ओपन इन्ट्रेस्ट क्या है? – What is Open Interest in Stock Market in Hindi.

दिन के अंत में मार्केट में व्यवहार करनेवालो के पास बचे हुए कुल कॉन्ट्रॅक्ट की संख्या को ओपन इन्ट्रेस्ट कहते है।

दुसरे शब्दों में बताना हो तो ओपन इन्ट्रेस्ट, फ्युचर्स अथवा ऑप्शन के ऐसे कॉन्ट्रैक्ट की कुल संख्या है जिनको एक्ससाईझ नही किया गया, जो एक्सपायर नही हुए है अथवा डीलीवरी देके उनको सेट ऑफ नहीं किया गया है।

सामान्य प्रकार से ओपन इन्ट्रेस्ट, फ्युचर्स मार्केट पर लागु होता है। ओपन इन्ट्रेस्ट अथवा जिनका अमल होना बाकी है ऐसे कॉन्ट्रॅक्ट बहुत समय बाजार के ट्रेन्ड का अंदाजा लगाने में मददगार होते है।

साथ ही ट्रेन्ड रिवर्स होने का निर्देश भी उसे मिलता है। ओपन इन्ट्रेस्ट की मद्द से फ्युचर्स मार्केट में धन का प्रवाह कितना है यह भी पता लगाया जा सकता है।

फ्युचर्स के कॉन्ट्रॅक्ट के हर एक विक्रेता के लिए एक खरीदार होना चाहिए। विक्रेता और खरीददार द्वारा मिलकर सिर्फ एक कॉन्ट्रॅक्ट किया जाता है।

इसलिये ओपन इन्ट्रेस्ट की गणना करते समय हमें कुल खरीदारों या विक्रेताओं की संख्या को देखना पडता है। दोनो पक्षों के कॉन्ट्रॅक्ट देखने की जरूरत नहीं होती।

हर ट्रेडींग दिन के अंत में ओपन इन्ट्रेस्ट रिपोर्ट आती है जिससे पता चलता है की ओपन इन्ट्रेस्ट में बढत हुई है अथवा कमी।

ओपन इन्ट्रेस्ट की गिनती किस तरह से करनी चाहिए – Calculation of Open Interest in Hindi.

एक्सचेंज पर पूरे होनेवाले प्रत्येक कॉन्ट्रॅक्ट का उस दिन के ओपन इन्ट्रेस्ट के स्तर पर परिणाम होता है।

निचे के उदाहरण की मदद से इस मुद्दे को हम अच्छी तरह से समझ सकते है।

ओपन इन्ट्रेस्ट की संख्या में एक से बढ़ोतरी होगी अगर दोनो पक्ष – खरीददार और विक्रेता नई पोजिशन खडी करते है।

दुसरे शब्दों में बताना हो तो खरीददार और विक्रेता, दोनो के कॉन्ट्रॅक्ट से ओपन इन्ट्रेस्ट में दो कॉन्ट्रैक्ट की बढ़ोतरी नहीं होती है।

ओपन इन्ट्रेस्ट की संख्या में एक से गिरावट होगी अगर दोनो पक्ष – खरीददार और विक्रेता अपनी पुरानी पोजिशन बंद करते है।

दुसरे शब्दों में बताना हो तो एक पुराना खरीददार और एक पुराना विक्रेता जब अपना कॉन्ट्रॅक्ट बंद करते है तब ओपन इन्ट्रेस्ट में दो कॉन्ट्रैक्ट की गिरावट नहीं होती है।

एक पुराना ट्रेडर उसका सौदा किसी भी नए ट्रेडर को सौप रहा हो तो ओपन इन्ट्रेस्ट के कॉन्ट्रॅक्ट की संख्या में कोई भी बढत या गिरावट नहीं होती है।

ओपन इन्ट्रेस्ट पर नजर रखने के लाभ – Benefits of Monitoring Open Interest in Hindi.

ट्रेडींग के हर दिन के अंत में ओपन इन्ट्रेस्ट की संख्या में होनेवाले बदलाव पर नजर रखना बहुत जरूरी होता है।

उस से दिन के दरम्यान हुए व्यवहार का निर्देश मिलता है और ट्रेन्ड या ट्रेन्ड रिवर्स होने का अंदाजा भी लगाया जा सकता है।

ट्रेडींग दिन के अंत में ओपन इन्ट्रेस्ट में किसी भी प्रकार की बढत हुई तो वह ऐसा संकेत देता है कि बाजार में नकद का प्रवाह है।

परिणामस्वरूप ऐसा अनुमान लगाया जा सकता है कि बाजार का वर्तमान ट्रेंड (तेजी, मंदी, साइडवेज़ ट्रेंड) जारी रहेगा।

ट्रेडींग दिन के अंत में ओपन इन्ट्रेस्ट में किसी भी प्रकार की गिरावट हुई तो वह ऐसा संकेत देता है कि बाजार में से नकद का प्रवाह बाहर जा रहा है अर्थार्त लोग अपनी पोसिशन निकाल रहे है।

परिणामस्वरूप ऐसा अनुमान लगाया जा सकता है कि बाजार का वर्तमान ट्रेंड समाप्ति की तरफ बढ़ रहा है।

फ्युचर्स मार्केट में लेन देन करने वाले खिलाडीयों के लिए हर दिन ओपन इन्ट्रेस्ट की पोजिशन जानना बहुत जरूरी है। इससे उन्हें बाजार में आने वाले बढे परीवर्तन का पहले से अंदेशा मिलता है।

वॉल्युम और ओपन इन्ट्रेस्ट – Interpretation of Volume and Open Interest in Hindi.

वॉल्युम और ओपन इन्ट्रेस्ट इन दोनों पर साथ में नजर रखने से हमें पता चलता है कि कोई भी ट्रेडिंग दिन में फ्युचर्स मार्केट में कितने कॉन्ट्रॅक्ट ने हाथ बदले है।

इससे हम यह अनुमान लगा सकते है कि बाजार का वर्तमान ट्रेंड चालू रहेगा की नजदीकी भविष्य में ट्रेन्ड रिव्हर्स होगा।

मार्केट के कामकाज के दरम्यान जितने जादा प्रमाण में व्यवहार होते है उतना वॉल्युम उपर जाने की संभावना होती है। ऐसी स्थिति में बाजार में ट्रेडींग करनेवाले समझते है कि बाजार में वॉल्युम के लेनदेन का दबाव निर्माण हो रहा है। यह दबाव इसके भाव का ट्रेन्ड निश्चित करता है।

बाजार में वॉल्युम जितना ज्यादा होगा उतना ही ज्यादा हम वर्तमान ट्रेन्ड चालु रहने की अपेक्षा कर सकते है। दुसरे शब्द में बताना हो तो इस स्थिति में ट्रेन्ड रिव्हर्स होने की संभावना कम होती है।

तेजी के ट्रेंड में अगर बिना भाव में बढ़त के वॉल्युम में बढ़त हुई तो वह तेजी का दबाव काम हो रहा है ऐसा दर्शाता है।

मंदी के ट्रेंड में अगर बिना भाव में गिरावट के वॉल्युम में बढ़त हुई तो वह मंदी का दबाव काम हो रहा है ऐसा दर्शाता है।

बार चार्ट पर ट्रेन्ड रिवर्स होने का निर्देश मिलने से पहले उसके वॉल्युम की संख्या से उसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

भाव का ट्रेन्ड ओपन इन्ट्रेस्ट वॉल्युम अर्थघटन
बढता हुआ भाव बढता है बढता है मार्केट सशक्त होता है
बढता हुआ भाव घटता है घटता है मार्केट अशक्त बनते
जाता है
घटता हुआ भाव बढता है बढता है मार्केट अशक्त होता है
घटता हुआ भाव घटता है घटता है मार्केट सशक्त बनते
जाता है

तेजी के माहोल में अगर भाव के साथ ओपन इन्ट्रेस्ट और वॉल्यूम में बढ़त होती है तो ऐसा माना जाता है कि बाजार में पैसों का प्रवाह बढ़ रहा है और नए खरीददार बाजार में आ रहे है और वर्तमान तेजी का दौर चालू रहेगा।

अगर भाव में बढ़त के साथ ओपन इन्ट्रेस्ट और वॉल्यूम में गिरावट होती है तो ऐसा माना जाता है कि बाजार में नए खरीददार नहीं आ रहे है

पर शॉर्ट सेलर्स अपनी पोसिशन कवर कर रहे है और यह ऐसा संकेत देता है कि तेजी का दबाव काम हो रहा है और नजदीकी भविष्य में तेजी की चाल का अंत होगा।

मंदी के माहोल में अगर भाव में गिरावट के साथ ओपन इन्ट्रेस्ट और वॉल्युम में बढ़त होती है तो ऐसा माना जाता है कि बाजार में पैसे का प्रवाह बढ़ रहा है

और नए ट्रेडर्स नई शार्ट पोसिशन बना रहे है और वर्तमान मंदी का दौर चालू रहेगा। अगर भाव के साथ ओपन इन्ट्रेस्ट और वॉल्युम में गिरावट होती है

तो ऐसा मान जाता है कि बाजार में नई शार्ट पोसिशन नहीं बन रही है पर तेजी की पोसिशन वाले अपनी पोसिशन कवर कर रहे है और यह ऐसा संकेत देता है कि मंदी का दबाव काम हो रहा है और नजदीकी भविष्य में मंदी की चाल का अंत होगा।

।। धन्यवाद ।।

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3 टिप्पणियाँ

फ्युचर्स और ऑप्शन्स की मार्जिन - क्लीयरिंग और सेटलमेंट (Margins - Clearing And Settlement Of Futures And Options In Hindi) · दिसम्बर 18, 2020 पर 8:48 अपराह्न

[…] ओपन इन्ट्रेस्ट क्या है? – What is Open Interest in Stock Mar… […]

कॉर्पोरेट अ‍ॅडजस्टमेंटस् क्या है - What Is Corporate Adjustments In Hindi. · दिसम्बर 19, 2020 पर 8:32 अपराह्न

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डेरिवेटिव बाजारों का रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क क्या है - What Is The Regulatory Framework Of Derivatives Markets In Hindi. · जुलाई 9, 2021 पर 8:38 अपराह्न

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