ऑप्शन की किमत निश्चित करने की पद्धती – Pricing of Options in Hindi.

ऑप्शन (Options in Hindi):

ऑप्शन दो प्रकार के होते है – कॉल ऑप्शन और पुट ऑप्शन।

कॉल ऑप्शन में खरीदार को खरीदी का अधिकार मिलता है, परंतु उस पर खरीदी करने की सख्ती नहीं की जाती।

कॉन्ट्रैक्ट के अंतर्गत निश्चित किए असेट को निश्चित किए भाव पर अथवा भविष्य में निश्चित की गई तारीख को खरीदी करने की जिम्मेदारी उन पर नही होती है।

पुट ऑप्शन में खरीदार को बिक्री करने का अधिकार मिलता है, परंतु उस पर बिक्री करने की सख्ती नही की जाती।

कॉन्ट्रॅक्ट के अंतर्गत निश्चित किए असेट को निश्चित किए भाव पर अथवा भविष्य में निश्चित की गई तारीख को बिक्री करने की जिम्मेदारी उन पर नही होती है।

ऑप्शन की किमत निश्चित करने का तरिका (Pricing of Options in Hindi):

ऑप्शन के कॉन्ट्रॅक्ट की किमत निश्चित करने के लिए हमें मददगार होंगे ऐसे कई अलग अलग मॉडल है।

इन में से बहुत से मॉडल ब्लॅक स्कोलस् मॉडल पर आधारित है जिसका उपयोग यूरोपियन ऑप्शन की किमत निश्चित करने के लिए किया जाता है।

ऑप्शन का भाव निश्चित करने के लिए ब्लॅक स्कोलस् का फॉर्म्युला (Black- Scholes Options Pricing Formula in Hindi):

निचे दिखाए गए आधार पर ब्लॅक स्कोलस् ने ऑप्शन प्राईसिंग का फॉर्म्युला निश्चित किया है।

  • हमें परफेक्ट मार्केट में व्यवहार करने चाहिए। याने की इस बाजार के ट्रान्झाक्शन के लिए कोई भी किमत नही चुकानी पडती है। उसी तरह से टॅक्स भी नही भरना पडता है। इस बाजार में आर्बिट्रेज का कोई भी मौका प्राप्त नही होता है।
  • फंड एकसमान जोखिम के बिना ब्याज दर से उधार ले सकते है। या उधार पैसे दे सकते है।
  • स्टॉक पर कोई भी डिविडन्ड नही चुकाया जाता है।
  • कॉन्ट्रॅक्ट पुरा होने से पहले कोई भी ऑप्शन को अमल (एक्ससाईझ) नही कर सकता। कॉन्ट्रॅक्ट पुरा होने की तारीख को ही ऑप्शन को अमल (एक्ससाईझ) किया जा सकता है।
  • शेअर्स की कीमतों में निरंतर बदलाव होता रहता है।

ऑप्शन के एक उचित मूल्य (C) की गणना के लिए ब्लॅक स्कोलस् ने निचे दिया हुआ फॉर्म्युला बताया है।

C=SN (di) -Ke (-rt) n(d2)

Where:

C= Theoretical call premium

S=Current Stock price

t=time until option expiration

K = opti on striking price

r=risk – free interest rate

N=Cumulative standard normal distribution

e=exponential term (2.7183)

Pricing of Options in Hindi

Pricing of Options

s = standard deviation of stock returns

In = natural logarithm

N (dı) and N (d2) represent the possibilities that of less than di and d2 respectively will occur in a normal distribution that has a mean of 0 and a standard deviation of 1.

उदाहरण (Example):

निचे दिखाए गए विषेशतावाले कॉल ऑप्शन की कल्पना कीजिए।

शेअर्स की किमत (s) = रू.९०
अमल में आनेवाली किमत (K) = रू.१००
कॉन्ट्रॅक्ट पूरा होने की तारीख = तीन महिने अर्थात ०.२५ वर्ष
जोखिम का दबाव (s) = ५० प्रतिशत अथवा ०.५०
निवेश (E) = २.७१८२८
जोखिम के बिना ब्याज का दर = वार्षिक १० प्रतिशत।

ब्लॅक स्कोलस् फॉर्म्युला का उपयोग करके हमें ऑप्शन का उचित मूल्य C = ५.०३ मिलता है।

अब अगर बाजार में यह कॉल ऑप्शन का ट्रेडींग ५.०३ से ज्यादा भाव पर हो रहा हो तो निवेशक को कॉल ऑप्शन को बेचना चाहिए और अगर ऑप्शन का ट्रेडींग ५.०३ से कम भाव पर हो रहा हो तो निवेशक को कॉल ऑप्शन को खरीदना चाहिए।

ऑप्शन के भाव पर परिणाम करनेवाले घटक (Factors Affecting Options Price in Hindi):

ऑप्शन की किमत पर विविध घटक परिणाम करते है, ऐसा देखने को मिलता है। इन में से हर एक घटक में होने वाले परिवर्तन से ऑप्शन की किमत पर होनेवाले परिणाम का हमें अध्ययन करना चाहिए।

यह समझने के लिए, एक समय पर एक घटक के बगैर सभी अन्य घटको में कोई भी परिवर्तन नही हुआ ऐसा अनुमान करके फिर उसके परिणाम का हमें अभ्यास करना चाहिए।

निचे दिए गए टेबल में कॉल और पुट ऑप्शन पर इन घटक के कारण होनेवाले परिणाम की जानकारी दी गई है।

घटक कॉल ऑप्शन पुट ऑप्शन
शेअर का वर्तमान भाव स्टॉक के मुल्य में वृद्धी होने से
कॉल ऑप्शन के प्रीमियम
में बढत होती है।
स्टॉक के मुल्य में वृद्धी होने से पुट ऑप्शन के प्रीमियम में गिरावट होता है।
कॉन्ट्रॅक्ट पूरा होने की कालावधी। कॉन्ट्रॅक्ट पूरा होने की कालावधी
जितनी दूर होती है उतना
अधिक प्रीमियम कॉल
ऑप्शन में
लिया जाता है।
कॉन्ट्रॅक्ट पूरा होने की कालावधी जितनी दूर होती है उतना अधिक प्रीमियम पुट ऑप्शन में लिया जाता है।
किमत में होनेवाला उतार चढाव। कॉल ऑप्शन के कॉन्टॅक्ट के अंतर्गत
आने वाले असेट की किमत में जितना
अधिक उतार चढाव निर्माण होगा
उतने अधिक प्रमाण में
उस पर प्रीमियम लिया जाता है।
पुट ऑप्शन के कॉन्टॅक्ट के अंतर्गत आने वाले असेट की किमत में जितना अधिक उतार चढाव निर्माण होगा उतने अधिक प्रमाण में उस पर प्रीमियम लिया जाता है।
स्ट्राईक प्राईज स्ट्राईक प्राईज जैसे जैसे उपर जाती है वैसे वैसे कॉल ऑप्शन के जरिए फायदा मिलने की संभावना कम होती है इसलिए उस पर लिए जाने वाले प्रीमियम में कमी होती है। स्ट्राईक प्राईज जैसे जैसे उपर जाती है वैसे वैसे पुट ऑप्शन के जरिए फायदा मिलने का मौका सुधरता जाता है इसलिए उस पर लिए जाने वाले प्रीमियम में भी बढत होती जाती है।
ब्याज दर ब्याज का दर जितना अधिक होता है कॉल ऑप्शन के प्रीमियम का भाव भी उतनाही ज्यादा होता है। ब्याज का दर जितना अधिक होता है पुट ऑप्शन के प्रीमियम का भाव भी उतनाही ज्यादा होता है।
नकद डिविडन्ड शेअर का एक्स डिविडन्ड दर सामान्यरूप से डिविडन्ड के भाव की तुलना में कम देखने को मिलता है। हर शेअर के पिछे मिलनेवाले नकद डिविडन्ड की रकम जितना ही उसके शेअर का भाव निचे जाता है। शेअर का भाव निचे आया तो कॉल ऑप्शन का मुल्य भी निचे उतरता है। शेअर का एक्स डिविडन्ड भाव सामान्यरूप से निचे के
स्तर पर देखने को मिलता है। हर शेअर
के पिछे जितना डिविडन्ड नकद दिया जाता है उतनाही उसके शेअर का भाव निचे उतरता है।

।। धन्यवाद ।।

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श्रेणी: Share Market

3 टिप्पणियाँ

इंडेक्स ऑप्शन क्या है? - What Is Index Options In Hindi. · दिसम्बर 15, 2020 पर 9:00 अपराह्न

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फ्युचर्स और ऑप्शन्स की मार्जिन - क्लीयरिंग और सेटलमेंट (Margins - Clearing And Settlement Of Futures And Options In Hindi) · दिसम्बर 19, 2020 पर 8:32 अपराह्न

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ओपन इन्ट्रेस्ट क्या है? - What Is Open Interest In Stock Market In Hindi. · मार्च 4, 2021 पर 4:10 अपराह्न

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