Online Share Treading क्या है

तो वर्चुअल ट्रेडिंग प्लेटफार्म की माध्यम से शेयर को खरीदने और बेचने की सुविधा को ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग (Online Share Treading) कहते है.

ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग (Online Share Treading) आप मोबाइल , कंप्यूटर और लैपटॉप से करते है और ज्यादा तर ये सुविधा आपको Discount Broker या Stock Broker प्रोवाइड करती है

ये ब्रोकर आपको सिर्फ शेयर ही नहीं आप आईपीओ, म्यूच्यूअल फण्ड, कमोडिटी और कर्रेंसी में भी आप निवेश कर सकते है

स्टॉक एक्सचेंज (Stock Exchange) में ट्रेडिंग (शेयरों की खरीद-फरोख्त) के कई तरीके हैं। हालाँकि ट्रेडिंग की एक सुनिश्चित प्रक्रिया होती है। इस प्रक्रिया में कई सारे लोग भाग लेते हैं।

खरीदार अपने ब्रोकर (Broker) से जुड़ा होता है और ब्रोकर (Broker) का लिंक स्टॉक एक्सचेंज (Stock Exchange) के साथ होता है। इसी प्रकार इस ट्रांजेक्शन (Transaction) के दूसरी तरफ बिक्रीकर्ता अपने ब्रोकर (Broker) के द्वारा एक्सचेंज (Exchange) से जुड़ा होता है।

स्टॉक एक्सचेंज (Stock Exchange) एक ऐसा प्लेटफॉर्म (मंच) बन जाता है, जहाँ सभी एक साथ इकट्ठे हो जाते हैं और उस जगह पर डिमांड या सप्लाई (Demand & Supply) का मिलान होता है और खरीद-बिक्री होती है।

आधुनिक तकनीक के आ जाने से स्टॉक मार्केट (Stock Market) में होनेवाले लेनदेन (ट्रेडिंग) के तरीके में भी काफी बदलाव आया है।

एक्सचेंज के द्वारा होनेवाली ट्रेडिंग के फायदे

पारदर्शिता

स्टॉक एक्सचेंज (Stock Exchange) द्वारा ट्रेडिंग की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होती है। निवेशक कंप्यूटर स्क्रीन पर शेयर की सबसे उचित कीमत पर खरीद व बिक्री की प्रक्रिया का निपटान स्वयं करता है।

निवेशक को कंप्यूटर स्क्रीन पर मार्केट में चल रही शेयर की कीमत पल-पल में मिलती है और वह जिस कीमत पर जितने शेयर खरीदना या बेचना चाहता है, उस कीमत व शेयरों की संख्या को कोट कर ‘ऑर्डर प्लेस’ कर सकता है और शेयर की खरीद व बिक्री अपनी इच्छानुसार कर सकता है।

उदाहरण के लिए

यदि निवेशक को 100 शेयर एन.टी.पी.सी. के लेने हैं और उस शेयर का उस समय बाजार भाव 90 रुपए प्रति शेयर है तथा उस समय निवेशक यदि यह तय करता है कि उसे इस भाव में शेयर लेने हैं, तो वह शेयरों की संख्या व भाव का उल्लेख कर शेयरों की खरीद कर सकता है।

ऑर्डर एग्जीक्यूट (Order executive) होने के बाद कंप्यूटर पर पता चल जाता है कि उसके कितने शेयर किस कीमत पर मिले हैं। यदि लिमिट ऑर्डर (Limit Order) नहीं दिया है और मार्केट ऑर्डर (Market Order) पर शेयरों की खरीद व बिक्री की गई है

तो आपके द्वारा ऑर्डर दिए जाने के बाद आपको जिस बाजार कीमत पर शेयर की बिक्री या खरीद हुई है, उसका पूरा उल्लेख कंप्यूटर स्क्रीन पर तुरंत आ जाता है।

यदि ट्रेड 90 रुपए 70 पैसे में हुई है तो आपको वह सही कीमत पता चलती है। इसलिए शेयर की कीमत के बारे में निवेशक बिलकुल निश्चिंत रह सकता है। कीमत को लेकर उसे धोखा होना नामुमकिन होता है।

प्रमाण

इस बात का निश्चित प्रमाण आपके पास होता है कि आपके द्वारा किया गया ट्रांजेक्शन किस तरह हुआ।

लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड आपके पास होता है, इसलिए आपको कल कोई पार्टी यह नहीं कह सकती कि ट्रांजेक्शन (लेन-देन) नहीं हुआ था।

आय करों का कम होना

जब शेयरों का लेन-देन (टांजेक्शन) देश के प्रमख एक्सचेंजो म हाता है, तब आयकर की दर काफी न्यूनतम होती है।

जहाँ लंबी अवधि में हुए पूँजी लाभ लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (Long Term Capital Gains) पर किसी तरह का टैक्स (कर) नहीं लगता है, वहीं कम अवधि म हुए पैसो का लाभ शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (Short Term Capital Gains) पर 15 प्रतिशत की दर से आयकर निवेशक को देना होता है।

गौरतलब है कि पहले शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (Short Term Capital Gains) टैक्स 10 प्रतिशत था, जिसे वर्ष 2008 के बजटीय प्रावधान में 15 प्रतिशत कर दिया गया।

शेयर बाजार में निवेश के माध्यम

शेयर बाजार में निवेश करने के कई रास्ते हैं तथा निवेशक को इन विभिन्न रास्तों की जानकारी होनी चाहिए, ताकि इन रास्तों से जुड़े जोखिम को भाँपकर वह अपने लिए योग्य रास्ता अपना सके।

मार्केट सेग्मेंट

एक सामान्य निवेशक शेयर बाजार में कैश सेग्मेंट के माध्यम से निवेश करता है। अर्थात् जब कभी वह शेयर खरीदता है तो उसे शेयरों का खरीद-मूल्य सेटलमेंट साइकिल की अवधि में चुकाना पड़ता है।

शेयरों की ट्रेडिंग का दूसरा तरीका ‘मार्जिन सिस्टम’ है। इसमें शेयर ब्रोकर (Broker) अपने ग्राहक को मार्जिन मनी पर ट्रेडिंग करने की सुविधा प्रदान करता है।

इस प्रकार की ट्रेडिंग में निवेशक (क्लाइंट) को शेयरों की खरीद का पूरा मूल्य नहीं चुकाना होता, अपितु आंशिक मूल्य (उदाहरण के तौर पर 30 प्रतिशत) ही चुकाकर वह पूरी ट्रेडिंग का लाभ उठा सकता है।

इस आंशिक मूल्य से ऊपर की राशि शेयर ब्रोकर (Broker) वहन करता है। इस विधि में कोई निवेशक (क्लाइंट) अपनी आर्थिक क्षमता से कई गुना अधिक आकार के निवेश से जुड़कर लाभ कमा सकता है।

ट्रेडिंग का पारंपरिक तरीका

पारंपरिक तरीके में खरीदार तथा बिक्रीकर्ता के बीच में शेयर दलाल माध्यम का काम करता है। निवेशक शेयर ब्रोकर (Broker) के पास अपना एकाउंट खोलता है, जिसके साथ वह ट्रेडिंग करेगा।

जब कभी ट्रांजेक्शन (खरीद-फरोख्त) की आवश्यकता होती है, तब निवेशक शेयर दलाल को फोन करता है तथा अपना एकाउंट नंबर बताकर खरीद-फरोख्त का ऑर्डर प्रस्तुत करता है।

ट्रांजेक्शन पूरा होने पर शेयर ब्रोकर ‘कॉण्ट्रेक्ट नोट’ तथा निर्धारित रकम का बिल बनाता है। निवेशक चेक के माध्यम से यह रकम शेयर ब्रोकर अदा करता है।

इस प्रक्रिया को ‘पे-इन’ सिस्टम कहते हैं। इसके पश्चात् खरीदे गए शेयर पे-आउट तारीख से पहले ब्रोकर के खाते में दर्ज कर दिए जाते हैं ।

इस प्रक्रिया में निवेशक को शेयर ब्रोकर के पास उपस्थित रहना अनिवार्य होता है, ताकि वह सारी प्रक्रिया को स्वयं देख सके तथा आनेवाली किसी समस्या का निवारण तुरंत किया जा सके।

ट्रेडिंग के पारंपरिक तरीके से लाभ

  • आसान तरीका है।
  • आमने-सामने तथा विश्वास होने पर फोन पर ट्रेडिंग की जा सकती है।
  • लचीलापन-नकदी की उपलब्धता संबंधी छोटी-मोटी समस्याएँ आपसी विश्वास से निपटाई जा सकती हैं।
  • शेयर दलाल से अतिरिक्त जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है।
  • इसमें शेयर दलाल का निवेशक से सीधा संपर्क रहता है।

पारंपरिक तरीके के नुकसान

  • निवेशक को स्वयं या अपने प्रतिनिधि को ट्रांजेक्शन के दौरान उपस्थित रहना अनिवार्य होता है।
  • इस वजह से निवेशक को परेशानी होती है।

शेयर ट्रेडिंग का ऑनलाइन तरीका

इस तरीके में निवेशक द्वारा शेयरों की ट्रेडिंग ब्रोकर (Trading Broker) के माध्यम से ही की जाती है। यद्यपि ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग (Online Share Trading) में ब्रोकर अदृश्य रहता है तथा इसका कोई नाम या पहचान नहीं होती।

ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग (Online Share Trading) में ब्रोकर की भूमिका इंटरनेट तथा अन्य सिस्टम, जो वेबसाइट के माध्यम से कार्य करते हैं, ने ले ली है।

इस प्रकार पारंपरिक तरीके से अलग ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग (Online Share Trading) में कुछ बदलाव आ गया है तथा इसमें निवेशक का अनुभव भी पूर्णत: अलग रहता है।

इसमें ब्रोकर (Broker) की वेबसाइट पर निवेशक को रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है तथा उसके नाम से ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग एकाउंट (Online Share Trading Account) खोला जाता है।

जब कभी निवेशक को ट्रांजेक्शन (ट्रेडिंग) करनी होती है, वह ब्रोकर (Broker) की वेबसाइट पर अपना नाम तथा पासवर्ड डालकर ब्रोकर की वेबसाइट के ट्रेडिंग पेज पर अपनी निर्धारित खरीद-बिक्री दर्ज करते हैं।

इसमें मार्केट ऑर्डर (Market Order) तथा लिमिट ऑर्डर (Limit Order) दोनों सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं। निवेशक के खाते में आवश्यक धन जमा रहने पर तथा पासवर्ड सही होने पर यह ट्रांजेक्शन बाजार में मान्य हो जाता है।

निवेशक के खाते में से शेयरों का खरीद मूल्य एवं ब्रोकर (Broker) का कमीशन निकल जाता है तथा उसके डी-मैट खाते (Demat Account) में खरीदे गए शेयर जमा हो जाते हैं।

शेयरों की बिक्री की अवस्था में निवेशक के डी-मैट खाते से शेयर स्थानांतरित हो जाते हैं तथा उसके बैंक एकाउंट (Bank Account) में शेयरों का बिक्री मूल्य कमीशन घटाकर दर्ज हो जाता है।

ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग के फायदे

  • निवेशक अपने समय व सुविधानुसार ट्रांजेक्शन कर सकता है।
  • निवेशक को शारीरिक रूप से उपस्थित रहने की जरूरत नहीं होती।
  • फॉर्म आदि भरने की प्रक्रिया से मुक्ति मिलती है। निवेशक के लिए प्राथमिक बाजार तथा द्वितीयक बाजार में निवेश बहुत आसान व सरल होता है।
  • गलती की संभावना नगण्य होती है।

ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग के नुकसान

  • आपका एकाउंट हैकर्स द्वारा हैक किया जा सकता है।
  • जो लोग कंप्यूटर व इंटरनेट से अवगत नहीं हैं, वे इस पद्धति का लाभ नहीं उठा सकते हैं।
  • इलेक्ट्रॉनिक गति से ट्रांजेक्शन होने के कारण निवेशक को अपना निर्णय बदलने की सुविधा नहीं होती है।

।। धन्यवाद ।।

Important Links :-

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Categories: Share Market

4 Comments

Index क्या है? - Assetinvestock · November 8, 2020 at 11:08 pm

[…] Online Share Treading क्या है? – Assetinvestock […]

स्टॉक में निवेश करने के विभिन्न तरीके - Different Ways To Invest In Stocks In Hindi · November 9, 2020 at 6:49 pm

[…] Online Share Treading क्या है? – Assetinvestock […]

शेयर सूची (स्टॉक टेबल) को पढ़ने का तरीका - How To Read A Stock List In Hindi. · November 10, 2020 at 10:28 pm

[…] Online Share Treading क्या है? – Assetinvestock […]

कमोडिटी मार्केट क्या है? - What Is Commodity Market In Hindi. · November 20, 2020 at 9:14 pm

[…] स्टॉक मार्केट ऑनलाइन ट्रेडिंग सिस्टम की तरह ही कॉमोडिटी एक्सचेंज भी ऑनलाइन ट्रेडिंग सिस्टम पर ही चलते हैं। […]

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