हमेशा शेयर बाजार के बारे में पूछे जानेवाले प्रश्न – Share Market Knowledge in Hindi

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इस ब्लॉग में हमेशा शेयर बाजार के बारे में पूछे जानेवाले प्रश्न – Share Market Knowledge in Hindi के सारे जवाब दिए है आप इस ब्लॉग को पूरा पढ़े.

शेअर बाज़ार में निवेश की शुरूआत कैसे करनी चाहिए? (How to start investing in the share market in Hindi)

सबसे पहले अपने ब्रोकर का चयन कीजिए। उस ब्रोकर का सेबी में रजिस्ट्रेशन होना चाहिए।

साथ ही ब्रोकर और क्लायन्ट अग्रीमेन्ट पर हस्ताक्षर करके जरूरी कार्यवाही पूरी कीजिए। साधारणरूप से तीन या चार दिनों में आपको क्लायन्ट कोड मिलता है, जो भविष्य में होनेवाले पत्र व्यवहार और आपको मिलनेवाले कॉन्ट्रैक्ट नोट में दर्शाया जाता है।

आपको डिमेट अकाऊन्ट भी खोलना पड़ता है जो आपके ब्रोकर के पास या मान्यताप्राप्त बँक में खोला जा सकता है।

एकबार यह संपूर्ण कार्यवाही पूर्ण होने के बाद शेअर्स के लेन-देन के लिए आपको अपने ब्रोकर को फोन करना पड़ता है या फिर आप उसके ऑफिस में जाकर टर्मिनल के सामने बैठकर ट्रेडिंग कर सकते है। या फिर आप ऑनलाईन भी ऑर्डर प्लेस कर सकते है।

ब्रोकर की जरूरत किसलिए होती है? (Why is a Broker Needed in Hindi)

सेबी के रेग्युलेशन के अनुसार रजिस्टर्ड लोग ही काम कर सकते है। इसलिए रजिस्ट्रेशन किए हुए ब्रोकर के मदद से ही ट्रेडिंग करना संभव होता है।

इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग क्या होता है? (What is Electronic Trading in Hindi)

इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग की शुरूआत के बाद अब ब्रोकर को ट्रेडिंग फ्लोर पर जाकर ट्रेडिंग नहीं करना पड़ता। अब कंप्यूटर पर ट्रेडिंग किया जाता है। जो एक्सचेन्ज के साथ वी.सेट द्वारा जुड़ा होता है।

अब इंटरनेट के माध्यम से भी ट्रेडिंग करने की सुविधा उपलब्ध है। इसलिए हम घर बैठे बैठे या स्वयं के ऑफिस से या खुद के कंप्यूटर की मदद से ट्रेडिंग कर सकते है।

इसका मुख्य नियम यह है कि जब आपको किसी निश्चित भाव से तुरंत ट्रेडिंग करना हो तो इसके लिए ब्रोकर को फोन करना नहीं पड़ता और इसमें होनेवाले विलंब के कारण भाव बदलने की संभावना नहीं होती। आप तुरंत चाहे उस भाव पर ट्रेडिंग कर सकते है।

कॉन्ट्रैक्ट नोट क्या होता है? (What is a Contract Note in Hindi)

आपने किए ट्रेडिंग का भाव, समय, संख्या और दलाली आदि को दर्शानेवाला नोट ‘कॉन्ट्रैक्ट नोट’ सभी दलाल के पास मिलता है। यह कॉन्ट्रॅक्ट नोट निश्चत किए फॉर्मेट में निवेशक को दिया जाता है।

जो निवेशक और ब्रोकर इनके बिच हुए ट्रेडिंग का कानूनन प्रमाण होता है। कॉन्ट्रॅक्ट नोट की दो प्रतीयाँ निकाली जाती है जिसमें से एक ब्रोकर और दुसरी निवेशक के पास होती है। यह ‘कॉन्ट्रॅक्ट नोट’ आपको २४ घंटे के अंदर मिल जाती है।

बुक – क्लोजर और रेकॉर्ड डेट याने क्या? (What is Book – Closure and Record Date in Hindi)

बुक – क्लोजर : द्वारा किसी भी दिन कंपनी में कितने निवेशकों का रजिस्ट्रेशन हुआ है यह देखा जाता है।

रेकॉर्ड डेट : डिविडन्ड, बोनस, राईट आदि जैसे लाभ ऐसे निवेशकों को मिलता है। जिनका नाम इस तारीख से पहले लिखा होता है। उसका ही नाम ‘रेकॉर्ड डेट’ है।

निवेशक किसी भी शेअर्स कम-बोनस, कमडिविडन्ड, कम-राईट को खरीद के एक नए निवेशक की तरहे उसका फायदा होने की आशा करते है। इसके लिए शेअर्स उनके नाम पर ट्रान्सफर होना जरूरी होता है।

अगर वैसा नहीं हुआ तो उनको यह फायदा नहीं मिलता। इस तरह से शेअर्स की खरीदी करने वाले घाटे में ट्रेडिंग करते है। इसलिए आवश्यक है कि आप जो शेअर्स कम-बोनस, आदि जैसे लाभ के साथ खरीदके समय के अनुसार उनके बुक क्लोजर से पूर्व स्वयं के नाम पर कर लेने चाहिए।

यह देखना भी आवश्यक है कि आपने जो भाव दिया था उस भाव की गिनती बाद में होती है। उस से पहले नहीं होती।

रेकॉर्ड डेट और बुक क्लोजर डेट इन दोनों में क्या फर्क होता है? (What is the Difference Between a Record Date and a Book Closure Date in Hindi)

रेकॉर्ड डेट के विषय में कंपनी स्वयं का रजिस्टर बंद नहीं करती। यह तारीख कंपनी के कितने लोग किसी भी अधिकार के दावेदार है यह जानलेनी की अंतिम तारीख होती है।

बुक क्लोज के विषय में जो शेअर्स बाज़ार में नहीं बेचे जा सकते उनके ट्रान्सफर डीड पर बुकक्लोजर के पहले की तारीख होती है।

नो डिलीवरी पिरीयड क्या होता है? (What is a No Delivery Period in Hindi)

जब कोई कंपनी बुक क्लोजर का विज्ञापन करती है तब एक्सचेन्ज उसके लिए नो-डिलीवरी पिरीयड निश्चित करता है। इस समय के दरम्यान सिर्फ ट्रेडिंग की अनुमती दी जाती है।

साथ ही इस ट्रेड का सेटलमेन्ट नोडिलीवरी का समय पूरा होने के बाद ही होता है। इस तरह से ऐसा होता है कि वहा पर उस कंपनी ने प्रसिद्ध किए फायदे के हकदार हो तो उन्हे अलग निकाला जा सकता है।

एक्स-डिविडन्ड क्या होता है? (What is Ex-Dividend in Hindi)

किसी कंपनी ने डिविडन्ड जाहिर करने के बाद वह ‘एक्स-डिविडन्ड’ कहलाता है। इसका अर्थ ऐसा होता है कि अब उन शेअर्स का ‘डिविडन्ड’ देने के बाद का भाव शुरू है।

ऐसा होने से शेअर्स खरीदनेवाले को इस से पहले दिए गए डिविडन्ड का लाभ नहीं मिलता।

एक्स-डेट क्या होती है? (What is Ex-Date in Hindi)

नो-डिलीवरी के पहले दिन को एक्स-डेट कहा जाता है। जो कुछ बोनस, राईट, डिविडन्ड जैसे विज्ञापन कंपनी द्वारा किया जाता है जिसके लिए बुक क्लोजर और रेकॉर्ड डेट निश्चित की गयी है।

तो फिर जो कुछ शेअर्स इस तारीख को या इसके बाद की तारीख को खरीदते है वह इसका फायदा मिलने के हकदार नहीं होते।

बोनस क्या होता है? (What is Bonus in Hindi)

जब आप निवेश करते है तभी आपके पूंजी में वृद्धी होने की गिनती नहीं की जाती। पर कंपनी के सभी उधारी का भुगतान करने के बाद जो सरप्लस बाकी होता है उसका हिस्सा मिलता है ऐसा भी हो सकता है।

पर इस सरप्लस का ठिक तरह से वितरण सौभाग्य से ही होता है ऐसा नज़र आता है। इसके बदले वह रिजर्व या सरप्लस खाते में जमा किया जाता है।

जब यह रकम बहुत ही बड़ी हो जाती है तब कंपनी ऐसे रकम को रिजर्व खाते में से एक एन्ट्री द्वारा शेअर कॅपिटल खाते में जमा कर सकती है।

इस तरह से बाज़ार में आऊटस्टँडींग शेअर्स को बढ़ाया जा सकता है और हर एक निवेशक को बोनस शेअर्स दिए जा सकते है जो एक निर्धारीत बोनस रेश्यो के अनुसार दिए जाते है। इसके ईश्यू को बोनस ईश्यू कहा जाता है।

अगर बोनस रेश्यो १:२ होगा तो उसका अर्थ ऐसा होता है कि प्रत्येक २ शेअर्स के पिछे शेअर धारक को १ शेअर मिलता है। इसलिए शेअर धारक के पास पहले के २ शेअर्स हो तो अब उनके पास कूल मिलाकर ३ शेअर्स होते है।

स्टॉक स्प्लीट क्या होता है? (What is Stock Split in Hindi)

यह एक ऐसी बक एन्टी है जिसमें शेअर्स के फेसव्हॅल्यू के बदले आऊटस्टँडिंग शेअर्स में बढ़ोतरी की जाती है।

अगर कंपनी ने टू-वे स्प्लीट किया तो उसका अर्थ यह होता है कि रू. १० की फेसव्हॅल्यू के शेअर्स रू. ५ की फेसव्हॅल्यू वाले बन जाते है और जिनके पास १ शेअर होता है अब उनके पास २ शेअर्स होते है।

बायबॅक क्या होता है? (What is Buyback in Hindi)

नाम दर्शाता है उस तरह से यह एक विकल्प है जिस से कंपनी स्वयं के शेअर्स निवेशक के पास से फिर से खरीदती है। यह कार्य वह अलग अलग प्रकार से कर सकती है।

उस निवेशक के पास से कम संख्या में शेअर्स खरीद सकती है या फिर टेन्ड ऑफर द्वारा ओपन बाज़ार में से खरीद सकती है। साथ ही बुक बिल्डिंग के तरीके से खरीद सकती है। स्टॉक एक्सचेन्ज के पास से या ऑड लॉट से खरीद सकती है।

सेटलमेन्ट सायकल क्या होता है? (What is Settlement Cycle in Hindi)

इस बाज़ार में जो शेअर्स ट्रेड होते है उनके अकाऊंन्टींग पिरीयड गिनती की जा सकती है। दोनों एनएसई और बीएसई रोलींग सेटलमेन्ट का उपयोग करते है।

हर एक सेटलमेन्ट के आखिर में किसी भी शेअर दलाल को जो देना होता है या बाज़ार में से माल और रूपए लेने होते है उसकी गिनती की जाती है और हर शेअर दलाल को उसके नियमानुसार, समय पर भुगतान करना होता है।

रोलीग सेटलमेन्ट क्या होता है? (What is Rolling Settlement in Hindi)

रोलींग सेटलमेन्ट द्वारा तय किया जाता है कि किसी भी दिन का ट्रेडिंग भाव और सेटलमेन्ट की कालावधी में निश्चित दिनों में सेटल किया जाता है।

फिलहाल संपूर्ण कालावधी यह पाच दिनों का माना जाता है। यह वेईटिंग कालावधी हर प्रकार के ट्रेड के लिए समान होता है।

लोगों ने स्वयं के शेअर दलाल को शेअर्स और रूपए कब देने चाहिए? (When Should People Give Shares and Money to Their Own Share Broker in Hindi)

एक विक्रेता के रूप में आपकी सेटलमेन्ट अच्छी तरह से हो इसके लिए आपको कॉन्ट्रॅक्ट नोट मिलने के बाद शेअर्स आपके ब्रोकर को ट्रान्सफर करने चाहिए। जो पे-ईन दिन से पहले किसी भी हालत में होना चाहिए।

फिलहाल आप जिस दिन शेअर्स बेचते है उस दिन के बाद तिसरे दिन पेईन होता है। इसलिए यह हितावह होता है। दुसरे दिन शेअर्स के लिए सब से अच्छा विकल्प यह ऑटो-पेईन का होता है। यह अगले अध्याय में विस्तार पूर्वक बताया गया है।

उसी तरह से खरीदी करने वाले को जब कॉन्ट्रॅक्ट नोट मिलता है तभी रूपए भर देने चाहिए। जो पे-ईन दिन से पहले होना जरूरी है। आपके ब्रोकर के साथ के संबंध के अनुसार इसमें आपको थोड़ी बहुत छूट मिल सकती है।

शॉर्ट सेलिंग क्या होता है? (What is Short Selling in Hindi)

किसी व्यक्ति को कुछ शेअर्स में गिरावट होगी ऐसा लगता हो तो वह शेअर्स पहले बेचकर और बाज़ार बंद होने से पहले फिर से खरीदके काम किया तो उसे ‘शॉर्ट सेलिंग’ कहा जाता है।

अगर आपके अंदाज के अनुसार शेअर्स का भाव गिरा और उस गिरावट पर खरीदी की तो उसका फायदा होता है।

उदा. किसी को ओएनजीसी में गिरावट होगी ऐसा लगता हो और चालू बाज़ार भाव रू. १००० होगा तब बेच दीजिए। इसके बाद भाव रू. ९९० होता है तब अच्छी खरीदी करने पर उन्हें रू. १० का मुनाफा हुआ ऐसा कहा जा सकता है।

इस तरह से खाते में शेअर्स न होने पर भी पहले बिक्री करके और बाद में खरीद के जो ट्रेडिंग किया जाता है उसे शॉर्ट सेलिंग कहते है।

नोट (Note):

  • शॉर्ट सेलिंग ईन्ट्राडे में किया जा सकता है। साथ ही फ्युचर के विषय में फ्युचर की बिक्री करके एक से ज्यादा दिनों तक शॉर्ट सेलिंग की पोजिशन खड़ी की जा सकती है।
  • जब आपको लगता हो कि अब गिरावट अटक गई और फिर बढ़ोतरी होगी तब ट्रेलिंग स्टॉप के अनुसार पोजिशन एक समान करनी चाहिए।

बॅड डिलिवरी क्या होता है? (What is Bad Delivery in Hindi)

सेबी ने अच्छे और खराब शेअर्स की डिलिवरी के लिए एक जैसे नियम बनाए है। बॅड डिलिवरी याने शेअर्स सर्टिफिकेट फटा हुआ हो, खराब हुआ हो, लिखावट में बदलाव किया हो, कंपनी के नाम में गलती हुई हो आदि कारणों का समावेष किया जाता है।

बॅड डिलिवरी तभी संभव है जब वह फिजिकल फॉर्म में हो। डिमेट में बॅड डिलिवरी की संभावना बिलकूल नहीं होती।

फिजिकल शेअर्स का ट्रान्सफर किस तरह से होता है? (How Do Physical Shares Transfer in HIndi)

एक बार शेअर्स बेचने के बाद वह शेअर्स उनके साथ ठिक तरह से भरकर, हस्ताक्षर करके और स्टॅम्प किए हए डीड के साथ जोडकर उस कंपनी में खरीददार के नाम से भेज दिए जाते है।

एक बार शेअर्स ट्रान्सफर रजिस्टर में नया नाम लिखवाने के बाद ट्रान्सफर की प्रक्रिया पूर्ण हुई ऐसा कहा जाता है।

निवेशकों के अधिकार (Investor Rights) :

  • कंपनी में से सभी प्रकार की जानकारी हासिल करने का अधिकार।
  • ट्रान्सफर, सब डिविजन इन जैसे कार्य बिना कोई विलंब कंपनी से किए जाते है।
  • निवेशकों को अधिकार होता है कि भविष्य में आनेवाले हर ईश्यू में वह सबस्क्राईब कर सकते है।
  • ब्रोकरेज २.५ से अधिक चार्ज नहीं कि जाती।
  • निश्चित किए फॉर्मेट में शेअर दलाल द्वारा कॉन्ट्रैक्ट मिलता है जिसमें ब्रोकरेज और भाव अलग अलग दर्शाए जाते है।
  • जिन्होने शेअर्स खरीदे है वह उनके खाते में ज्यादा से ज्यादा ५ दिनों के अंदर ट्रान्सफर होने चाहिए और जिन्होने शेअर्स बेचे है उनके रूपए भी इसी समय में उन्हे मिलने चाहिए।
  • अगर शेअर दलाल के साथ किसी कारणवश तक्रार हुई तो निवेशक एक्सचेन्ज की आर्बिट्रेज सुविधा का उपयोग कर सकते है।
  • लिस्टेड कंपनी या शेअर दलाल के खिलाफ फिर्याद दाखिल करने के लिए, संपर्क करे, इन्वेस्टर सर्विस सेल, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेन्ज लिमिटेड, पी.जे.टॉवर, दलाल स्ट्रीट, फोर्ट, मुंबई – ४००००१.

ऑक्शन क्या होता है? (What is Auction in HIndi)

जब कोई शेअर धारक शेअर बेचने के बाद समय के अनुसार शेअर्स की डिलिवरी देने में असफल होता है तब ऑक्शन द्वारा बाज़ार उस अंतर घाटे को एकसमान करता है।

इसके लिए हर एक निवेशक को ध्यान में रखना जरूरी है कि वह जब शेअर्स बेचते है तब उनके पास उतनी सख्या में शेअर्स होने चाहिए क्योंकि ऑक्शन के कारण उन्हें बिना मतलब बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

अब ऑक्शन जिस भाव से हुआ वह भाव और बिक्री भाव के बिच का फर्क सकारात्मक होगा तो होनेवाला मूनाफा ईन्वेस्टर प्रोटेक्शन फंड में जमा किया जाता है।

इसलिए ऑक्शन से फायदा कभी भी नहीं होता। पर घाटा मात्र हो सकता है। पहले दिन के बिक्री भाव से अगर ऑक्शन के दिन का भाव याने की पाँचवे दिन का भाव जितना अधिक होता है वह फर्क या २०% के ऊपर भी हो सकता है।

भाव बिक्री भाव के नीचे बंद हुआ तो ऑक्शन में मुनाफा होता है। जो ऊपर बताया है उस तरह से इन्वेस्टर प्रोटेक्शन फंड में जमा होता है।

शेअर दलाल का चयन (Selection of Stock Brokers in Hindi) :

  • आपका शेअर दलाल, ब्रोकर या सब-ब्रोकर सेबी में रजिस्टर्ड होना जरूरी है।
  • दलाल के साथ काम करने से पहले जरूरी करारनामा करना चाहिए। आजकल हर एक सेगमेन्ट में रू. १०० के स्टॅम्प वाले फॉर्म होत ह जिस भरकर वह आपका रजिस्ट्रेशन कर सकते है और यह करना जरूरी भी है।
  • लोग टॅक्स बचाने के लिए स्वयं के दलाल के खाते में ट्रेडिंग करते है। ऐसा करना आपके हित में नहीं होता। अपने स्वयं के खाते में ही ट्रेडिंग करने का आग्रह कीजिए। जिस से पारदर्शकता होगी।
  • दलाल के पास से लेन-देन की कॉन्ट्रॅक्ट नोट समय समय पर ले लेनी चाहिए। जिसमें लेन-देन का समय, ट्रेडिंग नंबर आदि की संपूर्ण जानकारी होती है।
  • दलाल के पास से समय समय पर रकम मिलने का आग्रह कीजिए। उसमें ढीलढाल हो तो दलाल बदलना हितकारक होता है।
  • आपने खरीदे हुए शेअर्स आपके खाते में कम से कम तीन दिन और ज्यादा से ज्यादा एक सप्ताह के अंदर जमा होने चाहिए।
  • सही सलाह, अच्छी सर्विस और पारदर्शक कार्यप्रणाली वाले शेअर दलाल के पास जाने का आग्रह कीजिए।

अगर आपको (हमेशा शेयर बाजार के बारे में पूछे जानेवाले प्रश्न – Share Market Knowledge in Hindi) इस ब्लॉग में आपके प्रश्न का उत्तर नहीं मिला है तो आप शेयर मार्किट से जुड़ा कोई भी सवाल है तो आप कृपया कमेंट में जरूर पूछे।

।। धन्यवाद ।।

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5 टिप्पणियाँ

Very nice information though it is very old too · फ़रवरी 7, 2021 पर 10:34 पूर्वाह्न

Nice reading

Vaman Agravat · फ़रवरी 7, 2021 पर 10:35 पूर्वाह्न

Happy reading the article

स्टॉक अ‍ॅनालिसिस के प्रकार - Types Of Stock Market Analysis In Hindi · फ़रवरी 7, 2021 पर 9:25 अपराह्न

[…] हमेशा शेयर बाजार के बारे में पूछे जाने… […]

टेक्नीकल अनालिसिस और स्विंग ट्रेडिंग - Technical Analysis And Swing Trading In Hindi · फ़रवरी 11, 2021 पर 3:49 अपराह्न

[…] हमेशा शेयर बाजार के बारे में पूछे जाने… […]

टेक्नीकल अ‍ॅनालिसीस का मूल ज्ञान - Basics Of Technical Analysis In Hindi · मार्च 4, 2021 पर 3:32 अपराह्न

[…] हमेशा शेयर बाजार के बारे में पूछे जाने… […]

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