क्या आपको पता है की NPA क्या है? – What is NPA in Hindi अगर आपको पता नहीं है तो आप इस ब्लॉग को पूरा पढ़े.

NPA क्या है? – What is NPA in Hindi

पिछले कुछ सालो में बँक के NPA यानि Non Performing Assets बोहोत बढ़ गये है तो आज हम NPA को समझेंगे बैंक का एनालिसिस करते वक़्त NPA क्यों महत्वपूर्ण होता है इसके बारे में बात करेंगे

बैंक ने किसी को दिया हुआ लोन बैंक के लिए Asset होता है क्युकी वो लोन बैंक interest यानि ब्याज के रूप में income कमा के देता है वही जिसने बैंक से लोन लिया है उसके लिए वो लोन liability होती है क्युकी आगे चलकर बैंक को वो लोन वापस करना होता है

जब लोन का interest और प्रिंसिपल अमाउंट वक़्त पर चुकाए जाते है तो उस लोन को standard Asset कहते है अगर borrower यानि जिनोने बैंक से लोन लिया है

वो उस लोन की installment यानि क़िस्त भरने के तारिक से ९० दिन के पहले क़िस्त नहीं भरते है तो उसके बाद उस लोन को NPA यानि Non Performing Assets कहते है

एग्रीकल्चरल और कुछ स्पेसिफिक लोन के लिए NPA के अलग-अलग क्राइटेरिया होते है लोन पर मिल रहा interest बैंक के लिए income होता है और जब कोई लोन बैंक के लिए इनकम बनाना बंद कर देता है तो वो लोन बैंक के लिए NPA बन जाता है

कई बार borrower की पूरी जांच किये बिना उन्हें लोन दिया जाता है तो कई बार पोलिटिकल पार्टी के प्रभाव में या जान पहचान से लोन दिए जाते है जिसमे borrower का पूरा verification नहीं किया जाता या उनसे sufficient asset colatral यानि गिरवी नहीं रखे जाते जिससे NPA बढ़ने का खतरा होता है

बैंक को NPAs को तीन केटेगरी में classify करना होता है

  1. Sub-Standard Assets
  2. Doubtful Assets
  3. Loss Assets

जो लोन १२ महीने या उससे कम समय के लिए NPA होते है उन्हें Sub-Standard Assets कहा जाता है और अगर वो लोन १ साल से ज्यादा समय के लिये NPA रहता है तो उसे Doubtful Assets की केटेगरी में रखा जाता है Doubtful Assets मतलब वो लोन जिनकी वसूली के संभावना बोहोत कम है

बैंक Overdraft Facility Provide करती है और Overdraft में भी NPA होता है Overdraft Facility आम तौर पर करंट अकाउंट में प्रदान की जाती है जिसमे आपके बैंक अकाउंट में जितने पैसे है अब बैंक ने आपको प्रदान की हुयी Overdraft लिमीट तक आप पैसे निकाल सकते हो

अगर किसी कंपनी ने Overdraft लिया है और Overdraft चुकाने के तारिक के बाद ९० दिन तक कंपनी Overdraft नहीं चुकाती है तो उसके बाद वो Overdraft NPA बन जायेगा कोई लोन NPA होने पर पैसा वसूल करने के लिए बैंक अलग-अलग approaches उपयोग में लेती है

जैसे की borrower ने कोई भी चीज colatral यानि गिरवी रखी है उसे बेच कर पैसे रिकवर कर लो अगर किसी ने अपने कंपनी के शेयर pledge यानि गिरवी रख कर लोन लिया है तो लोन न चुकाने पर बैंक उन शेयर को बेच कर पैसा रिकवर करती है

और बैंक कई बार लोन न चुकाने पर कंपनी को NCLT यानि National Company Law Tribunal खींचती है

जहा पर कंपनी को लिक्विडेट करके कंपनी के सारे Asset बेच कर या पूरी कंपनी बेच कर बैंक अपने पैसे रिकवर करती है पर ज्यादा तर टाइम बैंक्स कंपनी के लिक्विडेशन के जरिये अपने पुरे पैसे रिकवर नहीं कर पाती।

अगर लोन Unsecured है याने बैंक कोई चीज बिना गिरवी रखे लोन दिया है जैसे की पर्सनल लोन और Unsecured Loan को कोई देता नहीं है तो उसके वसूली करना बैंक के लिए बोहोत मुश्किल जाता है इसलिए बैंक का यही फोकस रहना चाहिए की NPA कम से कम कैसे रखा जाये।

क्युकी NPA का कंपनी के financial health पर बोहोत असर पड़ता है ज्यादा NPA की वजह से बैंक के पास फण्ड की कमी हो सकती है जिसका उनके लोन देने के capacity पर फर्क पड़ सकता है ज्यादा NPA की वजह से कुछ साल पहले IDBI Bank ने Corporate loan देना बंद कर दिया है

तो NPA से बैंक की आर्थिक हालत पता करने में मदत होती है इसलिए बैंक का एनालिसिस करते वक़्त NPA देखना बोहोत जरुरी है NPA से जुड़े कुछ रेश्यो होते है

  1. NPA Ratio
  2. Provision Coverage Ratio

हम आशा करते है की हमारी ये (NPA क्या है? – What is NPA in Hindi) ब्लॉग पोस्ट आपको पसंद आयी होगी अगर आपको शेयर मार्केट से जुड़ा कोई भी सवाल है तो आप कृपया कमेंट में जरूर पूछे।

।। धन्यवाद ।।

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[…] NPA क्या है? – What is NPA in Hindi […]

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