क्या आपको पता है की लाँग स्ट्रॅडल स्ट्रॅटेजी – Long Straddle Option Strategy in Hindi अगर आपको पता नहीं है तो आप इस ब्लॉग को पूरा पढ़े.

लाँग स्ट्रॅडल स्ट्रॅटेजी – Long Straddle Option Strategy in Hindi

एक जैसे स्ट्राईक प्राईज का एक कॉल ऑप्शन और एक पुट ऑप्शन खरीदकर इस स्ट्रॅटेजी का अमल किया जाता है।

बाजार में बहत बढोतरी या बहत गिरावट हुई तो इन दोनों स्थिति में इस स्ट्रॅटेजी का उपयोग करनेवाले को मुनाफा हो सकता है।

अधिकतम लाभ : बाजार में बढोतरी या गिरावट हुई तो इस ट्रेडिंग में अमर्यादित लाभ होने की संभावना होती है।

अधिकतम नुकसान : मिले हुए प्रीमियम की रक्कम जितना सीमित होता है।

Long Straddle Option Strategy

लाँग स्ट्रॅडल स्ट्रॅटेजी (Long Straddle Option Strategy) का उपयोग कब करना चाहिए :

शेअर बाजार में अफरातफरी का माहौल हो और ट्रेडिंग के लिए चूने शेअर्स के भाव में कम कालावधी में बडी बढोतरी या गिरावट होने की संभावना हो तब ट्रेडर लाँग स्ट्रॅडल स्ट्रॅटेजी का उपयोग करते है।

कंपनी की ओर से कोई महत्व का विज्ञापन किया जानेवाला हो, जैसे की क्वाटरली रिझल्ट, तब इस स्ट्रॅटेजी पर अमल किया जाता है।

ब्रेक ईवन पॉईन्ट (बी.ई.पी.):

उपर की दिशा का बी.ई.पी. = स्ट्रॅडल का स्ट्राईक प्राईज + मिले हुए प्रीमियम की रक्कम

निचे की दिशा का बी.ई.पी. = स्ट्रॅडल का स्ट्राईक प्राईज – मिले हुए प्रीमियम की रक्कम

लाँग स्ट्रॅडल स्ट्रॅटेजी (Long Straddle Option Strategy) के फायदे :

  • शेअर्स के भाव में बढोतरी या गिरावट हुई तो इन दोनों स्थितियों में मुनाफा कमाया जा सकता है।
  • शेअर्स का भाव एक ही दिशा में बढा या फिर गिरा तो उस से अमर्यादित मुनाफा लिया जा सकता है।
  • कंपनी की ओर से महत्व का विज्ञापन करने के बाद शेअर्स का भाव बढेगा या कम होगा इसका विश्लेषण करने की जरूरत नहीं होती है।
  • इस ट्रेडिंग में अधिकतम नुकसान, यह ट्रेडिंग करने के लिए दी हुई प्रीमियम की रक्कम जितना ही सीमित होता है।
  • ट्रेडिंग करते समय शेअर्स के भाव में अफरातफरी ना हुई और उसके बाद अफरातफरी बडी तो ऑप्शन के इस ट्रेडिंग में फायदा हो सकता है। शेअर्स के भाव में नोट करने लायक बदलाव न हुआ तो भी दोनों ट्रेडिंग में मुनाफा हो सकता है।

लाँग स्ट्रॅडल स्ट्रॅटेजी (Long Straddle Option Strategy) के घाटे :

  • कॉल ऑप्शन या पुट ऑप्शन की खरीदी करने के लिए दी जानेवाली दलाली की तुलना में इस ट्रेडिंग में अधिक दलाली देनी पडती है।
  • स्ट्रॅडल स्ट्रॅटेजी में कॉल ऑप्शन और पुट ऑप्शन खरीदने के बाद ट्रेडिंग के लिए चूने शेअर्स का भाव स्थिर ही रहा तो आपको अधिक रक्कम गवानी पडती है।
  • शेअर्स का भाव उपर के ब्रेक ईवन पॉईन्ट के निचे और निचे के ब्रेक ईवन पॉईन्ट के उपर होगा, याने की दोनों ब्रेक ईवन पॉईन्ट के बीच में होगा तो इस ट्रेडिंग में आपको नुकसान होने की संभावना होती है।
  • ऑप्शन का ट्रेडिंग करने के बाद अफरातफरी कम हुई तो उस से भाव के बदलाव के साथ या भाव के बदलाव के बगैर भी पोजिशन नुकसानदेह हो सकती है।

हम आशा करते है की हमारी ये लाँग स्ट्रॅडल स्ट्रॅटेजी – Long Straddle Option Strategy in Hindi ब्लॉग पोस्ट आपको पसंद आयी होगी अगर आपको शेयर मार्किट से जुड़ा कोई भी सवाल है तो आप कृपया कमेंट में जरूर पूछे।

।। धन्यवाद ।।

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3 टिप्पणियाँ

लाँग स्ट्रॅगल स्ट्रॅटेजी - Long Strangle Option Strategy In Hindi · जनवरी 6, 2021 पर 9:33 अपराह्न

[…] लाँग स्ट्रॅडल स्ट्रॅटेजी – Long Straddle Option St… […]

डे ट्रेडिंग की पहचान - Intraday Trading For Beginners In Hindi · मार्च 4, 2021 पर 3:51 अपराह्न

[…] लाँग स्ट्रॅडल स्ट्रॅटेजी – Long Straddle Option St… […]

इंट्राडे ट्रेडिंग टिप्स - Intraday Trading Tips In Hindi · जुलाई 9, 2021 पर 7:27 अपराह्न

[…] लाँग स्ट्रॅडल स्ट्रॅटेजी – Long Straddle Option Strate… […]

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