विश्व में चर्चित कुछ लोकप्रिय निवेशक – Top Richest Investors in the World in Hindi.

वारेन बफे (Warren Buffet)

अगस्त, 1930 को अमेरिका के ओमाहा में जनमे वारेन एडवर्ड बफे 30 को विश्व का सबसे सफलतम निवेशक माना जाता है।

सन् 2020 में फोर्ब्स द्वारा जारी अमीर लोगों की सूची में वारेन बफे को विश्व के चौथे अमीर व्यक्ति माना गया।

$67.5 अरब डॉलर की आँकी गई संपत्तिवाले इस निवेशक, बिजनेसमैन और परोपकारी व्यक्ति को ‘ओमाहा का संत’ कहा जाता है।

सन् 1958 से ओमाहा में खरीदे हुए घर में रह रहे वारेन बफे ने सन् 2006 में अपनी संपत्ति का 83 प्रतिशत ‘बिल और मिलेंडा फाउंडेशन’ को दान कर दिया।

सन् 2020 में ‘टाइम्स’ द्वारा जारी 100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक वारेन बफे की यात्रा इतनी रोमांचक है कि उनकी किताब को निवेश की दुनिया में बाइबिल’ का दर्जा दिया गया है।

वारेन बफे की ‘वैल्यू इनवेस्टिंग फिलॉसफी’ से प्रेरित होकर न जाने कितने निवेशकों ने लाभ कमाया और अपनी गलतियों को सुधारा।

इसलिए एक निवेशक को विश्व के इस महान् निवेशक की रोमांच निवेश यात्रा और उसकी सफलता की कहानी जरूर पढ़नी चाहिए, ताकि शेयर बाजार में निवेश को लेकर उसकी सोच सही दिशा की ओर आगे बढ़े।

वारेन बफे की जिंदगी के रोचक पक्ष – Interesting Aspects of Warren Buffet’s life

  • उन्होंने पहला शेयर 11 वर्ष की उम्र में खरीदा और उन्हें आज तक इस बात का पछतावा है कि उन्होंने देर से शेयर खरीदना शुरू किया।
  • 15 साल की उम्र में घर-घर न्यूजपेपर बाँटकर हुई आमदनी की बचत से दोस्तों के साथ मिलकर एक पिनबॉल मशीन लगा ली। इस स्मॉल स्केल वेंचर से उन्होंने थोड़ा पैसा बनाया और एक खेत खरीद लिया। इसके बाद बफे नेब्रास्का विश्वविद्यालय में शेयर बाजार का तकनीकी विश्लेषण सीखने गए। लेकिन जल्दी ही उसे छोड़कर कोलंबिया विश्वविद्यालय चले गए, क्योंकि वहाँ बेंजामिन ग्राहम पढ़ाते थे। उन्होंने ग्राहम के साथ कई साल काम किया और वापस ओमाहा आ गए।
  • इतने धनी के होने के बावजूद वे अभी भी ओमाहा के अपने पुराने घर में ही रहते हैं और इस बाबत वे कहते हैं कि उनकी हर जरूरत उस घर में पूरी हो जाती है तो वे नया घर क्यों खरीदें।’
  • हालाँकि वे विश्व की सबसे बड़ी प्राइवेट जेट कंपनी के मालिक हैं, पर वे स्वयं कभी भी प्राइवेट जेट में यात्रा नहीं करते।
  • उनकी कंपनी बर्कशायर हैथवे के अधीनस्थ 63 से ज्यादा कंपनियाँ हैं। उनका मानना है कि इन सभी कंपनियों के सी.ई.ओ. के साथ नियमित अंतराल के बाद बैठक करने से समय और पैसे की बरबादी होती है, इसलिए वे सभी सी.ई.ओ. को वर्ष में एक बार पत्र लिखते हैं और उसमें वे उस साल के लिए निर्धारित लक्ष्य का उल्लेख करते हैं। इसके बाद न तो वे फोन द्वारा और न ही बैठकों द्वारा उनके साथ संपर्क करते हैं। कंपनी के सी.ई.ओ. को दो नियमों पर चलने की सलाह वे देते हैं।
  • पहला, आपकी नीतियाँ ऐसी हों कि किसी भी शेयर होल्डर को घाटा नहीं उठाना पड़े।
  • दूसरा नियम यह है कि आपको पहलावाला नियम हमेशा याद रखना है।
  • वारेन पार्टी व भीड़भाड़ से दूर रहना पसंद करते हैं, इसलिए वे यदि जल्दी घर पहुँचते हैं तो अपना समय टी.वी. देखने और पॉपकार्न बनाकर घर में बिताना ज्यादा पसंद करते हैं।
  • माइक्रोसॉफ्ट जैसी अनुपम भेंट पूरे विश्व को देनेवाले विश्व के धनी लोगों में से एक बिल गेट्स जब पहली बार वारेन बफे से मिलने जाने वाले थे, तब उन्होंने इसके लिए सिर्फ आधा घंटे का समय काफी समझा। लेकिन जब गेट्स बफे से मिले तो उनकी आधे घंटे की भेंट 10 घंटे में मुश्किल से पूरी हो पाई और वह भी इसलिए पूरी हो पाई, क्योंकि वारेन बफे खुद ही उठकर चले गए थे। इसके बाद से बिल गेट्स ने वारेन बफे को अपना ‘गुरु’ बना लिया।
  • आपको जानकर आश्चर्य होगा, लेकिन यह सत्य है कि उनके पास न तो सेलफोन है और न ही उनकी डेस्क पर कंप्यूटर है।
  • वारेन बफे विश्व के सबसे अमीर और सफलतम निवेशक अपने निवेश द्वारा मिले रिटर्न की बदौलत हैं।
  • शुरुआत में उन्होंने अपने गुरु बेंजामिन ग्राहम के वैल्यू इनवेस्टिंग स्टाइल को अपनायाः लेकिन कुछ सालों के बाद वारेन ने खुद अपनी एक स्टाइल विकसित कर ली।
  • जब भी अवसर उत्पन्न होते हैं, उनका इस्तेमाल कैसे किया जाए, उस पर वारेन की नजर रहती है। उनका मानना है कि हर व्यक्ति को अवसर मिलते हैं, लेकिन उन्हें पहचानने की टाइमिंग पर आपका सफल होना निर्भर होता है।
  • वारेन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि दशकों बीत जाने के बाद भी शेयर बाजार में उनका प्रदर्शन सर्वोत्तम रहा और अपना लक्ष्य पाने के लिए उन्होंने कभी जोखिम भी नहीं लिया।
  • निवेश के लिए उनकी अप्रोच लंबी अवधि (लांग टर्म) के लिए रही। शेयर को खरीदना और उसे सही समय पर दूसरे निवेशक को बेच देना जैसी नहीं रही। वे हमेशा अच्छे शेयर में बने रहने में विश्वास करते हैं और कंपाउंडिंग की पॉवर का उपयोग करते हैं।
  • वारेन ने निवेश की प्रक्रिया को बिलकुल आसान तथा आम आदमी की समझ में आने लायक बनाया। धैर्य, अनुशासन और अपनी तार्किकता के बूते वारेन बफे ने शेयर बाजार के मायने आम आदमी के लिए पूरी तरह बदल दिए। आम आदमी को शेयर बाजार एक ऐसा स्थल लगने लगा, जो सिर्फ सट्टेबाजी या जुआखोरी द्वारा पैसा कमाने का जरिया नहीं, बल्कि बुद्धि, अनुशासन, धैर्य और तर्क शक्ति के बूते पैसा कमाने का एक जरिया लगने लगा। वारेन बफे निवेशकों को सलाह देते हैं कि ऐसी कंपनी या सेक्टर में निवेश मत करो जिसे आप समझ ही न पाओ (बफे की यह बात इंटरनेट बूम के दौरान सही साबित हुई, क्योंकि उस समय लोग इन शेयरों की ओर अंधी दौड़ लगा रहे थे, वहीं वारेन बफे ने अपना रास्ता चुना)।
  • ‘सालाना वार्षिक सम्मेलन’ में जब हजारों लोग इकट्ठे होते हैं, तब वारेन निवेशकों को निवेश के सफल सूत्र बताते हैं।
  • उनका मानना है कि कोई भी निवेश आँख मूंदकर नहीं करो, बल्कि निवेश का निर्णय पूरी तरह केंद्रित (फोकस्ड) होकर और सोच-समझकर किया जाना चाहिए।
  • वारेन का मानना है कि जब लोगों की भीड़ किसी सेक्टर या शेयर पर टूट पड़े तो आप वहाँ से हट जाएँ और जब लोगों की रुचि उसमें नहीं रहे, तब आप उसमें रुचि लेने लगें।
  • निवेश से पहले पूरी खोजबीन, प्रबंधन के बारे में जानकारी तथा प्रबंधन द्वारा संस्थागत कर्मचारियों से निपटने में सक्षमता को जाँचकर कंपनी में निवेश का निर्णय लें।
  • वारेन बफे का मानना है कि शेयर या बांड ऐसी कंपनी का होना चाहिए, जो अपने उद्योग या सेवा में नंबर वन हो और मुनाफा कमा रही हो। लेकिन सबसे जरूरी है, लंबी अवधि के लिए निवेश, जो कि उनके अनुसार 10-15 साल का होता है।
  • वारेन कहते हैं कि खूब पढ़ें, जमकर पढ़ें। वारेन बफे खुद अपना 60 प्रतिशत समय पढ़ने में गुजारते हैं । शेयर बाजार, निवेश, अर्थव्यवस्था और राजनीति सब कुछ पढ़ें और उनका विश्लेषण करें।

युवा पीढ़ी को बफे की दी गईं टिप्स – Buffet Tips Given to Younger Generation

  • क्रेडिट कार्ड से दूर रहें और खुद पर इनवेस्ट करें। याद रखें कि पैसा आदमी को नहीं, बल्कि आदमी पैसे को बनाता है।
  • आप जैसे हैं। वैसा ही जीवन जिएँ। दिखावे से अपने को दूर रखें।
  • दूसरे कह रहे हैं, इसलिए कोई काम न करें। सुनें दूसरे की, लेकिन करें वही, जो आपके मन को अच्छा लगे।
  • ब्रांड नाम के पीछे भागने की बजाय वही पहनें, जिसमें आप आरामदायक महसूस कर सकें।
  • यह आपकी जिंदगी है, इसलिए दूसरों को अपनी जिंदगी पर शासन करने का मौका न दें।

मंदी में भी आजमाएँ वारेन बफे का फॉर्मूला – Try Warren Buffet’s Formula Even in Recession

वारेन बफे और उनके गुरु बेंजामिन ग्राहम को ‘वैल्यू निवेशक’ माना जाता है। इनका मानना है कि मंदी के दौर में इक्विटी में पैसा लगाते वक्त यह देखा जाए कि कंपनी के पास नकदी कितनी है; क्योंकि ऐसी कंपनियाँ लंबे समय में अच्छा मुनाफा देती हैं।

कई जानकारों ने भी इस बात पर जोर दिया है कि मंदी के दौर या अनिश्चित कारोबारी माहौल में यह तरीका काफी कारगर साबित होता है।

बफे मानते हैं कि बैलेंस शीट से लोन अलग करने के बाद जो नकदी बचती है, उसमें बदलाव नहीं आता है।

उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि किसी कंपनी का शेयर मूल्य 1,000 रुपए है और बैलेंस शीट में प्रति शेयर 600 रुपए की नकदी है।

ऐसे में बैलेंस शीट की नकदीवाली रणनीति के हिसाब से शेयर की कीमत कम-से-कम 600 रुपए होनी चाहिए।

जानकारों का मानना है कि जिस कंपनी के पास जितनी ज्यादा नकदी होगी, उसे कई कामों को करने की उतनी ही ज्यादा आजादी होगी–जैसे शेयरों के बायबैक पुनर्चाय और कंपनियों की खरीदारी आदि।

यदि हम गौर करें तो शेयरों के बायबैक से हमें शेयरों की बॉटम वैल्यू’ (निम्नतम कीमत) आसानी से पता चल जाती है।

बैलेंस शीट में नकदी की स्थिति जानने का सबसे अच्छा अनुपात ‘कैश-टूमार्केट कैपिटलाइजेशन’ है। जिस कंपनी का कैश-टू-मार्केट कैपिटलाइजेशन अनुपात जितना ज्यादा होता है, उसका शेयर उतना ही सस्ता होता है।

बेंजामिन ग्राहम (Benjamin Graham)

अमेरिका के वॉल स्ट्रीट के संभवतया सबसे महान् निवेशकों में बेंजामिन ग्राहम का नाम लिया जाता है। निवेश के लिए क्वांटिटेटिव अप्रोच (परिणामात्मक पैठ) रखनेवाले बेंजामिन द्वारा लिखी किताबें विश्व के सभी निवेशकों के लिए उत्तम कृतियों सरीखी हैं।

‘सिक्यूरिटी एनालिसिस’ और ‘दि इंटेलिजेंट इनवेस्टर’ निवेश पर लिखी गई दो ऐसे ऐसी कृतियाँ हैं जिनके लिए निवेशक हमेशा बेंजामिन के ऋणी रहेंगे।

ऐसा कहा जाता है कि हर निवेशक को इन दो किताबों को जरूर पढ़ लेना चाहिए। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ जाने पर बेंजामिन पर जल्दी ही पारिवारिक जिम्मेदारियाँ आ गईं।

घर की वित्तीय हालत ठीक नहीं होने की ही वजह रही कि बेंजामिन ग्राहम ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी से स्नातक करने के तुरंत बाद वॉल स्ट्रीट में संदेशवाहक की नौकरी स्वीकार की।

उस समय बेंजामिन के मन में यह बात कहीं गहरे पैठ गई कि यदि जिंदगी में वित्तीय सुरक्षा नहीं हो तो व्यक्ति की जिंदगी किस कदर परेशानियों से घिर जाती है।

यही कारण है कि बेंजामिन ने इस सबक को पूरी जिंदगी याद रखा और वित्तीय सुरक्षा को अपनी जिंदगी में सबसे ज्यादा अहम स्थान पर रखा।

संदेशवाहक का काम करते-करते बेंजामिन की पारखी नजर ने शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव, वहाँ की गतिविधियों एवं लोगों के कामकाज को भांपा और वे जल्दी ही वित्तीय पत्र-पत्रिकाओं के लिए लेख लिखने लगे। उनके विश्लेषण लोगों के बीच धीरेधीरे लोकप्रिय होने लगे।

लिखने के शौकीन बेंजामिन ने सन् 1926 में ‘बेंजामिन ग्राहम जॉइंट अकाउंट’ नाम से पूल (व्यापारिक गठजोड़) का गठन किया, जिसमें वे लाभ में रहे शेयरों का रखरखाव करते थे।

बेंजामिन का अकाउंट ऐसा था कि सन् 1929 और 1930 में आई मंदी के बावजूद उस पर इसका काफी कम प्रभाव पड़ा।

उस दौरान वे कोलंबिया यूनिवर्सिटी में शाम को पढ़ाने जाते और वहीं वारेन बफे की उनसे मुलाकात हुई थी।

उनका मानना था कि यदि इस मनीमेकिंग बिजनेस (शेयर बाजार) में सफल होना है तो निवेश और सट्टेबाजी के बीच फर्क करना आना चाहिए।

निवेश-प्रक्रिया में यदि एक निश्चित प्रक्रिया को फॉलो (अनुसरण) किया जाए, जैसे पर्याप्त विश्लेषण, पूँजी की सुरक्षा और निवेश से मिलनेवाला पर्याप्त रिटर्न, तो निवेश जरूर फायदा देता है।

लेकिन यदि इन उपर्युक्त कारकों का आपके निवेश में अभाव है तो समझिए, आपने निवेश नहीं सट्टा खेला है, जिसमें लाभ और हानि आपके हाथ में नहीं होते हैं।

बेंजामिन इस बात पर विश्वास करते थे कि किसी भी कंपनी की अर्निंग (आय) डिविडेंड और प्रति शेयर के नेट लाभ में हुई बढ़ोतरी से आँकी जानी चाहिए।

इससे इस बात का भी अनुमान लगाया जा सकता है कि कंपनी के पास कितना सरप्लस फंड (अतिरिक्त पूँजी) है।

बेंजामिन का मानना था कि कोई भी शेयर कितना मुनाफा देगा, यह पता लगाने के लिए सबसे सही तरीका यह है कि उसकी संबद्ध कंपनी का डेब्ट इक्विटी रेशियो, कंपनी की अर्निंग स्टेबिलिटी, डिविडेंड रिकॉर्ड और उसकी स्थायी संपत्ति पर पारखी नजर डाली जाए।

।। धन्यवाद ।।

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श्रेणी: Share Market

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