फ्युचर्स का परीचय – Introduction to Futures in Hindi.

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आर्थिक बाजार में डेरीव्हटीव्ह का व्यवहार बहुत आवश्यक भुमिका निभाता है। इसीलिए आजकल हर एक एक्सचेन्ज में फ्युचर्स और ऑप्शन्स के व्यवहार किए जाते है।

साथ ही साथ ओटीसी के मार्केट में फॉरवर्ड के कॉन्टॅक्ट भी किए जाते है। इसीलिए हमें फॉरवर्ड फ्युचर्स और ऑप्शन का अध्ययन करना जरूरी है।

फॉरवर्ड कॉन्ट्रॅक्ट क्या है? – What is Forward Contracts in Hindi.

फॉरवर्ड कॉन्ट्रॅक्ट एक निर्धारित तारीख को निश्चित किए असेट को निश्चित किए भाव पर खरीदने या बेचने का करार है।

उदाहरण देकर बताना हो तो कॉन्ट्रॅक्ट करनेवाली पार्टीयों में से एक पार्टी तेजी की पोजीशन के लिए कॉन्ट्रैक्ट करती है और कॉन्ट्रैक्ट के अंर्तगत आने वाले असेट भविष्य में निश्चित की गई तारीख को निश्चित की गई किमत पर खरीदी करने के लिए सहमत होती है

दूसरी पार्टी मंदी की पोजीशन के लिए कॉन्ट्रॅक्ट करती है और कॉन्ट्रॅक्ट के अंर्तगत आने वाले असेट उसी तारीख को उसी भाव पर बेचने के लिए सहमत होती है।

कॉन्ट्रॅक्ट की और जानकारी जैसे की डीलीवरी की तारीख, भाव और क्वॉन्टीटी यह सब जानकारी कॉन्ट्रैक्ट करनेवाली दोनो पार्टीयाँ समझ लेती है।

सामान्य प्रकार से फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट का ट्रेडींग एक्सचेन्ज बाहर किया जाता है इस के सामान्य नियम और बंधन निचे की तरह है।

  • यह कॉन्ट्रॅक्ट द्वीपक्षी है और उन दोनो पक्षो पर जोखीम का भार होता है।
  • हर एक कॉन्ट्रॅक्ट की रूपरेखा पहले ही निश्चित की होती है। यहा से कॉन्ट्रॅक्ट का साइझ और कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने की तारीख और उस से संबंधित असेट के प्रकार और गुणवत्ता एक जैसी नही होती है।
  • इस कॉन्ट्रैक्ट की किमत सामान्य जनता में जाहीर नही की जाती।
  • कॉन्ट्रैक्ट पूरा होता है उस तारिख को असेट की डीलीवरी देकर कॉन्ट्रॅक्ट की सेटलमेन्ट करनी पड़ती है।
  • इस कॉन्ट्रॅक्ट से संबंधित पार्टीयों में से कोई भी एक पार्टी कॉन्ट्रॅक्ट को रिवर्स करना चाहती हैं, तो उसे अनिवार्यत: दूसरी पार्टी के पास जाना पडता है और अक्सर उस के लिए ज्यादा दाम चुकाने पड़ते है।

उदाहरण (Example):

अंदाजा लगाए की अमित (एक खरिददार) और राहुल (एक बिक्रेता) है। ३१ दिसंबर २००७ को दोनों १०० तोला सोने का करार प्रति तोला ९००० रूपए के भाव से करने के लिए सहमत होते है।

यहा ९००० रूपए सोने का फॉरवर्ड भाव है। अमित इस करार में खरिददार है और वह तेजी की पोजीशन (लाँग पोजीशन) खड़ी करता है ऐसा कहा जाता है।

उसी तरह से राहुल इस करार में विर्केता है और वह मंदी की पोजीशन (शॉर्ट पोजीशन) खड़ी करता है ऐसा कहा जाता है।

सोने के इस करार में अमित ३१ दिसंबर २००७ को राहुल को ९००००० रूपए देने और १०० तोला सोने की डिलीवरी लेने के लिए बद्ध हो जाता है।

उसी हिसाब से राहुल भी ३१ दिसंबर २००७ को ९००००० रूपए लेकर १०० तोला सोने की डीलीवरी देने के लिए बद्ध हो जाता है।

फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट की मर्यादा और समस्या – Problem & Limitations of Forward Contracts

  • फॉरवर्ड मार्केट पर कम अथवा कमजोर प्रवाह का परिणाम हो रहा है ऐसा देखने को मिलता है। उस में क्रेडीट के जोखीम की वजह से भरोसे का अभाव निर्माण होता है।
  • उन के ट्रेडींग में केन्द्रीकरण का अभाव दिखता है।
  • उस में स्थिति स्थापकता बहुत है और वॉल्युम खडा करने की क्षमता भी ज्यादा है

फ्युचर्स कॉन्ट्रॅक्ट क्या है? – What is Futures Contracts in Hindi.

फॉरवर्ड मार्केट में निर्माण होने वाली समस्या को हल करने के लिए फ्यूचर्स का मार्केट अस्तित्व में आया है।

फ्युचर्स कॉन्ट्रॅक्ट एक निर्धारित तारीख को निश्चित किए असेट को निश्चित किए भाव पर खरीदने या बेचने का करार है परंतु फारवर्ड कॉन्ट्रॅक्ट के विपरीत फ्युचर्स के व्यवहार स्टॅन्डर्ड बनाए गए है और शेअर बाजार के माध्यम से उसके व्यवहार किए जा सकते है।

फ्युचर्स के कॉन्ट्रैक्ट में लिक्वीडीटी का प्रवाह पुरी तरह से लाने के लिए कॉन्ट्रॅक्ट करते समय एक्सचेंज सही नियमो का पालन करने को कहता है।

यह कॉन्ट्रॅक्ट याने पहले से ही निश्चित किए हुए नियम होते है उस के अंतर्गत आने वाले इन्स्ट्रमेंट भी स्टॅन्डर्ड होते है। उनकी संख्या और गुणवत्ता भी निश्चित की होती है।पहले निश्चित किए नियमों के अनुसार असेट की डीलीवरी दे सकते है।

फ्युचर्स का कॉन्ट्रॅक्ट उस के म्यॅच्युरीटी के पहले उलटाया भी जा सकता है परंतु उस के लिए उतना ही विपरीत व्यवहार उसी तरिके से बराबर किया जाता है। फ्युचर्स कॉन्ट्रॅक्ट के सामान्य मानदंड निचे के अनुसार होते है।

एक भविष्य अनुबंध एक समान और विपरीत लेन-देन में प्रवेश करने से पूर्व परिपक्वता के लिए ऑफसेट किया जा सकता है।

  • कॉन्ट्रॅक्ट से संबंधित असेट की गुणवत्ता।
  • कॉन्ट्रॅक्ट से संबंधित असेट की संख्या।
  • डीलीवरी देने की तारीख और महीना।
  • किमत के क्वान्टेशन के युनिट और किमत में आयी कम से कम तफावत।
  • सेटलमेन्ट करने का स्थान।

फॉरवर्ड और फ्युचर्स के कॉन्ट्रॅक्ट का फर्क – Difference between Forwards and Futures Contracts in Hindi.

फॉरवर्ड कॉन्टॅक्ट और फ्यूचर्स कॉन्ट्रॅक्ट में हमेशा थोडी सी जटीलता निर्माण हो रही है

क्योंकि फ्युचर्स और फॉरवर्ड यह दोनो कॉन्ट्रॅक्ट भविष्य की किमत में होनेवाले चढाव उतार के अनिश्चितता के परिणाम से होनेवाले जोखीम के सामने रक्षण देने की एक समान आर्थिक भुमिका निभाते है।जहाँ फ्युचर्स का कॉन्ट्रॅक्ट फॉरवर्ड के कॉन्ट्रॅक्ट से सुधारीत आवृत्ती है।

फ्युचर्स
(Futures)
फॉरवर्ड
(Forwards)
आयोजित एक्सचेन्ज में ट्रेडींग होता
है।
ये ओटीसी प्रकार का कॉन्ट्रैक्ट
है।
हर कॉन्ट्रॅक्ट की शर्ते एक समान
होती है
हर कॉन्ट्रैक्ट की शर्ते कस्टमाईझड्
है।
इस में लिक्वीडीटी जादा है। इस में लिक्वीडीटी कम है।
इस में मार्जिन की रकम चुकाना
जरूरी होता है।
इस में मार्जिन की रकम चुकाना
जरूरी नही होता है।
व्यवहार की सेटलमेन्ट हर दिन
करते है।
व्यवहार का सेटलमेन्ट उस की
कालावधी पूरी होने पर करते है।

फ्युचर्स के व्यवहार में उपयोग में आने वाले महत्त्व के शब्द समुह – Futures Terminology in Hindi.

स्पॉट प्राईज (Spot Price):

स्पॉट बाजार में जिस भाव पर असेट के व्यवहार होते है उस भाव को स्पॉट प्राईज कहते है।

फ्युचर्स प्राईज (Futures Price):

फ्युचर्स के बाजार में जिस भाव पर फ्युचर्स के कॉन्ट्रैक्ट का ट्रेडींग होता है । उस भाव को फ्युचर प्राईज कहते है।

कॉन्ट्रॅक्ट का सायकल (Contract Cycle):

जिस कालावधी के लिए कॉन्ट्रैक्ट का ट्रेडींग होता है उस कालावधी को कॉन्ट्रॅक्ट सायकल कहते है।

एन.एस.ई में इन्डेक्स फ्युचर्स के होनेवाले कॉन्ट्रॅक्ट की देय मुद्दत एक महिना दो महिने अथवा तीन महिने बाद की होती है। उस महिने के अंत के गुरूवार को यह मुद्दत पूरी होती है।

उदाहरण के कॉन्ट्रैक्ट की देय मुद्दत एक महिना दो महिने अथवा तीन महिने बाद की होती है। उस महिने के अंत के गुरूवार को यह मुद्दत पूरी होती है।

उदाहरण के तौर पे जनवरी में पूरी होनेवाले कॉन्ट्रैक्ट की मुद्दत जनवरी के अंतिम गुरुवार को पूरी होती है उसी तरह फरवरी में पूरी होनेवाले कॉन्ट्रॅक्ट की मुद्दत फरवरी के अंतिम गुरुवार को पूरी होती है।

उसके बाद आने वाले शुक्रवार को तीन महिने बाद देय मुद्दत पकडने वाला नया कॉन्ट्रॅक्ट चालु किया जाता है।

कॉन्ट्रॅक्ट पूरा होने की तारीख (Expiry Date):

कॉन्ट्रॅक्ट पूरा होने की तारीख का उल्लेख कॉन्ट्रैक्ट में किया जाता है। कॉन्ट्रॅक्ट में दिखाई देने वाली अंत की तारीख उस ट्रेडींग का अंत का दिन होता है। उस के बाद उसका अस्तित्व नष्ट होता है।

कॉन्ट्रैक्ट का साइझ (Contract Size):

कॉन्टॅक्ट के अंतर्गत डीलीवरी देने के लिए बंधे गए असेट की संख्या को कॉन्ट्रॅक्ट का साइझ कहते है। उदाहरणार्थ एन.एस.ई फ्युचर्स के मार्केट की कॉन्ट्रॅक्ट साईज ५० निफ्टी की है।

बेसिस-मुल किमत (Basis):

फायनानशिअल फ्युचर्स के संदर्भ में फ्युचर्स के भाव से स्पॉट भाव को घटाने के बाद मिलनेवाली रकम को फ्युचर्स की किमत के बेसिस के नाम से पहचाना जाता है। डीलीवरी के हर एक महिने के कॉन्ट्रॅक्ट के लिए अलग बेसिस अथवा किमत मिलती है। सामान्य बाजार में किमत अथवा बेसिस पोझिटीव्ह होता है इस से यह सिध्द होता है कि स्पॉट भाव से सामान्यतः फ्युचर्स का भाव जादा ही होता है।

कॉस्ट ऑफ कॅरी (Cost of Carry):

फ्युचर्स के भाव और स्पॉट भाव के बीच का संबंध कॉस्ट ऑफ कॅरी द्वारा समझाया जा सकता है। असेट खरीदने के लिए लगने वाली रकम पर किए हुआ ब्याज के भुगतान में स्टोरेज खर्च (भंडारण की लागत) जोड़ कर कॉस्ट ऑफ कॅरी की गणना की जाती है।

आरंभ का मार्जिन (Initial Margin):

फ्यूचर्स के कॉन्ट्रॅक्ट के आरंभ के समय व्यवहार किया जाता है तब लिए जाने वाले मार्जिन को आरंभ का मार्जिन कहके पहचाना जाता है।

मार्किग टु मार्केट (Marking to Market):

फ्युचर्स के मार्केट में हर ट्रेडींग दिन के अंत में, मार्जिन अकाऊन्ट में अॅडजस्टमेन्ट की जाती है। उस के आधार पर दिन के दरम्यान किए जानेवाले व्यवहार के कारण उनको हुए नुकसान अथवा मुनाफे का अंदाजा लगा सकते है। फ्युचर्स के बंद भाव के आधार पर यह रकम निश्चित की जाती है। उस को मार्किग टु मार्केट के नाम से पहचाना जाता है।

मेईन्टेनन्स मार्जिन (Maintenance Margin):

आरंभ के मार्जिन से मेइन्टेनन्स मार्जिन थोडा कम होता है। मार्जिन अकाऊन्ट का बॅलेन्स माईनस में न आए इस के लिए यह मार्जिन रखा जाता है।

मार्जिन अकाऊन्ट का बॅलेन्स मेईन्टेनन्स मार्जिन से कम हुआ होगा तो निवेशक को मार्जिन जमा करने के लिए संदेश भेजा जाता है। इस संदेश को मार्जिन कॉल कहा जाता है।

मार्जिन कॉल जाने के बाद निवेशक उसके मार्जिन अकाऊन्ट में जादा रकम जमा करेगा ऐसा अंदाजा लगाया जाता है।

दुसरे दिन रकम जमा हो गई है क्या यह निवेशक अथवा ट्रेडींग करनेवालो को देखना पडता है।

डीस्काऊन्ट (Discount):

शेअर्स के स्पॉट भाव और फ्युचर्स भाव के फर्क पर से उस पर डीस्काऊन्ट लागु है या नही यह निश्चित किया जाता है।

फ्युचर्स का भाव स्पॉट भाव से कम होगा तो उस फ्युचर्स में ट्रेडींग डीस्काऊन्ट पर हो रहा है ऐसा कहा जाता है।

आम तौर पर, पास के भविष्य में शेअर्स की किमत में कमी होने की ट्रेडर अपेक्षा करते हो तो इस प्रकार की स्थिति निर्माण होती है।

प्रीमियम (Premium):

शेअर्स के स्पॉट भाव और फ्युचर्स भाव के फर्क पर से उस पर प्रीमियम लाग है या नही यह निश्चित किया जाता है।

जो फ्युचर्स का भाव स्पॉट भाव से कम होता है उस फ्युचर्स में ट्रेडींग प्रीमियम पर हो रहा है ऐसा कहा जाता है।

आम तौर पर, पास के भविष्य में शेअर्स की किमत में बढ़ोतरी होने की ट्रेडर अपेक्षा करते हो तो इस प्रकार की स्थिति निर्माण होती है।

बीटा (Beta):

यह बाजार के अफरातफरी की गिनती करने का एक प्रमाण है। उसकी मदद से सिक्योरिटी में या पोर्टफोलीओ में किए गए निवेश के सामने के जोखीम का ठिक तरह से अंदाजा लगाया जा सकता है।

उसी तरह संपूर्ण बाजार की स्थिति की तुलना में हर किसी पोर्टफोलीओ के सामने किए शेअर्स के निवेश के सामने के जोखीम का भी अंदाजा लगाया जा सकता है।

रिग्रेशन अॅनालिसीस सिस्टम से बीटा के आकडो की गिनती की जाती है।

बाजार में आने वाले चढाव उतार के परिणाम से सिक्योरिटी में किए गए निवेश पर मिलने वाली कमाई का अंदाजा देनेवाली व्यवस्था कहके आप बीटा को जान सकते है।

बीटा अंक एक से निचे हुआ तो उसका मतलब एसा है कि आपने जिस सिक्योरिटीज में निवेश किया है बाजार की तुलना में उसके भाव में कम अफरातफरी देखने को मिलेगी।

परंतु बीटा अंक एक से उपर हुआ तो उससे ऐसा निर्देश मिलता है कि सिक्योरिटीज के भाव में बाजार की तुलना में बडा चढाव उतार देखने को मिलेगा।

।। धन्यवाद ।।

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श्रेणी: Share Market

3 टिप्पणियाँ

फ्युचर्स की किमत निश्चित करने की पद्धती - Pricing Of Futures In Hindi. · नवम्बर 30, 2020 पर 8:27 अपराह्न

[…] फ्युचर्स का परीचय – Introduction to Futures in Hindi. […]

इंडेक्स फ्युचर्स क्या है? - What Is Index Futures In Hindi. · दिसम्बर 4, 2020 पर 8:55 अपराह्न

[…] फ्युचर्स का परीचय – Introduction to Futures in Hindi. […]

Stock Futures क्या है? - What Are Stock Futures In Hindi. · मार्च 4, 2021 पर 4:14 अपराह्न

[…] फ्युचर्स का परीचय – Introduction to Futures in Hindi. […]

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