क्या आपको पता है की कॉर्पोरेट अ‍ॅडजस्टमेंटस् क्या है (What is Corporate Adjustments in Hindi)? अगर आपको पता नहीं है तो आप इस ब्लॉग को पूरा पढ़े.

कॉर्पोरेट अ‍ॅडजस्टमेंटस् क्या है – What is Corporate Adjustments in Hindi.

किसी भी कॉर्पोरेट ॲक्शन के अ‍ॅडजस्टमेंट के पीछे का मूल आधार यह है कि कॉर्पोरेट ॲक्शन की वहज से, मार्केट में पहले से खड़ी की गई पोजिशनस् के मुल्य में, कॉर्पोरेट ॲक्शन से पहले और बाद में, जहाँ तक संभव हो वहाँ तक कोई फरक ना हो।

कॉर्पोरेट ॲक्शन को मोटे तौर पर शेअर लाभ (stock benefit) और नकद लाभ (cash benefit) के तहत वर्गीकृत किया जा सकता है।

शेअर होल्डर को दिए जानेवाले बोनस, राईट ईश्यु, मर्जर, डीमर्जर, एकीकरण, शेअर विभाजन, कंसोलिडेशन, वारंट, आदि को शेअर लाभ कहके पहचाना जाता है।

कॅपिटल ईश्यु करने वालो द्वारा दिए जानेवाले डिविडन्ड को नकद लाभ कहके पहचाना जाता है।

हर कॉर्पोरेट ॲक्शन के लिए कंपनी, तारीख पहले से निश्चित करती है। इस तारीख को ट्रेडिंग का दिन खत्म होने के बाद यह कॉर्पोरेट ॲक्शन के अंतर्गत आने वाले असेट के कॉर्पोरेट अॅक्शन के साथ अॅडजस्टमेंट किया जाता है।

यह अँडजस्टमेंट, कॉर्पोरेट ॲक्शन के अनुसार स्ट्राईक प्राईज, पोजिशन और लॉट साईज पर की जाती है।

बोनस और शेअर विभाजन के कारण किए जानेवाले अ‍ॅडजस्टमेंटस् – Adjustments due to Bonus and Stock Split in Hindi.

शेअर विभाजन के कारण किए जानेवाले

निचे दिए गए टेबल में उपर दिखाए गए हर कॉर्पोरेट ॲक्शन के बाद किस तरह से अ‍ॅडजस्टमेंटस् किए जाते है इसकी जानकारी दी है।

कॉर्पोरेट ॲक्शन अ‍ॅडजस्टमेंट फॅक्टर
बोनस (रेश्यो – A:B) (A + B) /B
शेअर विभाजन (रेश्यो – A:B) A / B
  • स्ट्राईक प्राईज (Strike Price):

उपर दिए गए अ‍ॅडजस्टमेंट फॅक्टर के साथ पुराने स्ट्राईक प्राईज का भागाकार करके नए स्ट्राईक प्राईज की गिनती की जा सकती है।

  • मार्केट लॉट (Market Lot):

उपर दिए गए अ‍ॅडजस्टमेंट फॅक्टर के साथ पुराने मार्केट लॉट का गुणाकार करके नए मार्केट लॉट की गिनती की जा सकती है।

  • पोजिशन (Position):

उपर दिए गए अ‍ॅडजस्टमेंट फॅक्टर के साथ पुराने पोजिशन का गुणाकार करके नए पोजिशन की गिनती की जा सकती है।

राईट ईश्यु के कारण किया जानेवाला अ‍ॅडजस्टमेंट – Adjustment due to Right Issue in Hindi.

ऐसा अनुमान किजिए की राईट ईश्यु A:B का रेश्यो लेकर किया जा रहा है। उसके लिए ‘C’ प्रीमियम लिया जाता है। उसकी मूल किमत ‘D’ है। उसकी वर्तमान स्ट्राईक प्राईज ‘x’ है और उसका वर्तमान लॉट ‘Y’ का है।

  • स्ट्राईक प्राईज (Strike Price):

नई स्ट्राईक प्राईज की गिनती निचे की तरह की जानी चाहिए।

नई स्ट्राईक प्राईज = (BxX) + A x (C + D) / (A + B)

  • मार्केट लॉट (Market Lot):

नए मार्केट लॉट की गिनती निचे की तरह की जानी चाहिए।

नया मार्केट लॉट = Y x (A + B) / B

डिविडन्ड के कारण किया जानेवाला अ‍ॅडजस्टमेंट – Adjustment due to Dividends in Hindi.

कॉन्ट्रॅक्ट के अंतर्गत लिए जाने वाले स्टॉक का डिविडन्ड उसके बाजार मुल्य के १० प्रतिशत से कम होगा तो उसे ऑर्डीनरी डिविडन्ड कहा जाता है।

ऑर्डीनरी डिविडन्ड के लिए स्ट्राईक प्राईज में या फ्युचर्स के प्राईज में कोई भी अ‍ॅडजस्टमेंट नहीं किया जाता है।

कॉन्ट्रॅक्ट के अंतर्गत आने वाले असेट के बाजार भाव के दस प्रतिशत से अधिक रकम की डिविडन्ड याने एक्स्ट्रा ऑर्डीनरी डिविडन्ड दिया गया तो स्ट्राईक प्राईज अ‍ॅडजस्ट किया जाता है।

चुकाया गया डीविडन्ड एक्स्ट्रा ऑर्डीनरी है या नहीं (अर्थात कॉन्ट्रैक्ट के अंतर्गत आने वाले असेट के बाजार भाव के दस प्रतिशत से अधिक है या नहीं यह निश्चित करने के लिए)

यह निश्चित करने के लिए कंपनी के बोर्ड ऑफ डिरेक्टर्स की मिटींग करने के बाद जिस दिन उनके डिविडन्ड का विज्ञापन किया जाता है उस दिन के बंद भाव को मार्केट प्राईज के अनुसार ध्यान में लिया जाता है।

अगर बाजार बंद होने के बाद डिविडन्ड का विज्ञापन किया हो तो ऐसी सूरत में उस दिन के बंद भाव को मार्केट प्राईज के अनुसार गिनती में लिया जाता है।

कंपनी द्वारा एक्स्ट्रा ऑर्डीनरी डिविडन्ड का विज्ञापन किया जाता है तो ऐसी सूरत में स्टॉक के ऑप्शन के कॉन्ट्रॅक्ट की स्ट्राईक प्राईज में से डिविडन्ड की पूरी रकम घटा दी जाती है। एक्सचेंज द्वारा किए गए एक्स डिविडन्ड डेट से सुधरी हुई स्ट्राईक प्राईज अमल में लाई जाती है।

मर्जर के कारण किया जानेवाला अ‍ॅडजस्टमेंट – Adjustment due to Mergers in Hindi.

मर्जर के कारण रेकॉर्ड डेट का विज्ञापन किया जाता है। तब कॉन्ट्रॅक्ट पूरा होने के निश्चित तारीख (मर्जर के आखरी तारीख के साथ) की जानकारी कंपनी के सदस्यो को दी जाती है।

रेकॉर्ड डेट का विज्ञापन किया जाता है उसके बाद किसी भी असेट से संबंधीत ऑप्शन के या फ्युचर्स के कोई भी नए कॉन्ट्रॅक्ट अमल में नहीं लाए जाते है।

कॉन्ट्रैक्ट के अंतर्गत आने वाले इस असेट का अस्तित्व मर्जर के बाद नष्ट हो जाए इसके लिए यह नियम लागू किए जाते है।

डिविडन्ड के साथ के आखरी तारीख को ही कॉन्ट्रॅक्ट की कालावधी पूरी नहीं हुई तो उसके सेटलमेंट प्राईज पर सख्ती से सेटलमेंट की जाती है। आखरी तारीख को डिविडन्ड के साथ उनका जो अंतिम भाव होगा उसे उसकी सेटलमेंट प्राईज कहके पहचाना जाता है।

हम आशा करते है की हमारी ये कॉर्पोरेट अ‍ॅडजस्टमेंटस् क्या है (What is Corporate Adjustments in Hindi)? ब्लॉग पोस्ट आपको पसंद आयी होगी अगर आपको शेयर मार्किट से जुड़ा कोई भी सवाल है तो आप कृपया कमेंट में जरूर पूछे।

।। धन्यवाद ।।

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3 Comments

डेरिवेटिव बाजारों का रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क क्या है - What Is The Regulatory Framework Of Derivatives Markets In Hindi. · December 20, 2020 at 8:33 pm

[…] कॉर्पोरेट अ‍ॅडजस्टमेंटस् क्या है – What … […]

फ्युचर्स और ऑप्शन के कॉन्ट्रॅक्ट स्पेसिफिकेशन - Future And Options Contract Specification In Hindi. · December 21, 2020 at 8:34 pm

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फ्युचर्स और ऑप्शन मार्केट में प्रवेश कैसे करना चाहिए - How To Enter Future And Options In Hindi. · March 4, 2021 at 4:06 pm

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