फ्युचर्स की किमत निश्चित करने की पद्धती – Pricing of Futures in Hindi.

कॉन्टॅक्ट करने के बाद जैसे डीलीवरी की तारीख पास आती है वैसे ही कॉन्टॅक्ट के अंतर्गत आनेवाले असेट के भाव फ्यूचर्स के कॉन्ट्रॅक्ट के भाव के पास आता जाता है। वैसे न होने पर आर्बिट्रेज का मौका उपलब्ध होता है।

फ्युचर्स का भाव, स्पॉट भाव से ज्यादा होने पर हम स्पॉट बाजार से खरीदी कर के फ्युचर्स के बाजार में बिक्री (शॉर्ट सेलिंग) कर के एक्सपायरी पर शेअर्स की डिलीवरी दे कर उस से मुनाफा ले सकते है।

फ्युचर्स का भाव स्पॉट भाव से कम होने पर हम असेट की खरीदी कर के फ्युचर्स के कॉन्ट्रॅक्ट में उस का शॉर्ट सेलिंग कर सकते है।

याने की असेट की कुछ कालावधी जाने के बाद फ्युचर्स की किमत पर बिक्री करने के लिए सहमत होना चाहिए

इस के बाद हमें उस की डीलीवरी देनी पडेगी और बाद में उस का मुनाफा निकाल लेने पर असेट लेने की इच्छा करनेवाले काई भी व्यक्ति को दिर्घ कालावधी का फ्युचर्स कॉन्ट्रैक्ट करना पडता है और स्पॉट भाव बचाने के लिए डीलीवरी लेनी पडती है।

इसको समझने के लिए कॉस्ट ऑफ कॅरी मॉडेल की जानकारी मिलना जरूरी है उस के अनुसार भविष्य में किसी भी असेट की किमत क्या होगी इस का अंदाजा लगाने के लिए किमत के संबंधित गणित को समझना जरूरी है।

हम असेट का भविष्य का भाव निश्चित करने की गणित की जानकारी हासिल करेंगे उस के पहले हमें भविष्य की तारीख को असेट का वास्तव में रहनेवाला भाव और अभी के फ्युचर्स का भाव के फर्क को समझना जरूरी है।

कॉस्ट ऑफ कॅरी मॉडेल क्या है? – Cost – of – Carry Model in Hindi.

कॉस्ट ऑफ कॅरी मॉडेल बिना आर्बिट्रेज का भाव निश्चित करनेवाला मॉडेल है।

आर्बिट्रेज का मुनाफा लेने का मौका न मिल पाए इस प्रकार से उसकी किमत निश्चित करना यह फ्युचर्स की कीमत निश्चित करने का मुख्य हेतु है।

कॉस्ट ऑफ कॅरी मॉडेल के आधार पर फ्यूचर्स का भाव निचे दिए गणित के अनुसार निश्चित किया जाता है।

फ्युचर्स का भाव = स्पॉट भाव + कॅरी कॉस्ट – कॅरी रीटर्न (Futures Price = Spot Price + Carry Cost – Carry Return)

फ्युचर्स के भाव को एफ (F) संक्षिप्त नाम से और कॅरी कॉस्ट को सीसी (CC) संक्षिप्त नाम से पहचाना जाता है। उस में कॉन्ट्रॅक्ट के अंतर्गत करार किया हो तो असेट में निवेश की गई रकम के ब्याज को गिनती में लिया जाता है।

दसरे शब्द में बताना हो तो वह खरीदी करते समय दी गई रक्कम पर उस के देय मुद्दत की कालावधी पर लगाए ब्याज को गिनती में लिया जाता है।

निवेश करने के बाद कॉन्ट्रॅक्ट की मुद्दत पूरी होने तक उस पर मिली जादा कमाई को कॅरी रिटर्न (CR) कहते है।

इस में कॉन्ट्रैक्ट के अंर्तगत आने वाले असेट की देय मुद्दत पूरी होगी तब तक उस पर मिली डीवीडन्ट की कमाई का समावेश होता है।फ्युचर्स के भाव को कॅरी कॉस्ट से जोड़ कर कॅरी रीटर्न से घटाने पर मिलने

वाला भाव फ्युचर्स के जितना होना चाहिए। अगर ऐसा ना हो तो निवेशक को आर्बिट्रेज करने का मौका मिलता है। यह आगे के उदाहरण में समझाया है।

उदाहरण (Example):

मानो के ३१ दिसंबर २००५ को बीएसएनएल के शेअर का भाव २२० रूपए था। उसी दिन बीएसएनएल के शेअर का मार्च २००६ के फ्युचर्स का भाव २३० रूपए था। फ्युचर्स के इस कॉन्ट्रॅक्ट की खासियत और जानकारी निचे दी गई है।

कॉन्टॅक्ट पूरा होने की तारीख
ब्याज का दर
बीएसएनएल का फेस वैल्यू
स्टॉक पर साल के अंत मे मिलनेवाला डीवीडन्ट
तीन महीना (०.२५साल)
वार्षिक १० प्रतिशत
रू.१०
३१-३-२००६ के पहले देने को
पात्र २५ प्रतिशत

उपर दी जानकारी के आधार पर ३१ दीसम्बर २००५ को बीएसएनएल का २२० रूपए किंमत के शेअर का फ्युचर्स का भाव निचे के अनुसार होना चाहिए।

= २२०+ (२२० x ०.१० ४ ०.२५) (०.२५ x १०) = २२३.००

यहाँ १० रूपए उसकी मुल किंमत याने की फेस व्हल्यु है। कॉस्ट ऑफ कॅरी के क्रायटेरिया के अनुसार फ्युचर्स का भाव २२३ रूपए हो जाता है।

यह २२३ रूपए का भाव मार्च २००६ के भाव से कम है। उस परिणाम से बाजार के खिलाडी के लिए आर्बिट्रेज का मौका निर्माण होता है। क्योंकि फ्युचर कॉन्ट्रैक्ट की देय मुद्दत पूरी होने पर दोनो भाव एक समान हो जाते है।

जब एफ > (एस + सीसी – सीआर) होता है तब ओवरप्राईज फ्युचर्स की बिक्री किजीए और इस फ्युचर्स के कॉन्ट्रॅक्ट के अंतर्गत आने वाले असेट को स्पॉट बाजार से खरीदी किजीए और फ्युचर्स का कॉन्ट्रॅक्ट पूरा होने तक उनको संभाल के रखे।

इस स्थिति को कॅश ॲन्ड कॅरी आर्बिट्रेज कहा जाता है। जब एफ < (एस + सीसी – सीआर) होती है तब (अंडरप्राईज) फ्युचर्स की खरीदी किजीए और इस कॉन्ट्रॅक्ट के अंतर्गत आने वाले असेट का स्पॉट बाजार में शॉर्ट सेलिंग किजीए।

शॉर्ट सेल करते समय आपको जो रकम मिलती है उस रकम की फ्युचर्स कॉन्ट्रॅक्ट पूरा होने की तारीख पास आने के । पहले बाजार में निवेश किजीए। इस स्थिति को रिवर्स कॅश ॲन्ड कॅरी आर्बिट्रेज कहा जाता है।

।। धन्यवाद ।।

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श्रेणी: Share Market

2 टिप्पणियाँ

Stock Futures क्या है? - What Are Stock Futures In Hindi. · दिसम्बर 7, 2020 पर 11:17 अपराह्न

[…] […]

ऑप्शन क्या है? - What Are Options In Hindi. · मार्च 4, 2021 पर 4:13 अपराह्न

[…] […]

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