इंडेक्स फ्युचर्स क्या है? – What is Index Futures in Hindi.

Table of Contents

इंडेक्स क्या है? – What is Index in Hindi.

इंडेक्स, यह फंड मॅनेजर के परफॉरमन्स की गिनती करने का बेरोमीटर है। उसी तरह बाजार के ट्रेन्ड का अंदाजा लगाने केलिए यह एक सर्वोत्तम साधन है।

सामान्य शेअर बाजार में नजर आने वाले भाव के चढाव उतार की तरह व्यवहार करने में जिन निवेशकों को रूची होगी उनके लिए यह इंन्डेक्स तैयार किया जाता है।

इस इंडेक्स में बड़े प्रमाण में लिक्वीडीटीवाले शेअर्स जिनका मार्केट कॅपिटलाईझेन अधिक हो, उन्हें स्थान दिया जाता है।

इंडेक्स में शेअर्स को उनके मार्केट कॅपिटलाईझेशन के अनुसार वेटेज (महत्व) दिया जाता है।

बी.एस.ई और एन.एस.ई इन दोनों ने एस अॅन्ड पी सीएनएक्स निफ्टी और बी.एस.ई सेन्सेक्स के आधार पर इंडेक्स फ्युचर चालू किया है। इंडेक्स के महत्व के उपयोगों की निचे जानकारी दी गई है।

  • इंडेक्स, बाजार के चढाव उतार का बॅरोमीटर है।
  • इंडेक्स, पोर्टफोलीओ के परफॉरमन्स केलिए एक बेंचमार्क की भूमिका निभाता है।
  • इंडेक्स फ्युचर्स जैसे डेरिवेटिव्ह इन्स्टुमेंट केलिए काम आता है।
  • इंडेक्स फंड द्वारा फंड का मॅनेजमेंट करने के लिए।

सेन्सेक्स क्या है?What is Sensex in Hindi.

सेन्सेक्स यह बी.एस.ई के ३० शेअर्स का इंडेक्स है। भारतीय कॅपिटल मार्केट का वह बॅरोमीटर है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने तैयार किया हुआ यह पहला इंडेक्स है।

उस इंडेक्स के स्क्रिप्ट के भाव में होनेवाले चढाव उतार पर सेन्सेक्स की मुव्हमेंट निर्भर होती है। फ्रि फ्लोट मार्केट कॅपिटलाईझेशन के तरिके से सेन्सेक्स की गिनती की जाती है।

निफ्टी क्या है? – What is Nifty in Hindi.

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने तैयार किया हुआ यह पहला इंडेक्स है। बी.एस.ई के सेन्सेक्स की रचना की तुलना में उसकी रचना थोडी अलग है।

हमने पहले पढा की सेन्सेक्स उससे संबंधित शेअर्स के कॅपिटलाईझेशन में होनेवाले चढाव उतार की गिनती करता है।

इस विषय में सेन्सेक्स की तुलना में निफ्टी एक कदम पिछे है। निफ्टी में उसके घटकरूप भाग को गिनते वक्त ५० शेअर्स के पूरे मार्केट कॅपिटलाईझेशन का विचार किया जाता है।

इंडेक्स फ्युचर्स क्या है? – What is Index Futures in Hindi.

इंडेक्स डेरिवेटिव्ह, डेरिवेटिव्ह का ही एक कॉन्ट्रॅक्ट है। इस कॉन्ट्रॅक्ट में असेट की तरह इंडेक्स का समावेष होता है।

विश्वभर के सबसे अधिक लोकप्रिय इंडेक्स डेरिवेटिव्ह कॉन्ट्रैक्ट में इंडेक्स फ्युचर्स और इंडेक्स ऑप्शन का समावेष होता है।

एन.एस.ई मार्केट इंडेक्स एस अॅन्ड पी सीएनएक्स निफ्टी की रचना वैज्ञानिक तरिके से की गई है। इंडेक्स पर आधारीत इंडेक्स डेरिवेटिव्ह और इंडेक्स फंड जैसे प्रोडक्ट लॉन्च किए जा सके इसके लिए इस प्रकार के एन.एस.ई मार्केट इंडेक्स की रचना की गई है।

एन.एस.ई के बाजार में सबसे पहले डेरिवेटिव्हस के कॉन्ट्रॅक्ट का ट्रेडिंग हुआ था। वह इंडेक्स फ्युचर का था।

इस कॉन्ट्रॅक्ट में असेट कहके निफ्टी का उपयोग किया गया। उसके बाद इंडेक्स ऑप्शन में ट्रेडींग शुरू हुआ।

इंडेक्स फ्युचर्स का उपयोग – Uses of Index Futures in Hindi.

सट्टेबाज, हेजर्स और आबिट्रेजर्स यह लोग इंडेक्स फ्युचर्स का उपयोग करते है।

स्पेक्युलेशन (Speculation):

सट्टेबाज सट्टा करने केलिए इंडेक्स फ्युचर्स का उपयोग इस प्रकार है।

१. इंडेक्स तेजी में होगा तो निफ्टी फ्युचर्स खरीदिए (Bullish Index, Buy Nifty Futures):

एक ऐसे सट्टेबाज का विचार कीजिए कि जो मानता है कि बाजार उपर जाएगा और फिर उसमें से फायदा लेने की वो ईच्छा रखता है, इसके लिए उसके पास दो पर्याय है।

  • इंडेक्स के साथ चाल दर्शानेवाली अच्छी लिक्वीडिटी के कुछ सिक्योरिटीज की खरीदी कीजिए और फिर भाव बढने पर भविष्य के किसी भी तारीख को सिक्योरिटीज की बिक्री कीजिए।
  • इंडेक्स फ्युचर्स का उपयोग करके संपूर्ण इंडेक्स से संबंधित सभी शेअर्स के पोर्टफोलीओ की खरीदी कीजिए और बाद में इंडेक्स का भाव बढने पर भविष्य के किसी भी तारीख को उसकी बिक्री कीजिए।

इंडेक्स में तेजी होती है तब उपर दिखाए गए दो विकल्प में से पहले पर्याय का चयन अधिक किया जाता है। यह पर्याय थोडा कठिन और ट्रान्झंक्शन कॉस्ट के दृष्टी से थोडा महँगा जरूर है। उसकी खरीदी करने के लिए अधिक रकम की जरूरत होती है।

दुसरे पर्याय का उपयोग करके निवेशक एक ही सिक्योरिटी में ट्रेडिंग करके पूरे इंडेक्स की खरीदी कर सकते है।

एकबार अगर बाजार में खरीदी बिक्री करनेवाले सट्टेबाज ने फ्युचर्स के मार्केट का उपयोग करके निफ्टी में दिर्घ समय की पोजिशन खडी करने के बाद इंडेक्स में सुधार हुआ तो जरूर फायदा कमा सकते है।

उदाहरण (Example):

इन्डेक्स में तेजी आएगी ऐसा आपको पक्का विश्वास हो तो निफ्टी के फ्युचर्स की खरीदी करे। निफ्टी के फ्युचर्स में व्यवहार करने के लिए निफ्टी का न्यूनतम लॉट ५० निफ्टी का होता है।

वैसे अगर ५२०० के भाव से निफ्टी में निवेश किया गया तो आपको उस में २,६०,००० रूपयों का निवेश करना पडेगा। पर वास्तव में आपको उसके लिए सामान्य रूप से २६००० रूपयों का आरंभिक मार्जिन जमा करना पडेगा।

इन्वेस्टर सिर्फ २६००० रूपयों का आरंभिक मार्जिन जमा करके २,६०,००० रूपयों के निफ्टी इंडेक्स की खरीदी कर सकते है।

अब अगर निफ्टी फ्युचर्स ५२०० से बढकर ५३०० हुआ तो आपको उसमें किए निवेश पर ५००० रूपए की कमाई होगी।

इस कमाई की गिनती आगे की तरह करते है। (५३०० – ५२००-५०)। सामान्य से २६००० रूपयों के निवेश पर आप ५००० रूपयों का मुनाफा या अंदाजा १९ प्रतिशत का मुनाफा कमा सकते है।

२. इंडेक्स में मंदी हो तो निफ्टी फ्युचर्स बेचिए (Bearish Index, Short Nifty Futures):

अब ऐसे सट्टेबाज की कल्पना कीजिए की जो ऐसा मानते है कि निफ्टी में घटाव निमार्ण होगा अर्थात एन.एस.ई इंडेक्स अशक्त होगा। इंडेक्स जब गिरकर निचे आता है तब ऐसे बाजार में से फायदा कमाने की ईच्छा करने वाले के पास भी दो पर्याय होते है।

  • इंडेक्स के साथ चाल दर्शानेवाली अच्छी लिक्वीडिटी के कुछ सिक्योरिटीज जिनका आप पहले के जैसे होल्डींग है उनकी बिक्री कीजिए और फिर भाव गिरने पर भविष्य के किसी भी तारीख को सिक्योरिटीज की वापस खरीदी कीजिए।
  • इंडेक्स फ्युचर्स का उपयोग करके संपूर्ण इंडेक्स से संबंधित सभी शेअर्स के पोर्टफोलीओ की बिक्री कीजिए और बाद में इंडेक्स का भाव गिरने पर भविष्य के किसी भी तारीख को उसकी वापस खरीदी कीजिए।

इस व्यक्ति के पास निफ्टी के कोई भी शेअर्स नही होंगे तो वो स्टॉक इक्विटी में कुछ भी नही कर सकता है। ऐसी घटना में वह निफ्टी फ्युचर्स की बिक्री करके वह फिर से निचे आने पर उसकी वापस खरीदी कर सकते है।

उदाहरण (Example):

आपने अंदाजा किया की इंन्डेक्स निचे आनेवाला है। तब तुरंत निफ्टी फ्युचर्स की बिक्री कीजिए। निफ्टी की बिक्री के लिए २,६०,००० रूपयों के युनिट की खरीदी करनी पडेगी।

खरीदी करने के बाद उस में ट्रेडींग होगा तब निवेशक को सिर्फ फायनानशिअल मार्जिन के (१० प्रतिशत मार्जिन के नियमानुसार)

२६००० रूपए जमा करने पडेगे। सामान्यत: २६००० रूपए निवेश करके निवेशक २,६०,००० रूपए मूल्य के असेट की बिक्री करते है।

अब अगर निफ्टी फ्युचर्स ५२०० से गिरकर ५१०० पर आया तो आपको उसमें किए निवेश पर ५००० रूपयों की कमाई होगी। इस कमाई की गिनती आगे की तरह करते है।

(५२०० – ५१०० X ५०)। सामान्य से २६००० रूपयों के निवेश पर आप ५००० रूपयों का मुनाफा या अंदाजा १९ प्रतिशत का मुनाफा कमा सकते है।

हेजिंग (Hedging):

हेजिंग करनेवाले इंडेक्स के फ्युचर्स में हेजिंग करने के लिए निचे दर्शाए तरिके का उपयोग करते है।

१. सिक्योरिटी की खरीदी की हो तो निफ्टी फ्युचर बेचिए (Long Security, Short Nifty Futures):

अंडर व्हॅल्यू याने वास्तविकरूप से उनका जो मूल्य होना चाहिए उससे कम मार्केट व्हॅल्यू वाली सिक्योरिटी शेअर बाजार का हमेशा अध्ययन करनेवाले निवेशकों के ध्यान में आती है।

तब वह इस सिक्योरिटी को उनके वर्तमान भाव पर उनके खुद के समझ पर आधीन रहकर खरीदी करते है।

उनके वर्तमान बाजार भाव की तुलना में उनका वर्थ अधिक है, ऐसा मानकर वह खरीदी करते है। इस तरह उनकी खरीदी करने में उनके सामने दो प्रकार के जोखीम होते है।

  • उनकी समझ झूट साबीत हो सकती है और कंपनी के शेअर का वर्तमान बाजार में जो भाव है सच में उनकी वर्थ उतनी नही हो यह भी हो सकता है।
  • हर किसी शेअर के संबंध में उनके अंदाज और समझ सच हुई तो भी संपूर्ण बाजार उनके उद्देश के विपरीत चलकर निचे आ सकता है, तब उन्हे बहुत नुकसान हो सकता है।

उपर दिए दोनों जोखीमों को कम कर सकते है। जिस के लिए वह निफ्टी फ्युचर्स को बेचकर उनके पोजिशन का हेजिंग कर सकते है।

उदाहरण (Example):

निफ्टी में सुधार होता है तब रिलायन्स में दिर्घ कालावधी की पोजिशन खडी की तो सामान्यरूप से निवेशक को फायदा ही होगा और अगर निफ्टी में गिरावट निर्माण हुई और तब रिलायन्स में दिर्घ कालावधी की पोजिशन खडी की तो निवेशक को सामान्य रूप से घाटा ही होता है।

इस दृष्टी से रिलायन्स में खडी की गई दिर्घ कालावधी की पोजिशन से रिलायन्स के मूल्य पर लक्ष केंद्रीत करके व्यवहार नही किया जाता है।

उसमें रिलायन्स के मुल्य पर नही परंतु निफ्टी में दिर्घ कालावधी की पोजिशन खडी की जाती है। उसी के साथ रिलायन्स एक आकस्मिक वस्तू की तरह मिल जाता है।

निवेशक कई बार ऐसा सोचता है कि वो रिलायन्स में दिर्घ कालावधी की पोजिशन खडी करना चाहते है

परंतु रिलायन्स में दिर्घ कालावधी की पोजिशन खडी करने के लिए अर्थात लाँग पोजिशन करते समय वह निफ्टी में भी दिर्घ कालावधी की पोजिशन खडी करते है, क्योंकि रिलायन्स यह निफ्टी इंडेक्स का ही एक हिस्सा है।

साधारण रूप से जब आप रिलायन्स के किसी भी एक शेअर में दिर्घ कालावधी की पोजिशन खडी करते हो तब आपको निफ्टी फ्युचर्स में भी थोडी बिक्री करनी चाहिए।

ऐसा करके हर शेअर्स में तैयार किए दिर्घ कालावधी की पोजिशन के साथ निफ्टी में अपने निवेश के सामने अप्रत्यक्ष रूप से आने वाले जोखम को कम किया जा सकता है।

एकबार इस तरह से करने के बाद आपकी पोजिशन ऐसी बनती है कि सिर्फ शेअर परफॉरमन्स के आधार पर ही उसमें फायदा या नुकसान होता है।

दुसरे शब्दो में कहना हो तो रिलायन्स में लाँग पोजिशन ली गई और उसके बाद निफ्टी में शॉर्ट पोजिशन याने कम कालावधी की पोजिशन खडी की गई तो उस निवेश में रिलायन्स के मूल्य में आने वाले चढाव उतार के आधीन रहकर ही फायदा अथवा नुकसान होता है।

सामान्यरूप से यह निवेश सिर्फ रिलायन्स के परफॉरमन्स पर आधारीत मुनाफा देनेवाली निवेश बनती है। मार्केट के इंडेक्स में होनेवाले चढाव उतार की वजह से उसके सामने दुसरा कोई भी जोखीम निर्माण नही होता है।

अब प्रश्न ऐसा है कि शेअर्स में दिर्घ कालावधी की पोजिशन तैयार करने के बाद निफ्टी में कितनी शॉर्ट पोजिशन तैयार करनी चाहिए

उसका आधार रिलायन्स का अर्थात अपने चुने हुए शेअर का निफ्टी इंडेक्स में कितना वेटेज है और उस शेअर का जोखिम कारक मूल्य (बीटा) कितना है।

एक सट्टेबाज का उदाहरण देखते है। तीन सितम्बर २००७ को वह रिलायन्स में १०,००,००० रूपयों की पोजिशन लेता है। उसकी योजना इस पोजिशन को २७ सितम्बर तक रखने की है।

रिलायन्स का बीटा १.२ का होगा ऐसा अनुमान करके चले तो निफ्टी में उसके निवेश पूरीतरह असरहीन करने केलिए उसे इंडेक्स फ्युचर्स के मार्केट में १२,००, ००० रूपयों की शॉर्ट पोजिशन लेनी होगी।

३ दिसंबर २००७ को निफ्टी का ट्रेडींग ४८०० पर हो रहा है और उसके नजदिकी फ्युचर्स के कॉन्ट्रॅक्ट की मुद्दत २७ सितम्बर २००७ को पूरी होती है और उसका ट्रेडिंग ४८२० पर हो रहा होगा

तो वहा से निफ्टी फ्युचर्स के प्रत्येक लॉट याने की ५० निफ्टी के एक लॉट का मूल्य २,४१,००० रूपयों का होगा।

इस स्थिति में १२,००,००० रूपए मूल्य के निफ्टी बेचने केलिए उन्हे पाँच लॉट निफ्टी की जरूरत होगी। (१२,००,००० की रूपए रकम के नजदिक में आए इस तरह से लॉट की गिनती की जाती है।)

निवेश के लिए उपर दर्शाए आयोजन की तरह वह उनकी पोजिशन स्थिर करने के लिए उस निफ्टी के पाँच मार्केट लॉट की (२५० निफ्टी की) बिक्री कर सकता है।

परिणाम स्वरूप रिलायन्स की लाँग पोजिशन १०,००,००० और निफ्टी की शॉर्ट पोजिशन १२,००,००० रूपयों की होती है।

पंद्रह दिन के बाद सरकारी वातावरण अस्थिर हआ तो निफ्टी में गडबडी निर्माण होती है और फ्युचर्स में उनका ट्रेडिंग ४२५५ पर होता है।

इस समय सट्टेबाज उनके दोनों पोजिशन को अनवाइन्ड करता है। रिलायन्स की लाँग पोजिशन का मूल्य घटकर ८,८०,००० रूपए होता है और इस पोजिशन में सट्टेबाज को १,२०,००० रूपयों की खोट सहन करनी पड़ती है।

उसके सामने फ्युचर्स में ली हुई शॉर्ट पोजिशन में वह १,४१,२५० रूपयों की कमाई करता है। सामान्यत: रिलायन्स की कमी को निफ्टी फ्युचर्स के फायदे में से घटा दिया गया तो वह २१,२५० रूपयों की कमाई करता है।

२. सिक्योरिटी की बिक्री की हो तो निफ्टी फ्युचर्स खरीदिए (Short Security, Long Nifty Futures):

शेअर बाजार और उनके स्क्रिप्ट का हमेशा अध्ययन करनेवाले खिलाडियो के ध्यान में कईबार ऐसी स्क्रिप्ट आती है कि जिन का बाजार मूल्य वास्तव में जितना होना चाहिए उससे अधिक होता है।

उस वजह से से उनका बाजार में जो भाव है उसकी तुलना में उनकी वर्थ कम किमत की है। ऐसी गणना करके यह खिलाडी वह शेअर्स बेच देते है। ऐसा करते समय वह आगे दिए दो खतरों का सामना करते है।

  • बाजार के संबंध में उनकी समझ शायद कच्ची हो सकती है। उनके शेअर का वर्थ वर्तमान बाजार भाव से अधिक भी हो सकता है।
  • उनके गणना के विपरीत बाजार में तेजी आई और सिक्योरिटी याने की हर किसी शेअर्स से संबंधित उनकी समझ सही होकर भी उन्हे नुकसान हो सकता है।

ऐसे स्थिति में निफ्टी फ्युचर्स की खरीदी करके निवेशक उनकी पोजिशन का हेजिंग करके वो जोखीम कम कर सकते है।

उदाहरण (Example):

निफ्टी में घटाव निर्माण हो रहा होगा तो ऐसे समय में रिलायन्स में खडे किए कम कालावधी की पोजिशन में से फायदा हो सकता है। और अगर निफ्टी में तेजी आई तो मात्र उसे नुकसान होने की संभावना होती है।

इस दृष्टी से विचार किया गया तो रिलायन्स में शॉर्ट पोजिशन खरीद कर के भी बाजार में खेल खेलनेवाले खिलाडी रिलायन्स मल्य को केंद्र में रखकर उस पर दाव नही लगा सकते।

वह निफ्टी में कम कालावधी की पोजिशन तैयार करता है। अर्थात शॉर्ट पोजिशन लेता है और उसके साथ ही आकस्मिक रूप से रिलायन्स के शेअर की जोड होती है।

उस वजह से निवेशक ऐसा सोचते है कि उन्होने सिर्फ रिलायन्स में शॉर्ट पोजिशन ली है परंतु वास्तव में मात्र उनको रिलायन्स के साथ शॉर्ट निफ्टीभी लेना पडता है।

सामान्य रूप से जीस जीस समय आप सिक्योरिटी में कोई भी शॉर्ट पोजिशन खडी करते है तब आपको कुछ अंश निफ्टी के फ्युचर्स की खरीदी करनी चाहिए।

इस तरिके से पोजिशन लेने से निफ्टी में खुलेआम नही परंतु मुक्त तरिके से किए आर्थिक निवेश के सामने रक्षण खडा कर देता है। सिक्योरिटीज में लिए गए हर कम कालावधी के पोजिशन के साथ इन बातों का संबंध है।

रिलायन्स में शॉर्ट पोजिशन लेकर निफ्टी में लाँग पोजिशन ली गई तो वह रिलायन्स के मूल्य पर ही की गई सही निवेश कहके पहचानी जाती है।

निवेशक को निफ्टी में कितना निवेश करना चाहिए वह निफ्टी में रिलायन्स को कितने प्रतिशत वेटेज दिया गया है उस पर और रिलायन्स के रिस्क फॅक्टर वॅल्यू बीटा पर आधारीत होता है।

एक सट्टेबाज ३ सितंबर २००७ को रिलायन्स में १०,००, ००० रूपयों की कम कालावधी की शॉर्ट पोजिशन लेता है। वह इस पोजिशन को २७ सितंबर तक अपने पास रखने का निर्णय लेता है।

इस समय रिलायन्स का बीटा १.२ का है, ऐसा अनुमान करके लाँग पोजिशन लेने का विचार किया गया तो उनको निफ्टी के निवेश के सामने का जोखीम पूरी तरह नष्ट करने के लिए इंडेक्स फ्युचर्स के मार्केट में १२,००, ००० रूपयों का निवेश करना चाहिए।

३ सितंबर २००७ को निफ्टी का ट्रेडिंग ४८०० पर हो रहा है। इस स्थिति में जो फ्युचर्स का कॉन्ट्रैक्ट नजदीक की तारीख को याने की २७ सितंबर को पूरा हो रहा होगा ऐसा कॉन्ट्रक्ट करना चाहिए।

उसका ट्रेडिंग ४८२० पर होता है। फ्युचर्स का हर लॉट (५० निफ्टी) २,४१,००० रूपयों का पडता है। उन्हे १२,००,००० मूल्य के निफ्टी खरीदने के लिए पाँच लॉट की (२५० निफ्टी) खरीदी करनी होगी।

उनके निवेश के आँकडो को देखा जाए तो उसके लिए कम से कम २५० के निफ्टी की खरीदी करना जरूरी है। उपर दर्शाया है उस तरह से पोजिशन खडी करने के लिए वह निफ्टी के पाँच लॉट की खरीदी करता है।

सामान्य बाजार में उसकी दो पोजिशन तैयार होती है। रिलायन्स में १०,००,००० रूपयों की शॉर्ट पोजिशन होती है।

उसके सामने निफ्टी में १२,००,००० रूपयों की लाँग पोजिशन होती है। पंद्रह दिन के बाद राजकिय स्थिरता के कारण निफ्टी में बढत होती है और उसका ट्रेडिंग ५३४० पर होता

सट्टेबाज इस समय उनके दोनों पोजिशन को अनवाइंड करते है याने की निकाल देते है। रिलायन्स में लिए पोजिशन के कारण उसे १,२०,००० रूपयों का नुकसान होता है।

रिलायन्स बढकर ११,२०,००० होने से उन्हे यह घाटा सहना पडेगा। परंतु निफ्टी के सितंबर के फ्युचर्स में उनके लिए हुए लाँग पोजिशन के जरिए उन्हे १,३०,००० रूपयों की कमाई होती है।

इस कमाई में से उन्हे हुए १,२०,००० रूपयों का घाटा निकालकर उन्हे १०,००० रूपयों की सही कमाई मिलती है।

३. पोर्टफोलीओ बनाया हो तो निफ्टी फ्युचर्स बेचिए (Have Portfolio, Short Nifty Futures):

पिटल मार्केट के लिए एक बात निश्चित है वो ये है कि बाजार में हमेशा चढाव उतार आता ही रहते है। संख्याबंद निवेशक उनका पोर्टफोलीओ बनाते है ऐसा देखने को मिलता है।

परंतु बाजार के चढाव उतार की वजह से वह अस्वस्थ होते है। कई बार वह ऐसा विचार करके बैठते है कि बाजार में नजदी की भविष्य में गडबडी निर्माण होगी।

दुसरी बार वह ऐसा समझ के चलते है की बाजार में परिवर्तन देखने को मिलेगा। सामान्य रूप से इस प्रकार की वोलेटॅलिटी बाजार में आती है तब वो उसमें प्रवेश करना ना पसंद करते है।

आप शेअर खरीदकर बाद में नजदीकी भविष्य में वह बेचने की इच्छा करते है तो ऐसे समय में इस प्रकार की स्थिति आपके लिए समस्या रूप बन सकती है।

उदाहरण के साथ बताना हो तो आप घर अथवा मोटरकार खरीदना चाहते है, आपने ऐसा आयोजन करके निवेश किया और निफ्टी में गडबड निर्माण हुई तो आपका संपूर्ण आयोजन व्यर्थ जाने की संभावना होती है।

ऐसी स्थिति में निवेशक सामान्य रूप से दो प्रकार के धारणा का अवलंब करते है।

  • अपने पास के शेअर तत्काल बेच सकते है। इस बिक्री को पॅनिक सेलिंग याने के डर से की हुई बिक्री कहके जाना जाता है।
  • दुसरा यह की वो कुछ भी नही करते इसका अर्थ वह बाजार में आने वाले चढाव उतार के परिणाम से होनेवाले नुकसान को सहते है।

परंतु इंडेक्स फ्युचर्स की उपस्थिति से उन्हें तीसरा और एक पर्याय मिलता है। इंडेक्स के चढाव उतार की वजह से आपके निवेश में होने वाले चढाव उतार को रोकने के लिए इंडेक्स फ्युचर्स की बिक्री करना जरूरी है।

यह कदम उठाने से निवेशक उनके निवेश के सामने के जोखीम पर नियंत्रण रख सकते है। कुछ भी व्यवहार न करने के बदले अथवा घाटा सहने के बदले यह कदम उठाना अधिक लाभदायक होगा।

ऐसी स्थिति में लाँग पोजिशन के साथवाला पोर्टफोलीओ और उसके साथ साथ शॉर्ट निफ्टी भी अनेक बार लॉन्ग पोर्टफोलिओ केलिए सिर्फ दसवे हिस्से का जोखम खडा करते है।

ऐसा अनुमान कीजिए कि हमारे पास दस लाख रूपयों का पोर्टफोलीओ है और उसका बीटा १.२५ का है।

यह संपूर्ण पोर्टफोलीओ सुरक्षित करने के लिए आप १२.५ लाख रूपयों के निफ्टी के फ्युचर्स की बिक्री कर सकते है।

उदाहरण (Example):

निचे दिए टेबल में दिखाया गया है उस तरह से पाँच अलग अलग शेअर का पोर्टफोलीओ वह इस्तेमाल करते है।

संपूर्ण पोर्टफोलीओ का बीटा निचे दर्शाया गया है।

पोर्टफोलिओ बीटा = [(१०० x १२५.५ X ०.५९)(२०० x ९८.५ X ०.९०)(४५० x ८४७.६५ X ०.७५)(२०० x ४५०.६५ x १.१३)(३०० x ३२५.५ x १.१०)] /६०१,४७२.५० = ०.८६५

उसका अर्थ यह है कि उसके संपूर्ण पोर्टफोलीओ का हेजिंग करने के लिए उसे ०.८६५ x ६,०१,४७२.५० = रू ५,२०,४७८.२७५ मुल्य की निफ्टी को ३ सिंतबर २००३ को बेचनी पडेगी।

इस दिन निफ्टी का दर ४८२५ होगा तो ऐसी स्थिति में वो १०० निफ्टी, मतलब उसके दो लॉट के कॉन्टॅक्ट की बिक्री करने का निश्चित करते है।

अब सट्टेबाज ने किए हुए गणित के हिसाब से इंडेक्स गिरकर निचे आता है और उसके पोर्टफोलीओ का मूल्य घटता है, परंतु वह निफ्टी में लिए हुए शॉर्ट पोजिशन तक ही कमाई कर सकता है। उसकी जानकारी निचे दी है।

फ्युचर्स में उन्होने किए हुए हेजिंग में उन्हे २९००० का फायदा मिला था। उनके पोर्टफोलीओ में उन्हे २९,२६५ रूपयों का घाटा होता है।

साधारणत: उनको कूल घाटा सिर्फ २६५ का होता है। अगर उन्होंने हेजिंग नही किया होता तो उनको कूल २९,२६५ रूपयों का घाटा हो सकता था।

इस उदाहरण में निफ्टी में घटाव होकर भी फ्युचर्स के मार्केट में लिए शॉर्ट पोजिशन की मदद से वह फायदा कमा सकते है।

इस कालावधी में निफ्टी में बढत हो रही हो तो निवेशक को उसके सिक्योरिटीज के पोर्टफोलीओ पर फायदा मिलेगा और फ्युचर्स में लिए पोजिशन में घाटा सहना पडेगा।

साधारणत: बाजार में घटाव या बढत दोनो में से कोई भी एक पोजिशन खडी हुई तो ऐसे संयोग में उसके पोर्टफोलीओ के मूल्य में कमी न हो ऐसी व्यवस्था वह पहले से करके रखते है।

दुसरे शब्दो में बताना हो तो इन्डेक्स में होनेवाले चढाव उतार के परिणाम से उन्हे घाटा भी नही होता और फायदा भी नही होता

नोट (Note):

यहा दिए गए उदाहरण में पोर्टफोलीओ में छोटी साईज की सिक्योरिटीज में किए गए निवेश की जानकारी दर्शाई है।

परंतु बाजार में हेजिंग की इस थिअरी पर अमल किया गया तो बडे पोर्टफोलीओ के लिए हेजिंग की व्यवस्था अधिक फायदेमंद साबित होगी।

हेजिंग संभावित नुकसान को खत्म नही करता। हेजिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उसकी मदद से जरूरी नही ऐसे निवेश को निकाल सकते है।

दुसरे शब्दो में कहना हो तो हेजिंग अनचाहे जोखीम को निकाल के निवेश पर नियंत्रण लाया जा सकता है।

हेजिंग किया गया हो तो ऐसे पोजिशन में होनेवाले फायदे का हेजिंग न किए हुए पोर्टफोलीओ के फायदे के साथ औसत की गई तो उसमें दिखनेवाले फायदे का प्रमाण कम होता है।

सामान्य रूप से होनेवाले फायदे से अधिक फायदा हासिल करने के उद्देश से किसी भी व्यक्ति को हेजिंग पोजिशन नही लेनी चाहिए। हेजिंग करने से अथवा हेजिंग की पोजिशन लेने से सिर्फ जोखीम में कुछ प्रतिशत कमी होती है।

आर्बिट्रेज (Arbitrage):

इंडेक्स फ्युचर्स का निचे की तरह से आर्बिट्रेज करने के लिए उपयोग करते है।

१. पूँजी उपलब्ध हो तो उसे बाजार में निवेश कीजिए।

बडे पैमाने में लोग उनके पास की जादा पूँजी को शेअर बाजार में निवेश करना पसंद करते है। किसी भी प्रकार का जोखीम न लेते हुए उन्हे यह निवेश करना होता है।

भूतकाल में लोगो के पास अधिक रूपए होते तो सिक्योरिटी मार्केट में निवेश करने के लिए वह कर्ज के तौर पर दिए जाते थे।

उसमें (१) शेअर्स का भाव कम होने का जोखीम और (२) लोन कह के पैसे लेने वाले से व्यवहार में डिफॉल्ड करने का धोखा होता है। परंतु इंडेक्स फ्युचर्स मार्केट की टेक्नॉलॉजी निफ्टी में निवेश किए बिना बाजार में पैसो का लेन देन करने की सुविधा उपलब्ध कराती है।

उसी के साथ क्रेडीट का जोखीम भी खडा रहने की शक्यता कम होती है। यह एक नई व्यवस्था है, जिसका उद्देश एकदम सरल है। पैसो का उधार देनेवाला बजार में से निफ्टी के ५० सिक्योरिटी को खरीदता है।

उसी के साथ इस सिक्योरिटी पर भविष्य के किसी भी निश्चित तारीख को बेचने के लिए फ्युचर्स के मार्केट में व्यवहार करता है। यह व्यवस्था बैंक की रपो रेट व्यवस्था की तरह है।

पोजिशन का हेजिंग करने से उसकी किमत के विषय में उस के सामने कोई भी जोखीम नही होती। दुसरा याने इस में क्रेडीट रिस्क भी अधिक नही होती। क्योंकि दोनों कॉन्ट्रॅक्ट में आमने सामने के पक्ष एनएससीसीएल होते है।

एनएससीसीएल एन.एस.ई क्लिअरिंग सेवा उपलब्ध कराती है। वहा से प्राईज रिस्क अथवा क्रेडीट रिस्क लेने की ईच्छा न

करनेवाले व्यक्तियो को उधार रूपए हासिल करने का यह एक आदर्श बाजार है। परंपरागत बैंक और अत्यंत कन्झरवेटीव्ह कॉर्पोरेट ट्रेजरीज जैसे उधारदाताओं के लिए यह एक माध्यम है।

उदाहरण (Example):

५ सितंबर २००७ को निफ्टी का ट्रेडिंग ४८०० पर हो रहा है और उसके नजदीकी कालावधी के फ्यूचर्स का कॉन्टॅक्ट २७ सितंबर को पूरा हो रहा है।

उसका ट्रेडिंग ४८४० पर हा रहा है। बाईस दिन की कालावधी में मिलने वाली यह अधिक कमाई लेने की ईच्छा सट्टेबाज करता है।

उसके लिए वह स्पॉट बाजार में से १०,००,००० रूपयों के निफ्टी की खरीदी करता है। (निफ्टी के इंडेक्स में शेअर्स के वेटेज के अनुसार शेअर्स खरीद के उन शेअर्स का पोर्टफोलीओ बनाता है।)

ये पोर्टफोलीओ बनाने के लिए वह खरीदी निफ्टी के हर किसी शेअर्स के वेइटेज के प्रमाण में स्क्रिप्ट के लिए ऑर्डर देता है।

ऐसा करने के लिए उसे थोडी अधिक किमत चुकानी पडती है। यह खरीदी के लिए उन्होने दी हुई कूल किमत उनके अपेक्षित किमत से अंदाजा ०.१५% अधिक होती है क्योंकि इसमें इम्पेक्ट कॉस्ट का भी समावेश होता है। याने की स्पॉट बाजार में उसे निफ्टी ४८०७ पर मिलता है।

उसके सामने ४८४० पर १०,००,००० रूपए मूल्य के निफ्टी फ्युचर्स बेचने के लिए निफ्टी के चार लॉट की बिक्री करता है।

अब ५ सितंबर से २७ सितंबर में के २२ दिन की कालावधी में कई स्क्रिप्ट में डिविडन्ड मिलता है। मानीए की मिले हुए डिविडन्ड की रकम ८५०० रूपए होती है।

२७ सितंबर दोपहर ३.१५ बजे वह उनके निफ्टी के ५० शेअर्स के पोर्टफोलीओ की बिक्री करता है। उस वक्त निफ्टी ४८२० के नजदीक थी।

०.१५% के इम्पेक्ट कॉस्ट को गिनती में लेने पर उसे बिक्री के इस ऑर्डर में ४८१३ का भाव मिलता है। याने की स्पॉट बाजार में निफ्टी ४८१३ पर बिकता है।

२७ सितंबर को फ्युचर्स की पोजिशन स्पॉट बाजार के निफ्टी के भाव याने ४८२० पर बंद होता है ।

इस सौदे में सट्टेबाज को स्पॉट बाजार के लेनदेन में प्रति युनिट ६ रूपयों का फायदा होगा और फ्युचर्स के लेनदेन में प्रति युनिट २० रूपयों का फायदा होगा। साथ ही उसे ८५०० रूपए डिविडन्ड भी मिलता है।

।। धन्यवाद ।।

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श्रेणी: Share Market

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