इंडेक्स ऑप्शन क्या है? – What is Index Options in Hindi.

Table of Contents

इंडेक्स ऑप्शन एक इस तरह का ऑप्शन है कि जिसमें कॉन्ट्रॅक्ट के अंतर्गत आने वाले असेट इंडेक्स के रूप में ही होते है।

इंडेक्स ऑप्शन का उपयोग करना (Using Index Options in Hindi):

सट्टेबाज और हेजर्स इंडेक्स ऑप्शन का उपयोग करते है।

स्पेक्युलेशन (Speculation):

इंडेक्स के फ्युचर्स का उपयोग सट्टा करने के लिए निचे दिखाए तरिके से किया जाता है।

१. इंडेक्स में तेजी हो तो निफ्टी के कॉल ऑप्शन खरीदिए अथवा निफ्टी के पुट ऑप्शन बेचिए (Bullish Index, Buy Nifty Calls or Sell Nifty Puts in Hindi.):

एक सट्टेबाज यह मानता है कि अगले कुछ दिनो में बाजार में अच्छा सुधार देखने को मिलेगा और उसमें से वह बहुत फायदा कमाने की इच्छा करता है। ऐसी स्थिति में उसके पास निचे दर्शाए दो पर्याय उपलब्ध होते है।

  • इंडेक्स के चढ – उतार के साथ चढने वाली और उतरने वाली कुछ सिक्योरिटीज की खरीदी करके बादमें भविष्य के किसी भी तारिख को उनकी बिक्रि करना।
  • ऑप्शन का उपयोग करके वह उपर की तरह आयोजन कर सकता है। इसके लिए वह इंडेक्स के कॉल ऑप्शन की खरीदी अथवा इंडेक्स के पुट ऑप्शन को राईट करके उसकी बिक्रि कर सकता है।

उदाहरण (Example):

एक सट्टेबाज ऐसा मानता है कि, आगामी दिनो में इंडेक्स में सुधार होगा। ऑप्शन का उपयोग करके वह किस तरह से फायदा ले सकते है यह अब हम देखते है।

अनुमान कीजिए की इंडेक्स का वर्तमान स्तर ५२५० है। उसका जोखीम मुक्त वार्षिक दर बारा प्रतिशत है। उसके सामने इंडेक्स में होने वाली अफरा तफरी का दर ३० प्रतिशत है।

निचे दिखाए गए टेबल में बाजार में उपलब्ध सभी कॉल और पुट ऑप्शन दर्शाए गए है।

निफ्टी ऑप्शन की
स्ट्राईक प्राईज
कॉल प्रीमियम
रू
पुट प्रीमियम
रू
५२५० ५२०० ८०.१० १८.१५
५२५० ५२२५ ६३.६५ २६.५०
५२५० ५२५० ४९.४५ ३७.००
५२५० ५२७५ ३७.५० ४९.८०
५२५० ५३०० २७.५० ६४.८०

केस १: निफ्टी के कॉल ऑप्शन खरीदिए – Buying Nifty Call Options in Hindi.

एक सट्टेबाज कॉल ऑप्शन खरीदकर मुनाफा कमा सकता है। माकेट में उपलब्ध अलग अलग स्ट्राईक प्राईज के ऑप्शन में से ट्रेडिंग के लिए कौन से

ऑप्शन का चयन करना यह दो बातों पर आधारित होता है। मार्केट उपर की तरफ जाने की आपकी मान्यता कितनी मजबूत है और आप कितने प्रमाण में घाटा सहने को तैयार है।

५२०० के स्ट्राईक प्राईज के कॉल ऑप्शन को डीप आयटीएम कहके पहचाना जाता है और उसका ट्रेडींग उच्च प्रीमियम पर होता है।

५२७५ के स्ट्राईक प्राईज के कॉल ऑप्शन को ओटीएम कहके जाना जाता है और उसका ट्रेडींग कम प्रीमियम पर होता है। उसी तरह से ५३०० के स्ट्राईक प्राईज के कॉल ऑप्शन को डीप ओटीएम कहके जाना जाता है और उसका ट्रेडींग बहुत कम प्रीमियम पर होता है

क्योंकि इस ऑप्शन का अमल अप्रत्याशित घटना पर निर्भर करता है जैसे की एक्सपायरी पर निफ्टी में अचानक से ५० पॉइंट की बढत होकर तेजी आती है।

इसलिए यह कॉल खरीदना लॉटरी खरीदने के समान है। एक्सपायरी पर यह कॉल इन द मनी हो और सट्टेबाज को उसमें से फायदा प्राप्त हो इसकी संभावना बहुत कम होती है।

निचे दर्शाए गए चित्र में कॉल ऑप्शन के खरीददार को अलग अलग स्ट्राईक प्राईज के ऑप्शन पर मिले पेऑफ की जानकारी दर्शाई गई है।

Buying Nifty Call Options in Hindi

केस २: निफ्टी के पुट ऑप्शन बेचिए – Selling Nifty Put Option in Hindi.

सट्टेबाज पुट ऑप्शन राईट करके याने बेचकर भी फायदा कमा सकता है। पर ऐसा करने से पहले एक बात जरूर ध्यान में रखें की पुट राईटर की हैसीयत से आपको अमर्यादित नुकसान और मर्यादित फायदा होने की संभावना होती है।

इन्डेक्स में बढत हुई तो पुट ऑप्शन का खरीददार ऑप्शन को एक्सपायर होने देता है और आपको प्रीमियम की रकम मिलती है।

इसके विपरीत अगर आपकी मान्यता गलत साबित हुई और इंन्डेक्स में गिरावट हुई तो ऐसे समय इंन्डेक्स जैसे जैसे निचे आता है वैसे वैसे सटटेबाज को होनेवाला नुकसान बढता जाता है।

मार्केट में उपलब्ध अलग अलग स्ट्राईक प्राईज के ऑप्शन में से ट्रेडिंग के लिए कौन से ऑप्शन का चयन करना यह दो बातों पर आधारित होता है। मार्केट नीचे की तरफ जाने की आपकी मान्यता कितनी मजबूत है और आप कितने प्रमाण में घाटा सहने को तैयार है।

५३०० के स्ट्राईक प्राईज के पुट ऑप्शन को डीप आयटीएम कहके पहचाना जाता है और उसका ट्रेडींग उच्च प्रीमियम पर होता है।

५२७५ के स्ट्राईक प्राईज के पुट ऑप्शन को आयटीएम कहके जाना जाता है और उसका ट्रेडींग कम प्रीमियम पर होता है।

उसी तरह से ५२०० के स्ट्राईक प्राईज के पुट ऑप्शन को डीप ओटीएम कहके जाना जाता है और उसका ट्रेडींग बहुत कम प्रीमियम पर होता है क्योंकि इस ऑप्शन का अमल अप्रत्याशित घटना पर निर्भर करता है

जैसे की एक्सपायरी पर निफ्टी में अचानक से ५० पॉइंट की गिरावट होकर मंदी आती है। इसलिए यह पुट राईट करना (याने बेचना) एक सुरक्षित आयोजन माना जाता है।

एक्सपायरी पर यह पुट इन द मनी हो इसकी संभावना बहुत कम होती है। दुर्भाग्यवश अगर ऐसा हुआ तो इस स्थिति में निफ्टी ५२०० के जितने नीचे जाती है उतना सट्टेबाज को नुकसान होता है।

निचे दर्शाए गए चित्र में पुट ऑप्शन के राईट को अलग अलग स्ट्राईक प्राईज के ऑप्शन पर मिले पेऑफ की जानकारी दर्शाई गई है।

Selling Nifty Put Option in Hindi

२. इंडेक्स में मंदी हो तो निफ्टी के कॉल ऑप्शन बेचिए अथवा निफ्टी के पुट ऑप्शन खरीदिए (Bearish Index : Sell Nifty Calls or Buy Nifty Puts in Hindi):

इन्डेक्स अचानक निचे आने की बाजार में परिस्थिति निर्माण हुई होगी अथवा आपको ऐसा अंदेशा हो तो इंडेक्स में पोजिशन लेकर आप मुनाफा ले सकते है।

सरकारी अस्थिरता के कारण या किसी और वजह से इंडेक्स में गिरावट निर्माण होगी ऐसा कई लोगो को अंदेशा होता है। ऐसी स्थिति में सट्टेबाज के पास उसमे से मुनाफा कमाने के लिए निचे दर्शाए दो पर्याय उपलब्ध होते है।

  • इंडेक्स के कॉल ऑप्शन की बिक्री करे।
  • इंडेक्स के पुट ऑप्शन की खरीदी करे।

उदाहरणः-

एक सट्टेबाज ऐसा मानता है कि, आगामी दिनो में इंडेक्स में गिरावट होगी। ऑप्शन का उपयोग करके वह किस तरह से फायदा ले सकते है यह देखते है।

अनुमान कीजिए की इंडेक्स का वर्तमान स्तर ५२५० है। उसका जोखीम मुक्त वार्षिक दर बारा प्रतिशत है। उसके सामने इंडेक्स में होने वाली अफरा तफरी का दर ३० प्रतिशत है।

निचे दिखाए गए टेबल में बाजार में उपलब्ध सभी कॉल और पुट ऑप्शन दर्शाए गए है।

निफ्टी ऑप्शन की
स्ट्राईक प्राईज
कॉल प्रीमियम
रू
पुट प्रीमियम
रू
५२५० ५२०० ८०.१० १८.१५
५२५० ५२२५ ६३.६५ २६.५०
५२५० ५२५० ४९.४५ ३७.००
५२५० ५२७५ ३७.५० ४९.८०
५२५० ५३०० २७.५० ६४.८०

केस १: निफ्टी के पुट ऑप्शन खरीदिए – Buying Nifty Put Options in Hindi.

इंडेक्स में गिरावट आते समय, एक सट्टेबाज पुट ऑप्शन खरीदकर मुनाफा कमा सकता है।

मार्केट में उपलब्ध अलग अलग स्ट्राईक प्राईज के ऑप्शन में से ट्रेडिंग के लिए कौन से ऑप्शन का चयन करना यह दो बातों पर आधारित होता है। मार्केट नीचे की तरफ जाने की आपकी मान्यता कितनी मजबूत है और आप कितने प्रमाण में घाटा सहने को तैयार है।

५३०० के स्ट्राईक प्राईज के पुट ऑप्शन को डीप आयटीएम कहके पहचाना जाता है और उसका ट्रेडींग उच्च प्रीमियम पर होता है।

५२७५ के स्ट्राईक प्राईज के पुट ऑप्शन को आयटीएम कहके जाना जाता है और उसका ट्रेडींग अधिक प्रीमियम पर होता है।

उसी तरह से ५२०० के स्ट्राईक प्राईज के पुट ऑप्शन को डीप ओटीएम कहके जाना जाता है और उसका ट्रेडींग बहुत कम प्रीमियम पर होता है क्योंकि इस ऑप्शन का अमल अप्रत्याशित घटना पर निर्भर करता है

जैसे की एक्सपायरी पर निफ्टी में अचानक से ५० पॉइंट की गिरावट होकर मंदी आती है। इसलिए यह पुट खरीदना लॉटरी खरीदने के समान है। एक्सपायरी पर यह पूट इन द मनी हो और सट्टेबाज को उसमें से फायदा प्राप्त हो इसकी संभावना बहुत कम होती है।

निचे दर्शाए गए चित्र में पुट ऑप्शन के खरीददार को अलग अलग स्ट्राईक प्राईज के ऑप्शन पर मिले पेऑफ की जानकारी दर्शाई गई है।

Buying Nifty Put Options in Hindi

केस २: निफ्टी के कॉल ऑप्शन बेचिए – Selling Nifty Call Options in Hindi.

सट्टेबाज कॉल ऑप्शन राईट करके याने बेचकर भी फायदा कमा सकता है। पर ऐसा करने से पहले एक बात जरूर ध्यान में रखें की कॉल राईटर की हैसीयत से आपको अमर्यादित नुकसान और मर्यादित फायदा होने की संभावना होती है।

इन्डेक्स में गिरावट हुई तो कॉल ऑप्शन का खरीददार ऑप्शन को एक्सपायर होने देता है और आपको प्रीमियम की रकम मिलती है।

इसके विपरीत अगर आपकी मान्यता गलत साबित हुई और इंन्डेक्स में बढ़त हुई तो ऐसे समय इंन्डेक्स जैसे जैसे ऊपर जाता है वैसे वैसे सटटेबाज को होनेवाला नुकसान बढता जाता है।

मार्केट में उपलब्ध अलग अलग स्ट्राईक प्राईज के ऑप्शन में से ट्रेडिंग के लिए कौन से ऑप्शन का चयन करना यह दो बातों पर आधारित होता है।

मार्केट नीचे की तरफ जाने की आपकी मान्यता कितनी मजबूत है और आप कितने प्रमाण में घाटा सहने को तैयार है।

५२०० के स्ट्राईक प्राईज के कॉल ऑप्शन को डीप आयटीएम कहके पहचाना जाता है और उसका ट्रेडींग उच्च प्रीमियम पर होता है।

५२७५ के स्ट्राईक प्राईज के कॉल ऑप्शन को ओटीएम कहके जाना जाता है और उसका ट्रेडींग अधिक प्रीमियम पर होता है। उसी तरह से ५३०० के स्ट्राईक प्राईज के कॉल

ऑप्शन को डीप ओटीएम कहके जाना जाता है और उसका ट्रेडींग बहुत कम प्रीमियम पर होता है क्योंकि इस ऑप्शन का अमल अप्रत्याशित घटना पर निर्भर करता है जैसे की एक्सपायरी पर निफ्टी में अचानक से ५० पॉइंट की बढ़त होकर तेजी आती है।

इसलिए यह कॉल राईट करना (याने बेचना) एक सुरक्षित आयोजन माना जाता है।

एक्सपायरी पर यह कॉल इन द मनी हो इसकी संभावना बहुत कम होती है। दुर्भाग्यवश अगर ऐसा हुआ तो इस स्थिति में निफ्टी ५३०० के जितने ऊपर जाती है उतना सट्टेबाज को नुकसान होता है।

निचे दर्शाए गए चित्र में कॉल ऑप्शन के राईट को अलग अलग स्ट्राईक प्राईज के ऑप्शन पर मिले पेऑफ की जानकारी दर्शाई गई है।

Selling Nifty Call Options in Hindi

हेजिंग (Hedging):

इंडेक्स ऑप्शन का हेंजिग करने के लिए निचे दिए गए तरीके से उपयोग किया जाता है।

१. आपके पास पोर्टफोलीओ हो तो पुट ऑप्शन खरीदिए (Have Portfolio, buy Puts in Hindi):

चढाव उतार यह कॅपिटल मार्केट में एक सामान्य बात है। बाजार में आने वाले चढाव उतार के परिणाम स्वरूप पोर्टफोलीओ धारक बहुत अस्वस्थ होते है।

कईबार वह ऐसा अनुमान करते है कि नजदीकी भविष्य के मार्केट में मंदी आएगी और बाजार में वॉलेटॅलिटी चालू रहेगी।

नजदीक के भविष्य में आपको शेअर्स बेचने हो और बाजार में मंदी आई तो उसमें बहुत समस्याए आती है।

उदाहरण देकर बताना हो तो आपने नजदीकी भविष्य में कोई भी घर अथवा मोटर खरीदने के लिए शेअर्स की बिक्री करने का गणित किया हो और आपको शेअर्स बेचने हो, तब अगर निफ्टी में गिरावट आई तो आपका किया हुआ आयोजन व्यर्थ होने की शक्यता होती है।

ऐसी स्थिति निमार्ण हुई तो निवेशक सामान्यरूप से आगे की तरह व्यवहार करते है।

  • निवेशक अपने पास के शेअर्स की तुरंत बिक्री करता है। इस तरह की बिक्री को पॅनिक सेलिंग कहके पहचाना जाता है।
  • निवेशक कुछ नही करता और बाजार के अस्थिरता के कारण होने वाले घाटे को वह सहन करता है।
  • इंडेक्स फ्युचर्स को बेचकर इंडेक्स में होनेवाले चढाव उतार के परिणामस्वरूप आपने निवेश के सामने खडे जोखीम को दूर कर सकता है।

निवेशक इंडेक्स ऑप्शन का उपयोग करके भी बाजार में आने वाले चढाव उतार के सामने उनके पोर्टफोलीओ को रक्षण दे सकता है।

इसके लिए निवेशक को योग्य संख्या में पुट ऑप्शन की खरीदी करनी पडती है। यह पुट ऑप्शन योग्य स्ट्राईक प्राईज पर खरीदी करना बहुत जरूरी है। इसके लिए आपको पोर्टफोलीओ के बीटा व्हॅल्यू की जानकारी होना जरूरी है।

उदाहरण:

मान लो की एक निवेशक के पास निचे दिए तरीके का पोर्टफोलीओ है।

शेअर का नाम निवेश की हुई
रकम
बीटा व्हॅल्यू
झी टेलिफिल्मस दस लाख १.४
हीरो होन्डा बीस लाख ०.८

पोर्टफोलीओ बीटा =[(१ x १.४) + (२ X ०.८)] / (१ + २) = १

किसी भी शेअर की बीटा व्हॅल्यू मालूम नही होगी तो ऐसे वक्त उसकी बीटा व्हॅल्यू एक है ऐसा मानकर आगे का व्यवहार किया जा सकता है।

इस तरह से अनुमान करके आगे जाना सुरक्षित होता है । सामान्यरूप से अधिक अच्छे विविधतावाले पोर्टफोलीओ का बीटा १ के आसपास ही होता है।

अब नीचे हम आगे दो केसे देखते है। एक केस में बीटा १ है और दुसरे केस में बीटा १ से ज्यादा है।

केस १: पोर्टफोलीओ का बीटा १.० है (Portfolio Beta is 1.0):

शेअर बाजार में आपके किए निवेश को आप कितना सुरक्षित रखना चाहते हो, उस पर ही ऑप्शन की स्ट्राईक प्राईज निश्चित करने का आधार होता है। अनुमान कीजिए की स्पॉट में निफ्टी का भाव ५२५० है। आपने ५१२५ के भाव पर पुट खरीदने का निर्णय किया है।

ऐसी स्थिति में इंडेक्स ५१२५ से अधिक निचे आया तो आपके पोर्टफोलीओ को वह रक्षण देता है। जब पोर्टफोलीओ का बीटा १ होता है तब स्पॉट के इंडेक्स से पोर्टफोलीओ के मुल्य का भागाकार करके जो नंबर मिलता है, उस संख्या के पुट ऑप्शन खरीदने पडते है।

अनुमान कीजिए की आपका पोर्टफोलीओ १० लाख का है। ऐसी स्थिति में इंडेक्स में गिरावट आई तो उसके सामने पोर्टफोलीओ को रक्षण देने के लिए आपको लगभग २०० पुट ऑप्शन खरीदने पडेगें (१०,००,००० / ५२५० = १९०.४७)।

अब अगर निफ्टी के पुट ऑप्शन का ५० का एक मार्केट लॉट है, तो आपका निफ्टी के पुट ऑप्शन के ४ मार्केट लॉट खरीदने पडेगें।

मान लो कि आपने ५१२५ के स्ट्राईक प्राईज पर निफ्टी के पुट ऑप्शन के ४ मार्केट लॉट खरीदे।

इन दो महीनो के समय में निफ्टी गिरकर ४५३६ पर आई तो उसके इंडेक्स में १३.६ प्रतिशत की गिरावट हुई ऐसा गीना जा सकता है।

आपके पोर्टफोलीओ के मुल्य में भी उतनी ही गिरावट होती है और उसका मुल्य रू. १० लाख से गिरकर रू ८.६४ लाख हो जाता है और आपको रू १,३६,००० का नुकसान सहन करना पड़ता है।

पर पुट ऑप्शन आपको (५१२५ – ४५३६)X४ X ५० याने की रू १,१७,८०० का पेऑफ देता है और आपके पोर्टफोलीओ का मुल्य रू ९,८०,००० का हो जाता है।

पोर्टफोलीओ के साथ पुट ऑप्शन खरीदने के परिणामस्वरूप बाजार में गिरावट की वजह से आपके पोर्टफोलीओ के मूल्य में गिरावट आने के साथ ही आप्शन की पोजिशन में भी उतनाही लाभ मिलता है और आपके पोर्टफोलीओ का मुल्य एक निश्चित स्तर से निचे नही जाता।

साथ ही बाजार में तेजी आई तो इस का स्थिति में आपके पोर्टफोलीओ के मूल्य में अमर्यादित बढ़त होने की संभावना होती है।

उदाहरण देकर बताना हो तो निफ्टी बढ़कर ५२८० हुआ तो निवेशक उनके पुट ऑप्शन को एक्सपायर होने देते है और इस पुट ऑप्शन के लिए उन्होने जो प्रीमियम दिया वह गँवाते है।

पोर्टफोलीओ का बीमा खरीदने के लिए उन्होने चुकाई हुई वह किमत होती है। पर बाजार में तेजी की वजह से उनके पोर्टफोलीओ के मुल्य में बढ़त होती है।

केस २: पोर्टफोलीओ का बीटा १.० से ज्यादा का है (Portfolio Beta is Greater than 1.0):

अनुमान कीजिए की अपके पास एक पोर्टफोलीओ है, जिसका बीटा १.२ का है। बाजार में गिरावट आई तो उसके सामने सुरक्षा प्राप्त करने के लिए हम क्या कर सकते है यह हम देखते है।

हमें पुट ऑप्शन कौन से स्ट्राईक प्राईज पर खरीदना चाहिए इसका आधार हम अपने निवेश को कितना सुरक्षित रखना चाहते है, उस पर निर्भर होता है।

अनुमान कीजिए की स्पॉट में निफ्टी का भाव ५२०० है। आपने ५१४० के भाव पर पट खरीदने का निर्णय किया है। ऐसी स्थिति में इंडेक्स ५१४० से अधिक निचे आया तो आपके पोर्टफोलीओ को वह रक्षण देता है।

अब कितने पुट ऑप्शन की खरीदी करनी चाहिए उसका गणित इस प्रकार है – (पोर्टफोलीओ का मुल्य x पोर्टफोलीओ का बीटा) / इंडेक्स का स्पॉट भाव। मानो की आपका पोर्टफोलीओ रू. १०,००, ००० का है और उसका बीटा १.२ है।

ऐसी स्थिति में इंडेक्स में गिरावट आई तो उसके सामने पोर्टफोलीओ को रक्षण देने के लिए आपको लगभग २३० पुट ऑप्शन खरीदने पडेगें (१०,००,००० x १.२ / ५२०० = २३०.७९)।

अब अगर निफ्टी के पुट ऑप्शन का ५० का एक मार्केट लॉट है, तो आपको निफ्टी के पुट ऑप्शन के ५ मार्केट लॉट खरीदने पडेगें। मान लो की आपने ५१४० के स्ट्राईक प्राईज पर निफ्टी के पुट ऑप्शन के ५ मार्केट लॉट खरीदे।

इन दो महीनो के समय में निफ्टी गिरकर ४६८० पर आई तो ऐसी स्थिति इंडेक्स में १० प्रतिशत की गिरावट हई।

साथ ही आपके पोर्टफोलीओ के मूल्य में १२ प्रतिशत की गिरावट आएगी और उसका मुल्य रू. १० लाख से गिरकर रू ८.८ लाख हो जाता है और आपको रू १,२०,००० का नुकसान सहन करना पड़ता है।

पर पुट ऑप्शन आपको (५१४० – ४६८०) ५ X ५० याने कि रू १,१५,००० का पेऑफ देता है और आपके पोर्टफोलीओ का मुल्य रू ९,९५,००० का हो जाता है।

पोर्टफोलीओ के साथ पुट ऑप्शन खरीदने के परिणामस्वरूप बाजार में गिरावट की वजह से आपके पोर्टफोलीओ के मूल्य में गिरावट आने के साथ ही आप्शन की पोजिशन में भी उतनाही लाभ मिलता है और आपके पोर्टफोलीओ का मुल्य एक निश्चित स्तर से निचे नही जाता।

साथ ही बाजार में तेजी आई तो इस का स्थिति में आपके पोर्टफोलीओ के मूल्य में अमर्यादित बढ़त होने की संभावना होती है।

उदाहरण देकर बताना हो तो निफ्टी बढ़कर ५२८० हुआ तो निवेशक उनके पुट ऑप्शन को एक्सपायर होने देते है और इस पुट ऑप्शन के लिए उन्होने जो प्रीमियम दिया वह गँवाते है।

पोर्टफोलीओ का बीमा खरीदने के लिए उन्होने चुकाई हुई वह किमत होती है। पर बाजार में तेजी की वजह से उनके पोर्टफोलीओ के मुल्य में बढ़त होती है।

।। धन्यवाद ।।

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श्रेणी: Share Market

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