क्या आपको पता है की स्विंग ट्रेडिंग क्या है? – What is Swing Trading in Hindi अगर आपको पता नहीं है तो आप इस ब्लॉग को पूरा पढ़े.

स्विंग ट्रेडिंग क्या है? – What is Swing Trading in Hindi

Table of Contents

स्विंग ट्रेडिंग का मूल उद्देश विभिन्न शेअर्स या इन्डेक्स में कम कालावधी में दिखनेवाले उतार चढ़ाव में मुनाफा कमाना होता है।

स्विंग ट्रेडिंग में हमें हर एक शेअर्स के फंडामेन्टल की चिंता नहीं होती, पर हम किसी भी कंपनी के शेअर्स या इंडेक्स जिसमें हमें पोजिशन खड़ी करनी हो, उसकी बाज़ार में कितनी तरलता (लिक्विडीटी) है इस बात का ध्यान रखना जरूरी है।

स्विंग ट्रेडर किसी भी प्रकार के बाज़ार में मुनाफा कमा सकते है, पर उन्हें अधिकतम लाभ तभी मिलता है जब बाज़ार एक स्थापित ट्रेन्ड में स्विंग के साथ आगे बढ़ता है या फिर ऐसे रेन्ज में होता है जिसमें ट्रेडिंग करने जैसे हालात मौजूद होते है।

स्विंग ट्रेडिंग और स्विंग के साथ स्थापित ट्रेन्ड में आगे बढ़नेवाला बाज़ार – Swing Trading & Markets Trending with a Wave in Hindi

आपको लहरें या तरंगें पता ही होगी। लहरें या तरंगें प्रकृती में मौजूद है। जब हम तालाब में एक पत्थर फेंकते है, तब तालाब की लहरों की तरंग उठती नज़र आती है। यही तरंग लहारों के रूप में आगे बढ़ती है।

इसी तरह से कई शेअर्स इस प्रकार की लहरों के अनुसार स्विंग के साथ आगे बढ़ते हुए नज़र आते है। स्विंग ट्रेडर की तरह हम ऐसे स्विंग का उपयोग करके कम कालावधी के लिए खरीदी-बिक्री करके मुनका कमा सकते है।

जब बाज़ार स्थापित ट्रेन्ड में होता है, तब तेजी की स्थिति में हमें स्विंग के सपोर्ट के नजदीक खरीदी करनी चाहिए और जब ट्रेन्ड रिवर्सल के संकेत मिलते है या उसकी समयमर्यादा पूर्ण होती है, तब जो स्थिति पहले आती है उसके अनुसार बिक्री करके बाहर निकलना चाहिए।

स्विंग ट्रेडिंग और रेंजिंग बाज़ार? – Swing Trading & Ranging Markets in Hindi

जब बाज़ार रेन्ज में होता है, उस समय नीचे की दिशा में सपोर्ट और ऊपर की दिशा में रेजिस्टन्स स्पष्टरूप से स्थापित होते नज़र आते है

उस वजह से स्विंग ट्रेडर को अपनी लागत पर बहुत ही कम जोखिम के साथ सपोर्ट के पास खरीदी करने के और रेजिस्टन्स के पास बिक्री करने के कई मौके मिलते है।

स्विंग ट्रेडिंग और पहले से ही मोमेन्टम की स्थिति में होनेवाला बाज़ार : जिसमें कोई भी सिग्नल नहीं मिलता।

जब बाज़ार मजबूत मोमेन्टम में होता है, तब वह बाज़ार स्विंग ट्रेडर के लिए किसी काम का नहीं होता क्योंकि ऐसे बाज़ार में उन्हें फिर से दाखील होने का मौका नहीं मिलता।

स्विंग ट्रेडिंग का लक्ष्य – Objective of Swing Trading in Hindi

स्विंग ट्रेडर की तरह आपका लक्ष्य ट्रेन्ड रिवर्सल और कन्टीन्यूएशन के बाज़ार में आनेवाले नए सकारात्मक ब्रेकआऊट को ढुंढ़ना पड़ता है और सही समय पर ट्रेड दाखील करके, उसके बाद दिखनेवाले उतार-चढ़ाव का फायदा उठाना चाहिए।

ट्रेडर को अपनी लागत पर अच्छा मुनाफा कमाने की ओर स्वंय का लक्ष्य केंद्रित करना चाहिए।

पारंपरिक परिभाषा के अनुसार हम ऐसा बोल सकते है कि, स्विंग ट्रेडर का लक्ष्य ३ से १० दिनों में दिखाई देनेवाले बड़े उतार-चढ़ाव का फायदा उठाना, यह होना चाहिए और ऐसे उतार-चढ़ाव ज्यादातर स्विंग वाले बाज़ार में और जब ट्रेन्ड बदलनेवाले होता है, उस समय अधिक मात्रा में दिखाई देते है।

परंतु पहले दर्शाए गए तरीके से एक आधुनिक ट्रेडर के समान आपके तय किए नियमों के अनुसार पोजिशन दाखील करनी चाहिए और जब बाहर निकलने की बात आती है

तब तय किए दिनों के पूर्व गिनती के बजाए तय किए स्टॉपलॉस के अनुसार जब तक पोजिशन पकड़कर रख सकते हो तब तक वह पकड़कर रखनी चाहिए।

प्रमखत: स्विंग ट्रेडर जो व्यवहार करते है वह स्थापित ट्रेन्ड की दिशा में ही होते है। परंतु कुछ ऐसे भी स्विंग ट्रेडर दिखाई देते है जो सपोर्ट नहीं टुटेगा या फिर रेजिस्टन्स आना तय है इस बात की पुष्टी किए बगैर पहले से ही पोजिशन खड़ी करके ट्रेन्ड की विपरीत दिशा में व्यवहार करते है।

ऐसा ट्रेन्ड स्थापित होने से पहले ही ट्रेन्ड के विपरीत किए गए व्यवहार में जोखीम का प्रमाण बहुत ही अधिक होता है और कई बार ऐसा दिखता है कि हमारी उम्मीद के विपरीत सपोर्ट टुटता है या फिर रेजिस्टन्स नहीं आता।

मैं आपको ऐसी सलाह दूंगा कि पहले इन बातों की पुष्टी कर लें, उसके बाद ही व्यवहार करें। अगर ऐसा करने के लिए थोड़ी अधिक किमत चुकानी पड़ें या फिर मुनाफा थोड़ा कम होगा तो भी ऐसे ही करना चाहिए।

स्विंग ट्रेडर का लक्ष्य ऐसा होना चाहिए कि, बड़े उतार-चढ़ाव में मिलने वाले मौके पर वह तुरंत मुनाफा निकाल सके और मोमेन्टम के गायब होने पर उसमें से बाहर निकलना चाहिए।

इस प्रकार के ट्रेडिंग में भाव पर आधारीत एक्झीट और समय पर आधारीत एक्झीट करना बड़ा ही महत्वपूर्ण होता है।

जब हम समय पर आधारीत एक्झीट की बात करते है, तब हमने एक सप्ताह तक खड़े रहने की गिनती से कोई व्यवहार किया हो और भाव उस समय के दौरान तय टार्गेट तक पहुंच नहीं पाया तो समय सीमा पूर्ण होने पर हमें उसमें से बाहर निकलना चाहिए

उसमें आपका थोड़ा नुकसान या फायदा हो तब भी। इस समय सीमा का आधार जब तक ट्रेलिंग स्टॉप लॉस ट्रिगर नहीं होता तब तक अपने शेअर्स की होल्डींग को पकड़ कर रखना होता है। यह स्टॉप लॉस की मर्यादा आप कई टेक्नीकल अॅनालिसिस के आधार पर तय कर सकते हैं।

जब किसी दिर्घ कालावधी के स्थापित ट्रेन्ड का अंत होने की संभावना होती है, तब एक ऐसा समय आता है जब बाज़ार तीव्र तेजी या तीव्र मंदी दर्शाता है और इस समय मोमेन्टम ट्रेडर इसका फायदा उठाते है।

इस तरह के मोमेन्टम के दरम्यान तेजी होगी तो भाव तुरंत बढ़ता है और मंदी होगी तो भाव तुरंत घटता है और स्वयं के ७ दिनों के अवरेज का मान रखकर भाव आगे बढ़ते हुए नज़र आता है। आगे चलकर ट्रेन्ड स्थापित होने के बाद दिखनेवाले स्विंग में स्विंग ट्रेडर दाखील होते हुए नज़र आते है।

स्विंग ट्रेडर ऐसे दिर्घ कालावधी के स्थापित ट्रेन्ड में कम कालावधी में उठनेवाले स्विंग का फायदा लेते हुए नज़र आता है। वह मध्यम कालावधी के सपोर्ट के नजदीक खरीदी करते हुए नज़र आते है और मध्यम कालावधी के रेजिस्टन्स के नजदीक बिक्री करते हए दिखाई देते है।

स्विंग ट्रेडिंग में, जब कोई शेअर्स या इन्डेक्स एक रेन्ज में होता है और सपोर्ट स्थापित करता है तब आपको उस स्तर पर खरीदने का प्रयास करना चाहिए और उसके बाद दिखनेवाली तेजी का अधिकतम फायदा उठाने का प्रयास करना चाहिए।

इसी प्रकार जब रेजिस्टन्स स्थापित होता है तब आपको रेजिस्टन्स के नजदीक बिक्री करके खड़े रहना चाहिए।

जब किसी शेअर्स में मंदी स्थापित होती है, तब स्विंग ट्रेडिंग में जब कम कालावधी की तेजी के खिलाड़ी किसी स्थापित रेजिस्टन्स के नजदीक तेजी नहीं कर पाते तब आपको वह शेअर्स का रेजिस्टन्स स्थापित होने के बाद उसके भाव में गिरावट की शुरूआत होती है, तब बिक्री करनी चाहिए।

स्विंग ट्रेडिंग में लाभ-क्षमता का आधार, आपने किस प्रकार के शेअर्स में ट्रेडिंग किया है, इस पर होता है। परंतु साधारणरूप से हम ऐसा बोल सकते है कि किसी भी ट्रेडिंग में से हम ५ से १५ % की कमाई कर सकते है।

स्विंग ट्रेडर के पोर्टफोलिओ के टर्नओवर डे-ट्रेडर की तुलना में बहुत ही कम होता है परंतु पोजिशन ट्रेडर की तुलना में अधिक होता है।

ज्यादातर स्विंग ट्रेडर सप्ताह में ३ से ५ बार ट्रेडिंग करते हुए दिखाई देते है। इस संख्या में बदलाव किया जा सकता है, उसका आधार व्यक्तिगत लक्ष्य तय करने और ट्रेडिंग करने की क्षमता पर होता है।

अलग अलग ट्रेडर अलग अलग ट्रेडिंग के तरीके का उपयोग करते हुए दिखाई देते है। इसके साथ ही ज्यादातर नए ट्रेडर, क्या करना या क्या नहीं करना चाहिए इस दुविधा में होते है।

इस दुविधा का एक मुख्य कारण यह भी है कि उन्हें कब तक पोजिशन पकड़कर रखनी चाहिए इसकी जानकारी उन्हें नहीं होती और समय के अनुसार एक्झीट के महत्व का ध्यान नहीं होता और उसका किस तरह से उपयोग करना चाहिए इसका ज्ञान भी नहीं होता।

यह कारक बिलकुल स्पष्ट होने चाहिए और उसमें किसी भी प्रकार की दुविधा नहीं होनी चाहिए। यह स्विंग ट्रेडिंग का मूल आधार है।अगर जरूरी हो तो इस को कई बार पढ़लें, जिससे आपके दिमाग में वह स्पष्टरूप से अंकित हो जाए।

स्विंग ट्रेडिंग की समय सीमा या शेअर्स होल्डिंग की अवधि – Time Horizon or Holding Period in Swing Trading in Hindi

परंपरागत दृष्टीकोण से देखा जाए तो स्विंग ट्रेडिंग की नीति के अनुसार काम करने वाले ट्रेडर कोई भी पोजिशन ३ दिन से लेकर १० दिनों तक पकड़कर रखते हुए दिखते है। अलग अलग स्विंग ट्रेडर के इस रेंज में थोड़ा-बहुत बदलाव नज़र आता है।

होल्डिंग पिरियड अर्थाथ शेअर्स को पकड़कर रखने की अवधी के विषय में दुविधा न हो इसके लिए क्या करना चाहिए?

शेअर्स को पकड़कर रखने की अवधी याने होल्डिंग पिरियड के विषय में दुविधा न हो इसके लिए नीचे दिए मूल आधार के सिद्धांत का उपयोग करना चाहिए।

स्विंग ट्रेडिंग में होल्डिंग पिरियड अर्थाथ शेअर्स को पकड़कर रखने की अवधी के मापदंड।

स्विंग ट्रेडिंग के आधार पर एक बार पोजिशन खड़ी करने के बाद निश्चित दिनों के लिए पकड़कर रखने के तरीके का उपयोग करने के बजाए किसी भी शेअर्स अथवा इंडेक्स को तब तक पकड़कर रखना चाहिए जब तक उनमें स्थापित मोमेन्टम अखंड होता है।

स्विंग ट्रेडिंग के व्यवहार में से बाहर कब निकलें?

स्विंग ट्रेडिंग के व्यवहार में से तब बाहर निकलना चाहिए जब आपको पहली बार ट्रेन्ड रिवर्सल का संकेत मिलता है और ट्रेलिंग स्टॉप लॉस का स्तर टुंटता है।

स्विंग ट्रेडिंग की समय सीमा के विषय में विभिन्नता।

स्विंग ट्रेडिंग का व्यवहार केवल एक टाईम फ्रेम पर लक्ष्य केंद्रित करके नहीं करना चाहिए।

स्विंग ट्रेडिंग में बहुत ही कम समय सीमा के टाईम फ्रेम का उपयोग करके कुछ दिन पोजिशन पकड़कर रखने के बजाए वह पोजिशन सिर्फ कुछ प्राईज कॅन्डल के लिए भी खड़ी करके मुनाफा कमाया जा सकता है।

स्विंग ट्रेडिंग की समय सीमा के आधार पर ट्रेडिंग में से बाहर निकलना – Time Based Exit in Swing Trading in Hindi

समय सीमा के आधार पर ट्रेडिंग में से तब बाहर निकलना होता है जब भाव तय समय सीमा में अपनी अपेक्षा के अनुसार परिणाम नहीं देता।

जब हम दिर्घ कालावधी के लिए निवेश करते है तब हम किसी भी शेअर्स कन्सॉलिडेशन में जाए तो हम अपनी पोजिशन पकड़कर रखते है। परंतु बात जब स्विंग ट्रेडिंग की होती है, तब कोई भी शेअर्स कन्सॉलिडेशन में जाने से पहले हमें उसमें से बाहर निकलना चाहिए।

आप कभी भी किसी भी स्विंग ट्रेडर को कन्सॉलिडेशन में अपनी पोजिशन खड़ी करते हुए नहीं देख सकते। अगर आपने ऐसा किया तो स्वयं को स्विंग ट्रेडर नहीं कहला सकते।

ऊपर बताया गया है उसके अनुसार, जब तक भाव कन्सॉलिडेशन के बगैर मजबूत मोमेन्टम के साथ अगर एकसूत्रता से बढ़ रहा होता है तब तक किसी निश्चित समय सीमा के आधार पर बाहर नहीं निकलना चाहिए। व्यवहार में स्विंग ट्रेडिंग के नियमों के अधिन रहकर दाखील होना चाहिए।

स्विंग ट्रेडिंग की बात जब कुछ दिनों के लिए पोजिशन खड़ी करके ट्रोडग करने की हो, तब कहा जा सकता है कि वह एक ऐसी टाईम फ्रेम है जा पूरा दिन नौकरी करने वाले लोगों के या व्यापार करने वाले लोगों के लिए याग्य गिनी जा सकती है, जो ईन्ट्राडे ट्रेडिंग नहीं कर सकते।

बहुत ही कम टाईम फ्रेम में स्विंग ट्रेडिंग – Swing Trading in Shorter Time Frames in Hindi

जिनके पास ईन्टाडे चार्ट के निरीक्षण के लिए समय होता है, वह स्विंग ट्रेडिंग का उपयोग कम कालावधी के टाईम फ्रेम में कर सकते है। ऐसे कम कालावधी के टाईम फ्रेम में भी स्विंग की संभावना होती है और ट्रेन्ड रिवर्सल का संकेत

दिखाई देता है। स्विंग ट्रेडिंग का उपयोग ऐसे टाईम फ्रेम में करके अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।

इस तरीके का उपयोग कौन कर सकता है?

बात जब बहुत ही कम कालावधी के टाईम फ्रेम में ट्रेडिंग करने की होती है. तब यह जान लेना जरूरी होता है कि इस प्रकार के तरीके में ईन्ट्राडे चार्ट जैसे कि कुछ मिनिटों के चार्ट या कुछ घंटो के चार्ट पर लक्ष्य केंद्रित करना जरूरी होता है।

इस लिए सिर्फ उन लोगों को इस तरीके का उपयोग करना चाहिए जिनके पास ईन्ट्राडे चार्ट पर नज़र रखने के लिए जरूरी समय उपलब्ध होता है।

क्या स्विंग ट्रेडिंग कारगर है? और अगर इसका जवाब हाँ है, तो वह कैसे?

कई लोगों को जब कोई नया काम करना होता है तब वह लोग दुविधा में पड़े हए नज़र आते है। स्विंग ट्रेडिंग के विषय में भी ऐसा हो सकता है।

यह जानना जरूरी है कि कोई तरीका काम कर रहा है या नहीं, उसका आधार आप उस तरीके का उपयोग कितनी अच्छी तरह से कर सकते हो उस पर निर्भर होता है।

स्विंग ट्रेडिंग में भी यही नियम लागू होता है। यह ट्रेडिंग का कोई नया तरीका नहीं है। स्विंग ट्रेडिंग लंबे समय तक परीक्षण किया हुआ ट्रेडिंग का तरीका है।

अगर वह ठिक तरह से समझ में आ गया और अगर उस पर सही और सटीकता से अमल किया जाए तो आप बहुत अच्छी कमाई कर सकते है। इसी

कारण से हम ऐसा बोल सकते है कि स्विंग ट्रेडिंग निश्चित रूप से कारगर है। | इसका एक प्रमुख कारण यह है कि, स्विंग ट्रेडिंग में ज्यादातर ट्रेडिंग पहले से

ही स्थापित हुए ट्रेन्ड की दिशा में किया जाता है और पोजिशन तभी ली जाती है जब हमें उसका पूरी तरह से यकिन होता है और हम बोल सकते है कि भाव किसी भी स्थापित ट्रेन्ड की दिशा में कुछ दिनों तक तो जरूर आगे बढ़ेगा।

स्विंग ट्रेडिंग के आधार पर ट्रेडिंग करने से पूर्व इस प्रकार की पुष्ठी हम | टेक्नीकल अ‍ॅनालिसिस में उपलब्ध कई सूचकों के आधार से हासिल कर सकते है।

नोट :

ट्रेन्ड की विपरीत दिशा में ट्रेडिंग करने की सलाह मैं नहीं दूंगा। एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि, किसी सपोर्ट पर या रेजिस्टन्स पर भाव आने के विश्वास से ट्रेडिंग नहीं करना चाहिए

अथवा भाव कम कालावधी में सपोर्ट लेकर जरूर बढ़ेगा या फिर रेजिस्टन्स देकर जरूर घटेगा। आपका लक्ष्य केवल कन्फर्म ट्रेडिंग करने पर ही होना चाहिए।

जब भाव ट्रेड ईनीशिएशन झोन में दाखिल होता है तब ट्रेडर को सतर्क रहना चाहिए। पर इसका अर्थ यह नहीं है कि ऐसा होने पर हमें तुरंत पोजिशन लेनी चाहिए।

हमेशा ध्यान में रखे कि, किसी भी टॉप के नजदीक ऐसा मानकर कभी ट्रेडिंग नहीं करना चाहिए कि, भाव कोई भी रेजिस्टन्स देने के बाद तुरंत घटने लगेगा।

स्थापित तेजी के समय में पोजिशन तभी लेनी चाहिए जब नीचे की दिशा में सपोर्ट के पास से भाव ऊपर की दिशा में जाने लगता है।भाव तब तक बढ़ते रहता है जब तक ऊपर की दिशा में कोई महत्वपूर्ण रेजिस्टन्स नहीं आता।

उसी तरह से स्थापित मंदी के समय में पोजिशन तभी लेनी चाहिए जब ऊपर की दिशा में रेजिस्टन्स आने के बाद भाव गिरने लगता है। भाव तब तक गिरता है जब तक नीचे की दिशा में कोई सपोर्ट नहीं मिलता।

स्विंग ट्रेडिंग और आप स्वयं (Swing Trading & Yourself)

आप स्विंग ट्रेडिंग के अनुसार ट्रेडिंग करें उसके पहले कई महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखना आपके लिए जरूरी है। उस आधार पर ही आप तय कर सकते है कि आप किस प्रकार के स्विंग टेडर है।

सब से पहले आपको यह तय करना जरूरी है कि आप स्विंग ट्रेडिंग के लिए कितना समय दे सकते है। यह बात इस लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्विंग ट्रेडिंग का उपयोग करने वाले कई लोग पूरा दिन उनके काम या नौकरी या फिर स्थापित कारोबार में पूरा दिन व्यस्त रहते है।

ऐसे स्विंग ट्रेडर को बाज़ार में दाखील होने के लिए या बाहर निकलने के लिए | फोन का आधार लेना पड़ता है। कई बार वह ट्रेडिंग टर्मिनल या टेलिविजन के सामने नहीं होते, इस लिए वह वर्तमान बाज़ार भाव पता नहीं कर सकते।

इसलिए अगर उन्होंने पहले ही टर्मिनल में लिमिट दाखील नहीं की तो उन्होंने स्वयं तय किया हुआ बाहर निकलने के भाव के स्तर को चूक सकते है, क्योंकि वह भाव कब आएगा इस बारे में वह अनजान होते है।

मेरी यह सलाह है कि, ऐसे ट्रेडर को अपने शेअर दलाल को पहले से ही जरूरी सूचना देनी चाहिए, जिससे वह आपको कोई भी भाव ट्रिगर होने पर तुरंत संदेश भेज सके या फिर उन्हें टर्मिनल में लिमिट देकर रखनी चाहिए जिससे वह जब कोई तय भाव आने पर ट्रेडिंग कर सके।

आधुनिक टेक्नोलॉजी की मद्द से अच्छी सेवा देने वाले शेअर दलाल की मदद से इस तरह की बाधाएं आप दूर कर सकते है। पर इस मद्द के अभाव से स्विंग ट्रेडिंग में या अन्य किसी भी ट्रेडिंग में अधिक मुनाफा कमाना कठिन है।

आपको यह जान लेना जरूरी है कि, ईन्ट्राडे ट्रेडिंग की तरह स्विंग ट्रेडिंग में आपको परा दिन ट्रेडिंग टर्मिनल के सामने बैठना जरूरी नहीं होता।

अगर सच में आपका लक्ष्य स्विंग ट्रेडिंग है और आप पूरा दिन टर्मिनल के सामने बैठ गए और आप अगर एक अनुशासित ट्रेडर नहीं है तो संभव है कि आप ईन्ट्राडे में दिखने वाले उतार-चढ़ाव के तनाव में आकर गलत निर्णय लें अथवा पहले ही शेअर्स बेचकर उसमें से बाहर निकल जाएंगे।

महत्वपूर्ण बात यह है कि बाज़ार शुरू होने से पहले किए हुए अभ्यास के आधार पर विविध ट्रिगर पॉईन्ट सेट करके रखने चाहिए और बाज़ार के शुरू होने पर टर्मिनल में जरूरत के अनुसार लिमिट ऑडर दाखील करनी चाहिए।

जिससे निर्धारीत भाव का टार्गेट नहीं चूकेगा और आपकी अपेक्षा के अनुसार ट्रेडिंग होगी। ज्यादातर लोगों ने ऊपर की तरह बर्ताव किया तो इस प्रवृत्ती को द्वितीय आमदनी के स्त्रोत के तौर पर अपनाया जा सकता है।

पर जिन्हे स्विंग ट्रेडिंग को प्राथमिक आमदनी के तौर पर अपनाना है, उन्होंने पहले जरूरी अभ्यास करके वैसी कुशलता हासिल करनी चाहिए और अनुभव

हासिल करना चाहिए। अनुभव हासिल करने का एक विकल्प यह है कि उन्होनें कुछ शेअर दलाला द्वारा दिए गए डेमो चार्टीग सॉफ्टवेअर का उपयोग करना चाहिए, जिसमें ट्रेडिंग प्लेटफार्म का भी समावेष होता है।

ट्रेडर इस अकाऊंट में डमी ट्रेडिंग करके स्वयं चूने हुए तरीके की सफलता की प्रतिशतता की जाँच कर सकते है और एक बार इस प्रकार के प्लेटफार्म पर सफलता की अच्छी प्रतिशतता मिलने के बाद ट्रेडर बाज़ार में ट्रेडिंग की शुरूआत कर सकते है।

दुसरी एक महत्वपूर्ण गुणवत्ता जो आप समय के साथ और अनुभव से हासिल कर सकते है कि, आप किसी भी दबाव को अच्छी तरह संभाल सके।

जो लोग तुरंत आक्रमक होते है, ऐसे लोग किसी भी ट्रेडिंग में सफलता हासिल नहीं कर सकते। कुल मिलाकर फायदे में होना यह कोई मुश्किल बात नहीं। पर उसके लिए ट्रेडिंग की दिशा में एक अनुशासित दृष्टिकोण होना चाहिए।

दुसरी महत्वपूर्ण बात जो आपको ध्यान में रखनी चाहिए वह यह कि आपका हर ट्रेडिंग मुनाफे में ही हो यह संभव नहीं।

हमें कुल मिलाकर फायदे में रहने की कोशिश करनी चाहिए। पर कभी भी इस बात का आग्रह नहीं करना चाहिए कि आपका हर ट्रेडिंग मुनाफे में ही हो क्योंकि ऐसा करके आप बिना कारण अपने दिमाग पर अधिक तनाव लेते है।

हमें जिस बात पर जोर देना चाहिए वह यह है कि ट्रेडिंग की हमारी लाभक्षमता की प्रतिशतता अच्छी हो। ट्रेलिंग स्टॉप लॉस के अनुसार और होशियारी से लगाए स्टॉप लॉस के आधार पर हम अपने ट्रेडिंग की लाभ-क्षमता को शत प्रतिशत के आसपास जरूर लेकर जा सकते है।

जिनमें अनुशासन का अभाव होता है, उनको थोड़ा बहुत नुकसान लगातार हुआ तो उस नुकसान में से बाहर निकलने की आशा में वह अधिक नुकसान वाला व्यवहार कर बैठते है। उनकी स्थिति, किसी हारे हुए जुआरी की तरह होती है।

जो बात वह भूलने की गलती करते है, वह यह कि जब आप किसी कारणवश लगातार नुकसान होने वाले ट्रेडिंग करते है तब आपको कम संख्या में ट्रेडिंग करना चाहिए, ना की उनकी संख्या बढ़ाकर।

पहले आपको एक तरफ रहकर, क्या हुआ है इस बात का विश्लेषण करना चाहिए।अगर आपने कोई गलती की हो तो वह सुधारी जा सकती है।

अगर बाज़ार में अस्थिरता हो तो, ऐसी परिस्थिति में क्या किया जा सकता है, इसके बरे में न सोचकर जब तक नया ट्रेन्ड स्थापित नहीं होता तब तक शांत रहकर राह देखना आपके हित में होता है और उसके बाद ही नया ट्रेडिंग करने का प्रयास करना चाहिए।

स्विंग ट्रेडिंग को आप अपनी वर्तमान नौकरी या कारोबार के साथ कर सकते है। आपको अपनी नौकरी छोड़ने की जरूरत नहीं और ऐसा करना भी नहीं।

इसके बदले आपको ऐसे तरीके का उपयोग करना चाहिए जिसमें आप सप्ताह के कुछ घंटे रिसर्च करके ऐसे सफल ट्रेडिंग के तरीके का विकास कर सकते है

जो आपको सही समय पर बाजार में दाखील होने का मौका देगा और टेलिंग स्टॉप लॉस की मद्द से बहुत ही ज्यादा मुनाफा आपको दिलाएगा और मुश्किल समय में अगर किसी ट्रेडिंग में आपकी तय की हुई चाल नहीं दिखाई दी

तो स्टॉप लॉस की मद्द से जरूरत पड़ने पर कम से कम नुकसान के साथ आपको ट्रेडिंग में से बाहर निकाल देगा।

स्विंग ट्रेडिंग (Swing Trading in Hindi)

  • लक्ष्य : मासिक आमदनी।
  • जिसकी मद्द से करना है : इंट्राडे और दैनिक चार्ट का टेक्नीकल अ‍ॅनालिसिस।
  • होल्ड करने की समय सीमा : परंपरागत नीति के अनुसार दैनिक और साप्ताहिक चार्ट के आधार पर स्विंग ट्रेडिंग का व्यवहार ३ दिनों से लेकर १० दिनों तक होल्ड करने की गिनती से किया जाता है।
  • समय की जरूरत : अगर आपका लक्ष्य इंट्राडे पर होगा तो हर दिन १ से ३ घंटे या बाजार बंद होने तक का समय चाहिए। अगर आपका लक्ष्य कुछ दिनों के लिए होगा तो ट्रेडिंग करने के बाद हर दिन कुछ मिनिटों का अवलोकन करना चाहिए।
  • टर्नओवर रेट : सप्ताह में ३ से ५ ट्रेडिंग।
  • दलाली का खर्च : मध्यम से थोड़ा अधिक।
  • संभावित सालाना आमदनी की प्रतिशतता : ५० % और उससे भी अधिक।

हमेशा ध्यान में रखना : जब स्विंग ट्रेडिंग की गिनती से आप कोई ट्रेडिंग करते है तब कम कालावधी की दृष्टी से किए हए टेडिंग को कभी भी दिर्घ कालावधी के ट्रेडिंग में परिवर्तीत नहीं करना चाहिए।

मैंने पहले बताया है उस तरह से अगर निश्चित समय में टार्गेट नहीं आया तो समय सीमा के आधार पर आपको तय समय पर बाहर निकलना ही चाहिए।

अब हम स्विंग ट्रेडिंग और दसरे प्रकार के ट्रेडिंग के बिच का अंतर जान लेते है। ऐसा करने से आप विविध तरीकों को एकत्रित करके उसमें गड़बड़ी नहीं करोगे और ऐसी गलती नहीं करोगे जो कई लोग कर बैठते है।

आपके लिए यह जान लेना जरूरी है कि स्विंग ट्रेडिंग क्या है, उसके साथ ही आपको यह जान लेना भी जरूरी है कि स्विंग ट्रेडिंग क्या नहीं है। इस लिए यहाँ पर स्विंग ट्रेडिंग और दुसरे प्रकार के ट्रेडिंग के तरीके की तुलना करना भी आवश्यक है।

खरीदी करके होल्ड करने का तरीका – Buy & Hold Investing Strategy in Hindi

  • लक्ष्य : दिर्घ कालावधी के निवेश का लाभ।
  • जिसकी मदद से करना है : विविध सेक्टरों और कंपनीयों का फंडामेंन्टल अॅनालिसिस।
  • होल्ड करने की समय सीमा : ६ महिने और उससे अधिक।
  • समय की जरूरत : हर महिने कुछ घंटे।
  • टर्नओवर रेट : सालाना १ से ५ ट्रेडिंग, इस संख्या में पूँजी निवेश करने की व्यक्तिगत क्षमता के अनुसार बदलाव किया जा सकता है।
  • दलाली का खर्च : न्युनतम।
  • संभावित सालाना आमदनी की प्रतिशतता : २५ % या उससे भी अधिक।

दिर्घ कालावधी के निवेश और स्विंग ट्रेडिंग के बिच का अंतर – Difference Between Long Term Investment and Swing Trading in Hindi

इस विषय को समझलेना बहुत ही निर्णायक है। यदी आप एक दिर्घ कालावधी के निवेशक है, तो आपने पहले से ही जो शेअर्स पकड़कर रखें है, उनमें कम कालावधी के लिए दिखनेवाले उतार-चढ़ाव में आपको विशेष रूची नहीं होती

अथवा जब तक दिर्घ कालावधी का ट्रेन्ड स्थापित नहीं हो जाता तब तक कम कालावधी में दिखनेवाले उतार-चढ़ाव में पड़ने को आपका मन नहीं करता।

एक दिर्घ कालावधी के निवेशक की तरह कम कालावधी में दिखनेवाले उतार-चढ़ाव में आपकी रूची मात्र ऐसे स्तर पर नई खरीदी करने की होती है जिस स्तर पर शेअर्स अपने आंतरिक मूल्य (ईन्ट्रीन्सीक व्हॅल्यू) से भी नीचे के भाव से मिलते हुए नज़र आते है।

दिर्घ कालावधी के निवेशक ऐसे समय पर दिर्घ कालावधी के लिए मिलने वाली नई खरीदी के मौके के हिसाब से गिनती करते है।

इस तरीके में निवेशकों का लक्ष्य न्यूनतम पोर्टफोलिओ टर्नओवर करके दिर्घ कालावधी के निवेश का लाभ (कॅपिटल गेन) हासिल करना होता है।

बाज़ार में सक्रिय रहनेवाले कई निवेशकों का सिर्फ खरीदी करके दिर्घ कालावधी के लिए शेअर्स पकड़कर रखने में रूची होती है और इस में कुछ भी गलत नहीं।

देखा जाए तो जो मानसिक दबाव में काम नहीं कर सकते और उनके पास कम कालावधी का ट्रेडिंग करने के लिए पर्याप्त समय भी नहीं होता है, उनके लिए यही उत्तम है कि उन्होने दिर्घ कालावधी के लिए निवेश करने योग्य शेअर्स पर अपना लक्ष्य केंद्रित करना चाहिए।

पर जिनकी कम कालावधी में अच्छी कमाई करने की इच्छा है और जो तय किए नियमों और तरीकों को पकड़कर रह सकते है और उसका उपयोग करने के लिए जरूरी ईच्छाशक्ति और अनुशासन जिनके पास होता है

वह जरूरत के अनुसार कम कालावधी के लिए स्विंग ट्रेडिंग की मद्द से अपने पोर्टफोलिओ का टर्नओवर बढ़ाकर उसमें अधिकतम मुनाफा कमा सकते है।

यह आपकी अतिरिक्त आय का स्त्रोत बन सकता है और अगर आपने अनुशासन से और गिनतीपूर्वक इसका उपयोग किया तो आप अपनी

आजीविका ट्रेडिंग में से चला सकते है और वह आपके कमाई का एक प्रमुख स्त्रोत भी बन सकती है।

इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday Trading in Hindi)

  • लक्ष्य : दैनिक आमदनी।
  • जिसकी मद्द से करना है : इंट्राडे चार्ट का टेक्नीकल अॅनालिसिस।
  • होल्ड करने की समय सीमा : मिनिटों से घंटो तक और अधिकतम एक दिन।
  • समय की जरूरत : दैनिक आधार पर ७ घंटे या उससे अधिक।
  • टर्नओवर रेट : दैनिक आधार पर २ से ५ ट्रेडिंग, बाज़ार के अस्थिरता के आधार पर।
  • दलाली का खर्च : बहुत ही ज्यादा।
  • संभावित सालाना आमदनी की प्रतिशतता : ७० % या उससे भी अधिक।

इंट्राडे ट्रेडिंग और स्विंग ट्रेडिंग के बिच का अंतर – Difference Between Intraday Trading & Swing Trading in Hindi

जैसे कि पहले बताया गया है, मिनिट चार्ट का उपयोग करके बहुत ही कम कालावधी के टाईम फ्रेम में स्विंग टेडिंग किया जा सकता है आर काइ पोजिशन को कछ दिनों तक पकड़कर भी रखा जा सकत है। जिसम आवर नाईट पोजिशन पकड़कर रखने का समावेश होता है।

पर बात जब इंट्राडे ट्रेडिंग की होती है तब ट्रेडर केवल ईन्ट्राडे चार्ट पर लक्ष्य कद्रित करते है और विविध तरीकों का उपयोग करके टेडिंग करते है। पर उन का ध्यान ईन्ट्राडे पर ही होता है।

कुछ भी हुआ तो आप अपनी पोजिशन दुसरे दिन कॅरीफॉरवर्ड न करें। सभी पोजिशन बाज़ार बंद होने से पहले बंद की जाती है। अगर आप स्विंग ट्रेडिंग के किसी टेक्निक का उपयोग कर रहे हो तो भी कुछ घंटों की समय सीमा ट्रेडिंग के दिन तक ही मर्यादित होती है।

आप अपनी पोजिशन ट्रेडिंग दिन से एक दिन भी अधिक कभी भी होल्ड ना करें, चाहे उस पोजिशन के अंत में मुनाफा हो या नुकसान। ऐसी दैनिक नीति से ट्रेडिंग करने वाले लोगों को विविध खबरों के चलते बाज़ार में उठनेवाली अस्थिरता में अधिक रूची होती है।

उनका किसी भी शेअर्स के फंडामेन्टल के साथ कोई भी संबंध नहीं होता परंतु इस प्रकार के ईन्ट्राडे ट्रेडर जो स्ट्रेटेजी का उपयोग करते है

वह परंपरागत स्विंग ट्रेडिंग की स्ट्रेटेजी की तुलना में बहुत ही मुश्किल स्ट्रॅटेजी साबीत हो सकती है क्योंकि ईन्ट्राडे ट्रेडिंग में विविध प्रकार की खबरों के कारण बाज़ार में बहुत ही बड़े पैमाने में अस्थिरता दिखाई देती है और जैसे निश्चित किया है

उससे कुछ विपरीत हुआ तो इंट्राडे ट्रेडर को तुरंत गिनती करके शीघ्रता से उस पर अमल करना पड़ता है। इसलिए ईन्ट्राडे ट्रेडिंग में बाहर निकलने का पूर्वनिर्धारीत स्तर पहले से ही तय करना जरूरी होता है।

स्विंग ट्रेडर कम तनाव के साथ बहुत ही अधिक कमाई अपनी पोजिशन से हासिल कर सकते है क्योंकि उनके शेअर होल्डिंग की समय सीमा ईन्ट्राडे ट्रेडर से अधिक होती है।

अब आपको एक क्रिकेट खेलनेवाले बल्लेबाज के उदाहरण से समझाता हूँ। जब एक बल्लेबाज बल्लेबाजी करता है तब उसके पास दो ही विकल्प होते है। एक विकल्प यह है कि, दो विकेट के दरम्यान दौड़ लगाकर रन बनाना।

इस प्रकार से रन बनानेवाली प्रक्रिया थका देने वाली होती है। साथ ही इस तरह से बड़ा स्कोर खड़ा करना हो तो उसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है।

दुसरा विकल्प यह है कि, उसको सही गेंद की राह देखनी चाहिए और मौका मिलते ही चौके और छक्के मारने चाहिए। इस तरह से बहुत ही कम मेहनत से और कम तनाव के साथ बहुत ही बड़ा स्कोर खड़ा हो सकता है।

बुद्धिमानी इसी में है कि हम उस कुशल बल्लेबाज जो मौका मिलते ही बड़े शॉट मार के अच्छा स्कोर खड़ा करता है, उसी तरह एक कुशल ट्रेडर बनकर अच्छा मौका मिलते ही ट्रेडिंग करके और जरूरत पड़ें तो राह देखने की नीति का अमल करके जोखीम लेने से दूर रहे।

कोई भी समझदार व्यक्ति दुसरे ही विकल्प का चुनाव करेगा क्योंकि उसमें तनाव की संभावना कम होती है और उस तरीके में थका देनेवाली स्थिति न के बराबर होती है। स्विंग ट्रेडिंग में हमारा लक्ष्य यही होता है।

ट्रेन्ड ट्रेडिंग (Trend Trading in Hindi)

  • लक्ष्य : त्रैमासिक आमदनी।
  • जिसकी मद्द से करना है : दैनिक और साप्ताहिक चार्ट का टेक्नीकल अ‍ॅनालिसिस।
  • होल्ड करने की समय सीमा : ३० से ९० दिन।
  • समय की जरूरत : हर सप्ताह में कुछ घंटे।
  • टर्नओवर रेट : मसिक आधार पर १ से ५ ट्रेडिंग।
  • दलाली का खर्च : मध्यम कम।
  • संभावित सालाना आमदनी की प्रतिशतता : ३५ % या उससे भी अधिक।

ट्रेन्ड ट्रेडिंग और स्विंग ट्रेडिंग के बिच का अंतर – Difference Between Trend Trading & Swing Trading in Hindi

ट्रेन्ड टेडर प्रथम स्थापित हए टेन्ड को अच्छी तरह से जान लेते है और फिर स्थापित टेन्ड की दिशा में ही टेडिंग करते है और एक समान ट्रेन्ड जब तक स्थापित होता है तब तक पोजिशन खड़ी रखते है। नया मौका टेन्ड रिवर्सल हान के बाद मिलता है।

एक बार नई ट्रेन्ड स्थापित होने के बाद वह नए स्थापित हुए ट्रेन्ड की दिशा में ट्रेडिंग कर सकते है। ट्रेन्ड ट्रेडिंग में एक ही मुख्य समस्या होती है कि उसमें आपकी पूँजी अटक सकती है।

जब बाज़ार में करेक्शन या कन्सॉलिडेशन होता है तब पूँजी अटक सकती है और जब कोई नया मौका मिलता है तब जरूरी पूँजी हात में नहीं होती, ऐसा हो सकता है।

वास्तव में होता यह है कि जैसे ही बाज़ार किसी सायकल के अनुसार आगे बढ़ता है तब उसमें तेजी के दिन भी दिखाई देते है, मंदी के दिन भी दिखाई देते है और रेन्जबाऊन्ड कन्सॉलिडेशन की स्थिति भी दिखाई देती है।

नियम के अनुसार ट्रेन्ड ट्रेडर को ऐसे ट्रेन्डलेस बाज़ार में भी पोजिशन होल्ड करनी होती है और आगे चलकर ट्रेन्ड आगे बढ़ने की राह देखनी होती है।

ऐसी कालावधी में अपनी पूँजी अटक जाती है और यह राह देखनेवाला समय कई ट्रेडर के लिए बहुत ही मुश्किल समय साबित होता है। ऐसे समय में दुसरे शेअर्स में अच्छा मौका दिखाई देने पर अधिक पूँजी न होने से वह उसका फायदा नहीं ले सकते।

स्विंग ट्रेडिंग के फायदे – Advantages of Swing Trading in Hindi

अब हम दुसरे सभी प्रकार के ट्रेडिंग की तुलना में स्विंग ट्रेडिंग में होनेवाले फायदें देखते है। आखिर में क्या करना चाहिए और किस प्रकार के ट्रेडिंग का उपयोग करना चाहिए यह व्यक्तिगत ट्रेडर या निवेशक को अपने लिए कौनसा तरीका अनुकूल है यह जाँचकर तय करना है।

जब स्विंग ट्रेडिंग पर अनुशासित तरीके से अमल किया जाता है तब दुसरे ट्रेडर की तुलना में स्विंग ट्रेडर बहुत ही कम जोखीम का अनुभव करते है।

जब इन्डेक्स लगातार गिरावट को दर्शाता है तब जीन निवेशकों में टेक्नीकल अॅनालिसिस के कौशल्य का अभाव होता है, उन्हें मंदी में भी शेअर्स पकड़कर रखने पड़ते है और चिंतीत होकर अपनी पूँजी को कम होते हुए देखना पड़ता है

परंतु स्विंग ट्रेडर ऐसे समय में नुकसान के ट्रेडिंग में से तुरंत बाहर निकलते है और फिर से तभी ही दाखील होते है जब नया मौका उपलब्ध होता है।

वह हर किसी पोजिशन में दाखील होकर बाज़ार के साथ तुरंत पलट जाते है और बहुत ही कम कालावधी में मुनाफा लेकर बाहर निकलते है। इसीलिए उनके ट्रेडिंग में जोखीम बहुत ही कम प्रमाण में होता है।

वह मंदी में हर किसी शेअर्स में मंदी का ट्रेडिंग करके मंदी में भी मुनाफा कमा सकते है, जब की निवेशकों को मंदी में नुकसान उठाना पड़ता है।

दुसरे प्रकार के ट्रेडिंग की तुलना में स्विंग ट्रेडिंग में अन्य फायदें यह है कि, ट्रेडर जब कोई ट्रेडिंग करता है तब उन्हें इंट्राडे ट्रेडर की तरह ट्रेडिंग टर्मिनल के सामने पूरा दिन बैठना नहीं पड़ता।

परंतु हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अगर आप स्विंग ट्रेडिंग टेक्निक का कम कालावधी की टाईम फ्रेम जैसे कि कुछ घंटों या मिनिटों का उपयोग करते हो तो आपको किसी भी शेअर्स के भाव पर अधिक नज़र रखनी पड़ती है।

जो स्विंग ट्रेडर दैनिक नीति की टाईम फ्रेम का उपयोग करते है, वह अपना मार्केट रिसर्च बाज़ार बंद होने के बाद कर सकते है और नए ट्रेड की तैयारी करके उस पर दुसरे दिन बाज़ार खुलने पर अमल कर सकते है।

एक बार आपका ट्रेड होने के बाद टर्मिनल में स्टॉप लॉस और टार्गेट की लिमिट तय करके कॉम्प्युटर बंद कर सकते है और अपने कारोबार पर ध्यान दें सकते है।

इंट्राडे ट्रेडिंग में बहुत ही मेहनत की जरूरत होती है और इसलिए वह ट्रेडर पर अधिक मानसिक दबाव ला सकता है। उन्हें जब तक उनकी पोजिशन खड़ी है तब तक हर किसी चार्ट में दिखनेवाली हर एक चाल पर नज़र रखनी पड़ती है।

कई लोग यह प्रि-मार्केट से लेकर पोस्ट मार्केट तक की कालावधी में अर्थात दैनिक नीति के अनुसार ५ से ७ घंटे टर्मिनल के सामने बैठते है।

इंट्राडे में मिलनेवाला मुनाफा स्विंग ट्रेडिंग में मिलनेवाले मुनाफे से अधिक हो तो भी स्विंग ट्रेडिंग एक अधिक कार्यक्षम और कम मेहनत में आकर्षक कमाई देनेवाला तरीका साबित हो सकता है।

टेक्नीकल अ‍ॅनालिसिस के ज्ञान का महत्व – Importance of Technical Analysis in Hindi

अगर आपको टेक्नीकल अ‍ॅनालिसिस का ज्ञान ना हो तो किसी भी प्रकार की कम कालावधी के ट्रेडिंग में सफल होना असंभव है। यही सत्य स्विंग ट्रेडिंग को भी लागू होता है।

अगर आपको स्विंग ट्रेडिंग में महत्तम फायदा लेना हो तो टेक्नीकल अ‍ॅनालिसिस का गहन ज्ञान होना जरूरी है।

आगे आने वाले पाठ में टेक्नीकल अ‍ॅनालिसिस की बुनियादी ज्ञान की चर्चा की गई है। जिससे आप समझ सकते है कि किसी भी प्रकार के ट्रेडिंग में सफल होने के लिए टेक्नीकल अ‍ॅनालिसिस का ज्ञान कितना महत्वपूर्ण होता है।

हम आशा करते है की हमारी ये स्विंग ट्रेडिंग क्या है? – What is Swing Trading in Hindi ब्लॉग पोस्ट आपको पसंद आयी होगी अगर आपको शेयर मार्किट से जुड़ा कोई भी सवाल है तो आप कृपया कमेंट में जरूर पूछे।

।। धन्यवाद ।।

Important Links :-

Open Demat Account in Zerodha – https://zerodha.com/?c=NH6775

81 / 100

6 टिप्पणियाँ

Manu Ji · फ़रवरी 4, 2021 पर 8:36 अपराह्न

बहुत हीं अच्छा लेख लिखा है आपने….. स्विंग ट्रेडिंग की सम्पूर्ण जानकारी देने के लिए आपका धन्यवाद….

हमेशा शेयर बाजार के बारे में पूछे जानेवाले प्रश्न - Share Market Knowledge In Hindi · फ़रवरी 6, 2021 पर 8:25 अपराह्न

[…] स्विंग ट्रेडिंग क्या है? – What is Swing Trading in Hi… […]

स्टॉक अ‍ॅनालिसिस के प्रकार - Types Of Stock Market Analysis In Hindi · फ़रवरी 7, 2021 पर 9:24 अपराह्न

[…] स्विंग ट्रेडिंग क्या है? – What is Swing Trading in Hi… […]

टेक्नीकल अ‍ॅनालिसीस का मूल ज्ञान - Basics Of Technical Analysis In Hindi · फ़रवरी 8, 2021 पर 8:51 अपराह्न

[…] स्विंग ट्रेडिंग क्या है? – What is Swing Trading in Hi… […]

ट्रेडिंग और इन्वेस्टिंग में क्या फर्क है? - Difference Between Trading And Investing In Hindi · जुलाई 8, 2021 पर 11:00 अपराह्न

[…] स्विंग ट्रेडिंग क्या है? – What is Swing Trading in Hindi […]

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

hi_INHindi