स्विंग ट्रेडिंग स्टेप बाय स्टेप – Swing Trading Step By Step in Hindi

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क्या आपको पता है की स्विंग ट्रेडिंग स्टेप बाय स्टेप कैसे करते हैं – Swing Trading Step By Step in Hindi अगर आपको पता नहीं है तो आप इस ब्लॉग को पूरा पढ़े.

स्विंग ट्रेडर्स चेकलीस्ट (Swing Trader’s Checklist):

जैसे कि मैंने पहले बताया, आपके पास ज्ञान होना यह महत्वपूर्ण बात है, परंतु आपकी सफलता का आधार आप अपने ज्ञान का उपयोग किस तरीके से करते हो उस पर निर्भर होता है।

कई निवेशक और ट्रेडर बाज़ार में निवेश और ट्रेडिंग में असफल होते है और उसका मुख्य कारण ज्ञान का अभाव नहीं परंतु ठिक तरह से ज्ञान का उपयोग करने का अभाव होता है।

इसलिए इस पाठ में स्टेप-बाय-स्टेप तरीके का निर्माण किया है जिसकी मद्द से आप सही मार्ग का उपयोग कर सकोग और खास करके स्विंग ट्रेडिंग की दृष्टी से उत्तम काम कर सकोगे।

अब हम चार्ट देखते समय कौनसे महत्वपूर्ण सवाल करने चाहिए और उनके जवाब हासिल करने चाहिए यह जान लेते है।

१. बाज़ार ट्रेन्ड में है या रेन्ज में?

वर्तमान स्थिति में बाज़ार ट्रेन्ड में है या रेन्ज में, यह सबसे पहले जाँच लेना चाहिए।

२. अगर बाज़ार ट्रेन्ड में हो तो उस स्थापित ट्रेन्ड की ताकत कितनी है?

जब आप किसी शेअर्स या इन्डेक्स के चार्ट पर नज़र घुमाते हो जो पहले से ही ट्रेन्ड में है, तब आपको स्थापित ट्रेन्ड की ताकत को जान लेना चाहिए। यह आपको ए.डी.एक्स. सूचक की मद्द से करना चाहिए।

जब ए.डी.एक्स. २५ के ऊपर निकलकर बढ़ने लगता है तब ट्रेन्ड स्थापित हुआ है ऐसा कहा जाता है और जब आगे चलकर ए.डी.एक्स. ४० के ऊपर निकल जाता है तब ट्रेन्ड अधिक मजबूत हुआ है ऐसा कहा जा सकता है।

कई बार ऐसा भी होता है कि ए.डी.एक्स. कोई निश्चित संकेत देने में असफल होता है। आपको निश्चित प्रकार का ट्रेडिंग करना हो तो ऐसी स्थिति में ए.डी.एक्स. के सुधरने की राह देखनी चाहिए।

३. बाज़ार स्विंग फेज में दाखील हुआ है या नहीं?

मोमेन्टम की कालावधी समाप्त होने के बाद चाहे ऊपर की दिशा या नीचे की दिशा का ट्रेन्ड हो, बाज़ार स्विंग फेज में दाखील होते हुए नज़र आता है।

एक स्विंग ट्रेडर की तरह तेजी की स्थिति में आपको कम कालावधी के बॉटम के नजदीक खरीदी करते रहना चाहिए

और उसके बाद दिखनेवाले मोमेन्टम का अंत आने पर पोजिशन में से बाहर निकलना चाहिए और मंदी में आपको रेजिस्टन्स के नजदीक बिक्री करते रहना चाहिए और उसके बाद दिखनेवाला मोमेन्टम ढिला पड़ते हुए नज़र आए तो पोजिशन में से बाहर निकलना चाहिए।

४. भाव ट्रेड ईनीशिएशन झोन में है या नहीं?

एक स्विंग ट्रेडर की तरह आपको ट्रेड ईनीशिएशन झोन को पहचानकर उसे मार्क करते रहना चाहिए और एक बार शेअर्स या इन्डेक्स का भाव ऐसे ट्रेड ईनीशिएशन झोन में दाखील होने के बाद और जब आपको नया ब्रेकआऊट मिलता है तब आपको ट्रेडिंग में दाखील होना चाहिए।

एक बार बाज़ार ने ऊपर या नीचे स्विंग करने की शुरूआत की या कोई ट्रेड किया जा सके ऐसे रेन्ज में अटका तो आप जैसे ऊपर बताया है वैसे ट्रेडिंग कर सकते है।

स्विंग फेज की स्थिति में आपको कई बार ॲक्शन पॉईन्ट देता है, जिसका अर्थ ऐसा होता है कि आपको अधिक ट्रेडिंग करने के मौके प्राप्त होते है।

एक बार आपने सेट किए क्रायटेरीया के अनुसार पोजिशन लेने के बाद दिखनेवाली मंदी के मामले में उतार और तेजी के मामले में बढ़त के दौरान मोमेन्टम एक समान ही होता है।

परंतु फर्क यह है कि ऐसी स्थिति में कई बार दिखनेवाले उछाल में कम कालावधी के लिए मोमेन्टम होल्ड किया होता है और इस कारणवश आपकी ट्रेडिंग होल्ड करने की कालावधी भी कम ही होती है।

५. किसी चार्ट पॅटर्न का निर्माण हुआ है या नहीं?

कोई चार्ट पॅटर्न तैयार हुआ हो तो उसे पहचानिए। अगर कोई शेअर्स किसी पॅटर्न में अटका पड़ा हो तो उनके सपोर्ट के नजदीक खरीदी करके और रेजिस्टन्स के नजदीक बिक्री करके ट्रेडिंग करना चाहिए और शेअर्स इस पॅटर्न के अंदर हो तब फायदा लेने का प्रयत्न करना चाहिए।

उसके बाद शेअर्स जब किसी भी पॅटर्न के बाहर ब्रेकआऊट या ब्रेकडाऊन होता है तब उस चार्ट पॅटर्न के सिद्धांत के अनुसार प्राईज प्रोजेक्शन का सहारा लेकर निश्चित किया हुआ टार्गेट आने तक आपनी खरीदी या बिक्री की पोजिशन को होल्ड कर सकते है।

६. सपोर्ट और रेजिस्टन्स के स्तर को जानिए?

आपको विविध सपोर्ट और रेजिस्टन्स के स्तरों को पहचानना जरूरी होता है, जिससे आप उन स्तरों पर से ट्रेन्ड रिवर्सल होता है तब उनका महत्तम फायदा उठा सके। इस लिए ऐसे स्तरों का निरीक्षण करना बहत ही जरूरी है।

परंतु लोग कई बार सूचकों पर अधिक लक्ष्य देते है और ऐसे स्तरों की अवगणना करते हुए दिखाई देते है, जो नहीं करना चाहिए। हर एक टेक्नीकल सूचक का अपना अलग महत्व होता है और ऐसे सूचकों को जोड़कर उसमें से मिलनेवाले संकेतों का फायदा लेना चाहिए।

ऐसे सूचकों को अलग रखना उपयोगी नहीं। सपोर्ट और रेजिस्टन्स एक निश्चित स्तर पर आ सकते है और ज्यादातर चार्ट पर वह ऐसा स्तर होता है जिस स्तर पर से कोई भी शेअर्स बार बार सपोर्ट और रेजिस्टन्स देता है।

७. क्या चार्ट किसी स्थापित ट्रेन्ड लाईन को तोड़कर ब्रेकआऊट या ब्रेकडाऊन दर्शा रहा है?

केई शेअर्स अगर किसी स्थापित ट्रेन्ड लाईन को ऊपर या नीचे की दिशा में तोड़कर आगे बढ़ते हुई नज़र आता हो तो उसके बाद दिखनेवाली बढ़ोतरी या गिरावट तुफानी होती है।

परंतु आप एक बार ट्रेन्ड लाईन ब्रेकआऊट या ब्रेकडाऊन होने के बाद, ब्रेकआऊट की स्थिति में शेअर्स के किसी भी महत्वपूर्ण अवरेज पर सपोर्ट लेने के बाद और ब्रेकडाऊन की स्थिति में शेअर्स के किसी भी महत्वपूर्ण अवरेज पर रेजिस्टन्स देने के बाद ही ट्रेडिंग दाखील करना आपके हित में होता है।

कुछ शेअर्स कइ बार ऐसे स्तर को पार करने के बाद कुछ समय कन्सॉलिडेशन में जाते हुए नज़र आते है और उसके बाद आगे चलकर वह नए स्थापित हुए ट्रेन्ड की दिशा में आगे बढ़ते है।

८. ओसिलेटर क्या सूचित करते है?

स्थापित ट्रेन्ड क्या है उस आधार पर विविध सूचक अलग अलग संकेत देते है।

क्या वह ओवर बॉट बाज़ार का संकेत दे रहे है या ओवर सोल्ड? वह बदलनेवाले मोमेन्टम का संकेत दे रहे है क्या? वह टिक सकनेवाले ट्रेन्ड का संकेत दे रहे है क्या? वह ट्रेन्ड रिवर्सल का संकेत दे रहे है क्या? यह सब जान लेना चाहिए।

९. मुविंग ॲवरेज क्या बता रहा है?

ट्रेन्ड करनेवाले बाज़ार में शेअर्स या इन्डेक्स किसी महत्वपूर्ण अवरेज पर सपोर्ट लेते हुए नज़र आते है या किसी दो महत्वपूर्ण अवरेज के दरम्यान जाकर ट्रेड ईनीशिएशन झोन स्थापित करके आगे बढ़ते हुए नज़र आते है।

एक बार मोमेन्टम की कालावधी पूरी होने के बाद स्विंग फेज स्थापित होता है और एस फेज में अगर तेजी की दिशा की स्थिति हो तो आप एक बार शेअर्स के किसी भी महत्वपूर्ण अवरेज पर सपोर्ट लेने के बाद खरीदी कर सकते है

और अगर ऐसे फेज में मंदी की दिशा की स्थिति हो तो आप एक बार शेअर्स किसी महत्वपूर्ण अवरेज पर रेजिस्टन्स देने के बाद बिक्री कर सकते है।

१०. शेअर्स या इन्डेक्स एक तरफा बढ़ोतरी दर्शा रहे है या एक तरफा गिरावट दर्शा रहे है?

ज्यादातर शेअर्स एक तरफा बढ़ोतरी या एक तरफा गिरावट के बाद ट्रेन्ड रिवर्सल करते हुए नज़र आते है। ऐसे शेअर्स पर लक्ष्य केंद्रित कीजिए जिन्होंने नजदीकी समय में एक तरफा गिरावट या एक तरफा बढ़ोतरी दर्शाई हों।

ज्यादातर नए ट्रेडर ऐसा करते है कि वह ऐसे शेअर्स जिसमें एक तरफा बढ़ोतरी या गिरावट दिखाई देती है ऐसे शेअर्स के पिछे दौड़कर खरीदी या बिक्री करते है। ऐसा करने से वह झुटे स्तर पर शेअर्स में फँस जाते है।

११. किसी कॅन्डलस्टिक पॅटर्न की रचना हुई है क्या?

कॅन्डलस्टिक जब बनता है फिर चाहे वह सिंगल कॅन्डल हो या डबल कॅन्डल, ऐसी रचना बनने पर खरीदी और बिक्री करने के लिए बहुत ही निश्चित संकेत देते है और कन्फर्मेशन लेने के बाद खरीदी या बिक्री करने से बहुत ही सुंदर परिणाम देते है।

ऐसी रचना पर लक्ष्य केंद्रित कीजिए और किसी भी कॅन्डल के गुणधर्म के अनुसार उसमें ट्रेडिंग कीजिए।

हम आशा करते है की हमारी ये (स्विंग ट्रेडिंग स्टेप बाय स्टेप – Swing Trading Step By Step in Hindi) ब्लॉग पोस्ट आपको पसंद आयी होगी अगर आपको शेयर मार्किट से जुड़ा कोई भी सवाल है तो आप कृपया कमेंट में जरूर पूछे।

।। धन्यवाद ।।

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