क्या आपको पता है की स्विंग ट्रेडिंग के नियम क्या है – Top 13 Golden Rules for Swing Trading in Hindi अगर आपको पता नहीं है तो आप इस ब्लॉग को पूरा पढ़े.

स्विंग ट्रेडिंग के नियम – Top 13 Golden Rules for Swing Trading in Hindi

Table of Contents

ट्रेडिंग का सफलतापूर्वक मॅनेजमेंन्ट करने के लिए विविध प्रकार की व्यूहरचनाओं को समझ लेना जरूरी है ऐसा कहा जाता है

परंतु आपको अपनी व्यूहरचना को बिना कारण जटील और कठिन बनाने की जरूरत नहीं है। इसीलिए उस विषय में स्पष्टता रखकर उसे मुमकिन हो उतना सरल रखना चाहिए।

अब हम स्विंग ट्रेडिंग के नियमों को जान लेते है।

१. योग्य सेटअप की राह देखिए।

आपने जो क्रायटेरीया निश्चित किया है उसके अनुसार बाज़ार आपको अलग अलग शेअर्स में नियमितरूप से मौके उपलब्ध कराता है।

अगर आप किसी भी एक शेअर्स पर लक्ष्य केंद्रित करते हो तो आपको उसमें स्विंग ट्रेडिंग की गिनती के अनुसार ट्रेडिंग करने का मौका हर एक सप्ताह में मिलता है

परंतु आप जब संपूर्ण बाज़ार में ट्रेड होनेवाले कई शेअर्स को फिल्टर करते हो तब आप मुनाफे की दिशा के ट्रेडिंग के मौके को कई गुना ज्यादा बढ़ाते हो।

महत्वपूर्ण बात यह है कि आप ट्रेडिंग तभी करे जब आपके निश्चित किए हुए क्रायटेरीया के अनुसार योग्य सेटअप आपके सामने उपलब्ध होता है। सहजरूप से ट्रेडिंग नहीं करना चाहिए क्योंकि वह आपके नफा कमाने की क्षमता के रेशो को नीचे ले जाती है।

जरूरत पड़ने पर बाज़ार से दूर रहने के नियम का पालन करना ही चाहिए और योग्य ट्रेडिंग आपके सामने उपलब्ध होने की राह देखनी चाहिए।

जब आपको एक जगह से दुसरी जगह जाना होता है तब आप किसी बस की राह देखते हो जो आपको उस जगह पर ले जाएगी। आप किसी भी बस में यह मानकर नहीं चढ़ते की वह आपको अपनी जगह पर ले जाएगी।

आप शांती से योग्य बस आने की राह देखते हो जो आपको अपनी निश्चित जगह पर ले जाएगी। बात जब ट्रेडिंग की होती है तब भी आपको ऐसा ही करना चाहिए।

२. चार्ट क्या बता रहा है उस पर लक्ष्य केंद्रित कीजिए, दुसरे लोग क्या कर रहे है इस पर नहीं।

जब किसी भी प्रकार की खबर सामने आती है तब वह शेअर्स पर बहुत ही अधिक प्रमाण में परिणाम कर सकती है जैसे की पहले बताया है यह आपके लिए बहुत ही जोखिम भरा साबित हो सकता है।

परंतु जो कुछ भी परिणाम होनेवाला होता है वह चार्ट को पहले से ही पता होता है और वह बहुत ही अच्छी तरह से उसे पेश करता है। ज्यादातर ऐसा नज़र आता है कि जब किसी शेअर्स में किसी तरह की हलचल होती है तब शेअर्स के चार्ट पर कन्वर्जन्स दिखाई देता है।

अगर खबर सकारात्मक हो तो इस तरह का कन्वर्जन्स ऊपर की दिशा में होता है और खबर नकारात्मक हो तो इस तरह का कन्वर्जन्स नीचे की दिशा में होता है।

भाव ज्यादातर ब्रेकआऊट या ब्रेकडाऊन तभी होता है जब खबर सच में बाहर आती है परंतु उससे पहले जानकार लोग ऐसे कन्वर्जन्स और कन्सॉलिडेशन में खरीदी करते है।

बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी आपको उस समय मिलती है जब चार्ट सामान्य समझ से भी कोई अलग दिशा पकड़ते हुए नज़र आता है।

३. भाव को भी स्मरण शक्ति होती है।

इसी सत्य के कारण आप देख सकते है कि विविध स्तर पर चार्ट सपोर्ट का स्तर और रेजीस्टन्स का स्तर बनाता है और वास्तव में ब्रेकआऊट मिलने से पहले ऐसा स्तर बारबार और कईबार टेस्ट होता है।

इस लिए हमेशा यह जाँच लें की भाव पहलेवाले किसी भी स्तर पे आने पर कैसा व्यवहार दर्शा रहा था।

इस वास्तविकता को ध्यान में रखिए की चार्ट ने अपनी चाल को आगे बढ़ाने पर उसमें जो पॅटर्न तैयार होता है उसी को फिर दोहराता है, इसकी संभावना बहुत ही अधिक होती है कि वह फिर से वैसा ही करेगा।

४. हमेशा तर्कसंगत रहिए, आपके मन की भावनाओं को वश में रखिए।

बात जब ट्रेडिंग की होती है तब आपको भावनात्मक नहीं होना चाहिए। फ्लेक्सीबल होना एक बात है, परंतु भावनात्मक होकर काम करना अलग बात है।

आपका प्रोअॅक्टीव व्यक्तिमत्व आपको इतना फ्लेक्सीबल होना जरूरी है ऐसा बताता है कि जिसकी मद्द से आप बाज़ार के साथ घुम सकें, परंतु आप उसमें भावूक हो इस बात के लिए कही भी जगह नहीं होती।

भावुकता आपकी विचार करने की क्षमता को खत्म करती है और आप कोई भी अनुमान नहीं लगा सकते और हमेशा के लिए आपकी विचार शक्ति को लकवा मार जाती है।

मनुष्य हो तो आपकी भावना आपके निर्णय लेने की शक्ति पर हावी होने का प्रयत्न जरूर करेगी। परंतु ऐसा न होने दें।

अपनी व्यूहरचना को पकड़कर रखिए और आपको स्वयं क्या लगता है या दुसरों को क्या लगता है उसके आधार पर नहीं परंतु जो चार्ट बता रहा है उसके आधार पर ही ट्रेडिंग कीजिए।

ट्रेडिंग में आपके दिमाग का उपयोग अॅनालिसिस करने के लिए कीजिए और उससे अलग विचार के लिए कोई भी जगह न रखें, जो आपको अपनी व्यूहरचना से भटका दें।

५. जब आपके मन में कोई शंका होती है तब बाज़ार से दूर रहिए।

स्विंग ट्रेडिंग के मामले में आपको ट्रेड ईनीशीएशन झोन में ही ट्रेडिंग करना चाहिए। ऐसा भी समय आएगा जब जिस शेअर्स में आपका लक्ष्य केंद्रित होता है वह शेअर्स आपको कुछ समय के लिए ट्रेडिंग करने का मौका नहीं देंगे।

ऐसे समय में आपको बाज़ार से दूर रहना सिखना चाहिए। मैंने लोगों को सहजता से ट्रेडिंग करते हुए देखा है। उन्हें किसी ट्रेडिंग के विषय में बहुत ही आत्मविश्वास रखते है तब उदाहरण के तौर पर ५०० शेअर्स का ट्रेडिंग करते है

परंतु जब उन्हें किसी समय या किसी कारणवश शंका होती है तब वह ऐसा विचार करते है कि इस समय मैं सिर्फ २०० शेअर्स का ट्रेडिंग करता हूँ और फिर देखता हूँ कि क्या होता है परंतु यह झूटी व्यूहरचना है।

अगर आपको आत्मविश्वास हो तो आपकी गिनती के अनुसार संपूर्ण क्षमता से काम करना चाहिए, परंतु जब आपको कोई शंका होती है तब वह ट्रेडिंग करने से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।

अगर आपको अपना सक्सेस रेशो उँचा रखना हो तो यह महत्वपूर्ण है कि जब बाज़ार आपको किसी भी प्रकार का मौका नहीं देता तब आपको उससे दूर रहना चाहिए। यह अनुशासन आपको नियमित मेहनत करके आत्मसात करना पड़ता

६. कोई भी ट्रेन्ड उसके टाईम फ्रेम पर निर्भर होता है।

भाव उसके निश्चित टाईम सायकल के अनुसार एक दिशा में आगे बढ़ते हुए नज़र आता है। इस लिए उस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि आपका ट्रेडिंग निश्चित की गई टाईम सायकल के अनुसार ही होगा।

विविध टाईम फ्रेम में अलग अलग सेटअप हो सकते है, इस लिए आप जो भी टाइम फ्रेम का उपयोग करते हो, यह जरूर ध्यान में रखिए कि आप जो भी कदम उठाओं वह अपनी टाइम फ्रेम को ध्यान में रखकर ही उठाना चाहिए।

लागू होनेवाले सपोर्ट और रेजिस्टन्स को जाँचकर देखिए और फिर उसके अनुसार ट्रेडिंग कीजिए।

७. ट्रेलिंग स्टॉप और स्टॉप लॉस का हमेशा अचूकता से उपयोग कीजिए।

आपके एक बार पोजिशन लेने के बाद सब से बड़ा डर अगर आपको हो तो वह यह कि भाव अगर बढ़ने में असफल हुआ तो क्या होगा? बिक्री करने के बाद भाव घटने में असफल हुआ तो?

स्वयं को ऐसी परिस्थिति में सुरक्षित रखने के लिए और उस परिस्थिति में आप पर विपरीत परिणाम ना हो इस लिए आपको स्टॉप लॉस का स्तर पहले से ही निश्चित करना आवश्यक होता है।

अगर आपकी अपेक्षा से अधिक विपरीत हुआ और भाव आपके खरीदी स्तर से भी नीचे जा रहा हो तो आपको उस ट्रेडिंग में न्युनतम लॉस और अपने पोर्टफोलिओ पर न्युनतम परिणाम के साथ बाहर निकलना चाहिए।

भाव जब वास्तव में आपने खरीदी किए हुए भाव के ऊपर निकाल जाता है और अगर वह आपने निश्चित किए टार्गेट पर पहुँचने से पहले ही घटने लगा तो आपको योग्य ट्रेलिंग स्टॉप, जिसका स्तर पहले से ही तय करके रखना आवश्यक होता है

उसकी मद्द से पोजिशन में से बाहर निकलकर ज्यादा से ज्यादा मुनाफे को बचाकर निकाल लेना चाहिए।

अगर खरीदी भाव से भाव अधिक सुधरने में असफल हुआ तो एक बड़े विकल्प की यहाँ पर संभावना है जिसकी मद्द से ऐसी स्थिति में आप ना फायदा ना नुकसान इस निती के साथ बाहर निकल सकते है।

जब आप कोई ट्रेडिंग करते हो तब आपका अंतिम हेतु आखिर में मनाफे के साथ बाहर निकलने का होता है परंतु कई बार ऐसा भी होता है कि आपकी गिनती के अनुसार परिस्थिति निर्माण नहीं होती। भाव थोड़ा बढ़ता है परंतु तुरंत फिर से घटने की शुरूआत करता है।

ऐसी स्थिति में आपको स्टॉप लॉस तक भाव घटने की और वास्तव में नुकसान होगा तब तक राह देखते नहीं बैठना चाहिए।

इसके बदले आपको ऐसे स्तर पर बाहर निकलने का आग्रह करना चाहिए जिस स्तर पर आपकी दलाली का खर्च भी वसूल होगा। इससे आप हमेशा ना फायदा ना नुकसान इस निती के साथ बाहर निकल सकते है।

अगर आप बहुत ही कम स्टॉप लॉस को सहकर ऊपर दर्शाया है उस तरह से ट्रेडिंग करना सिखते हो तो आपका बड़ा नुकसान कभी भी संभव नहीं है

क्योंकि ज्यादातर ट्रेडिंग मुनाफेवाली होगी और बहुत ही कम ट्रेडिंग ना फायदा ना नुकसान का होगा। ऐसा करने से आपकी सफलता की प्रतिशतता अधिक होती है।

८. हमेशा स्थापित बड़े ट्रेन्ड की दिशा में ही ट्रेडिंग कीजिए।

जैसे की पहलेवाले पाठ में दर्शाया गया है आपको पहले बड़े स्थापित ट्रेन्ड की जाँच करनी चाहिए। एक बार आप बड़े ट्रेन्ड के विषय में स्पष्ट हो जाने के बाद में आपको कम कालावधी का ट्रेडिंग पहले से ही स्थापित बड़े ट्रेन्ड की दिशा में ही करना चाहिए।

उदाहरण के तौर पर अगर स्थापित ट्रेन्ड तेजी का हो, जब बाज़ार कम कालावधी के लिए तेजी करता है तब कुछ लोग उस तेजी में बिक्री करके ट्रेडिंग करते हुए नज़र आते है।

ऐसे समय में बिक्री करके ट्रेडिंग करने के बजाए आपको चार्ट पर लक्ष्य केंद्रित करके हर एक शेअर्स को ऐसे स्तर पर पकड़ना चाहिए जब कोई भी दो महत्वपूर्ण अवरेज के दरम्यान वह सपोर्ट लेता है जिसे हम टेड ईनीशीएशन झोन कहते है।

अगर आपने टेन्ड के विपरीत काम करने का प्रयत्न किया तो तेजी की दिशा के शेअर्स में दिखनेवाली एक तरफा और अधिक दिर्घ तेजी में आपके विपरीत दिशा में फँस जाने की संभावना अधिक होती है। स्थापित ट्रेन्ड आपकी अपेक्षा से बहुत ही अधिक समय तक चल सकता है।

इस लिए अगर आप बड़े ट्रेन्ड की दिशा में खड़े हो तो आपको उसका बड़ा फायदा होने की संभावना अधिक होती है।

उसी तरह से आप अगर फिलहाल मंदी की स्थिति में दिखनेवाले उछाल में ट्रेडिंग करने का प्रयत्न करते हो तो ज्यादातर दिखाई देता है

वैसे वह उछाल दुध के उबाल की तरह साबित हो सकता है और अगर आप उसमें से समय रहते बाहर नहीं निकल सके तो आप उसके बाद आनेवाली मंदी में फँस सकते हो।

आपको एक बहुत ही प्रचलित मुहावरे को ध्यान में रखना चाहिए, “ट्रेन्ड यही आपका मित्र है।”

क्या नए स्तर पर नई चाल निर्माण होगी? यह जानलेने के लिए आपको चार्ट पर ट्रेन्ड लाईन और चॅनेल निकालना जरूरी है।

९. ट्रेड के विरूद्ध काम करनेवाले लोग : दुसरों से पहले अंदर दाखिल होना और बाहर निकलना।

यह करने से पहले आपको इतना अनुभवी और प्रतिभाशाली होना जरूरी है कि जिससे किसी भी प्रकार का सेटअप आपको डरा नहीं सकता।

डर की भावना का निर्माण तभी होती है जब आप कुछ तो गलत करते हो। एक समय ऐसा भी आता है कि जब आपको पता होता है कि कौनसा सेटअप सामान्य लोगों को डरा सकता है।

यहा पर महत्वपूर्ण बात यह है कि आप लोगों से पहले अंदर दाखिल हो। काऊन्टर ट्रेन्ड अर्थात ट्रेन्ड के विरूद्ध दाखिल होनेवाले लोग जो करते है वह यह कि वह दुसरों से पहले अंदर दाखिल हो जाते है।

वह ऐसी स्थिति होती है जिसमें ज्यादातर अनुभवहीन ट्रेडर को लगता है कि भाव उस सपोर्ट पर से अधिक घटने की संभावना होती है और रेजिस्टन्स पर से अधिक सुधरने की संभावना होती है।

अनुभवी काऊन्टर ट्रेन्ड ट्रेडर ऐसे स्तर पर पोजिशन लेते है और ऐसा करके वह लोगों से पहले दाखिल होते है और लोगों से पहले बाहर निकलने का प्रयत्न करते है। ऐसे ट्रेडिंग में आपको तर्कसंगत होकर गिनती पूर्वक चलना पड़ता है।

१०. स्विंग ट्रेडिंग में स्केलिंग।

एक बार आप मुनाफे में आजाए उसके बाद आखिर में आपके ट्रेडिंग का परिणाम सकारात्मक ही होगा, ऐसा करना जरूरी नहीं है, परंतु ऐसा करना निश्चित ही आपके हित में है।

ज्यादातर स्विंग ट्रेडिंग के मामलों में मुनाफे की संभावना मर्यादित परंतु अच्छी होती है और वह तुरंत गल जाने की संभावना भी होती है। उत्तम बात यह है कि आपको ऐसी व्यूहरचना पर अमल करना चाहिए

जिसमें आपका ट्रेडिंग एक बार मुनाफे में आने के बाद वह मुनाफे में ही रहोगा और उसका परिणाम सकारात्मक ही होगा।

उदाहरण के तौर पर, आपने १००० शेअर्स ७०४ रूपयों में खरीदे है, ६९६ के स्टॉप लॉस के साथ। अब भाव ७०९ रूपए हुआ है। यहा पर आप ५०० शेअर्स बेच सकते है और आप स्टॉप लॉस के स्तर को ७०४ कर सकते है।

जिससे आप आश्वस्थ हो सकते है कि आप का यह ट्रेडिंग किसी भी परिस्थिति में मुनाफे का ट्रेडिंग ही होगा। अगर भाव आगे चलकर ७१४ के स्तर तक आगे बढ़ा तो आप दुसरे २५० शेअर्स बेच सकते हो और ट्रेलिंग स्टॉप ७१० का रख सकते हो।

इस तरह से आप निश्चित कर सकते है कि ज्यादातर ट्रेडिंग मुनाफे में ही होगा। ट्रेलिंग स्टॉप कुछ निश्चित गिनती के आधार पर रखा जाता है, अपनी मर्जी के अनुसार नहीं।

११. बड़ा मुनाफा निकाल लेना चाहिए।

स्विंग ट्रेडर की दृष्टी से देखा जाए तो बड़े मुनाफे की संभावना मर्यादित होती है परंतु जब किसी दिन बड़ा मुव्हमेन्ट आता है तब आपको मुनाफा निकाल लेना चाहिए। इस तरह की चाल तब दिखाई देती है

जब किसी ट्रेडर के ध्यान में कोई चाल आती है और वह आसानी से उसमें दाखिल हो जाता है परंतु जब सभी खिलाड़ी अंदर दाखिल हो जाते है तो आखिर में खरीददार ही कैसे बच सकता है? इस लिए इस प्रकार की स्थिति अदृश्य होने से पहले ट्रेडिंग में से बाहर निकलना फायदेमंद होता है।

१२. हमेशा तरलता वाले शेअर्स में ट्रेडिंग कीजिए।

एक स्विंग ट्रेडर की तरह आप कम कालावधी में तुरंत मुव्हमेन्ट मिलती है तब ट्रेडिंग करने की गिनती करते है।

इस लिए जरूरी है कि आप ऐसे शेअर्स हुँढ़े जिनकी तरलता अधिक हो। ऐसे तरलता वाले शेअर्स में उतार-चढ़ाव अच्छी तरह से दिखाई देता है और वह अधिक प्रमाण में चंचलता दर्शाते है।

एक ट्रेडर की तरह आपको चंचलता से नहीं डरना चाहिए, चंचलता तो आपकी मित्र है क्योंकि वह कई बार आपको ट्रेडिंग करने का मौका उपलब्ध कराती है।

जिन के पास ज्ञान का अभाव है वह चंचलता से डरता है, परंतु जिन को अनुशासन और कुशलतापूर्वक ट्रेडिंग करना पता है वह चंचलतावाले शेअर्स या इन्डेक्स में ट्रेडिंग करना पसंद करते है। चंचलता और अस्थिरता की स्थिति में बड़ा फर्क है यह ध्यान में रखिए।

१३. जब आप ट्रेडिंग दाखिल करते हो तब संपूर्ण पोजिशन एकसाथ ही लीजिए।

स्विंग ट्रेडिंग में आपको बाज़ार में कम कालावधी में दिखनेवाली तुरंत बढ़ोतरी और गिरावट में रस होता है।

दिर्घ कालावधी के निवेशक या जिन्हे काल के अनुसार खरीदी करते रहकर अपनी पोजिशन बनानी होती है उनकी तुलना में स्विंग ट्रेडर को मात्र तुरंत मुव्हमेन्ट देनेवाली स्थिति में रस होता है।

इस लिए बात जब स्विंग ट्रेडिंग की होती है तब आप जैसे बाज़ार आगे बढ़ता है वैसे योग्य स्टॉप लॉस लगाकर सही समय पर मुनाफा निकाल लेना चाहिए, उसमें पोजिशन को नहीं बढ़ाना चाहिए।

हम आशा करते है की हमारी ये (स्विंग ट्रेडिंग के नियम – Top 13 Golden Rules for Swing Trading in Hindi) ब्लॉग पोस्ट आपको पसंद आयी होगी अगर आपको शेयर मार्किट से जुड़ा कोई भी सवाल है तो आप कृपया कमेंट में जरूर पूछे।

।। धन्यवाद ।।

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3 टिप्पणियाँ

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