क्या आपको पता है की म्यूचुअल फंड क्या है? – Mutual Fund Guide in Hindi अगर आपको पता नहीं है तो आप इस ब्लॉग को पूरा पढ़े.

म्यूचुअल फंड क्या है? – Mutual Fund Guide in Hindi

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म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) एक ट्रस्ट है। यह संस्था लोगों से पैसा जमा करके अलग अलग सिक्योरिटीज में उन पैसों का निवेश करती है। निवेश उस स्कीम के उद्देश के तहत होता है। अगर दुसरे शब्दों में बताना हो तो म्युचुअल याने सामान्य लोगों के पैसो एकत्रित करने का तरिका।

कुछ निवेशक सिधे शेअर में निवेश नहीं करते। पर उन्हें म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश करना पसंद है। इसका कारण यह कि निवेशक को शेअर मार्केट की जानकारी नहीं होती।

तो कभी किसी के पास शेअर मार्केट का अभ्यास करने के लिए समय नहीं होता। यह सभी वर्ग म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश करना पसंद करते है।

जैसे जैसे पोर्टफोलीओ का मूल्य बढ़ता है वैसे वैसे म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) के युनिट का भाव बढ़ता है। हर म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) का पैसा निवेश करने की स्कीम और तरीका अलग अलग होता है।

कुछ म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) शेअर में निवेश करते है तो कुछ सरकारी नकदों में निवेश करते है। तो कुछ दोनों में निवेश करते है। जो फंड सिर्फ सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करते है उन फंड की आय स्थिर रहती है।

जो फंड शेअर में निवेश करते है उनके यूनिट के भाव में उतार चढ़ाव होता है   शेयर बाजार में पैसा लगाकर उसे दोगुना-तिगुना करने की चाहत ज्यादातर लोगों में होती है।

लेकिन समय की कमी, शेयर बाजार के बारे में जानकारी का अभाव तथा शेयर मार्केट की अस्थिरता बहुत से लोगों को शेयर बाजार में उतरने से रोकती है।

यही कारण है कि लोगों को अपनी मेहनत की पूँजी बे मन से निवेश के पारंपरिक तरीकों में लगाकर, उस पर मिले कम रिटर्न पर ही संतोष करना पड़ता है। ऐसे निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड(Mutual Fund) निवेश का एक बेहतरीन विकल्प है।

म्यूचुअल फंड(Mutual Fund) उन निवेशकों के लिए निवेश का सबसे आसान रास्ता है, जो शेयर बाजार में निवेश तो करना चाहते हैं, लेकिन ज्यादा जोखिम लेने से डरते हैं तथा उन्हें शेयर बाजार की जानकारी नहीं होती।

ऐसे में उनके लिए म्यूचुअल फंड(Mutual Fund) निवेश का एक ऐसा विकल्प बनता है, जो उन्हें बिना सीधे शेयर बाजार में उतरे, न सिर्फ शेयर बाजार की तेजी का लाभ दिलाता है, बल्कि जोखिम का अनुपात भी शेयर बाजार के मुकाबले यहाँ काफी कम होता है।

यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत में म्यूचुअल फंड(Mutual Fund) तेजी से निवेशकों के बीच लोकप्रिय हो रहा है।

म्यूचुअल फंड(Mutual Fund) इंडस्ट्री में रिटेल इनवेस्टर्स (खुदरा निवेशकों) की भागीदारी लगातार बढ़ी है।

म्यूचुअल फंड(Mutual Fund) की लचीली कार्य-प्रणाली व कम जोखिम के साथ साल-दर-साल निवेशकों को मिलनेवाला बेहतर रिटर्न नए निवेशकों को लगातार इस तरफ आकर्षित रहा है।

इसलिए जरूरी है कि निवेशक म्यूचुअल फंड(Mutual Fund) की कार्य-प्रणाली को ठीक तरह से समझें, ताकि निवेश करते समय वे सबसे बेहतर फंड तथा स्कीम का चुनाव कर सकें।

म्यूचुअल फंड की कार्य-प्रणाली – How Mutual Funds Work in Hindi

म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) सेबी द्वारा रजिस्टर्ड एक ऐसी कॉरपोरेट संस्था है, जो उन सभी निवेशकों के निवेशित धन को इकट्ठा करती है, जिनके समान वित्तीय लक्ष्य हों।

इस एकत्रित धन को यह कॉरपोरेट बॉडी (ट्रस्ट) शेयर बाजार के विभिन्न इंस्टमेंट जैसे इक्विटी शेयर्स, डिबेंचर सरकारी प्रतिभूतियाँ, बांड आदि में निवेश करती है।

निवेशकों द्वारा एकत्रित की गई पूँजी को कैपिटल मार्केट में सही तरह निवेश करने के लिए फंड मैनेजर्स नियुक्त किए जाते हैं। चूँकि ये फंड मैनेजर शेयर बाजार के अनुभवी खिलाड़ी होते हैं

इसलिए निवेशकों के धन को बाजार में इस तरह निवेश करते हैं, ताकि निवेशित धन से आय (रिटर्न) ज्यादा-से-ज्यादा प्राप्त हो।

इस कैपिटल एप्रिसिएशन (पूँजी में वद्धि) को निवेशकों के पास मौजूद म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) की यूनिट के अनुपात में साझा (शेयर) कर दिया जाता है।

उदाहरण के लिए, यदि म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) की किसी स्कीम में एक वर्ष में निवेशकों को 50 प्रतिशत रिटर्न मिला तो इसका मतलब निवेशक के पास उस फंड की जितनी यूनिट्स हैं, उसके अनुसार उसकी पूँजी में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो जाएगी।

यही कारण है कि म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) आम आदमी के लिए निवेश का मुफीद तरीका माना जाने लगा है। यहाँ निवेशक का पैसा एक तो कुशल हाथों में होता है, दूसरे फंड मैनेजर निवेशकों की पूँजी को डाइवर्सिफाई कर बाजार में लगाते हैं।

वैसे ‘म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) की कोई सर्वव्यापक परिभाषा नहीं है। इस शब्द के अंदर कई प्रकार की निवेश कंपनियाँ शामिल हैं। भारत में तकरीबन 200 म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) हैं और अमेरिका में यह संख्या 3,000 से भी अधिक है।

सरल शब्दों में कहें, तो म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) एक ऐसी निवेश कंपनी है, जो निवेशकों के धन को एकत्रित कर, उस धन को निवेश करती है। आमतौर पर यह निवेश शेयर बाजार की प्रतिभूतियों या सरकारी प्रतिभूतियों (सिक्यूरिटीज) में होता है।

उदाहरण के लिए, जब आप किसी इक्विटी फंड में निवेश करते हैं तो शेयर बाजार से शेयर खरीदने का काम आप नहीं करते हैं,

बल्कि आपके लिए यह काम म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) की एसेट मैनेजमेंट कंपनी करती है और इक्विटी के माध्यम से आपका पैसा किन-किन इक्विटी शेयरों में लगाया जाएगा और उसे कब बेचा जाएगा, इसका निर्णय फंड मैनेजर करते हैं।

इससे लाभ यह होता है कि आपका पैसा विभिन्न सेक्टरों के अच्छे प्रदर्शन कर रहे शेयरों में डाइवर्सिफाई कर लगाया जाता है और इससे रिस्क कम हो जाता है, जबकि सीधा शेयर बाजार में इनवेस्ट करने पर जोखिम ज्यादा होता है।

उदाहरण के लिए, आपने फार्मा सेक्टर की किसी कंपनी के यदि 100 शेयर खरीदे, लेकिन अचानक कुछ ऐसी नीतियाँ सामने आईं कि फार्मा सेक्टर की कंपनियों के शेयर नीचे गिरने लगे। ऐसी स्थिति में आपके लिए मुश्किल पैदा हो जाती है।

यदि आपने म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) की इक्विटी डायवर्सिफाइड स्कीम में निवेश किया है तो आपका पैसा विभिन्न सेक्टरों की उन कंपनियों में लगेगा, जो अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं और भविष्य में भी अच्छा करेंगी।

यहाँ चॉयस भी है, यदि आप किसी एक विशेष सेक्टर में निवेश करना चाहते हैं तो आप ऐसा सेक्टर स्पेसिफिक फंड के द्वारा कर सकते हैं। यहाँ आपको उस सेक्टर की सभी अग्रणी उभरती कंपनियों का फायदा मिलता है, जबकि शेयर आप किसी एक या दो कंपनी का ही खरीदते हैं।

ऐसे में यदि आपके पास पॉवर सेक्टर की किसी कंपनी के शेयर हैं और उसका प्रदर्शन अच्छा नहीं है, जबकि पॉवर की अन्य कंपनियाँ अच्छा कर रही हैं, तो ऐसी स्थिति में आप फँसा हुआ महसूस करेंगे; जबकि यदि आपने म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) के द्वारा किसी सेक्टर विशेष को भी चुना है

तो आपका पैसा उस सेक्टर की मुनाफेवाली विभिन्न कंपनियों में बाँटकर लगाया जाएगा। जाहिर है, यदि उस सेक्टर की चार कंपनियों से औसत रिटर्न मिल रहा होगा

तो वहीं चार कंपनियों से उच्च रिटर्न तथा एक-दो कंपनियों में घाटा भी होगा, लेकिन आपका औसत रिटर्न काफी अच्छा होगा। यही कारण है कि वे निवेशक, जो म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) की किसी स्कीम में लॉन टर्म (लंबी अवधि) के लिए निवेश करते हैं, वे फायदे में रहते हैं।

म्यूचुअल फंड में निवेश लाभदायक – Profitable Mutual Funds in Hindi

प्रत्येक फंड अपने उद्देश्य के हिसाब से सिक्यूरिटीज (प्रतिभूतियों) की विभिन्न श्रेणियों में निवेश करता है। म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) विभिन्न एसेट क्लास, जैसे- इक्विटी, बांड, डिबेंचर, कमर्शियल पेपर, डेब्ट तथा विभिन्न सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करता है।

किस एसेट में कितना निवेश म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) द्वारा किया जाएगा, यह उसकी स्कीम के उद्देश्य पर निर्भर करता है। कुछ स्कीम 100 प्रतिशत इक्विटी (शेयर बाजार) में निवेश करती हैं, वहीं कुछ फंड स्कीम थोड़ा इक्विटी व थोड़ा डेब्ट में निवेश करती हैं।

लेकिन स्कीम कोई भी हो, म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश शेयर बाजार में निवेश की तुलना में किन कारणों से ज्यादा लाभदायक है, यह जानना जरूरी है।

म्युचुअल फंड के फायदे – Advantage Of Mutual Funds in Hindi

डायवरसिफिकेशन – (Diversification)

म्यूचुअल फंड(Mutual Fund) पूंजी का निवेश विस्तारीत रूप से करते है। वो जिस कंपनी में निवेश करते है उसकी प्रथम पूरी जानकारी लेते है। जैसे कि उस कंपनी की मुनाफा कमाने की क्षमता कितनी है इत्यादि।

इसी के साथ वो एक सेक्टर की कंपनी की उसी सेक्टर की दुसरी कंपनी से तुलना करती है और उस सेक्टर के ५ – ७ अच्छी कंपनीयाँ खोजकर निवेश करते है।

उनमें से दो तीन कंपनी के भाव नीचे गए तो भी म्यूचुअल फंड(Mutual Fund) के नेट एसेट में ज्यादा अंतर नहीं पड़ता।

यदि आप शेयर बाजार में छोटी रकम लगाते हैं, अर्थात् यदि आप छोटे निवेशक हैं तो आपको शेयर बाजार में निवेश करने से विविधता नहीं मिल पाती।

आप अपनी सीमित राशि के साथ एक या दो सेक्टर की कुछ कंपनियों में ही निवेश कर सकते हैं; क्योंकि यदि आपको विविध प्रकार के शेयरों में निवेश करना है तो लाखों रुपयों की जरूरत होती है।

यदि आप म्यूचुअल फंड(Mutual Fund) में निवेश करते हैं तो आपके द्वारा निवेशित छोटी राशि भी शेयर बाजार की सभी प्रमुख कंपनियों में निवेशित की जाती है।

उदाहरण के लिए, यदि आपने रिलायंस के इक्विटी फंड में 10,000 रुपए की राशि निवेश की है, तो फंड इन रुपयों को 100 से अधिक अलग-अलग कंपनियों में निवेश कर निवेशक को विविधता का लाभ देता है।

इस विविधता से जोखिम को कम किया जाता है; क्योंकि ऐसा बहुत ही कम होता है कि सभी स्टॉक एक ही समय में एक साथ नीचे गिर जाएँ। चूँकि 100 विभिन्न कंपनियों में फंड के माध्यम से आपका पैसा लगा है

तो यदि बाजार में उतार-चढ़ाव आता है तो कुछ कंपनियों के शेयरों की कीमत यदि बहुत नीचे आ गई होगी तो उसकी भरपाई कुछ कंपनियों में शेयरों की ऊँची कीमत से हो जाएगी।

विविधता (डायवर्सिफिकेशन) द्वारा जोखिम को कम कर निवेशकों को लगातार एक औसत रिटर्न मुहैया करवाते रहना ही म्यूचुअल फंड(Mutual Fund) का सबसे लाभदायक पहलू है।


सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान – (SIP – Systematic Investment Plan)

सिस्टमॅटिक योजना बहुत सारे निवेशकों को पसंद है क्योंकि इसमें नियमित रूप से समय के अंतर से निवेश करना होता है।

इस स्किम में निवेश हर एक महिने में या तीन महिनों में करना होता है। शुरू में कम से कम ५००० रू. का निवेश करना पड़ता है और फिर हर महिने १००० रू. भरने पड़ते है।

म्यूचुअल फंड(Mutual Fund) के माध्यम से आप अपनी मासिक बचत को मासिक, त्रैमासिक व छमाही आधार पर निवेश कर सकते हैं।

उदाहरण के लिए, यदि आप हर महीने 500 रुपए की पूँजी निवेश करना चाहते हैं तो उसे भी आप सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (एस.आई.पी.) के द्वारा शेयर बाजार में निवेश कर सकते हैं।ऐसा ऑप्शन इक्विटी शेयरों में नहीं है। एस.आई.पी. निवेश करने की सरल विधि है।

यह उसी तरह काम करता है, जिस तरह हमारा रिकरिंग डिपॉजिट एकाउंट।एस.आई.पी. के द्वारा निवेशक हर महीने की अपनी डिस्पिॉजिबल इनकम (अतिरिक्त आय) पर अच्छा रिटर्न पा सकता है।

शेयरों में निवेश करने के लिए जहाँ निवेशक को बाजार के नीचे आने का इंतजार करना पड़ता है, वहीं एस.आई.पी. के द्वारा निवेशक (न्यूनतम या अधिकतम) किसी भी स्तर पर निवेश कर सकता है; क्योंकि जैसे-जैसे बाजार ऊपर जाता है, फंड की नेट एसेट वैल्यू (NAV) ज्यादा हो जाती है।

उस समय निवेशक द्वारा फंड में किए गए निवेश पर उसे कम यूनिट्स मिलती हैं, क्योंकि यूनिट का मूल्य बढ़ गया होता है। यदि मार्केट नीचे गिरता है, तब फंड की नेट एसेट वैल्यू भी नीचे आ जाती है, और उतनी ही निवेशित राशि पर उसे ज्यादा यूनिट्स मिल जाती हैं।

इस तरह निवेशित राशि से औसत रिटर्न निवेशक को मिलता रहता है। बाजार में यदि बहुत अस्थिरता हो, यानी अस्थिरता से सेंसेक्स में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है, तब सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान द्वारा किया गया निवेश ज्यादा सुरक्षित व फायदेमंद निवेश माना जाता है।

इसे इस उदाहरण से समझा जा सकता है मान लो आपने किसी अच्छी फंड स्कीम में हर महीने 1,000 रुपए निवेश करने का निर्णय किया तो उसका लाभ आपको किस तरह मिलेगा।

इसे इस तरह उदाहरण से समझा जा सकता है   यानी छह महीनों में आपको हर महीने 1,000 रुपए निवेश करने से कुल 571.77 यूनिट्स प्राप्त हुईं। इस प्रकार लंबी अवधि में बाजार के ऊपर-नीचे जाने से आपको फायदा मिलेगा और अच्छा लाभ प्राप्त होगा।

इसके अलावा एक और फायदा यह है कि यदि आप एस.आई.पी. के द्वारा निवेश करते हैं तो बहुत से म्यूचुअल फंड एंट्री लोड नहीं लेते। वैसे भी अब सेबी ने निवेशकों को म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) से जोड़ने के लिए एंट्री लोड को हटा दिया है।

लेकिन इसके लिए जरूरी है कि निवेशक सीधा म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) हाउस से फंड में निवेश करे। लेकिन यदि निवेशक ब्रोकर के द्वारा फंड की यूनिट्स खरीदता है तो उसे 2.25 प्रतिशत एंट्री लोड देना होगा।

लेकिन कुछ लोग ब्रोकर के द्वारा ही फंड स्कीम लेना ठीक मानते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि 2.25 प्रतिशत एंट्री की एवज में ब्रोकर उन्हें बहुत सी सेवाएँ मुफ्त में देता है।

जो निवेशक सही फंड, एन.ए.वी. की कीमत, बाजार की स्थिति के बारे में जानते समझते हैं, उनके लिए सीधा फंड हाउस से म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश लाभकारी है।

वैसे भी, आजकल सभी म्यूचुअल फंड ए.न.एवी. की जानकारी तथा आपकी यूनिट्स की स्थिति की जानकारी समय-समय पर निवेशक को भेजते रहते हैं।

महत्त्वपूर्ण यह भी है कि यदि आप एक साल के बाद तक ओपन एंडेड स्कीम में बने रहते हैं और अपनी यूनिट्स बेचते हैं तो आपको एग्जिट लोड भी नहीं देना पड़ेगा।

प्रवेश और निकासी की आसान प्रक्रिया – Easy Entry and Exit Process

फंड में निवेश के साथ काफी लचीलापन जुड़ा है। आप अपनी जरूरतों व पर के अनुसार तथा अपने वित्तीय लक्ष्यों को पही मायनों में, सही तरीके से पूरा करने के लि फंड में उपलब्ध विभिन्न विकल्पों को चुन सकते हैं।

अपनी वित्तीय जरूरतों के अनसार आप नियमित निवेश-योजना को चुन सकते हैं, नियमित रूप से निकासी-योजनाचा सकते हैं या समय-समय पर मिलनेवाले डिविडेंड को पुनः निवेश करने की योजना को चुन सकते हैं।

ऐसा लचीलापन शेयर बाजार में निवेशक को नहीं मिलता। जहाँ तक फंड में प्रवेश तथा निकासी की बात है तो वह प्रक्रिया भी बहुत सरल है।

यदि निवेश करना है तो म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) का एप्लीकेशन फॉर्म भरना होता है और यदि यूनिट्स को बाजार में बेचना है तो रिडिंपशन फॉर्म भरना होता है। ये दोनों प्रक्रियाएँ बहुत ही सरल हैं।

आप यह ऑनलाइन भी कर सकते हैं। यदि फिजिकल फॉर्म भरकर फंड में निवेश कर रहे हैं तो इसके लिए सिर्फ अपना परमानेंट एकाउंट नंबर (पैन कार्ड) की फोटोकॉपी, फोटो और स्थायी पते का कोई प्रामाणिक दस्तावेज फॉर्म के साथ संलग्न करना होता है।

दूसरी तरफ शेयर बाजार में निवेश के लिए आपका डिपॉजिटरी (Depository) पार्टिसिपेंट के पास एकाउंट तथा ट्रेडिंग (खरीद-बिक्री) के लिए ब्रोकर के पास एकाउंट होना आवश्यक होता है, जो बहुत से निवशकों को मुश्किल लगता है।

जहाँ तक म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) से निकासी (एग्जिट), अतिरिक्त खरीद या प्लान बदलने की बात है, तो वह प्रक्रिया भी काफी सरल है। म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) हाउस आपके द्वारा निवेशित धन का एकाउंट स्टेटमेंट समय-समय पर भेजते हैं।

उस स्टेटमेंट में यूनिट्स की संख्या, एन.ए.वी. तथा बैलेंस यूनिट्स, उसकी करेंट कॉस्ट तथा करेंट वैल्यू दी जाती है। स्लिप में तीन ऑप्शन होते हैं- पहला एडिशनल पर्चेज रिक्वेस्ट’ का होता है।

मतलब आप उस फंड की और यूनिट्स खरीदना चाहते हैं तो वहाँ यूनिट खरीदने के लिए पैसों का भुगतान चेक/डी.डी. नंबर का ब्योरा देकर उसे फंड हाउस को भेज देना होता है।

दूसरा ऑप्शन ‘स्विच रिक्वेस्ट’ का होता है अर्थात् यदि आप उस फंड के किसी दूसरे प्लान तथा ऑप्शन का चयन करना चाहते हैं तो स्विंच रिटेक्स फॉर्म भरना होता है।

तीसरा ऑप्शन ‘रिडिंप्शन रिक्वेस्ट’ के लिए होता है। इसमें आप अपनी यूनिट्स को नकदी (कैश) में बदल सकते हैं।

म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में एक फॉर्म भर के उसके युनिट खरीद सकते है और दसरा फॉर्म भरके उसमें से निकल भी सकते है। जब शेअर खरीदना होता है

तब आपको शेअर दलाल के पास रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है और डिमेट अकाऊंट (Demat Account) चालू करना पड़ता है। यह तरिका म्यूचुअल फंड (Mutual Fund)में नहीं है।

Tax benefit (टैक्स बेनिफिट) :-

मध्यवर्गीय वेतनभोगियों के लिए टैक्स में बचत के लिए निवेश कई वर्षों से एक ही साँचे में ढला हुआ था।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड, एंप्लॉई प्रोविडेंट फंड, पोस्ट ऑफिस बचत योजना जैसी पारंपरिक निवेश योजनाओं में टैक्स में बचत के लिए निवेश करनेवाले मध्यवर्गीय लोगों को म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) की इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) के रूप में निवेश का ऐसा विकल्प मिला,

जहाँ निवेश करने पर न सिर्फ आयकर की धारा 80(सी) के तहत पूरा 1 लाख रुपए का कर लाभ (टैक्स बेनिफिट) मिलता है, बल्कि नौकरीपेशा लोगों को इस स्कीम से अच्छा-खासा लाभ (रिटर्न) भी मिलता है।

कर छूट का लाभ पाने के लिए वर्षों से निवेश के पारंपरिक विकल्पों में निवेश करनेवाले वेतन भोगियों को जहाँ प्रतिवर्ष निवेश करने से 6 से 8 प्रतिशत की दर से मिलनेवाले रिटर्न में ही संतोष कर लेना पड़ता था,

वहीं म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) की इस स्कीम ने लोगों को ऐसा विकल्प मुहैया करवाया, जहाँ कर-लाभ के साथ अनुमानतः प्रतिवर्ष 15 से 40 प्रतिशत के बीच रिटर्न (शेयर बाजार की स्थिति पर निर्भर) का ‘फील गुड फैक्टर’भी जुड़ा है।

इसके अलावा एक और लाभ म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश का यह है कि इससे | मिलनेवाला डिविडेंड तथा रिटर्न टैक्स फ्री होता है।

यानी उस पर किसी तरह का टैक्स नहीं देना होता। लेकिन यदि आप एक साल से पहले स्कीम से बाहर निकलते हैं तो आपको शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स और एग्जिट लोड देना होगा।

सभी म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) सेबी के साथ रजिस्टर्ड होते हैं और वे सेबी द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अंतर्गत कार्य करते हैं। सेबी म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) के सभी क्रियाकलापों (ऑपरेशंस) की नियमित रूप से देखरेख (मॉनिटर) करता है।

लिक्विडिटी – (Liquidity)

चूँकि म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) बहुत सारे निवेशकों की पूँजी को एकत्र कर शेयरों में लगाता है, इसलिए यहाँ शेयरों से ज्यादा Liquidity (लिक्विडिटी) का लाभ मिलता है। 

अगर आपने ओपन एंडेड स्कीम में निवेश किया है और आपको अपना पैसा वापस जल्दी चाहिए तो आप अपनी फंड यूनिट को बाजार में उस म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) की यूनिट के कुल संपत्ति मूल्य (नेट एसेट वैल्यू) के आधार पर बेच सकते हैं। 

उदाहरण के लिए, आपने यदि ‘टाटा इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड’ की ओपन एंडेड स्कीम में निवेश किया

तब आपको उस फंड की एक यूनिट 10 रुपए यूनिट के हिसाब से मिली और तकरीबन छह महीने बाद आपको पैसों की जरूरत पड़ गई और आपने अपनी यूनिट बेचने का निर्णय किया तो उस समय आपको यूनिट के बाजार मूल्य के हिसाब से पैसा प्राप्त हो जाएगा।

यदि आपने 10 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से यूनिट्स खरीदी थीं और बेचते वक्त उस फंड की कुल संपत्ति मूल्य (नेट एसेट | वैल्यू यानी एन.ए.वी.) बढ़कर 14 रुपए हो जाती है

तो समझिए, आपको 40 प्रतिशत रिटर्न (लाभ) के साथ आपकी राशि मिल जाएगी। 40 प्रतिशत लाभ इसलिए, क्योंकि | 10 रुपए प्रति यूनिट की खरीद पर आपको 14 रुपए मिल रहे हैं।

ऐसा भी हो सकता है कि जब आप फंड की यूनिट बेचना चाहें, तब शेयर बाजार में गिरावट जारी हो तो आपके द्वारा खरीदी गई फंड यूनिट्स की एन.ए.वी. भी नीचे आ जाएगी।

अनुभवी और प्रशिक्षित प्रबंधन – (Experienced and trained management)

म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश कर आप निश्चिंत हो सकते हैं, क्योंकि आप अपना पैसा ऐसे प्रशिक्षित व अनुभवी लोगों के हाथों में सौंपते हैं, जो आपके पैसे को बेहतर तरीके से निवेश कर आपको बेहतर रिटर्न (लाभ) देने की कोशिश करते हैं।

यह उन निवेशकों के लिए तो बहुत ही लाभदायक सिद्ध होता है, जिनमें शेयरों में निवेश की समझ व अनुभव नहीं होता, और न ही वे वित्तीय रूप से इतने मजबूत होते हैं कि वित्तीय सलाहकारों की सेवाएँ ले सकें।

ऐसे में म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) के द्वारा निवेश कर वे बैठे-बिठाए शेयर बाजार में अनुभवी खिलाड़ियों के कौशल का फायदा अपने लाभ के लिए ले सकते हैं।

इसके अलावा फंड में निवेश उन निवेशकों के लिए भी फायदेमंद है, जिनके पास निवेश के लिए पैसा भी है और समझ भी, लेकिन उनके पास शेयर बाजार के उतारचढ़ाव का विश्लेषण करने के लिए समय नहीं है।

उन्हें भी म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश से काफी फायदा व सुविधा मिलती है।

अनुभवी व योग्य प्रोफेशनल्स की रिटर्न टीम लगातार कंपनियों के प्रदर्शन व हालात का विश्लेषण करती रहती है और निवेश के लिए उन कंपनियों को चुनती है, जो स्कीम के उद्देश्य को पूरा कर सकें।

प्रोफेशनल मॅनेजमेंट – (Professional Management)

म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) की संस्था में सभी उच्च शिक्षित व्यक्तियों का सहभाग होता है। जैसे कि इंजिनिअर, एम.बी.ए, सी.ए., वैगरह व्यक्तियों को इस क्षेत्र का अच्छा अनुभव होता है।

वे हमेशा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार पर लक्ष्य केंद्रीत करते है और समय समय पर पोर्टफोलीओ में जरूरी बदलाव करते रहते

नेट एसेट वॅल्यू – (NAV-Net Asset Value)

म्यूचुअल फंड(Mutual Fund) याने अनेक लोगों से कम ज्यादा रक्कम जमा करके एकत्रित किया हुआ फंड।

जो शेअर बाज़ार में अथवा गव्हरमेंट सिक्योरिटीज में निवेश किया जाता है और वह युनीट से दर्शाया जाता है। उससे मिलने वाले फंड को म्यूचुअल फंड(Mutual Fund) कहते है।

म्युचुअल फंड में निवेश करनेवाले को युनिट दिए जाते है (शेअर बाज़ार में निवेश करनेवाले को शेअर मिलते है)।

निवेश किए पैसों पर जो कमाई होती है उसका खर्च निकालकर बचे हुए पैसों के हिसाब से युनिट के भाव कम ज्यादा होते है। उसे हम नेट अॅसेट वॅल्यू कहते है।

उदाः एक म्यूचुअल फंड(Mutual Fund) ने उसके १०० लाख युनीट की रू. १० कीमत से बिक्री करके १० करोड़ रूपए जमा किए। खर्च और मॅनेजमेंट फिस निकालकर बचे हुए फंड को वह शेअर अथवा सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करता है।

समझ लीजिए कि तीन महिने के बाद उस किए हुए निवेश का बाजार मूल्य १४ करोड ८६ लाख हुआ। तो अब एक युनिट का NAV ( Net Asset Value) = १४,८६,००,००० / १,००,००,००० = रू. १४.८६०

म्यूचुअल फंड के प्रकारTypes Of Mutual Funds in Hindi

वर्तमान में बहुत से म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) उपलब्ध है और उनके पास विविध स्किम उपलब्ध होते है। अब निवेशक को निश्चित क्या करना है। वह उन पर कितना खतरा ले सकते है और कौनसे स्किम में पैसा लगाना है, यह तय करते है।


ग्रोथ फंड – (Growth Fund)

इस फंड में शेअर की कीमत में वृद्धी का लाभ मिलता है और यह फंड सिर्फ ज्यादा ग्रोथ देनेवाली कंपनी के शेअर में लगाया जाता है। वह कंपनी डिविडंट नहीं देती तो भी चलेगा।


इन्कम फंड – (Income Fund)

इस म्यूचुअल फंड(Mutual Fund) में निवेश किया तो अंदाजे से १२ या १५ प्रतिशत लाभ | मिलता है और यह लाभ सामान्यत: पहले वर्ष से ही शुरू होता है।  

कुछ म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) तो साल में तीन चार बार डिविडंट देते है। इस फंड में धोखा कम है।


मनी मार्केट फंड – लिक्विड फंड – (Money Market Fund – Liquid Fund)

इस फंड में खतरे का प्रमाण कम होता है और दुसरे फंड के मुकाबले इसमें लाभ कम होता है। इसका एवरेज इन्कम रेट बैंक के फिक्स डिपोजिट से थोड़ा अधिक है।


गिल्ट फंड – (Gilt Fund)

अगर निवेशक को थोड़ा भी रिस्क न लेते हुए निवेश करना है तो इसमें पैसा लगाते है। क्योंकि यह फंड सिर्फ सरकारी सिक्योरिटीज में पैसे लगाता है।


इक्विटी लिंक सेविंग स्कीम – (Equity Link Saving Scheme)

जिस व्यक्ति की वार्षिक आय ज्यादा है, उनके लिए यह योजना बहत लाभदायक है क्योंकि उसका लॉकिंग समय तीन वर्ष का है।

अगर निवेशक ने किसी कारण से उसके युनिट्स की बिक्री जल्दी की तो उनको इन्कम टॅक्स का फायदा नहीं मिलता। अगर आपको निवेश अधिक समय के लिए रखनी है तो रख सकते है।

इसमें खतरे का प्रमाण ऊपर दिए मुद्दो से अधिक है। वैसे ही फायदा भी अधिक है। इसका फायदा तकरीबन २२ से २८% होता है।


इंडेक्स फंड – (Index Fund)

इस फंड में फायदा अथवा नुकसान इंडेक्स पर आधारित होता है। पर जो निवेशक खतरा उठाने के लिए तैयार है, उनके लिए यह फंड एकदम वरदान स्वरूप है। जो आप इस किताब के पाठ क्रमांक २७ में देख सकते है।

२००५ में सेंसेक्स ३००० पॉइन्ट से बढ़ा और वह २००६ में ४००० पॉइन्ट ज्यादा बढ़ा था। यह दर्शाता है कि निवेशक ने सोचा भी नहीं होगा उतना फायदा उसे मिलता है।

ऐसा भी हुआ है कि केतन पारेख के समय इंडेक्स बहुत नीचे आया था और निवेशकों को बहुत नुकसान हुआ था। वैसे ही जब फंड में इंडेक्स स्थिर होता है तब फायदे का प्रमाण एकदम कम हो जाता है। उस समय इंडेक्स की मुव्हमेंट साईड वे होती है।

कैसे म्युचुअल फंड पैसा बनाते हैं? – How Mutual Funds Make Money in Hindi

  1. शेयर बाजार में या बांड में निवेश कर डिविडेंड या ब्याज का लाभ पाना।
  2. कीमतें बढ़ने पर फंड द्वारा सिक्यूरिटीज को बेचने से होनेवाला लाभ, जिसे कैपिटल गेन’ कहा जाता है, जिसे फंड हाउस अपने निवेशकों के बीच बाँट देते हैं। म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) अपना घटा शुल्क व व्यय या तो अपने यूनिट होल्डरों में बाँट देता है या उसे अपने एन.ए.वी. की वृद्धि के लिए फंड में पुनः निवेश कर देता है। परिणामस्वरूप निवेशक को एक ओर फंड से मिलनेवाले डिविडेंड द्वारा तथा दूसरी ओर एन.ए.वी. में वृद्धि के द्वारा आमदनी होती रहती है।

हमने सीखा (We learned)

इस ब्लॉग में हमने म्यूचुअल फंड क्या है?, म्यूचुअल फंड की कार्य-प्रणाली, म्यूचुअल फंड के प्रकार, म्युचुअल फंड के फायदे और कैसे म्युचुअल फंड पैसा बनाते हैं? ये सब हिंदी में सीखा।

हम आशा करते है की हमारी ये म्यूचुअल फंड क्या है? – Mutual Fund Guide in Hindi ब्लॉग पोस्ट आपको पसंद आयी होगी अगर आपको शेयर मार्किट से जुड़ा कोई भी सवाल है तो आप कृपया कमेंट में जरूर पूछे।

।। धन्यवाद ।।

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6 टिप्पणियाँ

Shriram Prabhakar Puranik · जनवरी 28, 2021 पर 10:13 पूर्वाह्न

I want this type of information as like as mutual fund data.

स्विंग ट्रेडिंग क्या है? - What Is Swing Trading In Hindi · फ़रवरी 4, 2021 पर 8:00 अपराह्न

[…] म्यूचुअल फंड क्या है? – Mutual Fund Guide in Hindi […]

स्टॉक अ‍ॅनालिसिस के प्रकार - Types Of Stock Market Analysis In Hindi · मार्च 4, 2021 पर 3:33 अपराह्न

[…] म्यूचुअल फंड क्या है? – Mutual Fund Guide in Hindi […]

हमेशा शेयर बाजार के बारे में पूछे जानेवाले प्रश्न - Share Market Knowledge In Hindi · मार्च 4, 2021 पर 3:34 अपराह्न

[…] म्यूचुअल फंड क्या है? – Mutual Fund Guide in Hindi […]

डेब्ट इनवेस्टमेंट क्या है? - Debt Investment In Hindi · मार्च 13, 2021 पर 7:54 अपराह्न

[…] इसमें बैंक, फायनानशियल इनस्टीटयुशन, म्युचुअल फंड, प्रोविडन्ट फंड, इनशुरन्स कंपनियाँ, […]

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