फ्युचर्स और ऑप्शन्स की मार्जिन – क्लीयरिंग और सेटलमेंट (Margins – Clearing and Settlement Of Futures and Options in Hindi)

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फ्युचर्स का मार्जिन – Margins for Futures in Hindi.

क्लीअरिंग मेम्बर्स ग्राहकों को आर्कषीत करने के लिए, ग्राहकों से कम मार्जिन न ले पाए इसलिए, एक अनिवार्य न्यूनतम मार्जिन ग्राहकों से प्राप्त किया जाता है।

ग्राहकों से पर्याप्त मार्जिन लेने से बाजार में लिक्वीडीटी की गंभीर समस्या खडी होने का जोखीम कम होता है। अपर्याप्त मार्जिन लेने के कारण बाजार में लिक्वीडीटी की गंभीर समस्या का निर्माण होता है।

स्टॉक एक्सचेंज, क्लिअरिंग हाऊस और बैंक जैसी संस्थाए बाजार में आसानी से व्यवहार कर सके इसलिए क्लीअरिंग मेम्बर्स उन के क्लाइन्ट से निर्धारित किए गए मार्जिन की रकम इकठठा करते है। स्टॉक मार्केट के अधिकारी द्वारा समय समय पर मार्जिन की रकम निर्धारित की जाती है।

ट्रेडिंग मेम्बर्स अपने ग्राहकों से ग्रॉस बेसिस पर मार्जिन लेते है याने कि खरीदी और बिक्री पर मार्जिन की रकम अलग अलग लेते है। पर ट्रेडिंग मेम्बर्स, क्लिअरिंग हाऊस को मार्जिन नेट बेसिस पर देते है याने कि खरीद और बिक्री की स्थिति का निवल करके देते है।

स्टॉक एक्सचेन्ज ने निचे दिए तरिके से मार्जिन की रकम जमा करने के लिए व्यवस्था की है।

  1. खरीददार और विर्केता को आरंभिक मार्जिन भरना पडता है।
  2. खरिददार और विर्केता को हर दिन मार्क टु द मार्केट के हिसाब से उनके व्यवहार का सेटलमेन्ट करना पडता है।

मार्किग टु मार्केट – Marking to Market in Hindi.

प्रत्येक सदस्य के, फ्युचर्स के सभी कॉन्ट्रैक्ट का मार्क टु मार्केट (एमटीएम) सेटलमेन्ट हर दिन किया जाता है। यह सेटलमेन्ट प्रत्येक दिन के अंत में

दर्शाए जानेवाले दैनिक सेटलमेन्ट भाव पर होता है। उनको होने वाले मुनाफे और नुकसान की रकम की गिनती निचे के अनुसार की जाती है।

  1. सदस्यों ने जिस दिन पोजिशन ली उस दिन के अंत में पोजिशन को सेटल नहीं किया तो उनको होने वाले मुनाफे और नुकसान की रकम की गिनती, कॉन्ट्रॅक्ट के ट्रेड प्राईज और दैनिक सेटलमेन्ट प्राईज के बीच के अंतर से की जाती है।
  2. पहले से ली हुई पोजिशन के लिए पिछले दिन की सेटलमेन्ट प्राईज और वर्तमान सेटलमेन्ट प्राईज के बीच के अंतर से होने वाले मुनाफे और नुकसान की रकम की गिनती की जाती है।
  3. खरीदी और बिक्री के सौदे एक ही दिन में किए हो तो होने वाले मुनाफे और नुकसान की रकम की गिनती, कॉन्ट्रॅक्ट की खरीदी की कीमत और बिक्री की कीमत के अंतर से की जाती है।

जब क्लिअरिंग मेम्बर (सी.एम) ने व्यवहार में नुकसान किया हो तो उसको मार्क टु मार्केट के हिसाब से नुकसान की नकद रकम जमा करनी पडती है। वह रकम जिस क्लिअरिंग मेम्बर (सी.एम) ने व्यवहार में फायदा किया हो उसे दी जाती है।

इस व्यवस्था को दैनिक मार्क टु मार्केट (एम.टी.एम) सेटलमेन्ट नाम से जाना जाता है। ट्रेडिंग मेम्बर (टी.एम) द्वारा किए गए मुनाफे और नुकसान की रकम को हर दिन के हिसाब से एम.टी.एम के अनुसार सेटलमेंट करके देने का काम करने की जिम्मेदारी क्लिअरिंग मेम्बर की होती है।

उन के क्लाईन्ट के अकाऊन्ट को भी इसी तरह सेटल करने की उनकी जिम्मेदारी होती है। मार्क टु मार्केट सेटलमेन्ट के पे ईन और पे आउट का परिणाम दुसरे दिन के ट्रेडींग पर हुआ यह देखने को मिलता है।

फ्युचर्स के व्यवहार की फायनल सेटलमेन्ट – Final Settlement for Futures in Hindi.

फ्युचर्स कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने की तारिख को बाजार के ट्रेडींग पूरे होने के बाद एन.एस.सी.सी.एल क्लिअरिंग मेम्बर के सभी पोजिशन और सेटलमेन्ट की अंतिम किंमत को नोट करती है और हर क्लिअरिंग मेम्बर के नफे नुकसान की गिनती करती है।

अब यह मुनाफे अथवा नुकसान का नकद में सेटलमेन्ट किया जाता है। फायनल सेटलमेन्ट करने के बाद मिलने वाले मुनाफे की अथवा

नुकसान की रकम उस क्लिअरिंग मेम्बर के खाते में जमा की जाती है अथवा उधार रखी जाती है।

नोट (Note):

फ्युच्यर्स की खरीदी अथवा बिक्री के सौदे, कॉन्टॅक्ट पूरा होने की तारिख तक सेटल नही किए हो तो उन सौदो को कम्प्युटर आपने आप सेटल कर देता है।

कॉन्ट्रॅक्ट पूरा होने के दिन का ट्रेडींग बंद होता है तब जो भाव होगा उसके आधार पर सौदे सेटल किए जाते है।

फ्युचर्स का सेटलमेन्ट भाव – Settlement Price for Futures in Hindi.

ट्रेडींग के दिन के अंत में दर्शाया जानेवाला दैनिक सेटलमेन्ट भाव, उस दिन के पुयचर्स के कॉन्ट्रक्ट का बंद भाव होता है।

फिलहाल फ्युचर्स कॉन्ट्रॅक्ट के बंद भाव की गिनती उस एक्सचेन्ज के फ्युचर्स और ऑप्शन के क्षेत्र में अंत के एक घंटे के दरम्यान भाव में होनेवाले चढावउतार का अँवरेज निकाल के की जाती है।

कॉन्ट्रक्ट ट्रेडींग के अंत के दिन में उस एक्सचेन्ज के कॅपिटल मार्केट के विभाग में कॉन्ट्रक्ट के अंतर्गत आने वाले इन्डेक्स अथवा सिक्योरिटी के बंद भाव को ही उन का फायनल सेटलमेन्ट भाव कह के गिना जाता है।

कॉन्ट्रक्ट के अंतर्गत आने वाले इन्डेक्स का अथवा सिक्योरिटी का बंद भाव उस एक्सचेन्ज के कॅपिटल मार्केट के विभाग में अंत के आधे घंटे में उसमें होनेवाले चढावउतार के ॲवरेज के आधार पर निश्चित किया जाता है।

ऑप्शन का सेटलमेन्ट – Settlement for Options in Hindi.

ऑप्शन के कॉन्ट्रक्ट का तीन प्रकार से सेटलमेन्ट किया जाता है। हर दिन के प्रीमियम के आधार पर होने वाला सेटलमेन्ट, एक्ससाईज सेटलमेन्ट

और सिक्योरिटीज संबंधित ऑप्शन होगा तो उसके लिए इन्टरिम एक्ससाईज सेटलमेन्ट और फायनल सेटलमेन्ट।

हर दिन के प्रिमियम के आधार पर किया जानेवाला सेटलमन्ट – Daily Premium Settlement in Hindi.

ऑप्शन की खरीदी करनेवाले, खरीदे हुए ऑप्शन का प्रीमियम देने के लिए बाध्य होते है। इसी तरह से ऑप्शन की बिक्री करनेवाले, बेचे हुए ऑप्शन का प्रीमियम प्राप्त करने के लिए हकदार होते है।

प्रीमियम देय राशि और प्रीमियम प्राप्य राशि को जोड़ कर नेट प्रीमियम की गणना की जाती है। हर एक ऑप्शन के हर एक क्लाइन्ट का नेट प्रीमियम इसी प्रकार से गीना जाता है।

एक्सर्साइज सेटलमेन्ट – Exercise Settlement in Hindi.

ज्यादातर ऑप्शन के खरीददार और विर्केता, अपने ऑप्शन के कॉन्ट्रक्ट की पोजीशन को बंद करने के लिए ऑफसेट करने वाला व्यवहार करते है।

पर ऑप्शन एक्ससाईज के संबंध में जानकारी, ऑप्शन के खरीददार को यह निर्णय लेने में मददगार हो सकती है की उसके लिए ऑप्शन को एक्ससाईज करना ज्यादा फायदेमंद है कि ऑफसेट करने वाला व्यवहार करना याने की ऑप्शन की बिक्री करना।

ऑप्शन वि:ता को एक्ससाईज असाइन करके दिए जाने की संभावना हमेशा होती है। एक बार अगर ऑप्शन के खरीदार ने ऑप्शन के विक्रेता पर ऑप्शन को अमल (एक्ससाईझ) करने की सख्ती की तो ऐसी स्थिति में ऑप्शन के विक्रेता को उस की जिम्मेदारी पूरी करने के लिए सख्ती से बांध दिया जाता है।

दुसरे शब्द में बताना हो तो नकद सेटलमेंट की हो तो उस ऑप्शन के केस में नकद के सेटलमेन्ट की रकम देने के लिए वह बंधा होता है।

इन्टरिम एक्सर्साईज सेटलमेन्ट – Interim Exercise Settlement in Hindi.

सिर्फ सिक्योरिटीज के ऑप्शन के कॉन्टॅक्ट के लिए इन्टरिम एक्ससाईज सेटलमेन्ट होता है। ट्रेडिंग दिन के दरमियान किसी भी समय निवेशक ट्रेडींग मेम्बर के जरिए उसके इन-द-मनी (आईटीएम) ऑप्शन पर अमल कर सकते है।

इस प्रकार के ऑप्शन के लिए इन्टरिम एक्ससाईज सेटलमेन्ट, उस ट्रेडिंग दिन के अंत में किया जाता है जिस दिन निवेशक ने उस ऑप्शन को एक्ससाईज किया।

एक्ससाईज किए हुए ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट को उसी सीरीज के (याने की ऐसे कॉन्ट्रैक्ट जिनके अंतर्गत आनेवाली सिक्योरिटी, उनकी स्ट्राईक प्राईज और कॉन्ट्रॅक्ट पूरा होने की तारिख एक समान हो) शॉर्ट पोजिशन के कॉन्ट्रॅक्ट वालो को असाइन किया जाता है।

ऑप्शन का अमल जिस क्लिअरिंग मेम्बर (सी.एम) ने किया होगा उसको ऑप्शन की एक्ससाईज सेटलमेन्ट व्हॅल्यु मिलती है और यह रक्कम जिस क्लिअरिंग मेम्बर (सी.एम) को ऑप्शन का कॉन्ट्रॅक्ट असाइन किया गया है उससे ली जाती है।

फायनल एक्ससाईज सेटलमेन्ट – Final Exercise Settlement in Hindi.

ऑप्शन कॉन्ट्रॅक्ट पूरा होने की तारिख को बाजार के ट्रेडींग पूरा होने के बाद सभी इन द मनी (आईटीएम) ऑप्शन की लाँग पोजीशन का फायनल एक्ससाईज सेटलमेन्ट होता है।

सभी इन द मनी (आईटीएम) ऑप्शन की लाँग पोजीशन को उसी सीरीज की (याने की ऐसे कॉन्ट्रैक्ट जिनके अंतर्गत आनेवाली सिक्योरिटी, उनकी स्ट्राईक प्राईज और कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने की तारिख एक समान हो) शॉर्ट पोजिशन को असाइन किया जाता है।

जिस निवेशक के पास इन द मनी (आईटीएम) ऑप्शन की लाँग पोजीशन होगी उसे ऑप्शन की एक्ससाईज सेटलमेन्ट व्हॅल्यु मिलती है और यह रक्कम जिस निवेशक को ऑप्शन का कॉन्ट्रॅक्ट असाइन किया गया है उससे ली जाती है।

एक्ससाईज की प्रक्रिया – Exercise Process in Hindi.

ऑप्शन की शैली (स्टाईल) अनुसार ऑप्शन कितनी कालावधी में एक्ससाईज करने के लिए पात्र होगा उसका आधार होता है।

एन.एस.ई पर उपलब्ध इन्डेक्स ऑप्शन युरोपियन स्टाईल के है। इस तरह के ऑप्शन का अमल कॉन्ट्रॅक्ट पूरा होने की तारीख (एक्सपायरी डेट) को ही अपने आप किया जा सकता है और वह भी अगर ऑप्शन इन द मनी हो तो

एन.एस.ई पर उपलब्ध स्टॉक ऑप्शन अमेरिकन स्टाईल के है। इस तरह के ऑप्शन का अमल एक्सपायरी डेट के पहले कभी भी स्वेच्छा से किया जा सकता है और एक्सपायरी डेट को भी अपने आप किया जा सकता है। एक्ससाईज केवल इन द मनी ऑप्शन को किया जा सकता है।

कॉन्ट्रॅक्ट अपने आप अमल में आने का मतलब कॉन्ट्रॅक्ट पूरा होने की तारिख को एन.एस.सी.सी.एल सब इन द मनी कॉन्ट्रैक्ट को अपने आप अमल में लाता है।

इस स्थिति में ऑप्शन कॉन्ट्रॅक्ट खरीदनेवाले को कॉन्ट्रैक्ट का अमल करने की जानकारी (नोटीस) एन.एस.सी.सी.एल को नही देनी पडती।

कॉन्ट्रॅक्ट स्वेच्छा से याने वॉल्युन्टरी एक्ससाईज करने का मतलब ऐसा होता है कि इन द मनी ऑप्शन खरीदनेवाला व्यक्ति उनके क्लिअरिंग मेम्बर (सी.एम) को अथवा ट्रेडिंग मेम्बर (टी.एम) को उस कॉन्ट्रैक्ट का अमल करने की एन.एस.सी.सी.एल को सुचना देने के लिए आदेश करता है।

ऑप्शन सही तारिख को एक्ससाईज किया जा सके इसलिए ऑप्शन खरीददार को उन के ट्रेडिंग मेम्बर (टी.एम) को उस दिन कॉन्ट्रैक्ट का अमल करने के लिए सूचना स्वीकारने के लिए कट ऑफ टाईम पहले उन के कॉन्ट्रॅक्ट का अमल करने की सुचना देनी पडती है।

आम तौर पर ट्रेडींग का समय पूरा हान तक सिस्टम में एक्ससाईज के ऑर्डर लिए जाते है। हर ट्रेडिंग मेम्बर का कट ऑफ टाईम अलग अलग हो सकता है।

वैसे ही अलग अलग प्रकार के ऑप्शन कॉन्ट्रॅक्ट के लिए भी यह कट ऑफ टाईम अलग अलग टीएम का अलग अलग हो सकता है।

कॉन्ट्रॅक्ट की मुद्दत पुरी होने आती है तब इन द मनी कॉन्ट्रॅक्ट होगा तो उस पर अमल करने की बात है।

कॉन्ट्रैक्ट पर अमल करने की सुचना क्लिअरिंग मेम्बर द्वारा एन.एस.सी.सी.एल को दी गई तो इस सुचना को सामान्य तरह से फिरसे खीचा नही जा सकता अथवा रदद किया नही जा सकता है। ऑप्शन की

खरीदी करनेवालो द्वारा एक्ससाईज करने की नोटीस दी जाती है। उस दिन के ट्रेडींग का समय पूरा होने के बाद इस कॉन्ट्रॅक्ट का प्रोसेसिंग जिस दिन एन.एस.सी.सी.एल द्वारा किया जाता है तब खरीददार एक्ससाईज की सुचना दे सकते है।

नीट (एनईएटी) एफ ॲन्ड ओ सिस्टम की तरफ से एक्ससाईज करने के लिए एन.एस.सी.सी.एल को मिलनेवाली सब सुचनाओ की कानूनन जाँच करने का प्रोसेस किया जाता है।

कॉन्ट्रॅक्ट पर अमल करने के बाद क्लायन्ट टीएम की उसी तरह कॉन्ट्रैक्ट भी इन द मनी होगा तो उस की कानूनन जाँच के लिए बहुत नियमो को ध्यान में लेके उस की जाँच की जाती है।

एक्ससाईज करने के लिए कॉन्ट्रॅक्ट कानुनी है यह देखने के बाद उस कॉन्ट्रैक्ट को असाइन किया जाता है।

कॉन्ट्रॅक्ट पूरा होने की तारीख (एक्सपायरी डेट) को जो ऑप्शन एक्ससाईज नही होते वह ऑप्शन वर्थलेस याने की बेकार मने जाते है। दुसरे शब्द में बताना हो तो उनकी कुछ भी किंमत रहती नही है।

असाइन करने की प्रक्रिया – Assignment Process in Hindi.

कॉन्ट्रॅक्ट एक्ससाईज करने की नोटीस, ऑप्शन की उसी सीरीज (याने की ऐसे कॉन्ट्रॅक्ट जिनके अंतर्गत आनेवाली सिक्योरिटी, उनकी स्ट्राईक प्राईज और कॉन्ट्रॅक्ट पूरा होने की तारिख एक समान हो) की शॉर्ट पोजिशन को असाइन किया जाता है।

कौनसी शॉर्ट पोजीशन असाइन करने के लिए पात्र है, वह एन.एस.सी.सी.एल निर्धारित करता है और फिर बाजार में ट्रेडींग पूरा होने के बाद एक्ससाईज पोजिशन को शॉर्ट पोजिशन को असाइन करते है।

यह असाइन करने की प्रक्रिया को उस दिन अमल में लाया जाता है जिस दिन एन.एस.सी.सी.एल को एक्ससाईज निर्देश प्राप्त होता है।

एन.एस.सी.सी.एल को एक्ससाईज की सुचना मिलती है उसी दिन के ट्रेडींग पूरा होने के बाद क्लिअरिंग मेम्बर (सी.एम) को उसकी जानकारी दी जाती है।

क्लिअरिंग मेम्बर (सी.एम) यह जानकारी ट्रेडिंग मेम्बर (टी.एम) को देते है जो इसे ऑप्शन विकेंता को देते है। आम तौर पर ऑप्शन विता को यह जानकारी असाइन किए जाने के दुसरे दिन तक नही मिली है।

एक्ससाईज सेटलमेन्ट कॉम्प्युटेशन – Exercise Settlement Computation in Hindi.

इन्डेक्स ऑप्शन का अमल कॉन्ट्रॅक्ट पूरा होने की तारीख (एक्सपायरी डेट) को ही अपने आप किया जा सकता है और वह भी अगर ऑप्शन इन द मनी हो तो ही।

स्टॉक ऑप्सन का अमल एक्सपायरी डेट के पहले कभी भी स्वेच्छा से किया जा सकता है और एक्सपायरी डेट को भी अपने आप किया जा सकता है। एक्ससाईज केवल इन द मनी स्टॉक ऑप्शन को किया जा सकता है।

ऑप्शन कॉन्ट्रॅक्ट पूरा होने की तारिख को बाजार के ट्रेडींग पूरा होने के बाद सभी इन द मनी (आईटीएम) ऑप्शन की लाँग पोजीशन का फायनल एक्ससाईज सेटलमेन्ट होता है।

इन्टरिम एक्ससाईज के लिए एक्ससाईज सेटलमेन्ट प्राईज, यह कॉन्ट्रॅक्ट के अंतर्गत आनेवाली सिक्योरिटी का उस दिन का बाजार बंद भाव होता है जिस दिन ऑप्शन के कॉन्ट्रैक्ट का अमल किया जाता है।

फायनल एक्ससाईज के लिए फायनल सेटलमेन्ट प्राईज, यह कॉन्ट्रॅक्ट के अतगत आने वाले असेट (इन्डेक्स अथवा सिक्योरिटी) का कॉन्टॅक्ट पूरा होने की तारीख (एक्सपायरी डेट) का बाजार बंद भाव होता है।

एक्ससाईज सेटलमेन्ट वैल्यू, यह ऑप्सन की स्ट्राईक प्राईज और फायनल सेटलमेन्ट प्राईज के बीच का अंतर होता है।

कॉल ऑप्शन का एक्ससाईज सेटलमेन्ट वैल्यू, यह फायनल सेटलमेन्ट प्राईज में से स्ट्राईक प्राईज को घटाने पर मिलता है।

पुट ऑप्शन का एक्ससाईज सेटलमेन्ट वैल्यू, यह स्ट्राईक प्राईज में से फायनल सेटलमेन्ट प्राईज को घटाने पर मिलता है।

सिक्योरिटी के ऑप्शन के एक्ससाईज का सेटलमेन्ट वर्तमान में नगद पेमेन्ट से ही किया जाता है, उस को सिक्योरिटी की डीलीवरी दे कर नहीं किया जाता है ।

एक्ससाईज कॉन्ट्रॅक्ट में हर युनिट के एक्ससाईज सेटलमेन्ट व्हॅल्यु की गिनती निचे की तरह की जाती है।

  • कॉल ऑप्शन = ऑप्शन का अमल किया जाता है उस दिन का बंद भाव – स्ट्राईक प्राईज।
  • पुट ऑप्शन = स्ट्राईक प्राईज – कॉन्ट्रॅक्ट पर अमल होता है उस दिन के सिक्योरिटी का बंद भाव।

कॉन्ट्रैक्ट के अंतर्गत आने वाले असेट के फायनल एक्ससाईज के लिए कॉन्ट्रैक्ट पूरा होने की तारिख को उन सिक्योरिटी के बंद भाव को गिनती में लिया जाता है।

कॉन्ट्रॅक्ट एक्सपायरी के तीन दिन बाद एन.एस.सी.सी.एल द्वारा एक्ससाईज सेटलमेन्ट किए जाता है।

जिन ग्राहकों को कॉन्ट्रॅक्ट असाइन कर के दिया हो उन को सदस्य एक्ससाईज सेटलमेन्ट व्हॅल्यु जमा करने के लिए पहले से ही पुछ सकते है।

क्लाइंट का मार्जिन – Client Margins in Hindi.

एन.एस.सी.सी.एल उस के हर सदस्य को, उनके हर ग्राहक के मार्जिन की जानकारी देते है। सदस्यो ने खुद क्लायन्ट के पास से जमा किए मार्जिन की जानकारी एन.एस.सी.सी.एल को भेजी जाती है।

मेम्बर द्वारा दिए मार्जिन मनी को वह संभाल के रखते है सभासदद्वारा क्लायन्ट के पास से मार्जिन कलेक्ट किया हो तो उन के जानकारी के आधार पर वह मार्जिन मनी संभाल के रखते है।

।। धन्यवाद ।।

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