Stock Futures क्या है? – What are Stock Futures in Hindi.

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स्टॉक डेरीवेटीव्ह यह डेरीवेटीव्ह का कॉन्ट्रैक्ट होता है जिसके अंतर्गत आनेवाले असेट में शेअर्स का समावेश होता है।

विश्व के सब से जादा लोकप्रिय डेरीवेटीव्ह कॉन्ट्रॅक्ट में स्टॉक फ्युचर्स और स्टॉक ऑप्शन का समावेश होता है।

व्यक्तिगत शेअर्स की सिक्योरीटीज का ट्रेडींग और व्यक्तिगत शेअर्स के फ्युचर्स की ट्रेडींग का फर्क (Difference between Trading Securities & Trading Futures on Individual Securities):

  • सिक्योरीटीज का ट्रेडींग करने के लिए ग्राहक को दलाल के साथ ट्रेडींग अकाऊन्ट और सिक्योरिटी डीपोजिटरी में डिमेट अकाउन्ट खोलना पडता है। पर फ्युचर्स में ट्रेडींग करने के लिए आपको डेरीवेटीव्ह के दलाल के पास फ्युचर्स ट्रेडींग अकाउन्ट खोलना पडता है।
  • सिक्योरिटी की खरीदी करने के लिए निवेशक उनकी पूंजी का निवेश एखाद दुसरी कंपनी में करते है पर फ्युचर्स में निवेश करनेवालो को सिर्फ मार्जिन मनी देना पडता है। फ्युचर्स के व्यवहार में ट्रेडर को कॉन्ट्रॅक्ट के अंतर्गत लिए असेट में पोजिशन लेने की जिम्मेदारी पूरी करनी पडती है। यह निवेश करने के लिए सिक्योरिटी ब्रोकर के पास खाता खोलने की जरूरत नही होती है।
  • एक कंपनी के शेअर्स की खरीदी के साथ शेअरधारक संबंधित कंपनी का हिस्सेदार अथवा मालिक बन जाता है। इन शेअरधारक को कुछ विशेष अधिकार भी प्राप्त होते है। इस विशेष अधिकारो में डीवीडन्ट का अधिकार, शेअरधारक के वार्षिक मिटींग में उपस्थित रहने का अधिकार और कोई भी निर्णय से संबंधित मतदान करने की जरूरत लगने पर खुद का मत देने का अधिकार इन सभी का समावेश होता है। एक सिक्योरिटीज के फ्युचर्स की खरीदी करते समय उसके साथ में खरीददार भविष्य में किसी भी समय (कॉन्ट्रैक्ट के पूरा होने की तारीख या उससे पहले) उन शेअर्स अथवा सिक्योरिटीज की खरीदी करने के लिए कायदे से बंध जाता है। सिक्योरिटी के फ्युचर्स कॉन्ट्रॅक्ट में कॉर्पोरेशन के मालीकाना हक्क का प्रतिनिधित्व मिलता नही इसीलिए फ्युचर्स के धारक को शेअरधारक में गिना नही जाता है।
  • सिक्योरिटी की बिक्री करने से पहले सिक्योरिटी की खरीदी करनी पड़ती है। जब सिक्योरिटी का शॉर्ट सेलिंग करने के लिए छुट दी जाती है तब ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि सिक्योरिटी ब्रोकर के पास उन की मालकी है। उस के बाद उस सिक्योरिटी की बिक्री करने के लिए उसे ट्रेडरर्स को गिरवी दी जाती है उस के बाद सिक्योरिटी के शॉर्ट सेल का व्यवहार किया जा सकता है। फ्युचर्स के कॉन्ट्रैक्ट में भविष्य के किसी भी एक समय पर व्यवहार करने का वचन दिया जाता है ऐसी स्थिति में सिक्योरिटी खरीदने का वचन देना जितना आसान है उतना ही आसान सिक्योरिटी की बिक्री करने का वचन देना है। खुद के पास न होने पर भी फ्युचर्स में सिक्योरिटीज बचने के लिए भविष्य के कोई भी समय पर उन के कॉन्ट्रॅक्ट के अंतर्गत आने वाले असेट को बेचने की उन पर जीम्मेदारी होती है। यह कार्य फ्युचर्स की खरीदी करने के जैसा ही आसान है जिसमे भविष्य के किसी भी समय पर उन के कॉन्ट्रैक्ट के अंतर्गत आने वाले असेट को खरीदने की उन पर जीम्मेदारी होती है।

स्टॉक के फ्युचर्स का उपयोग (Using of Stock futures):

स्टॉक फ्युचर्स का उपयोग सटटेबाज, हेजर्स और आब्रिट्रेजर द्वारा किया जाता है।

स्टॉक फ्यूचर्स में सट्टा का उपयोग कैसे करें – How to use Speculation in Stock Futures in Hindi.

स्पेक्युलेशन के लिए स्टॉक फ्युचर्स का उपयोग निचे दिए तरिके से किया जा सकता है।

१. शेअर्स में तेजी हो तो फ्युचर्स खरीदिए (Bullish Security, Buy Futures):

ऐसे सटटेबाज का विचार कीजिए जो ऐसे मानता है कि कोई कंपनी के शेअर्स का वर्तमान बाजार भाव उन के वास्तवीक मुल्य से कम (अन्डरवेल्युड) है।

उस वजह से आगे के दो से तीन महीनों में उसके शेअर्स के भाव में बढ़त हो सकती है। ऐसी स्थिति में उस कंपनी के शेअर्स को वह खरीद के उन का भाव बढने तक राह देख सकता है। सिधे शेअर्स खरीदने के बदले वो उनके फ्युचर्स के कॉन्ट्रैक्ट को खरीद के भी यह कार्य कर सकते है।

ऐसा करने पर नकद बाजार की तुलना में उसे डेरीवेटीव्ह मार्केट में ज्यादा लीवरेज का लाभ प्राप्त होता है जिससे वह अपने उत्पन्न में बढ़ोतरी कर सकता है।

उदाहरण (Example):

मान लो की ABC कंपनी के शेअर्स का भाव अभी १००० रूपए है। उस के फ्युचर्स का ट्रेडींग १०१० रूपए पर हो रहा है।

सटटेबाज को शेअर्स में तेजी लग रही है और आने वाले हफ्तों में उन शेअर्स का भाव निश्चित बढेगा ऐसा वो मानता होगा तो वह उसमे से आगे के दो प्रकार से मुनाफा कमा सकता है।

  • ABC कंपनी के २०० शेअर्स सटटेबाज १००० रूपए के भाव पर खरीद सकता है और ३० दिन के बाद उन का भाव बढकर १०५० रूपए होने पर वह उन की बिक्री कर सकता है। इस सौदे में वह २ लाख रूपयों का निवेश करके १०,००० का मुनाफा कमा सकता है याने उसको मासिक ५ प्रतिशत का मुनाफा मिला।
  • स्पॉट बाजार में व्यवहार करने के बदले वह फ्युचर्स मार्केट में वो शेअर्स १०१० रूपए भाव पर खरीद सकता है। ३० दिन के बाद स्पॉट का भाव १०५० रूपए होने पर उस शेअर्स की बिक्री कर सकता है। फ्युचर्स में उसने र्सिफ २०० शेअर्स खरीदे थे ऐसा माना जाए तो उस के कॉन्ट्रॅक्ट का मुल्य लगभग २ लाख रूपए होगा और बीस प्रतिशत के अनुसार उसको ४०,००० रूपए मार्जिन मनी देना पड़ा। इस प्रकार निवेश कर के वह महीने में ८००० रूपए [(१०५० -१०१०) x २००] की कमाई कर सकता है याने उसको मासिक २० प्रतिशत का मुनाफा मिला।

२. शेअर्स में मंदी हो तो फ्युचर्स बेचिए (Bearish Security, Sell Futures):

अभी ऐसे सटटेबाज का विचार कीजिए जो ऐसे मानता है कि किसी कंपनी के शेअर्स का वर्तमान बाजार भाव उन के वास्तवीक मुल्य से जादा (ओवरवेल्युड) है।

उस वजह से आगे के दो से तीन महीनों में उसके शेअर्स के भाव में गिरावट हो सकती है। ऐसी स्थिति में उस कंपनी के शेअर्स को वह बेच के खद को होनेवाले नुकसान से बच सकता है।

उसके बाद भाव तेजी से नीचे आया तो उस समय उन शेअर्स को खरीद के और उनके भाव बढने तक राह देखने के पर्याय का चयन करना सटेबाज पसंद करता है।

अगर उसके पास उन शेअर्स का होल्डींग नही होगा तब वह स्पॉट बाजार में व्यवहार नही कर सकते। ऐसी स्थिति में वह फ्युचर्स में शेअर्स की बिक्री करके भाव नीचे आने पर उसकी फिर से खरीदी कर सकते है।

उदाहरण (Example):

XYZ कंपनी के शेअर्स का ट्रेडींग ५०० रूपए के भाव पर हो रहा है। फ्युचर्स में ४९५ रूपए के भाव पर उनका ट्रेडींग हो रहा है।

सटटेबाज को शेअर्स में मंदी लग रही है और आने वाले हफ्तों में उन शेअर्स के भाव में निश्चित गिरावट होगी ऐसा वो मानता होगा तो वो XYZ शेअर्स का फ्युचर्स रू. ४९५ के भाव से बेच सकता है।

अब मान लो कि ३० दिन के बाद उसका भाव गिर के रू. ४७५ के स्तर पर आया और उस का फ्युचर्स में भाव रू. ४८० हुआ। अब वह रू. ४८० के भाव से फ्युचर्स की वापस खरीदी कर सकता है।

मान लो कि उसके कॉन्ट्रैक्ट का मुल्य लगभग २.५ लाख रूपए होगा और बीस प्रतिशत के अनुसार उसको ५०,००० रूपए मार्जिन मनी देना पड़ा।

इस प्रकार निवेश कर के वह महीने में ७५०० रूपए [(४९५ – ४८०) x ५००] की कमाई कर सकता है याने उसको मासिक १५ प्रतिशत का मुनाफा मिला।

स्टॉक फ्यूचर्स में हेजिंग का उपयोग कैसे करें – How to use Hedging in Stock Futures in Hindi.

हेजिंग के लिए स्टॉक फ्युचर्स का उपयोग आगे दिए गए तरिक से किया जा सकता है।

१. सिक्योरिटी में लाँग पोजीशन खडी की हो तो फ्युचर्स बेचिए (Long Security, Sell Futures):

किसी भी निवेशक ने दिर्घ कालवधी के लिए निवेश किया हो और निकट भविष्य में उस शेअर्स के भाव में बढे चढाव उतार होगा ऐसा उन्हें लगता हो

तो शेअर्स के भाव में देखने को मिलने वाले चढाव उतार से उन के निवेश के मुल्य के सामने खडे रहने वाले अनावश्यक जोखीम को दुर करने के लिए वह उन का निवेश निकाल ले सकता है।

अन्ताथा वह स्टॉक के फ्युचर्स की बिक्री कर के अपनी पोजिशन का हेंजिग करके नुकसान के सामने संरक्षण पा सकता है।

उदाहरण (Example):

निवेश करनेवाले एक व्यक्ति के पास ABC कंपनी के शेअर्स है। इस शेअर्स का भाव ८०० रूपए है। किसी भी कारण से इन शेअर्स के भाव में गिरावट होने की संभावन उनको लग रही हो

तो उस समय उस के इस दिर्घ कालावधी के निवेश में नुकसान न हो इस के लिए वह उसका हेजिंग कर सकते है।

इस के लिए ABC का फ्यचर्स कॉन्टॅक्ट वह रू/०२ के भाव पर बेच सकता हैं। इस के लिए उसको सिर्फ आरंभीक मार्जिन देना पड़ता है।

बाद में उन शेअर्स का भाव कम होकर रू ७५० हुआ तो ऐसी स्थिति में उसे हर एक शेअर के पिछे ५० रूपयों का नुकसान होता है। परंतु यह नुकसान उसके शॉट पोजिशन में उसने किए मुनाफे के साथ अॅडजस्ट होता है।

इसका कारण यह कि शेअर्स का भाव निचे आता है तब फ्युचर्स का भाव भी उतर के रू ७५० के आसपास आता है।

नोट (Note):

हेजिंग संभावित नुकसान को खत्म नही करता। हेजिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उसकी मदद से जरूरी नही ऐसे निवेश को निकाल सकते है।

दुसरे शब्दो में कहना हो तो हेजिंग अनचाहे जोखीम को निकाल के निवेश पर नियंत्रण लाया जा सकता है।

हेजिंग किया गया हो तो ऐसे पोजिशन में होनेवाले फायदे का हेजिंग न किए हुए पोर्टफोलीओ के फायदे के साथ औसत की गई तो उसमें दिखनेवाले फायदे का प्रमाण कम होता है। सामान्य रूप से

होनेवाले फायदे से अधिक फायदा हासिल करने के उद्देश से किसी भी व्यक्ति को हेजिंग पोजिशन नही लेनी चाहिए। हेजिंग करने से अथवा हेजिंग की पोजिशन लेने से सिर्फ जोखीम में कुछ प्रतिशत कमी होती है।

स्टॉक फ्यूचर्स में आर्बिट्रेज का उपयोग कैसे करें – How to use Arbitrage in Stock Futures in Hindi.

आर्बिट्रेज करने के लिए स्टॉक फ्युचर्स का उपयोग निचे दिए तरिके से किया जा सकता है।

१. फ्युचर्स ओवरप्राईज हो तो स्पॉट में खरीदिए और फ्युचर्स में बेचिए (Overpriced Futures : Buy Spot, Sell Futures):

कॉस्ट ऑफ कॅरी की वजह से फ्युचर्स का भाव स्पॉट भाव के स्तर पर रहता है।

जब कभी फ्युचर्स का भाव उन के चालु भाव स्तर के उपर अथवा निचे जाता है तब आर्बिट्रेज करने की याने एक बाजार से खरीदी कर के दुसरे बाजार में बिक्री कर के उस में का फरक (मुनाफा) निकाल लेने का मौका मिलता है।

अगर आपके नजर में कोई सिक्योरिटी आई जिसके फ्युचर्स का भाव उसके वास्तवीक बाजार भाव से बहुत ज्यादा है

याने की एफ > (एस + सीसी – सीआर) है तो ऐसी स्थिति में ओवरप्राईज फ्युचर्स की बिक्री किजीए और इस फ्युचर्स के कॉन्ट्रैक्ट के अंतर्गत आने वाले असेट को स्पॉट बाजार से खरीदीए और फ्युचर्स का कॉन्ट्रॅक्ट पूरा होने तक उनको संभाल के रखे।

इस स्थिति को कॅश ॲन्ड कॅरी आर्बिट्रेज कहा जाता है।

उदाहरण (Example):

ABC कंपनी के शेअर्स का ट्रेडींग रू १००० के भाव पर हो रहा है और उसके एक महीने के फ्युचर्स का भाव रू १०२५ है। यह भाव आपको उसके वास्तविक बाजार मुल्य से जादा लग रहा हो

तो एक आर्बिट्रेज करनेवाले की हैसियत से आप किसी भी प्रकार का जोखीम लिए बिनाही निचे दिए अनुसार उस में से मुनाफा कमा सकते है।

पहले ही दिन नगद अथवा स्पॉट बाजार से सिक्योरीटी खरीदने के लिए आप एक निश्चित रकम का लोन लीजिए। स्पॉट बाजार से १००० रूपए भाव से उस सिक्योरीटी की खरीदी कीजिए।

उसके साथ ही उस सिक्योरिटी को फ्युचर्स में रू १०२५ भाव से बेचिए। अभी आपने खरीदे गए सिक्योरिटी की डीलीवरी लिजिए। इस सिक्योरिटी का निवेश एक महीने तक संभाल के रखे।

फ्युचर्स की मुद्दत पूरी होगी, तब स्पॉट का भाव और फ्युचर्स का भाव एक दुसरे के समान स्तर पर आता है। इस समय आपकी पोजिशन को अनवाइन्ड (unwind) कीजिए याने की निकालिए।

अभी ऐसा माने कि इस सिक्योरिटी का बंद भाव रू १०१० हुआ है। तब सिक्योरिटी की बिक्री कीजिए और फ्युचर्स कॉन्ट्रॅक्ट को सेटल कीजिए।

स्पॉट बाजार में किए गए निवेश पर आपको रू १० का मुनाफा और फ्युचर्स के बाजार में किए कॉन्ट्रॅक्ट पर १५ रूपए का मुनाफा होता है। अभी आप उधार ली हुई रकम वापस कर सकते है।

२. फ्युचर्स अंडरप्राईज हो तो फ्युचर्स में खरीदिए और स्पॉट में बेचिए (Under Priced Futures : Buy Futures, Sell Spot):

अगर आपकी नजर में कोई सिक्योरिटी आई जिसके फ्युचर्स का भाव उसके वास्तवीक बाजार भाव से बहुत निचे है

याने की एफ < (एस + सीसी – सीआर) है तो ऐसी स्थिति में अंडरप्राईज फ्युचर्स की खरीदी किजीए और इस फ्युचर्स के कॉन्ट्रॅक्ट के अंतर्गत आने वाले असेट का स्पॉट बाजार में शॉर्ट सेलिंग कीजिए।

शॉर्ट सेल करते समय आपको जो रकम मिलती है उस रकम की फ्युचर्स कॉन्टॅक्ट पूरा होने की तारीख पास आने के पहले बाजार में निवेश किजीए। इस स्थिति को रिवर्स कॅश ॲन्ड कॅरी आर्बिट्रेज कहा जाता है।

उदाहरण (Example):

XYZ शेअर्स का ट्रेडींग १००० के भाव पर हो रहा है और उसके एक महीने के फ्युचर्स का भाव रू ९५५ है।

यह भाव आपको उसके वास्तविक बाजार मुल्य से कम लग रहा हो तो एक आर्बिट्रेज करनेवाले की हैसियत से आप किसी भी प्रकार का जोखीम लिए बिनाही निचे दिए अनुसार उस में से मुनाफा कमा सकते है।

पहले ही दिन नगद अथवा स्पॉट बाजार में सिक्योरीटी की बिक्री (शॉर्ट सेलिंग) कीजिए। उसके साथ ही उस सिक्योरिटी को फ्युचर्स में रू ९५५ के भाव से खरीदीए।

फ्युचर्स की मुद्दत पूरी होगी, तब स्पॉट का भाव और फ्युचर्स का भाव एक दुसरे के समान स्तर पर आता है। इस समय आपकी पोजिशन को अनवाइन्ड (unwind) कीजिए याने की निकालिए।

अभी ऐसा माने कि इस सिक्योरिटी का बंद भाव रू ९८५ हुआ है। अब शॉर्ट सेलिंग किए सिक्योरिटी की खरीदी कीजिए। स्पॉट बाजार में किए गए सौदे में आपको रू १५ का मुनाफा और फ्युचर्स के बाजार में किए कॉन्ट्रैक्ट पर ३० रूपए का मुनाफा होता है।

।। धन्यवाद ।।


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श्रेणी: Share Market

4 टिप्पणियाँ

ऑप्शन क्या है? - What Are Options In Hindi. · दिसम्बर 11, 2020 पर 9:26 अपराह्न

[…] Stock Futures क्या है? – What are Stock Futures in Hindi. […]

स्टॉक ऑप्शन क्या है और स्टॉक ऑप्शन का उपयोग क्या है? - What Is Stock Options In Hindi. · दिसम्बर 12, 2020 पर 9:11 अपराह्न

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ऑप्शन की किमत निश्चित करने की पद्धती - Pricing Of Options In Hindi. · दिसम्बर 14, 2020 पर 8:35 अपराह्न

[…] Stock Futures क्या है? – What are Stock Futures in Hindi. […]

फ्युचर्स और ऑप्शन के कॉन्ट्रॅक्ट स्पेसिफिकेशन - Future And Options Contract Specification In Hindi. · मार्च 4, 2021 पर 4:07 अपराह्न

[…] व्यक्तिगत स्टॉक फ्युचर्स – Stock Futures in Hindi. […]

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