताप भी होता है। साथ ही हमने जो कुछ भी किया उसके बदले कुछ अलग करते तो उसका परिणाम भी कुछ अलग ही होता है ऐसा भी हम विचार करते है।

परंतु एक बात को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए की जितनी बार आपको घाटा होगा उतनी बार आपको उससे कुछ नया सिखने के लिए जरूर मिलेगा।

७. डटे रहना (Persistence):

डे ट्रेडर्स में डटे रहने का गण भी होना जरूरी है। इंट्राडे ट्रेडिंग करनेवाले को अच्छा परिणाम न मिलने पर भी डे ट्रेडिंग को छोडना नहीं चाहिए।

ट्राडग सिस्टीम और बाजार के विशेषता से ही बुरा समय आता है। उसके बाद अच्छा समय भी आता है। उसी तरह अच्छा समय आने के बाद बरा समय भी आ सकता है। कुछ ट्रेडरों को कई बार घाटा होने के बाद बडी सफलता मिलती है।

ट्रेडिंग के लिए एक प्रकार का उपयोग करने के बाद उसका काम शुरू हो तब डे ट्रेडर ने उसमें से अपनी निवेश को निकाल लिया तो उसका भी डे ट्रेडिंग के परफॉरमन्स पर विपरीत परिणाम होता है।

डे ट्रेडर ने अपनी पोजिशन को अधिक समय के लिए ऐसा ही रखा तो उनके पास की ट्रेडिंग के लिए जो निवेश है वह खत्म होने का जोखिम भी होता है। इसमें डटे रहना जरूरी है मगर वह अंधे की तरह नहीं होना चाहिए।

८. परिणाम का दैनिक विश्लेषण (Daily Analysis of Results):

हर दिन के अंत में अपने परिणाम का विश्लेषण करने की आदत डे ट्रेडिंग करनेवाले व्यक्ति में होनी चाहिए।

इंट्राडे ट्रेडिंग की हर एक पोजिशन में से जादा से जादा सिखने के लिए इस प्रकार का विश्लेषण करना जरूरी है। आपके द्वारा किए गए किसी भी ट्रेडिंग में फायदा या घाटा हुआ हो उसकी जानकारी आपके पास होनी चाहिए।

यह कार्य करने के लिए दृढता और अनुशासन होना जरूरी है।अगर आप उसकी जानकारी नहीं रखते हो तो आप उसके लिए दैनिक डायरी अवश्य तैयार करे।

हर ट्रेडिंग के साथ अपने विचार को नोट करके आप बहुत कुछ सिख सकते है। यह करने के लिए आपको सिर्फ कुछ मिनट ही लगेंगे मगर इस से मिलनेवाला फायदा आपकी मेहनत और किमत से कई गुना अधिक बड़ा सकता है।

९. आत्मविश्वास (Confidence):

कामयाब ट्रेडर हमेशा सफल ही होते है क्योंकि उन्हे खुद पर और अपने फैसलों पर पूरा विश्वास होता है। इस निडरता से ही उनका दिमाग भी सकारात्मक बन जाता है।

अगर आप में विश्वास का अभाव हो तो अपको मिला हुआ मौका भी हाथ से जाने की संभावना होती है। इस वजह से आपका घाटा बढता है और फायदा कम हो जाता है।

अगर आप में पूरा आत्मविश्वास होगा तो आप अपने फैसले पर दोबारा सोचना छोड देंगे और उसके परिणाम की चिंता करना भी छोड देंगे।

आत्मविश्वास के बारे में अगर किसी का अनुकरण करना हो तो उनका उदाहरण अपनी आँखों के सामने लाईए। उनमें खास करके जिनको ट्रेडिंग में सफलता मिली है उनका उदाहरण लिजिए।

१०. एकाग्रता (Concentration):

एकाग्रता डे ट्रेडर में होनेवाला एक महत्वपूर्ण गुण है। कामयाब डे ट्रेडर में यह गुण होना जरूरी है। यह गुण नहीं होगा तो डे ट्रेडर को वह गुण स्वयं में विकसित करना चाहिए।

इंट्राडे ट्रेडिंग में हर वक्त आपको नई नई जानकारी मिलती रहती है। कई स्क्रिप्ट के भाव बढते है और कई स्क्रिप्ट के भाव घटते है।

दूसरी भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं होती है। ऐसे हालात में एक डे ट्रेडर के रूप में कामयाब होने के लिए आपको इन सब के आगे होना चाहिए। इन में से किसी भी बात को ना भूलकर अपना लक्ष्य अपने ध्येय पर केंद्रीत करना चाहिए।

हो सके तो अपने ट्रेडिंग रूम में कोई भी आवाज न हो इसका ध्यान रखीए। ऐसा होगा तो आप अपने काम पर लक्ष्य केंद्रीत कर पाएंगे।

११. धीरज (Patience):

इंट्राडे ट्रेडिंग में कामयाब होने के लिए धीरज होना भी उतना ही जरूरी है। डे ट्रेडिंग में श्रेणीबद्ध घाटा हो रहा हो तो वह सहन करने की शक्ती डे ट्रेडर में होनी चाहिए।

उसके साथ ही धीरज के साथ कमाई करने के मौके की राह देखनी चाहिए। पर अधिक समय तक धीरज रखकर बैठना भी डे ट्रेडर के लिए घातक हो सकता है।

घाटे की पोजिशन को ऐसे ही रखकर धीरज से बैठे रहे तो इंट्राडे ट्रेडिंग में कामयाब होने के मूल सिद्धांत के नियम का ही वह उल्लंघन करते है।

इंट्राडे ट्रेडिंग में घाटा हो रहा हो तो वह पोजिशन दुसरे दिन आगे नहीं ले जानी चाहिए। उसी तरह फायदा हो रहा हो और दुसरे दिन भी फायदा होने की संभावना हो तो भी वह पोजिशन वैसे ही आगे नहीं ले जानी चाहिए। इंट्राडे ट्रेडिंग में घाटे का स्विकार भी तुरंत करना चाहिए।

ऐसा कहने का यह उद्देश्य है कि घाटे को सिमित करके मिलनेवाले दुसरे किसी मौके का उपयोग करके फायदा कमाने का आयोजन करने का मौका आप ले सकते है।

१२. निरंतरता (Consistency):

इंट्राडे ट्रेडिंग करने के लिए आप नए ही बाजार में उतरे हो या आपको डे ट्रेडिंग का सालों का अनुभव है, दोनों स्थितिओं आप में निरंतरता का गुण हाना जरूरी है।

निरंतरता होना याने जब तक आपको अपना अच्छा परिणाम मिल रहा हो तब तक आपका कोई निश्चित आयोजन या टेडिंग के प्रकार का चयन करने की क्षमता और तैयारी।

डे ट्रेडर ने हर दिन या फिर उन्हे अपेक्षित परिणाम देनेवाली कोई भी तरीका हो तो उसका उपयोग करने की तैयारी दर्शानी चाहिए।

कामयाब हुए डे ट्रेडर को निरंतर कार्य पद्धती और ट्रेडिंग सिस्टीम का उपयोग करने से सफलता मिलती है। पर अधिक से अधिक डे ट्रेडर उन्हे लाभ दिलानेवाले कार्यपद्धती का उपयोग न करके नई नई टेक्निक आजमाने में अधिक समय बिताते है ऐसा दिखता है।

१३. सिखने की तैयारी (Willingness to Learn):

इंट्राडे ट्रेडिंग एक दो दिन में अथवा कुछ हफ्तो में सिखने जैसा नहीं है। इंट्राडे ट्रेडिंग में कामयाब होनेवाले बाजार के विषय में नए नए रिसर्च करके उसके बारे में मिलनेवाली अलग अलग खबरों को नियमित पढते रहते है।

उसके साथ ही टेक्निकल अ‍ॅनालिसीस का भी अध्ययन करते है। हर महिने बाजार में आनेवाली नई नई किताबों को भी वह पढते है।

इंट्राडे ट्रेडिंग की टेक्निक, इंट्राडे ट्रेडिंग की सायकोलॉजी और कामयाब हुए अन्य डे ट्रेडर्स की किताबों को भी नियमित पढते है। आप भी यह सब करके इंट्राडे ट्रेडिंग में सफलता पा सकते है।

हम आशा करते है की हमारी ये इंट्राडे ट्रेडिंग टिप्स – Intraday Trading Tips in Hindi ब्लॉग पोस्ट आपको पसंद आयी होगी अगर आपको शेयर मार्किट से जुड़ा कोई भी सवाल है तो आप कृपया कमेंट में जरूर पूछे।

।। धन्यवाद ।।

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3 टिप्पणियाँ

डे ट्रेडिंग आपके लिए अनुकूल है क्या?- Will Intraday Trading Suit You ? Hindi. · जनवरी 8, 2021 पर 8:39 अपराह्न

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इंट्राडे ट्रेडिंग की शुरूआत - Top 8 Rules To Start Intraday Trading In Hindi · जनवरी 9, 2021 पर 8:32 अपराह्न

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