निवेशकों के लिए सुरक्षा के उपाय – (Safeguards for Investors in Hindi)

शेअर धारक (Share Holder) ने शेअर बाज़ार (Share Market) में आने से पूर्व सुरक्षा के लिए नीचे दी हुई बातों का ध्यान रखना चाहिए।

१. ब्रोकर – सब ब्रोकर का चयन करते समय (While Selecting the Broker/Sub-Broker):-

सिर्फ सेबी (SEBI) के पास दर्ज किए दलाल (Broker) के साथ ही व्यापार कीजिए। दलाल (Broker) की लिस्ट शेअर बाज़ार (Share Market) ने प्रसिद्ध किए सभासदों की लिस्ट में प्रस्तुत की जाती है।

२. करार कीजिए (Enter in to an Agreement):-

  • दलाल (Broker) के पास ग्राहक दर्ज का फार्म भरना चाहिए। शेअर बाज़ार (Share Market) ने प्रस्तुत किया हुआ रिस्क डीस्क्लोजर डॉक्युमेंट (Risk disclosure document) हर ग्राहक को समझलेना चाहिए और व्यापार करने से पूर्व उस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करना चाहिए।
  • ब्रोकर/सब-ब्रोकर क्लाईन्ट Broker/Sub-Broker-Client करार करना चाहिए। बी.एस.ई या एन.एस.ई के सभासद होने के लिए यह करार निवेशकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

३. व्यवहार करते समय:-

  • आप जिस स्टॉक एक्सचेंज (Stock Exchange) के जरिए व्यवहार करनेवाले है (बी.एस.ई/एन.एस.ई) उसके ब्रोकर, सब ब्रोकर को जानकारी दीजिए।
  • व्यापार करने के २४ घंटो के अंदर दलाल (Broker) से करारनामा लीजिए। करारनामा उस दिन के व्यापार की पूष्टी होती है। इस करारनामें के दो नमूने होते हैं। एक नमुना दलाल (Broker) के पास और दुसरा नमुना ग्राहक के पास होता है। ग्राहक को करारानामें के नमुने पर हस्ताक्षर करना पड़ता है जिससे असली करारनामा उनके पास है इस बात की उन्हें तसल्ली हो जाती है।
  • करारनामें पर सेबी (SEBI) ने दिए हुए दलाल (Broker) का सभासद नंबर, व्यापार की सभी जानकारी जैसे कि माँग नंबर, व्यापार नंबर, व्यापार का समय, भाव, संख्या आदि है या नहीं इसकी तसल्ली करनी चाहिए।

सेटलमेंन्ट सुनिश्चित करना (Ensuring Settlement):

  • खरीदी बिक्री के करार पत्र होने के बाद तुरंत दलाल (Broker) को सेक्युरिटी की डिलीवरी या पेमेंट दिए गए समय के दिन में करना चाहिए।
  • ग्राहक का पैसा आने के बाद २४ घंटो के अंदर दलाल (Broker) को उनके पैसे या शेअर उन्हें देने चाहिए। डिमेट अकाऊन्ट (Demat Account) में से शेअर की डिलीवरी करने के लिए डिपॉजिटरी पार्टीसिपेन्ट (Depository Participant) को डिलीवरी आऊट की सुचना करनी चाहिए जिससे शेअर बेनिफीशिअरी अकाऊन्ट (Beneficiary Account) में से दलाल (Broker) के पुल अकाऊन्ट की जानकारी जिन्हे शेअर की बिक्री की है उन्हें देनी चाहिए।
  • अगर फिजिकल डिलीवरी (Physical Delivery) ली है तो सेबी (SEBI) ने प्रस्तुत किए हुए डिलीवरी के नियम के साथ उनकी पूछताछ करके फिर डिलीवरी लेनी चाहिए।
  • जो बॅड डिलीवरी है वो ब्रोकर को मिलकर जल्द से उनका निवारण करना जरूरी है।
  • निवेशकों ने अपने अकाऊन्ट की पूछताछ दलाल (Broker) के साथ ६ महिने में एकबार तो करनी ही चाहिए।

सेटलमेंट गॅरेंटी (Settlement Guarantee):

NSCCL व्यवहार होने के बाद दोषी पार्टी को पैसे और माल की डिलीवरी हई है या नहीं उसकी तसल्ली करता है। उनके पास सेटलमेंन्ट गॅरेंटी (Settlement Guarantee) है।

३१ मार्च २००३ में सेटलमेंन्ट गॅरेंटी (Settlement Guarantee) का अमाऊन्ट १४८७ करोड़ था और अगर वापसी (Settlement) में कठिनाई हुई तो सेटलमेंन्ट गॅरेंटी (Settlement Guarantee) फंड तसल्ली देता है कि शेअर धारक (Share Holder) को उनके पैसे अथवा माल की डिलीवरी मिलेगी।

जब शेअर दलाल (Trading Member) सेटलमेंट अथवा पेमेंट में गलती करते है तब यह सेटलमेंन्ट गॅरेंटी (Settlement Guarantee) फंड सुधरता है।

इसके लिए सेटलमेंन्ट गॅरेंटी (Settlement Guarantee) फंड दान जमा हुए पैसों का उपयोग करता है। इसमें काऊन्टर पार्टी का धोखा नहीं रहता।

मार्केट को पूरी तसल्ली है कि अगर शेअर दलाल की गलती हो तो भी सेटलमेंट (Settlement) तो होगा ही इसकी गॅरेंटी सेटलमेंन्ट गॅरेंटी (Settlement Guarantee) फंड के वजह से मिलती है

निवेशक सुरक्षा फंड (Investors Protection Fund):

इस फंड की स्थापना निवेशकों के लिए की गई है। जब शेअर दलाल अपनी जवाबदारी में असफल होते है तब इस फंड से निवेशकों को उनके पैसे वापिस मिलते है। यह फंड चॅरीटी कमिशन (Charity Commission) में दर्ज किया होता है।

बी.एस.ई के निवेशक सुरक्षा फंड (Investors Protection Fund of BSE):

इस फंड की स्थापना करने में बी.एस.ई सर्वप्रथम है। इस फंड की स्थापना दलाल विरोधी ग्राहको के संरक्षण के लिए की गई है।

इसकी स्थापना १० जुलाई १९८६ में हुई है और चॅरीटी कमीशनर (Charity Commissioner) के पास उसे दर्ज किया है बी.एस.ई दलाल की गलतीपर अधिक से अधिक १० लाख रूपयों तक नकसान भरकर दे सकती है।

शेअर दलाल १० लाख रूपयों के टर्नओवर पर १.५० पैसे के हिसाब से रक्कम फंड में जमा करते है और स्टॉक एक्सचेंज (Stock Exchange) नई कंपनी के लिस्टेड से २.५% उस फंड में जमा करते है।

इन्वेस्टर्स प्रोटेक्शन फंड (आईपीएफ) Investors Protection Fund (IPF):

बॉम्बे पब्लिक ट्रस्ट (Bombay Public Trust) १९५० के नाम पर यह फंड ट्रस्ट कहकर स्थापित किया गया है। आईपीएफ का संचालन एनएसई के हाथ के नीचे होता है।

अगर दोषी दलाल (Broker) ने काम की सेटलमेंट (Settlement) नहीं की तो ग्राहक की माँग का हक्क सुरक्षित रखने के लिए ऐसी योजना की गई है।

जब दलाल (Broker) दोषी होता है तब आईपीएफ के फंड की रक्कम से ग्राहक को उनकी रक्कम वापिस दी जाती है आईपीएफ ग्राहकों को ५ लाख तक का नुकसान भरकर देता है।

ट्रेड गॅरेंटी फंड (Trade Guarantee Fund):

व्यापार की समस्याए मिटाने के लिए और दलाल (Broker) से तसल्ली का व्यवहार करने के लिए और मार्केट में समतल रखने के लिए १२ मई १९९७ से ट्रेड गॅरेंटी फंड (Trade Guarantee Fund) अस्तित्व में आया। ट्रेड गॅरेंटी फंड (Trade Guarantee Fund) का हत् नीचे दिया है।

  • स्टॉक एक्सचेंज (Stock Exchange) के व्यापार का व्यवहार समय पर पूरा करना और शेअर धारको का और स्टॉक एक्सचेंज (Stock Exchange) के सभासदों का विश्वास कायम रखने के लिए मद्द करना।
  • द्वितीय मार्केट के भारतीय और विदेशी बाज़ार में भारतीय निवेशक और एफ.आय.आय. का विश्वास मार्केट में कायम रखने के लिए।
  • निवेशकों का विश्वास संपादन करना और वह कायम रखना, द्वितीय बाज़ार की प्रगती करना। इस फंड का संचालन डीफॉल्टर कमिटी करती है। यह कमिटी एक्सचेन्ज ने बनाई है और सेबी (SEBI) ने उसे मंजूरी भी दी है।

।। धन्यवाद ।।

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श्रेणी: Share Market

3 टिप्पणियाँ

Online Share Treading क्या है? - Assetinvestock · नवम्बर 7, 2020 पर 10:59 अपराह्न

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Index क्या है? - Assetinvestock · नवम्बर 8, 2020 पर 11:09 अपराह्न

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स्टॉक में निवेश करने के विभिन्न तरीके - Different Ways To Invest In Stocks In Hindi · नवम्बर 9, 2020 पर 6:49 अपराह्न

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