क्या आपको पता है की प्रोटेक्टिव पुट ऑप्शन स्ट्रॅटेजी – Protective Put Options Strategy in Hindi अगर आपको पता नहीं है तो आप इस ब्लॉग को पूरा पढ़े.

प्रोटेक्टिव पुट ऑप्शन स्ट्रॅटेजी – Protective Put Options Strategy in Hindi

चुने हुए शेअर्स की खरीदी करके और उसके पुट ऑप्शन की भी खरीदी करके प्रोटेक्टिव पुट स्ट्रॅटेजी पर अमल किया जाता है।

अधिकतम लाभ : बाजार में सुधार होने पर अमर्यादित फायदा हो सकता है।

अधिकतम नुकसान : पुट ऑप्शन के लिए दी हुई प्रीमियम की रक्कम जितना ही सीमित होता है।

Protective Put Options

प्रोटेक्टिव पुट ऑप्शन ( Protective Put Options ) के स्ट्रॅटेजी का उपयोग कब करना चाहिए :

प्रोटेक्टिव पुट ऑप्शन का उपयोग करनेवाले निवेशकों ने चुने हुए शेअर्स पहले से ही खरीदे होते है और उन्हे इन शेअर्स में फायदा हो रहा होता है और उन्हें कम कालावधी में बाजार में और उनके शेअर्स के भाव में गिरावट होने का डर सताता है।

इस स्थिति में वह उनके शेअर्स की किमत में हुई बढोतरी को सुरक्षित रखने का प्रयत्न प्रोटेक्टिव पुट ऑप्शन स्ट्रॅटेजी के द्वारा कर सकते है।

ट्रेडिंग के लिए आपके पसंद किए शेअर्स केलिए पुट ऑप्शन की खरीदी किजिए और उसके साथ आपके उन शेअर्स की होल्डींग वैसे ही रखीए।

इस स्टॅटेजी को डिरेक्शनल स्ट्रॅटेजी के नाम से भी जाना जाता है। यह स्ट्रॅटेजी तेजी की एक स्ट्रॅटेजी है।

यह हेजिंग के लिए एक स्ट्रॅटेजी है। इस स्ट्रॅटेजी में आप ट्रेडिंग के लिए चूने शेअर्स में दिर्घ कालावधी की पोजिशन खडी करते है।

    यह कदम उठाकर आप अपना निवेश, बाजार में करेक्शन आता है उस वक्त सुरक्षित रख सकते है।

    मेरिड पुट ईन्वेस्टर की तरह ही प्रोटेक्टिव पुट ईन्वेस्टर उनके शेअर्स का मालिकाना अधिकार, वोटिंग का अधिकार, डिविडंड आदी के तमाम फायदे लेना जारी रख सकते है।

    पुट ऑप्शन की कालावधी के दरम्यान आपने शेअर्स बेचे नहीं तो शेअर्स से संबंधित तमाम अधिकार और लाभ आपको मिलते है।

    प्रोटेक्टिव पुट की मदद से, शेअर्स के भाव में गिरावट के कारण होने वाले नुकसान को मर्यादित किया जा सकता है।

    यह ट्रेडिंग करने के बाद आपके शेअर्स का भाव ऑप्शन के ट्रेडिंग के अस्तित्व की कालावधी के दरम्यान चाहे जितना भी गिरे, आपके पास उन शेअर्स को निश्चित किए स्ट्राईक प्राईज से बेचने का अधिकार होता है।

    आपके पसंद के शेअर्स के भाव में एकाएक बडी गिरावट हुई तो उस कारण आपको आराम से विचार विमर्श करके कदम उठाने और निर्णय लेने के लिए समय मिलता है।

    ब्रेक ईवन पॉईन्ट (बी.ई.पी.) = शेअर्स की खरीदी किमत + पुट के लिए दिया हुआ प्रीमियम।

    प्रोटेक्टिव पुट ( Protective Put ) के फायदे :

    • संभावित नुकसान के सामने सुरक्षा देकर आपको अपनी होल्डींग वस हा जारी रखने का मौका देता है।
    • शेअर्स के भाव में होनेवाली बढोतरी और घटाव दोनों का लाभ ले सके इसलिए पट ऑप्शन के आपके ट्रेडिंग का जब भी संभव जल्दा स सिन्थेटिक स्ट्रेडल्ड में रूपांतर करने की आपकी जरूरत को पूरा करता है।

    प्रोटेक्टिव पुट ( Protective Put ) के घाटे :

    • पुट ऑप्शन के लिए दी जानेवाली किमत आपके फायदे को पूरी तरह खा जाती है।

    हम आशा करते है की हमारी ये प्रोटेक्टिव पुट ऑप्शन स्ट्रॅटेजी – Protective Put Options Strategy in Hindi ब्लॉग पोस्ट आपको पसंद आयी होगी अगर आपको शेयर मार्किट से जुड़ा कोई भी सवाल है तो आप कृपया कमेंट में जरूर पूछे।

    ।। धन्यवाद ।।

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    3 Comments

    बुल कॉल स्प्रेड स्ट्रॅटेजी - Bull Call Spread Strategy In Hindi · December 31, 2020 at 8:33 pm

    […] प्रोटेक्टिव पुट ऑप्शन स्ट्रॅटेजी – P… […]

    कॉल बॅक स्प्रेड स्ट्रॅटेजी - Call Back Spread Strategy In Hindi · March 4, 2021 at 3:59 pm

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    बुल पुट स्प्रेड स्ट्रॅटेजी - Bull Put Spread Strategy In Hindi · July 9, 2021 at 8:01 pm

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